रविवार, 31 जनवरी 2010

भाई ! गाँधी की हत्या कितनी बार करोगे ?

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महान सेनानी मोहनदास करमचंद गाँधी की हत्या आजादी के बाद ब्रिटिश साम्राज्यवाद के पिट्ठू हिंदुत्ववादी शक्तियों ने कर दी थी। अब उन्ही शक्तियों को गाँधी की सूरत गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी में दिख रही है। गाँधी जी ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ हुए शांति पूर्ण युद्ध के अद्भुद महानायक थे। गाँधी से हम सहमत हों या न हों यह दूसरी बात है लेकिन गाँधी धर्म निरपेक्षता को बनाये रखने के भी महान सेनानी भी थे। भारतीय संघ को धार्मिक रूप से एक रखने की अदभुद क्षमता थी। अंग्रेजो ने हिन्दू-मुसलमान का जो बीज अपने फायदे के लिए बोया था। गाँधी जी जबतक जिन्दा थे उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगा कर उस बीज को पेड़ नहीं बनने दिया। गोडसे प्रतीक ने गाँधी का वध किया था। आज उनके अनुयायीओं को नरेंद्र मोदी में गाँधी की तस्वीर दिखती है। मोदी जी ने गुजरात के अन्दर मुस्लिम अल्पसंख्यकों का नरसंहार कराया था आज उसी व्यक्ति में अगर गाँधी की तस्वीर दिखती है तो भी वह गाँधी की दूसरी हत्या है।
गाँधी जी के तथाकथित उत्तराधिकारी अमेरिकन साम्राज्यवाद की सेवा में लगे हुए हैं। साम्राज्यवाद का मुख्य दुश्मन महात्मा गाँधी थे। अगर उनके तथाकथित उत्तराधिकारी साम्राज्यवाद की सेवा में लगे हुए हैं तो यह गाँधी के विचारों का वध नहीं है तो और क्या है ? गाँधी जी के विचार आज पूरी दुनिया में प्रासंगिक हैं अगर उनका सत्य और अहिंसा का प्रयोग उनके अनुयायी अगर अपने जीवन में उतारे होते तो निश्चित रूप से साम्राज्यवादी शक्तियों का शोषण भारतीय जनता को आत्महत्या करने को मजबूर नहीं करता।

सुमन
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शनिवार, 30 जनवरी 2010

संघ का हिंदुत्व

सर्वश्री जमुना प्रसाद त्रिपाठी, चन्दन मिश्र, मनीष मेहरोत्रा नगर पुरोहित भाल चन्द्र मिश्रा

बाराबंकी
में सैकड़ों साल पुराना ठाकुरद्वारा का मंदिर शहर के बीच में स्थित है ठाकुरद्वारा ट्रस्ट के पदाधिकारी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के आदि पुरुष गण हैं । संघ का परिचय उन्ही के नामो से शुरू होता है इन लोगो ने शहर में दंगा करने के लिए मंदिर के अग्र भाग को प्रोपर्टी ड़ीलर नौशाद आलम उर्फ़ चंदा को बेच दिया जिस पर जैसे ही मंदिर टूटना प्रारम्भ हुआ शहर में तमाम तरह की अफवाहें उड़ना शुरू हो गयीं वो तो कहिये की नगर पुरोहित भाल चन्द्र मिश्र, जमुना प्रसाद त्रिपाठी पूर्व अध्यक्ष राज्य कर्मचारी महासंघ, चन्दन मिश्र व समाज सेवी मनीष मल्होत्रा ने स्थित को संभाला और संघ के बाराबंकी के संस्थापको में से एक सूर्य नारायण टंडन को जेल जाना पड़ा।
मंदिर का आगे का बिका हुआ खंड

संघ के लोगो ने प्राचीन मंदिर को प्रोपर्टी ड़ीलर के हाथ कुल रकबा का 60% प्रोपर्टी ड़ीलर को बेच डाला है अब सवाल यह उठता है की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का हिंदुत्व सिर्फ हिन्दू धर्म के प्रतीकों को नष्ट करना, धर्म के महान नायकों को राजनीति में उनका इस्तेमाल कर अपमानित करना है । उनका हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नहीं है यह लोग हिटलर की नाजी विचारधारा से प्रेरणा लेते हैं। हिंदुत्व इनकी राजनीतिक विचारधारा है।

सुमन
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शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

कैसे मिले गरीब को भोजन ?


महंगाई अपनी चरम सीमा पर है। आम आदमी की आय में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। सरकार द्वारा सार्वजानिक वितरण प्रणाली उत्तर प्रदेश में ध्वस्त हो गयी है आपूर्ति विभाग के जिला पूर्ती अधिकारी से लेकर विपणन विभाग के अधिकारीयों तक केंद्र सरकार द्वारा सस्ते दामो पर उपलब्ध कराये खाद्यान को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों से वितरित होता है किन्तु कई सालों से आपूर्ति विभाग के अफसर फर्जी लिखा पढ़ी करवाकर गेंहू को सीधे फ्लोर मीलों को बेच देते हैं। चावल को महंगे दामो पर खुले बाजार में बेचने का काम भी करते हैं अब जनता को सस्ते दामो पर दालें भी बेचने का काम आपूर्ति विभाग के जिम्मे किया गया है। भगवान् ही मालिक होगा आज जरूरत इस बात की है की इनके अधिकारियो और कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच हो तो 99 प्रतिशत यह लोग आर्थिक अपराधी हैं और आर्थिक अपराधियों की जगह जेल होती है लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था में भ्रष्टाचारियों को ही व्यवस्था का प्रमुख बनाया जाता है । इस तरह से कैसे मिलेगी गरीब आदमियों की रोटी इस पर एक प्रश्नवाचक चिन्ह है ।

सुमन
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बृहस्पतिवार, 28 जनवरी 2010

पुलिस व अपराधियों का गठजोड़

उत्तर प्रदेश पुलिस के आरमोरर श्री राजेश कुमार सिंह को उनके साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया उनके पास से सौ कारतूस 9 एमएम, .के 47 के 49 कारतूस एस.अल.आर खाली कारतूसों के 498 खोखे भी बरामद किये गएपुलिस और अपराधियों का गठजोड़ काफी दिनों से कार्य कर रहा है अपराधियों को शस्त्रों कारतूसों की सप्लाई पुलिस विभाग से ही होती है प्रतिबंधित बोर के आर्म्स के कारतूस बाजार में नहीं मिल सकते हैं उनकी सप्लाई पूरे देश में नियोजित तरीके से अपराधियों को होती है
अपराधियों, पुलिस राजनेताओं का गठजोड़ संगठित अपराधों को बढ़ावा देता हैचाहे दिल्ली हो चाहे मुंबई हो शस्त्रों की सप्लाई अपराधी समूहों को संरक्षण इस गठजोड़ से मिलता है, जबतक इस गठजोड़ को ईमानदारी से नष्ट नहीं किया जायेगा तब तक संगठित अपराध होते रहेंगेअपराधियों ने अपने गठजोड़ में कार्यपालिका के भी अधिकारियो को शामिल कर रखा हैराजनीतिक दल तो उनके लिए कार्य करते ही रहते हैं। गणतंत्र दिवस के दिन पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के गोसाबा के छोटामोल्लाखाली थाना में बंद एक कैदी को छुड़ाने के लिए तृणमूल कांग्रेस के लोग थाने पर हमला कर पुलिस वालों की पिटाई कर कैदी को छुड़ा ले गएआज आवश्यकता इस बात की है की राजनीतिक दलों को अपराधिक पृष्टभूमि वाले लोगों को अपने दल से निष्काषित करना होगा

सुमन
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बुधवार, 27 जनवरी 2010

अगले वर्ष हिन्दुस्तान के महाभ्रष्ट को भारत रत्न मिल सकता है


केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अनिवासी भारतीय अमेरिकन संत सिंह चटवाल को पद्मभूषण से सम्मानित किया है श्री संत सिंह चटवाल ने नब्बे लाख डालर का घोटाला स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में किया था। जिसकी जांच सी.बी.आई ने की थी । जांच उपरांत सी.बी.आई ने संत सिंह चटवाल के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया है।
सरकार के इस कदम से यह साबित होता है कि भ्रष्टाचार व आर्थिक अपराधियों को पद्मभूषण से सम्मानित किया जाना उसको मान्यता देना है । सरकार आने वाले वर्षों में देश में सबसे बड़े आर्थिक अपराधी व भ्रष्टाचारी को भारत रत्न भी दे सकती है सरकार के इस कदम से यह लगता है की श्री संत सिंह चटवाल अगर भारतीय नागरिक होते तो उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जा सकता था।
पद्मभूषण श्री संत सिंह चटवाल

मंगलवार, 26 जनवरी 2010

बोलो देश बंधुओं मेरे, वे कैसा गणतंत्र मनाएं........


















फल, सब्जी, शक्कर हुआ सपना, यही कमर तोड़ महंगाई में,
ईद का चाँद हुई दालें, सौ रुपया रोज कमाई में।
बच्चे रोटी दाल को तरसें, मटरफ़ली देखि ललचायें॥ बोलो देश.....
तीस साल तक लड़े मुकदमा, हत्यारे सब बरी होई गए।
टूटी थी अंधे की लाठी, गहनों, खेत मकान बिक गए।
शोक मनाये मात-पिता कि, न्यायपालिका के गुण गायें। बोलो देश..........
फर्जी मुठभेड़ों में जिनके, प्रिय जन स्वर्ग सिधार गए।
जो भ्रष्ट व्यवस्था, सत्ता के, गुंडों से लड़कर हार गए।
जो नीर अपराधीन नवजवान हिंसक आतंकी कहलाएं॥ बोलो देश.........
गुजरात, उड़ीसा, महाराष्ट्र में, जो जिन्दा ही दफ़न हो गए,
धू-धूकर जलते भवनों में, जिनके प्रिय बेकफ़न सो गए।
जो अपना सर्वस्व गवांकर, शिविरों में जिंदगी बिताएं॥ बोलो देश.......
गोदें सूनी हुई और जिन मांगों के सिन्दूर धुल गए।
भस्म हुए स्वर्णिम सपने, आँखों में बनकर अश्रु घुल गए।
रक्षक पुलिस बन गयी भक्षक, दंगाई मिलि आग लगायें ॥ बोलो देश......
गए कमाने मायानगरी, बीवी बच्चे आस लगाए,
राजठाकरे के गुंडों से, बचकर फिर न वापस आये।
मातम करें आश्रित या कि, संविधान की महिमा गाएं॥ बोलो देश......
संविधान की ऐसी की तैसी, करते गुंडे व्यभिचारी,
कर रहे कलंकित रक्षक पद, राठौर सरीखे अधिकारी।
जो स्वदेश में छिपते फिरते, कैसे मान सम्मान बचाएँ॥ बोलो देश.....
मृतक घोषित कर, वारिस बन, माफिया जमीन हथियाय रहे।
न्यायलयों में जा जाकर, मुर्दे फ़रियाद सुनाये रहे।
हम जीवित है हम जीवित हैं, वे जगह-जगह प्रमाण दिखाएं॥ बोलो देश.....
जिनके पुरखे देश के लिए, शीश कटाए रक्त बहाए।
मात्रभूमि की रक्षा हित जो, तन-मन-धन सर्वस्व लुटाये॥
झुग्गी झोपड़ियों में रहकर, घुट-घुटकर जिंदगी बिताएं॥ बोलो देश.......
काल बनी मेहँदी की लाली, दुल्हन के जोड़े कफ़न बन गए,
सेज सुहाग की चिता बन गयी, सारे सपने दफ़न हो गए।
चढ़ी दहेज़ की बलि वेदी पर, जिनकी बहन, बेटियाँ, माएं॥ बोलो देश......
फटे चीथड़ों में कितनी, माँ बहनें छिपकर लाज बचाएँ॥ बोलो देश......
आज भी लाखों नन्हे मुन्ने, रोते-रोते सो जाते हैं।
भूख कुपोषण बीमारी से, तड़प-तड़पकर मर जाते हैं॥
वे क्या जाने लोकतंत्र औ क्या गणतंत्र की महिमा गायें॥ बोलो देश.........
फटा सुथन्ना पहन के बुधुआ, झूम-झूम जन गण मन गाये।
नंग धडंग खड़ा दुवारे, घिसुआ देख-देख मुस्काये॥
छोडो अनंत कथा यह बंधू , आओ जन गण मंगल गाएँ॥
बुधुआ गाए, घिसुआ गाए, दुखना बंधुना काकी गाएँ।
नेता अभिनेता सब गाएँ, व्यभिचारी अचारी गाएँ॥
मिलावटखोर व्यापारी गाएँ, महाभ्रष्ट अधिकारी गाएँ।
चली आ रही वर्षों से, यह परंपरा हम आप निभाएं॥


मोहम्मद जमील शास्त्री

सोमवार, 25 जनवरी 2010

गणतंत्र दिवस पर विशेष: बोलो देश बंधुओ मेरे .......


अंधे भूखे अधनंगे जो, फुटपथों पर रात बिताएं
बोलो देश बंधुओं मेरे, वे कैसा गणतंत्र मनाएं
पेट की आग बुझाने खातिर, जो नित सुबह अँधेरे उठकर
अपना-अपना भाग बटोरते, कूड़े के ढेरों से चुनकर
गंदे नालों के तीरे जो, डेरा डाले दिवस बिताएंबोलो देश......
बिकल बिलखते भूखे बच्चे, माओं की छाती से चिपटे,
तन पर कुछ चीथड़े लपेटे, सोये झोपड़ियों में सिमटे
दीन-हीन असहाय, अभागे, ठिठुर-ठिठुर कर रात बिताएंबोलो देश..........
जिनका घर, पशुधन, फसलें, विकराल घाघरा बहा ले गयी
कोई राहत, अनुदान नहीं, चिरनिद्रा में सरकार सो गयी
सड़क किनारे तम्बू ताने, शीत लहर में जान गवाएंबोलो देश .........
वृद्ध, अपंग, निराश्रय जिनको, सूखी रोटी के लाले हैं,
उनके हिस्से के राशन में, कई अरब के घोटाले हैं
वे क्या जन गण मंगलदायक, भारत भाग्य विधाता गायेंबोलो देश......
बूँद-बूँद पानी को तरसें , झांसी की रानी की धरती
अभी विकास की बाट जोहती बुंदेले वीरों की बस्ती
जहाँ अन्नदाता किसान, मजदूर करें आत्महत्याएंबोलो देश..........
तीस साल के नवजवान जो, वृद्धावस्था पेंशन पाएं
सत्तर साल की वृद्धा, विधवा, भीख मांगकर भूख मिटायें
पेंशन मिला कौनो कारड़, रोय-रोय निज व्यथा सुनाएंबोलो देश ....
रात-दिवस निर्माण में लगे, जो श्रमिक कारखाने में
जिनकी मेहनत से निर्मित, हम सोते महल, मकानों में,
खुले गगन के नीचे खुद, सर्दी, गर्मी, बरसात बिताएंबोलो देश........
माघ-पूष में जुटे खेत में, जो नित ठण्ड शीत लहरी में,
तर-तर चुए पसीना तन से, जेठ की तपती दो पहरी में
हाड-तोड़ परिश्रम करेंमूल सूखी रोटी नमक से खाएंबोलो देश........

मोहम्मद जमील शास्त्री

रविवार, 24 जनवरी 2010

गुंडागर्दी का ईनाम

लखनऊ के जिला मजिस्त्रेट अमित घोष की गुंडागर्दी के कारण राज्य कर्मचारियो की हड़ताल हो गयी थी सैकड़ो राजकर्मचारियों के सर फूटे थे करोडो रुपयों का नुकसान हुआ लेकिन समयबद्द वेतनमान के तहत उनको ईनाम के रूप में सरकार सुपर टाइम स्केल में प्रौन्नति की जा रही है कृषि विभाग के जिस कर्मचारी को थप्पड़ों से पीटा था उसके ऊपर फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा चुका है राज्य द्वारा नियमो कानूनों का उल्लंघन अब आम बात हो गयी है अमित घोष के खिलाफ कमिश्नर की जांच लंबित है जांचें इन अधिकारियों के खिलाफ चलती रहती हैं और इनको प्रोमोशन दर प्रोमोशन मिलता रहता है ये अधिकारिगण अच्छी तरह से जानते हैं कि लोकतंत्र में इनके खिलाफ कुछ नहीं हो सकता है इन अधिकारियों की कार्यशैली आम आदमी की रक्षा के लिए होकर उनका उत्पीडन करने के लिए है गाँव देहात में इन अधिकारियों की भूमिका बहुत ही निंदनीय हो जाती है राजधानी लखनऊ के अगल बगल के जिलो में प्रशासनिक अधिकारियो ने अपनी काली कमाई से फार्म हाउस खोले है और किसानो के पास अब उपजाऊ जमीन का टोटा होता जा रहा है हजारो लाखो एकड़ जमीन के चारो तरफ दीवालें बना कर चौकीदार नियुक्त किये जा चुके हैं अच्छा यह होगा की नए जमीन दारों की जमींदारी की जांच हो तो उनके नए-नए कारनामे जनता के समक्ष आयेंगे

सुमन
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शनिवार, 23 जनवरी 2010

राज्य की गुंडागर्दी

भारतीय संविधान के अनुसार राज्य कर्मचारियों को अपनी मांगो के समर्थन में हड़ताल का अधिकार है वहीँ काम नहीं तो दाम नहीं के सिधान्त के अनुसार हड़ताल के समय कर्मचारियों की उस दिन का वेतन देने का प्राविधान हैउत्तर प्रदेश के राज्य कर्मचारी शिक्षक अपनी मांगो के लिए लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे थे जिसपर उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष चहेते जिला मजिस्टे्ट अमित घोष ने लाठियां गोलियां चलवायीं डी.आई.जी लखनऊ ने निहत्थी महिलाओं को लाठियों से पीटासरकारी कार्यालयों में घुस कर गैर हडताली कर्मचारियों को भी पीटा गयाकल दिनांक 22-01-2010 को राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पताल बलरामपुर हॉस्पिटल में पुलिस और पी.एस.सी, हड़ताल खत्म कराने के नाम पर मरीजों तथा कर्मचारियों के ऊपर अकारण लाठीचार्ज कर दिया अस्पताल के आसपास के राहगीरों को भी पीटा गयारात में पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में कर्मचारी नेताओं के घरों में घुसकर उनके बीबी और बच्चो की राजाइयाँ डंडो से फेंक कर उनके पतियों का सुराग मालूम करने का प्रयास जारी रहाकर्मचारियों की पत्नियां बच्चे राज्य के नौकर नहीं हैं। महिलाओं व बच्चों को राज्य सरकार द्वारा प्रताड़ित करने का कोई औचित्य नहीं है। उनके साथ इस तरह की अभद्रता करना सीधे-सीधे राज्य की गुंडागर्दी है और यह भी एक गंभीर अपराध है
लखनऊ के जिला मजिस्टे्ट अमित घोष उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती को खुश करने के लिए कृषि विभाग के एक कर्मचारी को तीन थप्पड़ मारेडी.आई.जी पुलिस जिला मजिस्टे्ट अमित घोष पागलपन की सीमा से बढ़ कर आतंक का राज पैदा कर रहे हैंराज्य द्वारा किये गए अपराधों के लिए कोई कानून नहीं है ?

सुमन
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जीवन सफल बनाना है तो, सत्य पथ अपनाना होगा

हार जाना काल चक्र से, जीत को शीश झुकाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्य पथ अपनाना होगा

द्विधा की घनघोर घटा जब, मन मानस पर घिरती जाए
मोह, भ्रान्ति के अवरोधों से, प्रेम की धारा रूकती जाए।।

ज्ञान, विवेक, सुमति, साहस से, संशय तुम्हे मिटाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा

संसार-सिन्धु की लहरों से, जीवन नौका टकराएगी
प्रचंड काल की भंवरों में, यह कभी उलझ जायेगी

निर्भय निर्द्वंद दृढ़ता से, तुमको पतवार चलाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्य पथ अपनाना होगा

दुर्दिन में मित्रों का विछोह , ह्रदय को कभी व्यथित कर देगा
मित्रता, विश्वास, प्रेम का, छद्म रूप विचलित कर देगा

निर्विकार, निष्काम भाव से, स्वकर्तव्य निभाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा

सत्य, अहिंसा, दया, प्रेम का, बीज धरा पर बोना होगा
हिंसा, स्वार्थ, इर्ष्या, घृणा से कल्पित मन धोना होगा

काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह को, जग से दूर भागना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा



मोहम्मद जमील शास्त्री

शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

डी.आई.जी पुलिस की जवाँमर्दगी

राजधानी लखनऊ में प्रदेश के राज्य कर्मचारी शिक्षक अपनी मांगो के लिए प्रदर्शन कर रहे थे जिसपर लखनऊ पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियां गोलियां चलायीं, सरकारी कार्यालयों में घुसकर लोगों को पीटा गयाडी.आई.जी लखनऊ को जवाँमर्दगी दिखाने के लिए नहीं मिला तो वह निहत्थी महिलाओं के ऊपर लाठियां चलाने लगे पुलिस ने अनावश्यक रूप से राज्य कर्मचारियों शिक्षकों पर लाठीचार्ज किया आंसू गैस के गोले छोड़े हवाई फायरिंग कीजवाहर भवन इंदिरा भवन सहित दर्जनों सरकारी कार्यालयों में घुसकर लाठी चार्ज किया
शांतिपूर्ण कर्मचारी शिक्षकों के ऊपर प्रशासन द्वारा लाठीचार्ज उनके बब्बर चरित्र को दर्शाता हैराजधानी में निहत्थी महिलाओं के ऊपर बेशर्मी के साथ लाठीचार्ज करना यह बताता है कि पुलिस का माननीय उच्चतम न्यालय के दिशानिर्देश कानून संविधान में कोई यकीन नहीं हैयह सब ब्रिटिश युग के गुलाम मानसिकता वाले सरकारी तंत्र हैंऊँचे ओहदों पर बैठे हुए लोग अपने को सर्वशक्तिमान समझते हैं वह यह समझते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं कर सकता है इसीलिए डी.आई.जी पुलिस लखनऊ को जब पीटने के लिए कोई नहीं दिखा तो वह औरतों पर अपने हाथ में लाठी लेकर मार पीट करने लगेप्रशासन ने समझदारी से कार्य लिया होता तो राज्य कर्मचारियों शिक्षकों के ऊपर लाठी चार्ज करने की कोई आवश्यकता नहीं थीआज जरूरत इस बात की है कि प्रशासन के ऊपर ऊँचे ओहदे पर नियुक्त बीमार मानसिकता वाले लोगो की छँटनी की जाए

सुमन
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सत्ता के लिए ललायित कांग्रेस के खेल

महराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चाहवाण की कैबिनेट द्वारा लिए गये एक फैसले ने महाराष्ट्र में नफरत अलगाववाद की राजनीत करने वालों के पक्ष को शक्ति प्रदान की है। कैबिनेट में लिए गये निर्णय के मुताबिक महाराष्ट्र में उन्हीं टैक्सी चालकों को टैक्सी चलाने का परमिट दिया जायेगा जो मराठी भाषा ठीक से बोल, लिख पढ़ लेते हो। इस पर राष्ट्र स्तर पर आती तीखी प्रतिक्रियाओं से घबराकर कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व के दबाव में अशोक चाहवाण को निर्णय पर अपना स्पष्टीकरण देकर यू टर्न लेना पड़ा।
कांग्रेस का यह खेल बहुत पुराना है। सत्ता पाने के लिए वह अक्सर ऐसे खेल खेला करती है। कहने को तो यह जमात अपने को धर्म निरपेक्ष जातिवाद के विरूद्ध कहती है परन्तु इस तरह के शिगूफे वह बराबर छोड़ती रहती है और सम्प्रदायिक अलगाववादी शक्तियों को ताकत देती रहती है। बाबरी मस्जिद का सोया शेर कांग्रेसियों ने जगाया। फिर शिलान्यास करवाकर हिन्दूवादी शक्तियों के अंदर धार्मिक उबाल पैदा कर राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से हिन्दू कार्ड खेला, परन्तु दाव उलटा पड़ गया लाभ भाजपा के हिस्से में चला गया। बाबरी मस्जिद विंध्वस के समय तत्कालीन कांग्रेसी प्रधानमंत्री नरसिंहाराव ने मस्जिद बचाने के वह सार्थक प्रयास यह सोच कर वही किये कि भाजपा के हाथ से मुद्दा ही समाप्त कर दिया जाये और केन्द्रीय सुरक्षा बलों को विवादित स्थल में तब भेजा जब कारसेवक मालने को साथ करने के पश्चात अस्थायी मंदिर बनाकर रामजानकी की मूर्ति वहां स्थापित कर गये।
फिर गुजरात में नरेन्द्र मोदी के विरूद्ध कांग्रेस ने हिन्दुत्व का फार्मूला यह सोचकर आजमाया कि नरेन्द्र मोदी के उग्र हिन्दुत्व का विकल्प जनता के सामने रखा जाये मगर राम ही मिला ना रहीम। हिन्दू वोट तो नरेन्द्र मोदी के गर्मा गर्म ताजा हिन्दुत्व के कारण कांग्रेस द्वारा पर से गये ठण्डे बासी नरम हिन्दुत्व की थाली के पास तक आया उल्टे मुस्लिम वोट भी कांग्रेस से दूर छिटक गया।
इसी तरह कश्मीर में 1973 में शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में चुनी गई सरकार में फूट डालकर उनके सगे बहनोई गुल मोहम्मद शाह की पीठ पर हाथ रखकर लोकतंात्रिक सरकार को ध्वस्त कर वहां राष्ट्रपति शासन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लगवाया और जगमोहन को गर्वनर बना कर कश्मीरियों पर ऐसा जुल्म ढाया कि पाकिस्तान की आरे नर्मगोशा उनका पैदा शुरू हो गया जिसका लाभ कश्मीर के अलगाव वादी संगठनों ने भरपूर तौर पर लिया और जिसका परिणाम यह है कि कश्मीर अभी तक सुलग रहा है लाखों इंसान मार डाले जा चुके हैं पर्यटन उद्योग से लेकर फल मेवा उद्योग सभी प्रभावित हुए हैं।
उधर पश्चिम बंगाल में वामपंथी सरकार की हटाने के प्रयास में ममता बनर्जी का साथ देकर नक्सलियों पर चोरी छुपे हाथ रखने का काम भी कांग्रेस के द्वारा ही किया जा रहा है। इससे पूर्व पंजाब में अकालियांे को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से भिंडरा वाला नाम के जनूनी व्यक्ति को भी खड़ा करने का दुष्कर्म कांग्रेस की ही रणनीति का हिस्सा था जिसका परिणाम पूरा पंजाब को और बाद में स्वयं इंदिरा गांधी को अपने प्राणों की आहूति देकर भुगतना पड़ा।
एक बार फिर कांग्रेस वही गलती दोहरा रही है और महाराष्ट्र जैसे औद्योगिक प्रान्त की सुख शांति जो पहले रही शिवसेना महराष्ट्र निर्माण पार्टी के कारण छिन्न भिन्न हो चुकी है उसमें और शोले भड़काने का काम कांग्रेस कर रही है। स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि बार-बार मुंह की खाने के बाद कांग्रेस ऐसी गलती करती क्यों है तो इसका जवाब यह है कि कांग्रेस के भीतर विभिन्न करती क्यों है तो इसका जवाब यह है कि कांग्रेस के भीतर विभिन्न विचार धाराओं के व्यक्तियों का संग्रह है जो कांग्रेस की सत्ता पाने की लालच में यह गलतियां कराने पर मजबूर करते हैं।

मोहम्मद तारिक खान

बृहस्पतिवार, 21 जनवरी 2010

जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा
घनतम दूर भागना है तो, ज्ञान-प्रदीप जलना होगा

खिलता है कांटो में गुलाब जग में सौरभ फैलाता है
शीत, ताप, झंझा झकोर से, कब पंकज मुरझाता है

जीवन सुरभित करना है तो, आदर्श इन्हें बनाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

संघर्षनाम है जीवन का, जीवन संघर्ष के बिना कहाँ?
है वहीँ सफलता का निवास, कर्तव्य बोध संघर्ष जहाँ

पथ पर बिखरे पषाणों से , पग-पग पर टकराना होगा
जीवन सफल बना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

कर्तव्यों से विमुख होना है तो, भाग्य भरोसे बैठे रहना
यदि गंतव्य को पाना है तो, पथिक निरंतर बढ़ते रहना

थककर बैठ जाना प्यारे! आजीवन पछताना होगा
जीवन सफल बना है तो, सत्यपथ को अपनाना होगा

जीवन हो विष का प्याला, पर इसे सुधा सम पीना होगा
युग के झंझावातों में भी, हँस-हँस कर के जीना होगा

कितना ही कंटकमय पथ हो, आगे बढ़ते जाना होगा
जीवन सफल बनाना है तो, सत्यपथ अपनाना होगा

मन को विचलित करने वाले, कुछ ऐसे भी क्षण आयेंगे
संकट की काली छाया से, माथे पर बल जायेंगे


- मोहम्मद जमील शास्त्री

बुधवार, 20 जनवरी 2010

धोबी, पासी, चमार, तेली खोलेंगे अँधेरे का ताला

महाप्राण निराला के जन्मदिन के अवसर पर लोकसंघर्ष परिवार का शत्-शत् नमन
image source: google search

जल्द -जल्द पैर बढाओ , आओ-आओ
आज अमीरों की हवेली , किसानो की होगी पाठशाला
धोबी, पासी, चमार, तेली खोलेंगे अँधेरे का ताला
एक पाठ पढेंगे, टाट बिछाओ

सूर्य कान्त त्रिपाठी 'निराला'

मंगलवार, 19 जनवरी 2010

गरीबो, किसानो के मसीहा व धर्मनिरपेक्षता के सिपाही को लाल सलाम


image source: people's democracy

कामरेड ज्योति बसु एक गंभीर प्रवृत्ति सदा जीवन और बयानबाजी या नारों के स्थान पर सदा कार्य को प्रधानता देने वाले राज़नीतज्ञ थे। उन्होंने बंगाल को नक्सल समस्या से निदान देने के लिए पंचायत राज व्यवस्था कानून का क्रियान्वित पारदर्शी ढंग से करा कर गरीब किसानो को मूल भूत सुविधाएं देकर हथियार के स्थान पर उन्हें हल पकड़ने की तरफ आकर्षित कराया और उन्हें पार्टी का कैडर भी बनाया। साथ ही पश्चिम बंगाल में धर्मनिरपेक्षता का एक अभेद किला उन्होंने बना कर तैयार कर दिया जहाँ स्वतंत्रता के पश्चात अनेको सांप्रदायिक दंगे होते रहे थे।
जिस समय विश्व में कम्युनिस्ट सरकारों का पतन हो रहा था और साम्यवादी सत्ता सोवियत यूनियन की ईंट से ईंट, लोकतंत्र की लुभावनी दुनिया दिखा कर पूंजीवादी राष्ट्रों ने मिल कर बजा दी थी उस समय पश्चिम बंगाल में लाल झंडा मजबूती से गडा हुआ था। कांग्रेस से लेकर भाजपा ने अनेको हमले लाल झंडे को पश्चिम बंगाल के उखाड़ देने के लिए किये परन्तु ज्योति बसु के लौह व्यक्तित्व से टकरा कर सारी शक्तियां चूर-चूर हो गयीं। देश के सबसे लम्बे समय तक मुख्य मंत्री रहने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ। उन्होंने पूरे 23 वर्षों तक पश्चिम बंगाल पर सत्ता संभाली फिर स्वास्थ्य की खराबी के कारण उन्होंने स्वेच्छा से मुख्य मंत्री पद का त्याग कर राजनीति से सदैव के लिए सन्यास वर्ष 2000 में लिया।
ज्योति बसु ने पश्चिम बंगाल की बागडोर वर्ष 1967 में बतौर उपमुख्यमंत्री, अजय मुखर्जी के नेतृत्व में बनी संयुक्त मोर्चा की सरकार के गठन के उपरांत संभाली थी। वह उस मंत्रिमंडल में गृहमंत्री भी थे। उस समय कांग्रेस के लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहे प्रफुल्ल चन्द्र सेन की गलत नीतियों के कारण जहाँ एक ओर प्रान्त के किसानो की समस्याएं चरम सीमा पर थी तो वहीँ मुस्लिम समुदाय के साथ बरते गए उनके दुर्भावना व सांप्रदायिक पूर्ण सुलूक से हिन्दू और मुसलमानों के बीच लम्बी खाई बन गयी थी। ज्योति बसु ने गृहमंत्री बन्ने के पश्चात पहला काम यह किया कि जो क्षेत्र सांप्रदायिक हिंसा की दृष्टिकोण से संवेदनशील थे वहां के थानों पर मुस्लिम पुलिस अधिकारियो व प्रशासनिक अधिकारियो की तैनाती कर दी। ताकि मुसलमानों में शासन प्रशासन के प्रति विश्वास पैदा हो सके और पक्षपात पूर्ण रवैये से उनकी सुरक्षा भी हो। बाद में यही नुस्खा आजमा कर वर्ष 1971 में मुख्य मंत्री बने सिद्धार्थ शंकर रे ने मुसलमानों का दिल जीता जब एक समय में कलकत्ता शहर में तीन ए.सी.पी पुलिस मुस्लिम समुदाय के उन्होंने तैनात कर दिए। परन्तु किसानो की समस्याओं को वह सुलझा न सके और नक्सलियों की समस्या बढती गयी जिसको उन्होंने बलपूर्वक दबा कर अपनी प्रशासनिक योग्यताओं का लोहा इंदिरा गाँधी जैसी आयरन लेडी के मन में स्थापित कर लिया बताते हैं देश में आंतरिक सुरक्षा के बिगड़ते हालात से निपटने के लिए आपातकाल लगाने की सलाह भी सिद्धार्थ शंकर रे ने ही इंदिरा गाँधी को दी थी और बाद में आपातकाल के दुष्परिणामो के कारण कांग्रेस के पतन की भी सजा उन्ही को दी गयी।
परिणामस्वरूप 1977 में वाम पंथियों ने पश्चिम बंगाल पर लाल झंडा गाड़ दिया। जिसका नेतृत्व ज्योति बसु के मजबूत हाथो में दिया गया। वाम पंथी दलों को एकजुट रख कर पश्चिम बंगाल में इतने दिनों तक सत्ता चलाने का कीर्तिमान ज्योति बसु ने स्थापित कर देश के युवा राजनीतज्ञों के सामने एक मिसाल रख दी है कि यदि इमानदारी के साथ सच्चे दिल से वह जनता की समस्याओं के लिए लड़ेंगे तो जनता कभी ऐसे लोगो को निराश नहीं करेगी।

मोहम्मद तारिक खान

सोमवार, 18 जनवरी 2010

अब पछताए क्या होत.......

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री आसिफ अली जरदारी ने अमरीका से शिकायत की है कि एक तरफ अमरीका आतंकवाद के विरूद्ध जंग में उसे अपना सहयोगी मानता है तो वही दूसरी तरफ उसके शहरियों पर ड्रोन हमले भी होते रहते हैं जिसके कारण आम जनता में अमरीका व पाकिस्तानी सरकार के विरूद्ध क्रोध व कुण्ठा बढ़ती है परिणाम स्वरूप आतंकियों का जनसमर्थन बढ़ता है।
वाह जरदारी साहब मीठा-मीठा हक कड़वा-कड़वा थू। जब अमरीका व उसकी गुप्तचर एजेन्सी सी0आई0ए0 के साथ गलबहियाँ डालकर भारत के विरूद्ध साजिशे पाकिस्तान से कभी पंजाब तो कभी कश्मीर के विरूद्ध की जाती रही तब अमरीकी दोस्ती अच्छी लगती थी जिस समय अमरीकी सातवें नौसेना बेड़े के द्वारा भारत पाक युद्ध 1971 के समय, भारत को धमकी दी जा रही थी तब अमरीका आपका आका बना हुआ था। जब अफगान रूस युद्ध चल रहा था तो पाकिस्तान में तालिबानी शिविर लगाकर अमरीकी सेना के द्वारा उन्हें शस्त्र ट्रेनिंग दी जा रही थी उस समय अमरीका के हक में हाथ उठा उठाकर मस्जिदों में दुआए उस समय के पाक राष्ट्रपति जियाउल हक करवाते थे और जिन्होंने अमरीका के ही कहने पर आपके ससुर पूर्व प्रधानमंत्री जुलफिकार अली भुट्टो को जेल में सड़ाकर फांसी के फंदे पर लटका दिया था।
उसी अमरीका के साथ आपने हाथ मिलाकर ना केवल आपके ससुराल वालों की कुरबानी को शर्मिन्दा किया है बल्कि पाकिस्तान की जनता पर वर्तमान में हो रहे अत्याचार व जुल्मों के पीछे आपकी महात्वाकांक्षा व सत्ता की लालच ही जिम्मेदार है।
आपका व आपके राष्ट्र का तो हश्र यह होना ही था क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान के पूर्वप्रधानमंत्री भुट्टो, जियाउल हक, लियाकत अली खां इत्यादि की भी जीवन लीला सी0आई0ए0 ने ही समाप्त करायी और नवाज शरीफ, अय्यूब खां व जनरल यहिया खाँ को दूसरे रूप में सजा दी। आपका भी हश्र इससे अलग ना होगा क्योंकि एक माफिया की भांति अमरीका जिस व्यक्ति से अपने नाजायज काम लेता है तो बाद में राज को दफन करने के लिए उसे समाप्त जरूर करवाता है।

मो0 तारिक खान

रविवार, 17 जनवरी 2010

ममता जी, टिकट रेलवे का बेचती हैं, यात्री यमलोक जाता है

टूंडला रेलवे स्टेशन पर कालिंदी एक्सप्रेस ने श्रम शक्ति एक्सप्रेस को टक्कर मारी तीन यात्रियों की मौत 14 घायलआज हरिहरनाथ एक्सप्रेस ने हैदरगढ़ बाराबंकी के पास मानव रहित क्रोस्सिंग पर इंडिका कार को टक्कर मारीकहने के लिए बहाना चाहे जो भी धुंध जाए ममता जी जब से आप रेलमंत्री हुई हैं ट्रेन दुर्घटनाओ की बाढ़ गयी है आप के पास समाये नहीं है रेल मंत्रालय को देने के लिए टू रेल मंत्री पद से इस्तीफा देकर केंद्र की कैबिनेट में अपने लिए नया पद बंगाल में वाम मोर्चा हटाओ मंत्री पद ले लीजिये जिससे कोई नया रेल मंत्री आवे टू कम से कम रेलवे की समस्याओं से निपटने का प्रयास करे सबको मालूम है कि कोई भी रेलवे ट्रैक 20 मिनट तक खाली नहीं रहता हैकोई कोई ट्रेन अच्छी स्पीड में पास होती रहती है तो मानव रहित रेलवे क्रोसिंग्स का क्या अर्थ है जब भी कोई वहां क्रोसिंग पार करेगा तो दुर्घटना तो होगी हीरेलवे में अगर 24-24 घंटे यातायात स्टॉप से कार्य लिया जाएगा तो निश्चित रूप से मानवीय भूलों के आधार पर दुर्घटनाएं होंगी हीअगर रेलवे में खाली पदों पर भर्ती कर ली जाए और नियमानुसार कार्य किया जाए तो लाखो लोगो को रोजगार मिलेगा और दुर्घटनाएं नहीं होंगी
ममता जी आपकी मंशा है कि अमेरिकन साम्राज्यवाद के इशारे पर रेलवे की स्तिथि इतनी खराब कर दो की बेचने के अलावा कोई विकल्प रह जाए ये सारी की सारी दुर्घटनाएं और अव्यवस्था जानबूझ कर फैलाई जा राही हैं जिसका आप एक हिस्सा हैंइसीलिए आप टिकट रेलवे का बेच रही हैं और यात्रा करा रही हैं यमलोक की

सुमन
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शनिवार, 16 जनवरी 2010

सम्मानित कीजिये उत्तर प्रदेश पुलिस को

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अधिवक्ता के ऊपर अपहरण व हत्या का वाद दर्ज होता है ।पुलिस ने जांच की और कहा कि अधिवक्ता ने अपना जुर्म इकबाल कर लिया है। लाश का पंचायतनामा और उसके बाद पोस्मार्टम हुआ । अभियुक्त को कारागार में निरुद्ध कर दिया गया। न्यायलय में आरोप पत्र दाखिल हो गया बाद में जिस व्यक्ति की अपहरण व हत्या अधिवक्ता को 55 दिन जेल में रहना पड़ा हो, वह व्यक्ति जिन्दा है
कारागार में हजारो व्यक्ति बेगुनाह निरुद्ध हैं। उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है जिस अपराध में निरुद्ध हैं , उस अपराध के घटनास्थल को भी उन्होंने नहीं देखा है। विवेचना में पुलिस ने उनके ऊपर लगाये गए आरोप मय साक्ष्य के सही पाए गए हैं कुछ अपराधो में विवेचना अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक होते हैं उन अपराधो में विवेचना का स्तर और भी घटिया है कथित दहेज़ हत्या के मामलो में हजारो बेगुनाह स्त्रियाँ पुरुष कारागार में निरुद्ध हैं। विवेचना अधिकारी ने कार्यालय के अन्दर ही बैठ कर विवेचनाएं कर डाली हैं। उनके लिए गुनाहगार बेगुनाह व्यक्ति में कोई अंतर नहीं है जब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक अधिवक्ता के साथ ऐसा हो सकता है तो पूरे प्रदेश का हाल क्या होगा ? इसलिए ऐसी पुलिस को सलाम करने की जरूरत है, सम्मान करने की जरूरत है अन्यथा हमारा और आपका भी नंबर सकता है

सुमन
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शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

ठाकरे का नया फ़तवा

शिवसेना के बाल ठाकरे ने घोषणा की है कि महाराष्ट्र की धरती पर ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट की टीम को खेलने नहीं देंगेपाकिस्तान के बाद ऑस्ट्रेलिया दूसरा देश होगा जिसको शिवसेना ने क्रिकेट खेलने से मना किया हैबाल ठाकरे का तर्क है कि ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों के ऊपर नस्लवादी हमले हो रहे हैं उसका जवाब हम दे रहे हैंइससे पूर्व में मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीयों के ऊपर शिवसेना कुनबे ने हमले किये थेबाल ठाकरे समझते हैं कि उनकी हिटलरी सनक से महाराष्ट्र चलता हैआज जरूरत इस बात की है कि बाल ठाकरे जैसे प्रान्तीयतावादी, नस्लवादी नेताओं के खिलाफ कठोर कदम उठाया जाए क्योंकि उनकी समझ कुछ मुट्ठी भर लोगो को लेकर गुंडा गर्दी के अतिरिक्त कुछ नहीं हैभारतीय लोकतान्त्रिक समाज में इस तरह के घृणापद विचार और हरकतों से देश का कतई भला नहीं होने वाला है बल्कि छोटी मानसिकता वाले लोगो से नुकसान ही होता हैऑस्ट्रेलिया में अगर बाल ठाकरे जैसी मानसिकता वाले लोग अगर भारतीय लोगों पर हमले कर रहे हैं तो वहां का कानून अपना कार्य करेगा प्रत्येक व्यक्ति को कानून लागू करने दण्डित करने का अधिकार किसी भी सभी समाज में नहीं होता है एक निश्चित प्रक्रिया के तहत कानून तोड़ने वाले लोगो को दण्डित किया जाता है समाज प्रगति पर हैबाल ठाकरे जैसे लोग आदिम अवस्था में जीते हैं और फतवे जारी करते हैं
बाल ठाकरे कि अगर सरकारी सुरक्षा व्यवस्था हटा ली जाए तो वह सियार कि तरह से मांद में पड़े नजर आयेंगे तब उनको लोकतंत्र, न्याय, कानून अपने आप समझ में आ जाएगा।

सुमन
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बृहस्पतिवार, 14 जनवरी 2010

गुजरात का मुख्य आतंकी कौन था ?

22 दिसम्बर 2005 को गुजरात में सहाबुद्दीन और उनकी पत्नी कौशर बी तथा एक अन्य व्यक्ति तुलसी राम प्रजापति को गुजरात और आन्ध्र पुलिस के एक संयुक्त ऑपरेशन में पकड़ा गया था बाद में गुजरात के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या कर दी थीपुलिस अधिकारियो ने सबूत मिटाने के लिए तुलसी राम प्रजापति तथा कौसर बी की भी हत्या कर दी थीयह सब कार्य गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास पात्र अधिकारीयों ने किया था पीड़ित पक्ष माननीय उच्चतम न्यायलय में रिट दाखिल कर सी.बी.आई जांच कराने की मांग कर रहा थामाननीय उच्चतम न्यायलय ने विगत दिनों सी.बी.आई जांच करने के आदेश दे दिए हैंइस मामले में महानिरीक्षक डी.डी बंजारा, आर.के पाण्डेय आई.पी.एस, दिनेश एमएन (राजस्थान कैडर के आई.पी एस) पुलिस उपाधीक्षक एन.के अमीन सहित अन्य नौ पुलिस कर्मी जेल में हैं सी.बी.आई को यह जांच करनी है कि क्या नरेंद्र मोदी के साथ-साथ कौन-कौन से अधिकारी इन तीनो की हत्या के षड्यंत्र में शामिल थे ? माननीय डी.डी बंजारा जब से जेल में हैं तबसे गुजरात का आतंकवाद पूर्णतया समाप्त हो गया है । इस तरह से यह बात सोचने की है कि गुजरात का मुख्य आतंकी कौन था ?
माननीय उच्चतम न्यायलय के इस आदेश के बाद राजनीतिक नेतृत्व नौकरशाही अपने हितों के लिए लोगो की हत्या करने में जो संकोच नहीं करती है उसकी गति में जरूर ठहराव आएगाराज्य का कार्य अपने नागरिको की हत्या करना नहीं होता है बल्कि नागरिको द्वारा किसी भी अपराध किये जाने पर समुचित न्यायिक प्रक्रिया द्वारा दण्डित किये जाने की व्यवस्था है लेकिन हमारे देश में भाषा, धर्म, जाति , राज्य, लिंग के आधार पर तमाम सारे अपराध राज्य को चलाने वाले अपराधी करते रहते हैं जिसको रोका जाना समाज के हित में होगा

सुमन
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