शनिवार, 31 जुलाई 2010

खुद तो डूबे हैं, मगर यार को भी ले डूबेंगे

कानपुर के कनपटीमार को शायद बुजुर्ग भी भूल चुके हैं, एक समय था जब वह बहुत चर्चित था, लोग भयभीत रहा करते थे, वह एकदम से निकलता जो मिलता, उसकी कनपटी पर ऐसा जोरदार तमाचा जड़ता कि वह तुरंत गिर कर मर जाता, इधर यह तुरंत गायब हो जाता, जब एक बार पकड़ में आया तो किसी मनोचिकित्सक ने उसका दिल टटोला, उसने सरलता से जवाब दिया कि इस से मुझे संतुष्टि मिलती है
अमेरिका का यही हाल है, उसे दादागिरी करने, धौंस गांठने, युद्ध थोपने, बम बरसाने तथा हर जगह दखल देने में बहुत मजा आता हैइसका एक लम्बा इतिहास है- इधर बड़े छोटे बुश की करतूत आप देख ही चुके हैं, अब ओबामा को देख रहे हैं, जिनसे दुनिया को बड़ी उम्मीदें थीठीक चुनाव बाद बिना किसी उपलब्धि के नोबल शांति पुरस्कार भी मिला- तब से अब तक शांति का एक भी काम नहीं कियाअब स्तिथि यह है कि दुनिया की छोडिये खुद उन्ही के देश में उनकी पोपुलारिटी का ग्राफ बहुत गिर गया है
युद्धों पर इतना अनाप-शनाप खर्च कर दिया कि आर्थिक स्तिथि बेहद बिगड़ गयीइसका अंदाजा इस बात से लगाइए कि ओबामा ने अभी जल्दी अपने एक कार्यक्रम में विश्व के देशों से यह साफ़ कह दिया कि वे अपने विकास के मॉडल बदल लें, क्यों की पूरी दुनिया का आर्थिक विकास अकेले अमेरिका के बल पर नहीं हो सकतामनमोहन सिंह ने अभी अभी जो यह कहा कि हम निर्भरता को ख़त्म करेंगे तथा सब्सिडी समाप्त कर देंगे, यह बात शायद इसी क्रम में कही गयी है
अमेरिका ने ईराक अफगानिस्तान के युद्धों की शुरुआत इस दंभ में की थी कि इनको चुटकी बजाते जीत लिया जायेगा, दशक बीत गया परन्तु उद्देश्य पूरे हो सके, आतंकी कम, आम जनता ज्यादा मारी गयीपूरी दुनिया जानती है कि ईराक के तेल के लालच में उस पर हमला करने का झूठा बहाना बनाया कि उसके पास परमाणु हथियार हैं- अगर थे तो बरामद क्यों हुए, जब कि वह देश अब तक अमेरिका के कब्जे में हैं ?
इधर अफगानिस्तान में पैर बुरी तरह फंसे हुए हैं, नाटो के देश सोचते थे कि जंग जीत कर बड़े-बड़े ठेके आपस में बाटेंगे, जब यह तमन्ना पूरी होती नहीं दिखी तो कुछ देश किसी किसी बहाने से भाग निकले, विदेशी सैनिक इतने अधिक मारे गए कि जो हैं वह भयभीत हैंकरीब डेढ़ लाख सैनिक अमेरिका के हैं, दस हजार ब्रिटेन के हैंलगभग 5000 जर्मनी के हैं, जिनको समझाने बुझाने तथा उनका हौसला बढ़ाने हेतु हेतु जर्मनी के रक्षा मंत्री कार्ल थ्योडोर स्वयं अभी अफगानिस्तान आये, यह वादा भी किया कि हर दो माह पर वह आया करेंगे
अफगानिस्तान को लेकर इस तरफ पश्चिमी देशों में बड़ी हलचल है, एक तरफ वहां अफगान डोनर्स कांफ्रेंस कराई गयी जिसमें 70 से अधिक देश शामिल हुए, दूसरी ओर फ्रेंड्स आफ पकिस्तान की बैठक पकिस्तान में कराई गयी, अमेरिका के तीन दूत विदेश मंत्री हिलेरी, होलब्रूक तथा जोइंट चीफ आफ स्टाफ एडमिरल माइक मुलेन घूम फिर कर इधर के देशों के चक्कर काटते रहेनाटो के सेक्रेटरी जनरल ने भी पकिस्तान का दौरा किया
इस सब गहमागहमी के पीछे आखिर क्या है ? यही कि समय भी बहुत लगा गया, अमेरिका ही नहीं उसके साथी देशों का पैसा भी अथाह खर्च हो गया, युद्धरत देशों की जनता अपनी सरकारों से असंतुष्ट हुई जा रही है, उनके यहाँ के विकास कार्य अवरुद्ध हुए जा रहे हैं, अमेरिकी मंदी ने उसके साथी देशों को भी बहुत प्रभावित कर दिया - मगर अमेरिका उन सबको यही समझाता है कि अभी लगे रहो, अभी साथ छोडो- यह भी खूब रही-

खुद तो डूबे हैं, मगर यार को भी ले डूबेंगे

- डॉक्टर एस.एम हैदर

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वर्ष के श्रेष्ठ युवा गीतकार का सम्मान,वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि का सम्मान

वर्ष के श्रेष्ठ युवा गीतकार का सम्मान

एक ऐसा युवा चिट्ठाकार जो सुमधुर गीतकार भी है और उसके गीत के लफ्ज बांचने वाले का अहम् ही नहीं गलता अपितु वह गहरे संवेदनाओं में डूबने को मजबूर भी हो जाता है !
जिनके शब्द भावना की भूमि पर प्रतिभा के अभिनव अंकुर का संकल्पित प्रस्फुटन है और छंद अलग-अलग आयामों में जीवन के विराट वैविध्य की कलात्मक प्रस्तुतियां !
जिनकी प्रवाहशीलता के साथ-साथ अर्थ व्यंजनायें व्यापक प्रभामंडल को विस्तारित करने में समर्थ होती है वहीं गीतात्मकता पाठकों को बरबस आकर्षित !
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं रविकांत पाण्डेय
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ युवा गीतकार का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है!

वर्ष के श्रेष्ठ युवा कवि का सम्मान

एक ऐसा कवि/चिट्ठाकार जिसने महज डेढ़ वर्षों की चिट्ठाकारी में वह मुकाम प्राप्त करने में सफल हुआ जो मुकाम शायद हीं किसी को अबतक प्राप्त हुआ हो .

एक ऐसा कवि जिसकी कविता की आग जलाती नहीं वल्कि कलुषित परिवेश की कालिमा जलाकर उसके बदले एक खुशहाली से भरे विहान की ललक में ही आग जगाती है !

एक ऐसा कवि जिसकी साहित्यिक साधना पाठकों के सिने में दबी आग को बाहर ही नहीं निकालते वल्कि उन्हें आंदोलित भी करती है !
जानते हैं कौन है वो ?
वो हैं ओम आर्य

जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष का श्रेष्ठ युवा कवि का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
suman

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट का सम्मान,वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार का सम्मान

वर्ष के श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट का सम्मान

१० मई २०१० को हिंदी के प्रतिष्ठित समाचार पत्र जनसत्ता के नियमित स्तंभ में एक आलेख ब्लोगोत्सव-२०१० से साभार प्रकाशित किया गया था , शीर्षक था " भविष्य का यथार्थ"
यह अपने आप में एक प्रमाण है पोस्ट की श्रेष्ठता का , इस आलेख में भविष्य से संबंधित उन पहलूओं पर प्रकाश डाला गया है जो पूर्णत: प्रमाणिक और सत्यता से परिपूर्ण है !
इसके लेखक हैं जीशान हैदर जैदी

ब्लोगोत्सव की टीम ने इस पोस्ट को वर्ष का श्रेष्ठ विज्ञान पोस्ट का अलंकरण देते हुए इसके लेखक को सम्मानित करने का निर्णय लिया है !



वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार का सम्मान

कहा गया है कि प्रेम में जीव अभय हो जाता है , वहां तो सिर्फ समर्पण ही रह जाता है ! प्रेम सर्वस्व न्योछावर करके गदगद हो जाता है ! अहंकार सबकुछ पाकर भी खुश नहीं होता है ! प्रेम दूसरों की छाया बनकर अपने को धन्य मानता है, अहंकार दूसरो की छाया छीनकर भी उदास बना रहता है ....प्रेम जब कुछ बाँट नहीं पाता तब दुखी होता है !

ऐसे दो गीतकार हैं हमारे चिट्ठाजगत में जिनका एक मात्र उद्देश्य है प्रेम बांटना ....उनके गीतों में प्रेम की कोमलता होती है और छंद श्रृंगार से सराबोर ! इनके गीत ह्रदय की धड़कन और साँसों के आरोह-अवरोह के वे सरगम होते हैं जिसमें डूबकर पाठक सत्य -शिव और सुन्दर की तलाश हेतु आतुर हो जाता है !

ये दोनों गीतकार हैं क्रमश: डा. रूप चन्द्र शास्त्री मयंक और संजीव वर्मा सलिल


इन दोनों सुमधुर गीतकारों को ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ उत्सवी गीतकार का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
suman

बृहस्पतिवार, 29 जुलाई 2010

यूँ तो हम जमाने में कब किसी से डरते हैं, आदमी के मारे हैं, आदमी से डरते हैं।

जब से मैंने इंदौर के संवेदनशील कुत्ते का हाल पढ़ा है, इस बारे में, मैं चिंतन मनन पर मजबूर हुआ, आप कहेंगे क्यों आप कुत्ते को लेकर इतना परेशान होते हैं ? ज्यादा सोचेंगे तो घर के रहेंगे घाट के !
खैर यही क्या कम है कि मैं कुत्ता नहीं बना, अगर बन गया होता तो मोहल्ले के आवारा लड़कों के धेले खाता रहता, ऐसी किस्मत कहाँ थीं कि एल्सेशियन बन कर सेठ जी की गाडी पर बैठता और केक बिस्कुट उडाता और अपने ही गरीब कुत्ते भाइयों पर शीशे से झांक झांक कर भौंकता
किसी कवि ने कभी बड़े गर्व से कहा था ' अहो भाग्य मानव तन पावा ' उसने यह बात अध्यात्मिक श्रेष्ठता के लिए कही होगी यह सोचकर कि पता नहीं कितनी करोडो अरबों योनियों से मुक्ति पाकर यहाँ तक पहुंचासमय के अनुसार शब्दों के अर्थ एवं वाक्यों के भावार्थ बदलते हैं जब आज का पदार्थ वादी यही कहे गर तो उसका अभिप्राय यह होगा कि अगर मानव बनता तो घोटाले करता, रिश्वतें लेता, महलों का सुख भोगता ! फंसता तो रिश्वत देकर छूटता

इस्लाम में भी मनुष्य को 'अशरफुल-मखलुकात' अर्थात स्रष्टि में सब से श्रेष्ट बताया गया हैमैं तो हालात देख कर क्षमा कीजियेगा यह समझता हूँ कि आज का मानव कुत्ते से भी बदतर है, गुणों की अगर बात करें तो कुत्ते में वफादारी होती है- एक कुत्ता 'असहाबे- हफ' का भी था, कितना वफादार थाअब इंसान को देखिये ये हद से ज्यादा बेवफा, हद से ज्यादा दगाबाज
कुत्ते का सबसे बड़ा अवगुण यह है कि वह स्वयं अपने भाई बन्धुवों से लड़ता है, गुर्राता हैइंसान इस अवगुण में भी कुत्ते से बहुत आगे है। पडोसी हो, परिवार वाले हो, जाति के गैर जाति के हों, सब से लड़ाई, कतल खून, लाठी डंडा, बंदूख, कट्टा, बम, सब के हक़ मारना, किसी को हक़ देना। ' खुमार' भी इसी का शिकार हुए होंगे ? क्या पता कभी शिकार किया भी होगा- आदमी तो अपनी ही गाता है-

यूँ तो हम जमाने में कब किसी से डरते हैं,
आदमी के मारे हैं, आदमी से डरते हैं

-डॉक्टर एस.एम हैदर

वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (लेखन और गायन ),वर्षके श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक)

वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (लेखन और गायन )

एक ऐसा गीतकार जिसकी प्रतिभा को स्थानीय स्तर पर केवल दबाया ही न गया हो, अपितु उन्हें उस स्थान को प्राप्त करने से वंचित भी रखा गया जिसके वे सचमुच हक़दार थे ...!

एक ऐसा गीतकार जिसकी लेखनी से प्रेम के स्वर प्रस्फुटित होते हैं और कंठ में निवास करती हैं स्वयं सरस्वती ....जिसके गीत पाठकों/श्रोताओं को आंदोलित ही नहीं करते अपितु भीतर-ही भीतर नए महासमर के लिए तैयार भी करते हैं .....जिसकी प्रेमानुभुतियाँ इंसानियत के लड़खड़ाते कदमों को संभालने में, प्रेम पंजरी फांकने वालों को झुलसाने से बचाने में और हताश-निराश लोगों को आशा की किरण प्रदान करती है !

कहा भी गया है कि काव्य के निरिक्षण, परिक्षण और मूल्यांकन के सच्चे अधिकारी वही होते हैं जिनकी अभिव्यक्तियाँ प्रेम से सनी होती है ....यादों की बस्तियों में जिनके अपने महल-दुमहलें होती है और जो सपनों के सत्संग में स्नेह सुरभि लुटाता हो ....!

ऐसे ही एक काव्य व्यक्तित्व का नाम है राजेन्द्र स्वर्णकार
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (लेखन और गायन) से अलंकृत करते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक)

हमारे युग के सर्वाधिक लोकप्रिय गीतकार पद्मश्री नीरज की मान्यता है,कि " गीत ही आदि गीत ही मध्य गीत ही अंत, बिन गीत विश्व है केवल मरघट के सामान " राष्ट्रकवि दिनकर ने अपने महाकाव्य 'उर्वशी' में बड़े ही प्रभावी ढंग से निरुपित किया है , कि " बौद्धिक निर्मितियां नहीं हार्दिक प्रस्तुतियां ही अंतस के रक्तिम ज्वार की परिचय -पत्रिकाएं बनती है और एक क्रान्तिदर्शी कवि के अत्याहत रागतत्व को विजय- वैजयंती प्रदान करती है !"

एक ऐसा गीतकार जिसकी गीतात्मक अभिव्यक्तियों में एक और प्रीति के फाग का राग है तो दूसरी ओर गहन दार्शनिक चिंतन- सरणि का सारभूत अध्यात्म का पराग भी है ...!

एक ऐसा गीतकार जिसके बिंब और कथ्य ग्रामीण परिस्थितियों से लबरेज है वहीं भाव व्यापक प्रभामंडल को आयामित करने में समर्थ ...!

जिसकी प्रवाहशीलता के साथ-साथ अर्थ व्यंजनायें बरबस आकर्षित करती है और जिसकी जिन्दादिली से वाकिफ है पूरा हिंदी चिट्ठाजगत ...!

जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं रायपुर निवासी ललित शर्मा
जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ गीतकार (आंचलिक) का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
suman

बुधवार, 28 जुलाई 2010

शिखर पर हूँ'' ........

शिखर पर हूँ'' ........
घाटियों में खोजिए मत
मैं शिखर पर हूँ'
धुएँ की
पगडंडियों को
बहुत पीछे छोड़ आयी हूँ
रोशनी के राजपथ पर
गीत का रथ मोड़
आयी हूँ,
मैं नहीं भटकी
रही चलती निरंतर हूँ।

लाल-
पीली उठीं लपटें
लग रही है आग जंगल में
आरियाँ उगने लगी हैं
आम, बरगद, और
पीपल में
मैं झुलसती रेत पर
रसवंत निर्झर हूँ....

साँझ ढलते
पश्चिमी नभ के
जलधि में डूब जाऊँगी,
सूर्य हूँ मैं जुगनुओं की'
चित्र----लिपि----में
जगमगावुगी,
अनकही अभिव्यक्ति का मैं

स्वर अनश्वर हूँ''!
meet

वर्ष का श्रेष्ठ बाल साहित्यकार सम्मान,वर्ष के श्रेष्ठ लेखक ( हिंदी चिट्ठाकारी से संवंधित आलेख हेतु )

वर्ष का श्रेष्ठ बाल साहित्यकार सम्मान


आज का सम्मान एक ऐसे चिट्ठाकार के नाम, जो सक्रियता की मिसाल है और जिसे सदलेखन को प्रोत्साहन देने वाले चिट्ठाजगत के पहले सम्मान को प्रारम्भ करने का श्रेय जाता है।

ये ऐसे चिट्ठाकार हैं, जो आम तौर से 'तस्लीम', 'साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन' और 'सर्प संसार' सम्बंधी वैज्ञानिक चेतना का प्रसार करने वाली गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं, पर मूलत: वे एक बाल साहित्यकार हैं और बहुत ही कम उम्र में बाल साहित्य की उन ऊचाँईयों का स्पर्श किया है, जो बहुतों के लिए सपनों जैसा है।

जानते हैं कौन हैं ये ?
ये हैं लखनऊ निवासी श्री ज़ाकिर अली 'रजनीश'

जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने हिंदी चिट्ठाकारी से संवंधित आलेख लेखन के लिए वर्ष के श्रेष्ठ बाल साहित्यकार का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है.

वर्ष के श्रेष्ठ लेखक ( हिंदी चिट्ठाकारी से संवंधित आलेख हेतु )

एक ऐसा चिट्ठाकार जिसने मात्र एक वर्ष की हिंदी चिट्ठाकारी में वह श्रेष्ठता हासिल करने में सफलता पायी है जो शायद किसी को वर्षों की साधना के पश्चात भी हासिल नहीं होता !

एक ऐसा चिट्ठाकार जिसकी भाषा बरबस आकर्षित करती है और शब्द चमत्कृत करते हैं ....हिंदी चिट्ठाकारी को नया आयाम देने की दिशा में सक्रीय नए चिट्ठाकारों में ये वेहद समर्पित और उत्साह से परिपूर्ण हैं !

जानते हैं कौन हैं ये ?
ये हैं भोपाल निवासी श्री प्रमोद तांबट

जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने हिंदी चिट्ठाकारी से संवंधित आलेख लेखन के लिए वर्ष के श्रेष्ठ लेखक का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।
suman

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

खुशबू .......महकते विचारों की


खुशबू तुम दिखती तो नहीं हो ...

पर तुम्हे महसूस करती हूँ हर पल ...!!

फूल तुम्हे मैं कैसे भूलूं ?

डाली पर उगते हो जब तुम ,

काँटों कि चुभन को सहते हुए भी ,

आँखों को यूं मूंदकर .......


वो खुशबू को जहन में भर लेते है हम ,

क्योंकि तुम पौधे पर ही खूबसूरत हो लगते ....



पहली बरसात में तपती धरती पर ,

पड़ती है बारिश की पहली बूंदें ...

धरती से उठती वो सौंधी सी खुशबू ,

होती है पहले प्यार के अहसास सी .....



खुशबू ....रिश्तों में बंधे प्यार की,

खुशबू ...वो मुस्कानों की,

खुशबू ...दोस्ती के अटूट बन्धनकी ,

खुशबू .......महकते विचारों की .......!!!!

- मीत

वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति,वर्ष के श्रेष्ठ आकर्षण के अंतर्गत वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका

वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति

किसी शायर ने कहा है, कि- " बादल हो तो बरसों कभी बेआब जमीं पर, खुशबू हो अगर तुम तो बिखर क्यूँ नहीं जाते !!" ब्लोगोत्सव की २०० से ज्यादा प्रस्तुतियों से एक श्रेष्ठ प्रस्तुति का चयन आसान नहीं था .....
ब्लोगोत्सव की टीम इस दिशा में लगातार माथापच्ची करती रही और अंतत: इस निष्कर्ष पर पहुंची कि कैप्टन मृगांक नंदन और उनकी टीम के द्वारा प्रस्तुत देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत विडिओ प्रस्तुति को ही वर्ष की श्रेष्ठ प्रस्तुति की संज्ञा दी जाए ......!

इसलिए कैप्टन मृगांक नंदन और उनकी टीम के द्वारा प्रस्तुत विडिओ प्रस्तुति को श्रेष्ठ प्रस्तुति का अलंकारं देते हुए ब्लोगोत्सव की टीम ने सम्मानित करने का निर्णय लिया है जो देश के स्वाभिमान को अक्षुण बनाए रखने हेतु सतत संकल्पित युवा सेनानियों को ब्लोगोत्सव की यह सप्रेम भेंट है ...!

वर्ष के श्रेष्ठ आकर्षण के अंतर्गत वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका

आज की प्रस्तुति के क्रम में मुझे हिंदी फिल्म का एक पुराना गाना स्मरण हो आया अचानक -"बच्चे मन के सच्चे, सारे जग के आँख के तारे.....!"

हम ऐसे ही तीन नन्हे सितारों की बात करने जा रहे हैं जिनकी उपस्थिति मात्र से गरिमामय हो गया था ब्लोगोत्सव का समापन समारोह !
जिन्होंने अपने नन्हे मन में छिपी बड़ी इच्छाशक्ति के बल पर ब्लोगोत्सव को दिया एक बड़ा आकाश और संगीत की एक ऐसी जमीन जिसपर टिककर आज पूरा हिंदी चिट्ठाजगत सर उठाकर देखने को आतुर है आकाश के झिलमिल सितारों को ....!

संगीत के प्रति इन तीनों की श्रद्धामयी भावना और साँसों-साँसों में बसी अदम्य आकांक्षा की खुशबू .....अपराजेय ख्वाहिशों के साथ पवित्रता की हद तक ईश को समर्पित है ....
खुशबू /अपराजिता और ईशिता

यही तीनों स्वर साधिकाएँ हैं जिन्हें हम अपनी ब्लोगोत्सव -२०१० की टीम की सहमति से वर्ष के श्रेष्ठ आकर्षण के अंतर्गत वर्ष की श्रेष्ठ उदीयमान गायिका से अलंकृत करने जा रहे हैं !
suman

सोमवार, 26 जुलाई 2010

भेड़ें लातादाद हैं लेकिन सबको जान के लाले हैं, उनको यह तालीम मिली है, भेड़िए ताकत वाले हैं : हफीज जालंधरी


उत्तर प्रदेश में यह शेर हाफिज जालंधरी साहब का आज भी पूरी तरीके से प्रासंगिक है प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री अवधेश वर्मा की सुरक्षामें तैनात सिपाही शाहजहांपुर दो पुलिस कांस्टेबल रात के ग्यारह बजे शाहजहाँपुर के कार्पोरेशन बैंक पहुंचे और वहां लगी हुई .टी.एम मशीन को उखाड़ liya और चौकीदारों को मार पीट कर .टी.एम मशीन को गाडी में लाद कर चले गए
बैंक अधिकारियो के प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के बाद एक पुलिस कांस्टेबल के घर से .टी.एम मशीन बरामद हुई.टी.एम मशीन में लगभग 9 लाख रुपये थेउत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकांश कर्मचारी अधिकारी इसी तरह की हरकत कर रहे हैंइन सब घटनाओ की जानकारी ऊपर से नीचे बैठे सभी लोगों को होती रहती हैइस व्यवस्था में भेड़ों को मोड़ने का कार्य बराबर जारी है राजनेताओं की स्तिथि और भी बद से बदतर हैदेखिये आगे अभी क्या-क्या होता है ?

सुमन
लो क सं घ र्ष !

फोटो साभार: हिंदुस्तान दैनिक

रविवार, 25 जुलाई 2010

शेरों को आजादी है, आजादी के पाबंद रहें, जिसको चाहे चीरें-फाड़ें, खाएं-पिएँ आनंद रहे - हफीज जालंधरी

(आजादी है)
कर्नाटक के लोकायुक्त ने अवैध खनन करके बेल्ल्केरी बंदरगाह पर जब्त किये 5 लाख टन लौह अयस्क के गायब हो जाने के सवाल पर आपत्ति करते हुए मुख्यमंत्री येदियुरप्पा से बार बार पूछे जाने पर कि लोह अयस्क कहाँ गायब हो गया और जवाब न मिलने पर इस्तीफा दे दिया था। केंद्र सरकार और भाजपा नेता लाल कृष्ण अडवाणी ने लोकायुक्त को कुछ समझाया और उन्होंने बाद में इस्तीफा वापस ले लिया उक्त लौह अयस्क जब्त होने के बाद भी निर्यात कर दिया गया है।
फरवरी 2010 से लेकर 20 जुलाई तक लगभग 35 लाख टन लौह अयस्क की गैर कानूनी खुदाई कर्नाटक में हुई है और उसका निर्यात भी कर दिया गया है जिसकी कीमत लगभग 60 हजार करोड़ रुपये होती है। कर्नाटक में एक पुलिस कांस्टेबल के दो बेटे करुणाकर रेड्डी और जनार्दन रेड्डी मंत्री हैं। खान-खदान माफिया का संचालन इन्ही दो व्यक्तियों से होता है। कर्नाटक की शासक पार्टी भाजपा भी इन्ही के इशारे पर चलती है। वैसे तो खनन विभाग मुख्यमंत्री के पास है।

हम आजाद हैं भूखे मरने के लिए वह आजाद हैं हजारो-हजार लूटने के लिए।
शेरों को आजादी है, आजादी के पाबंद रहें
जिसको चाहे चीरें-फाड़ें, खाएं-पिएँ आनंद रहे
- हफीज जालंधरी

वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार (पुरुष),वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार

वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार (पुरुष)

कहा जाता है कि -" जिस टिप्पणी में दर्शन नहीं वह टिपण्णी कहाँ ?" वह तो मरे हुए कुछ शब्दों की शवयात्रा है . ...!

टिप्पणी तो साधना के तन और मन के पोर-पोर को झंकृत करने की क्षमता रखती है , हहराती-घहराती आकाश की छाती चीरती कुत्सित विचारधाराओं को विचलित कर देती है .

टिप्पणी में तो वह शक्ति होती है कि पराजय के कगार पर पहुंचे योद्धाओं में जीत की ललक जगा देती है .परों की तलाश में भटकती हुयी साधना को माया और राम दोनों के दर्शन करा देती है . यानी टिप्पणी साहित्य के लिए अमृत भी है और विष भी ....इसलिए उसका महत्व साहित्य की तमाम विधाओं से कहीं ज्यादा है .

एक ऐसा कवि जिसकी पहचान हिंदी चिट्ठाजगत में धूमकेतु के सामान है , जिनकी कवितायें हिंदी साहित्य को प्रयाग की पावनता प्रदान करती है , सुर-सरस्वती और संस्कृति की त्रिवेणी में डूबने को मजबूर कर देती है , पाठकों के मन-मस्तिस्क पर सीधे उतर जाने वाले इस युवा कवि का नाम है- हिमांशु

किन्तु ब्लोगोत्सव में उनके द्वारा प्रस्तुत सारगर्भित टिप्पणियों के लिए ब्लोगोत्सव की टीम ने उन्हें वर्ष के श्रेष्ठ टिप्पणीकार (पुरुष) का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार

कहा जाता है कि -" जिस टिप्पणी में दर्शन नहीं वह टिपण्णी कहाँ ?" वह तो मरे हुए कुछ शब्दों की शवयात्रा है . ...!
टिप्पणी तो शब्द-शब्द से दर्शन टपकाती है . टिप्पणी में जीवन दर्शन नहीं हो तो उसकी कोई प्रासंगिकता नहीं होती वह तो निष्प्राण होती है . चूँकि टिप्पणी पत्थरों तक में प्राण-प्रतिष्ठा करती है , इसलिए उसका महत्व साहित्य की तमाम विधाओं से कहीं ज्यादा है .

एक ऐसी गीतकार जो गीत रचती है, गीत बांचती है ...यहाँ तक कि गीत जिसका ओढ़ना-बिछौना है , गीत जिसका स्वप्न है , गीत जिसका खिलौना है....जो अपने नाम के साथ गीत लिखना पसंद ही नहीं करती, अपितु गीत जिसकी प्राण-उर्जा है ऐसा महसूस करती है .

किन्तु आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि ब्लोगोत्सव-२०१० में प्रस्तुत उनकी टिप्पणी इतनी सारगर्भित रही कि उन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने उन्हें वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं श्रीमती संगीता स्वरुप जी !
suman

शनिवार, 24 जुलाई 2010

पुलिस मंत्री भागा है, अफसर हैं जेल में

भगोड़ा पुलिस मंत्री
माननीय उच्चतम न्यायलय के निर्देश पर सी.बी.आई द्वारा सोहराबुद्दीन के एनकाउन्टर के मामले में गुजरात के पुलिस मंत्री भाग गए हैं। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने पुलिस उपनिरीक्षक डी. बंजारा, पुलिस अधीक्षक राजकुमार पांडियन, एम.एन दिनेश, पुलिस उपाधीक्षक एम.एल परमार व एन.के अमीन के खिलाफ आरोप पत्र न्यायलय में दाखिल कर दिया है। नस्लवादी सोच के आधार पर राज्य अपने नागरिको की हत्या करने लगा है। जिसका लोकतान्त्रिक व्यवस्था में प्रत्यक्ष उदहारण है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने भगोड़े पुलिस मंत्री के समर्थन में प्रधानमंत्री के लंच का बहिष्कार किया है।
दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक श्री दिवाकर त्रिपाठी को रंगेहाथ घूस लेते हुए पकड़ा गया है। श्री दिवाकर त्रिपाठी अपने पद का दुरपयोग करते हुए लोगों को नोटिस जारी करते थे। नोटिस प्राप्त करने वाला व्यक्ति जब उनके कार्यालय पहुँचता था तो लाखों रुपये उससे वसूले जाते थे। रुपये न देने पर एन.डी.पी.एस एक्ट में चालान कर दिया जाता था। नारकोटिक्स ब्यूरो का कार्यालय प्रतारणा केंद्र भी था। घूस न देने पर इस तरह से पिटाई की जाती थी कि वह व्यक्ति मर जाता था जिसका प्रत्यक्ष उदहारण बाराबंकी जनपद के मदन की मौत है। मदन नामक युवक को बाराबंकी शहर से उसके घर से उठाया ले जाया गया था और नारकोटिक्स ब्यूरो के कार्यालय में जब पिटाई से उसकी मृत्यु हो गयी थी तो उसके घर उसकी लाश छोड़ कर भाग गए थे। लखनऊ स्तिथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के कार्यालय में अब तक कई करोड़ रुपये की वसूली बाराबंकी जनपद के नागरिको से हो चुकी है जिन व्यक्तियों ने रुपया नहीं दिया उनका चालान फर्जी मार्फीन दिखाकर कर दिया गया।
अब राज्य आधारित अपराधों को कैसे नियंत्रित किया जाए मुख्य सवाल यह है ?

सुमन
लो क सं घ र्ष !

वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक,वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका

वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक

एक ऐसा उदीयमान लेखक और व्यंग्यकार जब सृजन के लिए कलम उठाता है तो जग के कंटीले करील-कुंजों को प्रयाग की पावनता प्रदान कर देता है ....!
"वसुधैव कुटुंबकम" तक जाकर क्षितिज को भी अपनी बांहों के घेरे में भर लेने की प्रचेष्टा जिसकी रचनाओं में पूरी तरह प्रतिविंबित होती है और जो साहित्य की विभिन्न विधाओं से जन कल्याण के साथ ही साथ जग कल्याण करता है ...!
जानते हैं कौन है वो?
वो है बहुचर्चित युवा लेखक व् व्यंग्यकार श्री दीपक मशाल

जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने इस बार वर्ष के श्रेष्ठ परिचर्चा लेखक का खिताब देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है !


वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका

एक ऐसी लेखिका जिसकी साधना के स्वर पाठकों के मन के सुदूर घाटियों में अन्तर्निहित स्वर को ध्वनित- प्रतिध्वनित करने में पूरी तरह सक्षम है ...!
एक ऐसी लेखिका जिसकी साधना जब सरस्वती की अग्निविना पर सुर साधती है तो साहित्य की अग्नि धाराएं प्रवाहित होने लगती है ...! इन अग्निधाराओं में कहीं अग्नि की आंच धाह मारती है तो कहीं कलुषित परिवेश की कालिमा जलाकर उसके बदले एक खुशहाली से भरे विहान की ललक दिखा जाती है....!
जानते हैं कौन है वो?
वो हैं सूरत (गुजरात) निवासी प्रीती महेता
जिन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने वर्ष की श्रेष्ठ परिचर्चा लेखिका का खिताब देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है !
suman

शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

वर्ष के श्रेष्ठ कवि (कविता पाठ),वर्ष के श्रेष्ठ गज़लकार

वर्ष के श्रेष्ठ कवि (कविता पाठ)

कहा गया है- " वाक्यं रसात्मकं काव्यं " यानी रसों से सरावोर वाक्य ही काव्य है ।
एक ऐसा प्रवासी भारतीय कवि जिनकी कविता तो आकर्षित करती ही है , आवाज़ भी कम आकर्षित नहीं करती ।
उस आवाज़ में यदि कविता रूपी महुए का स्वाद आपने एक बार चख लिया तो समझिये हमेशा के लिए आप उनकी आवाज़ में आबद्ध हो जायेंगे ।
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं श्री अनुराग शर्मा
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने ब्लोगोत्सव पर प्रसारित उनकी कविता "गड़बड़झाला" को आधार बनाते हुए उन्हें वर्ष के श्रेष्ठ कवि (कविता पाठ ) का अलंकरण देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।


वर्ष के श्रेष्ठ गज़लकार

एक ऐसा गज़लकार जिनकी ग़ज़लों का सबसे बड़ा आकर्षण प्रभावोत्पादकता है . पढ़ने वाले को यह महसूस होता है कि यह उन्ही की दिली बातों का वर्णन है।
एक ऐसा गज़लकार जिनकी ग़ज़लों के शिल्प और कथ्य में गज़ब का तारतम्य होता है । शब्दों का विभाजन विभिन्न घटकों की मात्रा संख्या के अंतर्गत वे ऐसे करते हैं कि पढ़ने वाला कोई भी पाठक उनकी ग़ज़लों का मुरीद हो जाए ।
आज अपनी अकुंठ संघर्ष चेतना और एक के बाद दूसरी विकासोन्मुख प्रवृति के बीच जिनकी ग़ज़ल हिन्दी साहित्य में अपनी स्वतन्त्र उपस्थिति दर्ज कराने को वेचैन दिखती है।
जानते हैं कौन है वो ?
वे हैं श्री दिगंबर नासवा
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ गज़लकार का अलंकरण देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान-२०१० से सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।
suman

बृहस्पतिवार, 22 जुलाई 2010

हे राही, तुम दिल्ली कब जाओगे

ममता जी की रेल : इसी रेल की तरह चलेगा बंगाल

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार सुश्री ममता बनर्जी आज कल भारत सरकार के रेल मंत्री पद पर आसीन हैं। रेल विभाग की हालत बद से बदतर होती जा रही है। आये दिन रेल दुर्घटनाएं हो रही हैं। कभी दो ट्रेनों में अगल-बगल से टक्कर से होती है तो कभी पीछे से टक्कर हो रही है । ट्रेन के डिब्बों में छोटी-छोटी खराबियों के कारण धुँआ भर जाना आग लग जाना, कपलिंग टूट जाना आम बात हो गयी है। रेल मंत्री का जरा सा भी ध्यान रेल मंत्रालय की तरफ नहीं है। वह इस मुहावरे का उपयोग कर के बचना चाहती हैं कि इसमें विरोधियों का हाथ है। यह बात कहकर फुर्सत नहीं मिल जाती है। अपनी गलतियों को छिपाने के लिए जिम्मेदार पदों पर आसीन लोगो के मुंह से यह बात शोभा नहीं देती।
भारत सरकार के अधिकांश मंत्रालयों की स्तिथि यही है कि अभी विदेश मंत्री एस.एम कृष्णा ने भी अपनी कूटनीतिक कमजोरियों को छिपाने के लिए पकिस्तान यात्रा की असफलता को गृह सचिव पिल्लई के ऊपर मड दिया और जहाँ पर उनको मजबूती से अपनी बात कहनी चाहिए वहां पर वह चुप्पी साध गए। अमेरिकन साम्राज्यवाद चाहता यह है कि भारत पकिस्तान सहित इस क्षेत्र में उपजा आतंकवाद बरकरार रहे। उसके लिए उसकी हर कोशिश जारी है। दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर सार्वजानिक क्षेत्र को बर्बाद करने की भी उसकी मंशा है। उसकी मंशा के अनुरूप प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रेल मंत्री ममता बनर्जी सहित तमाम मंत्री कार्य कर रहे हैं। अगर यह बात नहीं होती तो निश्चित रूप से ममता बनर्जी कृष्णा साहब जैसे अक्षम लोग मंत्री पद पर विराजमान नहीं होते।
रेल की दुर्दशा देख कर यह लिखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है कि " हे राही, तुम दिल्ली कब जाओगे "।

-सुमन
लो क सं घ र्ष !

वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक, वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका

वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक

हिंदी चिट्ठाजगत से जुडा एक ऐसा लेखक जो अपनी माटी , अपनी सभ्यता-संस्कृति और आंचलिक लोक कलाओं को आयामित करने की दिशा में विगत कई वर्षों से सक्रिय है ।
एक ऐसा लेखक जब अपनी सांस्कृतिक विरासत के गुणों और विशेषताओं को प्रस्तुत करता है तो हर भारतीयों का सीना गर्व से फूल जाता है ।
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं छतीसगढ़ की माटी में लोटा-लोटा कर जवान हुआ एक ऐसा लेखक जो जीता है तो छातिसगढ़ी संस्कृति के लिए और लिखता है तो छतीसगढ़ी संस्कृति को अक्षुण बनाए रखने के लिए ....!
नाम है संजीव तिवारी
जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष के श्रेष्ठ क्षेत्रीय लेखक का खिताब देते हुए इस बार लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।

वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका

किसी भी उत्सव की परिपूर्णता बिना बच्चों बिना युवाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं होती ....यही कुछ हुआ ब्लोगोत्सव के साथ भी ....नन्ही पाखी ने जहां उत्सव की धमाकेदार शुरुआत की वहीं मालविका ने ब्लोगोत्सव के १५० पोस्ट पूरे होने पर गीतों से भरी शाम प्रस्तुत कर पहली बार हिंदी चिट्ठाजगत में अपनी हंगामेदार भागीदारी देने में सफल रही । साथ ही उत्सव को एक नया आयाम देकर गरिमामय बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ।
सबसे सुखद बात तो यह है कि इन्होने ब्लोगोत्सव में शामिल होने के लिए अपना ब्लॉग बनाया ....इस होनहार युवा गायिका को ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष की श्रेष्ठ युवा गायिका का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।
बहुत सारे चिट्ठाकारों के लिए यह उदीयमान गायिका भले ही अपरिचित हों, किन्तु ये बड़ी तेजी से संगीत की दुनिया में एक मुकाम बनाने की दिशा में अग्रसर है ।
नाम है मालविका निराजन
suman

बुधवार, 21 जुलाई 2010

सभी लुटेरे हाथी पर




आजादी के बाद लुटेरों का समुदाय विकसित होने लगा जो प्राकृतिक संपदाओं पर अपना कब्ज़ा कर अपनी सम्रद्धि का नया रास्ता खोला। उस नए समुदाय ने ग्राम समाज की जमीन तालाब, बालू, मौरंग, जंगल, पहाड़, वन्य जीव आदि पर घोषित और अघोषित तरीके से अपना कब्ज़ा किया। उस समुदाय का एक कार्य यह भी होता था कि चुनाव के समय कांग्रेस की सरकार बनाओ और राज्य का संरक्षण प्राप्त करो। 1977 में गैर कांग्रेस वाद के नाम पर छोटे-छोटे दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई और केंद्र से लेकर प्रदेश तक सरकार स्थापित की। उस सरकार ने अपना 3 वर्ष का कार्यकाल राज्य को समझने और आपस में लड़ने में गंवान दिए। पहली बार उत्तर प्रदेश में जब मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो प्राकृतिक संपदाओं के लुटेरे बेबस हुए क्योंकि उनको राज्य का संरक्षण नहीं मिल पा रहा था । भारी संख्या में ऐसे तत्व समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने पूरे प्रदेश में बालू, मौरंग, गिट्टी, जल, जंगल, जमीन पर अपनी लूट बनाए रखी और इस लूट से वंचित जातियों को भी लूट करने की कला सिखाई और सारे बाहुबली समाजवादी हो गए जो बाहुबली समाजवादी नहीं हुए उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव में समाजवादी पार्टी की मदद कर अपनी लूट को बनाये रखा फिर दौर आया सुश्री मायावती का उसमें प्राकृतिक सम्पदा के लुटेरे बाहुबलियों को अपने प्रशासन के डंडे से हांक कर अपने पक्ष में किया और स्तिथि यहाँ तक आ पहुंची की लगभग सभी लुटेरे हाथी पर आज सवार हो गए ।
आज के दौर में संगठित अपराध का मुख्य कारण राज्य को संचालित करने वाले लोग प्राकृतिक सम्पदा को लूटने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। जिससे कानून व्यवस्था नाम की चीज नष्ट होती है। उत्तर प्रदेश के मंत्री नन्द कुमार नंदी के ऊपर हुआ हमला उसी का परिणाम है। नंदी साहब ने इलाहाबाद में सभी प्राकृतिक संपदाओं के ऊपर राज्य की ताकत का इस्तेमाल कर लूट खसोट मचा रखी है। हद तो यहाँ तक हो गयी कि पहले से लूट कर रहे लोगों को ठेके पट्टे ही नहीं मिले और राज्य की मदद से उनकी संपत्तियों की नीलामी कर दी गयी। लोकसंघर्ष पहले भी लिख चुका है की खनन मंत्री के कारण 1500 रुपये में एक ट्रक बिकने वाली बालू आज 6000 रुपये की बिक रही है। उसका मुख्य कारण बालू खनन पर राज्य की मदद से एकाधिकार हो जाना है।
प्रदेश में कमोबेश स्तिथि अफसरशाही की भी है। अफसरशाही भ्रष्टाचार में बुरी तरीके से लिप्त ही है। इसके अतिरिक्त तमाम सारे व्यवसायों के ऊपर भी उनका कब्ज़ा है। दूसरे लोग प्रकृति प्रदत्त चीजों का उपयोग नहीं कर सकते हैं और यही मुख्य संघर्ष है।

पुरानी बिल्डिंगो से किरायेदारों को मार-पीट कर खाली कराने का कार्य राज्य पर काबिज लोग कर रहे हैं। न्यायलय की भूमिका समाप्त हो चुकी है। यह पोस्ट लिखी ही जा रही थी कि सांस्कृतिकर्मी, युवा कवि श्री सुनील कुमार दत्ता आजमगढ़ शहर में किराए के मकान में रह रहे हैंन्यायलय में विवाद विचाराधीन है जिसपर फैक्स फीड के संविदा सहायक अभियंता राजेश सिंह कब्ज़ा कर लेना चाहते हैं, का उधम जारी थाजिला प्रशासन मौन है न्यायपालिका तारीखें देने में व्यस्त हैइसका कोई विकल्प नहीं हैयह बात टेलेफोन से अभी-अभी उन्होंने बताईफैक्स फीड का अभियंता 5-6 साल की नौकरी में अगर 20-25 करोड़ का स्वामी हो गया है तो यह सब होगा हीआय से अधिक संपत्ति रखने पर कानून मौन है

आज सभी गुंडे चाहे वह नौकरशाह के रूप में हों या राजनेता के रूप में सभी हाथी की सवारी कर रहे हैं।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार_________-वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका

वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्यकार

एक ऐसा चिट्ठाकार जो व्यंग्य की चाशनी में डूबोकर जब साहित्य परोसता है तो फिर चखने वाले के होठों से आह निकालने के बजाये स्वत:वाह निकल जाता है .....!
एक ऐसा व्यंग्यकार जिसके व्यंग्य वाण से आहत व्यक्ति भी मुस्कुराने को विवश हो जाता है ....जो सबका दोस्त है दुश्मन किसी का नहीं ....दुश्मन है भी तो केवल खोखली व्यवस्था का .....! जो मशहूर है खुशमिजाजी के लिए हिन्दी चिट्ठाजगत में ।
जानते हैं कौन है वो?
वो है अविनाश वाचस्पति

चिट्ठाजगत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जिस ने अविनाश वाचस्पति का नाम न सुना हो। अविनाश जी की उर्जा और स्फूर्ति जगजाहिर है । जिन विषयों पर वे लिखते हैं उसकी व्यापकता तारीफे काबिल है।
ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने इस वार इस बहुचर्चित व्यंग्यकार को वर्ष का श्रेष्ठ व्यंग्यकार का खिताब देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।

वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका

एक ऐसी लेखिका जो अपने को लेखिका से ज्यादा कलाकार कहलाना पसंद करती है । खुद कुछ नहीं बोलती , बोलती है केवल इनकी कलम -कभी माँ, कभी बेटी, तो कभी पत्नी बनकर .....!
स्मृतियों के आईने में झांककर जब इनकी कलम बोलती है तो पढ़ने बालों के जेहन में तूफ़ान पैदा कर देती हैं , संस्मरण के बहाने इनके शब्द जब रोते हैं तो पढ़ने वालों की आँखों से करुणा और स्नेह की धाराएं फूट पड़ती हैं ....खुद के लिए प्रचार जिन्हें पसंद नहीं ....जो महसूस करती हैं बिना लाग-लपेट के बयान कर देती हैं,आप इसे जो नाम देना चाहें दे दें आपकी मर्जी ....!
जो अख़बारों ,मासिकों तथा आकाशवाणी के लिए तीन भाषाओँ क्रमश:हिंदी,मराठी तथा अंग्रेजी में लिखती हैं . जिनकी ज़्यादातर किताबें मराठी में प्रकाशित हुई है , किन्तु हिंदी ब्लॉग पर सक्रियता अन्य हिंदी भाषी लेखकों से कहीं ज्यादा है ।
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो है शमा
यानी शमा कश्यप
ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने इन्हें इस बार वर्ष की श्रेष्ठ सह लेखिका का खिताब देते हुए लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान -२०१० से सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।
suman

मंगलवार, 20 जुलाई 2010

तुम हो जीवन-हृदय


तुम हो जीवन-हृदय
मैं हृदय का हृदय
तुम हो सूरज-किरण
मैं किरण का उदय
इस जगत को यही रास आई नहीं
मैं तुम्हारी हूँ कोई परायी नहीं,

तुम हो इक साधना
प्रार्थना, भक्ति हो
सुप्त मानव हो तुम
जागरण -शक्ति हो
कौन है जिसको तुमने जगाया नहीं ?
मैं तुम्हारी हूँ कोई पराया नहीं...!

-मीत

सोमवार, 19 जुलाई 2010

प्रिय..........


प्रिय,
अधूरे को ही तो
पूरा किया जाता है
पूर्णता तो स्वयं
स्थान रहित होती है...
पृथ्वी पर मैं
टूटे दिल,
विरह के मारे प्रेमी,
व्यथित हृदयों,
कल्पनायों में
विचरने वालों के
अधूरे सपने ही तो
पूरे करने जाती हूँ।

पर अब तो,
मानव ही बदल गया
न छत्त है, न आँगन
बड़ी-बड़ी अट्टालिकायें
न जा सकूँ, न फैल सकूँ
फिर निराश आशिक भी कहाँ...
इधर दिल टूटा,
नई जगह है जुड़ जाता,
आहें भरने,
मुझ से ठंडक पाने का समय कहाँ...
कल्पनाओं में मुझे बुनने वाले
अब कवि भी कहाँ...
बुद्धि कौशल में उलझे उनके
हृदयों में अब मेरा स्थान कहाँ...

प्रिय,
धरती वासी
तुम पर बसना चाहते हैं,
जिस दिन तुम्हें कष्ट में पाऊँगी,
रक्षा कवच बन जाऊँगी,
साथ निभाने आऊँगी,
पूर्णता पा जाऊँगी,
अभी मुझे धर्म निभाने दो,
कुछ बेचैन रूहों,
अतृप्त आत्मायों को सुख देने दो...!

-मीत

रविवार, 18 जुलाई 2010

बस इतना ही करना साथी........


बस इतना ही करना साथी,
मेरे अचेतन मन में जब तुम्हारे होने का भान उठे,
और मैं तुम्हें निःशब्द पुकारने लगूँ,
तुम मेरी पुकार की प्रतिध्वनि बन जाना।

बस इतना ही करना कि,
सर्द रातों में जब चाँद अपना पूरा यौवन पा ले,
और मेरा एकाकीपन उबलने लगे,
तुम मुझे छूने वाली हवाओं में घुल जाना।

बस इतना ही करना कि,
स्मृति की वादियों में जब ठंडी गुबार उठे,
और मेरे प्रेम का बदन ठिठुरने लगे,
तुम मेरे दीपक कि लौ में समा जाना।

बस इतना ही करना कि,
सावन में जब उमस भरी पुरवाई चले,
और मेरे मन के घावों में टीस उठने लगे,
तुम अपने गीतों के मरहम बनाना।

बस इतना ही करना दोस्त,
पीड़ा (तुमसे न मिल पाने की ) का अलख जब कभी मद्धिम पड़ने लगे,
और मैं एक पल के लिए भी भूल जाऊँ,
तुम मेरे मन की आग बन जाना।

बस इतना ही करना मीत!
मेरी साँसें जब मेरे सीने में डूबने लगे,
और मैं महा-प्रयाण की तैयारी करने लगूँ,
तुम मिलन की आस बन जाना।

- मीत

शनिवार, 17 जुलाई 2010

वर्ष के श्रेष्ठ कवि-वर्ष की श्रेष्ठ कवियित्री

वर्ष के श्रेष्ठ कवि

हिंदी चिट्ठाजगत में सक्रीय एक ऐसा कवि जो 20 वीं शताब्दी के आठवें दशक में अपने पहले ही कविता संग्रह 'रास्ते के बीच' से चर्चित हुए ! जो 38 वर्ष की ही आयु में 'रास्ते के बीच' और 'खुली आँखों में आकाश' जैसी अपनी मौलिक कृतियों पर 'सोवियत लैंड नेहरू अवार्ड' जैसा अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाले पहले कवि बने । जिनका जीवन निरंतर संघर्षमय रहा है। जो 11 वीं कक्षा के बाद से ही आजीविका के लिए काम करते हुए शिक्षा पूरी की। जो 17-18 वर्षों तक दूरदर्शन के विविध कार्यक्रमों का संचालन किया और 1994 से 1997 में भारत की ओर से दक्षिण कोरिया में अतिथि आचार्य के रूप में भेजे गए, जहाँ साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उन्होंने कीर्तिमान स्थापित किए।

जानते हैं कौन हैं वो ?
वे हैं डा. दिविक रमेश

जिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने इस बार वर्ष के श्रेष्ठ कवि का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ...!

वर्ष की श्रेष्ठ कवियित्री

एक ऐसी कवियित्री जो कविवर पन्त की मानस पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की बेटी हैं । स्वर्गीय सुमित्रा नंदन पन्त ने जिनका नामकरण ही नहीं किया अपितु अपनी स्व रचित पंक्तियाँ इनके नाम की..."सुन्दर जीवन का क्रम रे, सुन्दर-सुन्दर जग-जीवन"।

शब्दों की पांडुलिपि जिन्हें विरासत में मिली है। मन जहाँ तक जाता है, इनके शब्द उसकी अभिव्यक्ति बन जाते हैं। जिन्हें शब्दों की जादुई ताकत माँ ने दी और कमल बनने का संस्कार पिता ने, परिपक्वता समय की तेज आँधी ने।

सपने जिनकी नींव हैं और लेखनी जिनकी ताक़त .....जो सपनों की दुनिया में कोमलता ढूँढती हैं और हकीक़त कविता के रूप में सामने आ जाती है .... इनका मानना है कि सपनों की दुनिया मन की कोमलता को बरकरार रखती है...हर सुबह चिड़ियों का मधुर कलरव - नई शुरूआत की ताकत के संग इनके मन-आँगन में उतरा...ख़ामोश परिवेश में सार्थक शब्दों का जन्म होता रहा और ये अबाध गति से बढती गईं और यह एक और सौभाग्य कि आज यहाँ हैं....अपने सपने, अपने आकाश, अपने वजूद के साथ!
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं रश्मि प्रभा

इन्हें ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने वर्ष की श्रेष्ठ कवियित्री का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।
suman

वर्ष के श्रेष्ठ हिंदी प्रचारक ---वर्ष की श्रेष्ठ चित्रकार

वर्ष के श्रेष्ठ हिंदी प्रचारक ....


हिंदी का एक ऐसा साधक जिसकी मौन साधना आगे-आगे चलती है और सारे स्वर-व्यंजन के साथ समय पीछे-पीछे ....जो एक समर्पित लेखक, अनुसंधानकर्ता, एवं हिन्दी-सेवी हैं.जिन्होंने भौतिकी, देशीय औषधिशास्त्र, और ईसा के दर्शन शास्त्र में अलग अलग विश्व्वविद्यालयो से डाक्टरेट किया है और आजकल पुरातत्व के वैज्ञानिक पहलुओं पर अपने अगले डाक्टरेट के लिये गहन अनुसंधान कर रहे हैं. जो एक अमरीकी विश्वविद्यालय के मानद कुलाधिपति भी हैं....!

जिन्होंने ६ भाषाओं में ६० से अधिक ग्रन्थ एवं ६००० से अधिक लेख दर्शन, धर्म, भौतिकी, विज्ञान, इलेक्ट्रानिक्स, संगणक, मनोविज्ञान, भाषा, जर्नलिस्म, पुरावस्तुशास्त्र, एवं देशी चिकित्सा पद्धतियों पर लिखा है. जिनका लिखा "हिन्दु धर्म परिचय" मलयालम भाषा में एक प्रसिद्ध पाठ्य पुस्तक है !

जिन्होंने अपने जीवन में राजभाषा हिन्दी की साधना और सेवा करने का प्रण बचपन में ही कर लिया था. जिनका मानना है कि यदि हम भारतीय संगठित हो जायें तो सन २०२५ से पहले हिन्दुस्तान एक विश्व-शक्ति बन जायगा. फिर से एक सोने की चिडिया भी बन जायगा....!
जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं हिंदी चिट्ठाजगत के परम श्रद्धेय चिट्ठाकार
शास्त्री जे. सी. फिलिप
ब्लोगोत्सव की टीम ने हिंदी के इस परम अनुरागी को वर्ष के श्रेष्ठ हिंदी प्रचारक का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !

वर्ष की श्रेष्ठ चित्रकार















अल्पना माने रंगोली…'अल्पना' शब्द संस्कृत के - 'ओलंपेन' शब्द से निकला है, ओलंपेन का मतलब है - लेप करना।
मगर किसी का नाम हो अल्पना और वह अपने नाम के अनुरूप अपनी अभिरुचियों को विकसित करते हुए जीवित किवदंती बन जाए तो उसे क्या कहेंगे आप ? यही न कि उसने अपने नाम को चरितार्थ कर दिया .........
जिनकी कलाकृतियाँ लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकोर्ड में शुमार की गयी हैं और जिनके बनाए ग्रीटिंग्स की धाक है कला जगत में .....
जानते हैं कौन है वो ?
वो हैं श्रीमती अल्पना देशपांडे
ब्लोगोत्सव की टीम ने इन्हें वर्ष की श्रेष्ठ चित्रकार का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ....!

शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृत्तांत )-वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृत्तांत )

वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृत्तांत )

एक ऐसा चिट्ठाकार जो चिट्ठा चर्चा पर अपनी पैनी अभिव्यक्ति के लिए मशहूर है । भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय में एक जिम्मेदारी वालेपद पर पदासीन होने के बावजूद अपने साहित्यिक और सृजन कर्म से कोई समझौता न करना जिनके फितरत में शामिल है . जिनके कथ्य और शिल्प अनायास ही चमत्कृत करते हैं .......जानते हैं कौन है वो ?
वो हैं श्री मनोज कुमार
( नाम : मनोज कुमार, जन्म 1962, ग्राम – रेवाड़ी, ज़िला – समस्तीपुर, बिहार शिक्षा – स्नातकोत्तर जन्तुविज्ञान (एमएससी जूऑलजी) पत्र पत्रिकाओं में लेखन, कादम्बिनी, मिलाप, राजस्थान पत्रिका आदि में लेख, कहानी, आकाशवाणी हैदराबाद पर कविताएं प्रकाशित। पेशे से भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय, कार्यरत।)

ब्लोगोत्सव की टीम ने उन्हें वर्ष के श्रेष्ठ लेखक (यात्रा वृत्तांत ) का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है .

वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृत्तांत )

एक ऐसी लेखिका जो अपनी मातृ भाषा जितनी अच्छी जानती हैं , उतना ही उनका अँग्रेज़ी और रूसी भाषा पर समानाधिकार है . बचपन में अपने इंजीनियर पिता के साथ होली के साहित्यिक टाइटिल बनाने वाली आज खुद ही बहुत अच्छी कविताएँ और आलेख लिखती हैं . टी वी चेनल्स हेतु आलेखों के साथ साथ हिन्दी - अँग्रेज़ी - रूसी भाषा अनुवाद भी वे बखूबी करती हैं ॥

उनके अनुसार अँग्रेज़ी अथवा अन्य भाषाएँ जानना उतने गर्व की बात नही है , जितना अपनी मातृ भाषा हिंदी को महत्व देना गर्व की बात है । अपने मनोभाव कागज पर उतारना उन्हें अच्छा लगता है। जिसे ही वे अपना साहित्य मानती हैं ॥

ग़ज़ल सुनना, कविताएँ लिखना , पेंटिंग करना , ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करना आदि उनकी अभि रुचियाँ उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को उजागर करती हैं . मृदुभाषी और सकारात्मक दृष्टिकोण वाली यह लेखिका आज के दौर में "ब्लॉग्स" को अपनी अभिव्यक्ति का सबसे अच्छा माध्यम मानती हैं।

जानते हैं कौन है वह ?

वह हैं श्रीमतीशिखा वार्ष्णेयजिन्हें ब्लोगोत्सव की टीम ने वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (यात्रा वृत्तांत) का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ।

suman

बृहस्पतिवार, 15 जुलाई 2010

लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान : वर्ष के श्रेष्ठ लेखक-वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (संस्मरण )

वर्ष के श्रेष्ठ लेखक

एक ऐसा लेखक जिसे हिन्दी साहित्य में छिटपुट लेखन का २० वर्षों का अनुभव है । जो साहित्य के अलावा फीचर लेखन में भी सिद्धहस्त हैं। जो इलेक्ट्रॉनिक्स फ़ॉर यू समूह, दिल्ली की पत्रिकाओं आई.टी तथा लिनक्स फ़ॉर यू में पिछले आठ वर्षों से तकनीकी लेखन करते आ रहे हैं। आई।टी पत्रिका के तकनीकी लेखक पैनल तथा इंडलिनक्स हिन्दी टीम के सदस्य भी हैं।

इसके अतिरिक्त जिन्होंने हिन्दी दैनिक चेतना में २ वर्ष तक तकनीकी स्तम्भ में लेखन किया तथा संप्रति अभिव्यक्ति तथा प्रभासाक्षी में तकनीकी विषयों पर नियमित लिखते हैं। इंटरनेट पर रामचरित मानस को यूनीकोड में उपलब्ध कराने में भी जिनका सक्रिय सहयोग रहा।

चिट्ठाकारी की प्रवीणता और नियमितता जिनका परिचय हैं और लगभग हर प्रविष्टि के साथ एक गज़ल जिनका ट्रेडमार्क। जिनकी चुटीली उक्तियाँ पड़ कर लगता है कि उत्तर भारत के किसी शहर की हवा मन को छूकर निकल गयी, वह हवा जिसमें गज़ल की खुशबू, जमीनी हकीकत, सामजिक पीड़ाओं के बीच भी हँस सकने की हिम्मत और नींद से झझकोर देने वाली अपील शामिल है। सामयिक मुद्दो के साथ गजलों का मिश्रण जिनका अनूठा प्रयोग है।

जानते हैं कौन हैं वो ?

वो हैं हमारे रवि शंकर श्रीवास्तव यानी रवि रतलामी

ब्लोगोत्सव की टीम ने इन्हें वर्ष के श्रेष्ठ लेखक के रूप में इस वर्ष सम्मानित करने का निर्णय लिया है


वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (संस्मरण )
















एक ऐसी लेखिका जो पौराणिक साहित्यिक जमीन पर नयी साहित्यिक मूल्यों का निर्माण करती है , परंपरा और आधुनिकता के बीच से अपने आचरण को तय करने वाले सरोकारों का चुनाव करती हैं .....उनका मानना है कि परिस्थितियाँ अजीव तौर पर बिदंबनापूर्ण परिदृश्य सामने ला रही है साहित्य के क्षेत्र में इसलिए हमें नए सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना है .....जानते हैं कौन हैं वो ?
वो हैं कविवर पन्त की मानसपुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद
ब्लोगोत्सव की टीम ने इन्हें वर्ष की श्रेष्ठ लेखिका (संस्मरण ) का खिताब देते हुए इन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया है ....!

suman