शनिवार, 23 मार्च 2013

चुनाव का खर्चा कारपोरेट सेक्टर ही उठा रहे है : कामरेड अशोक मिश्रा

ब्रिटिश साम्राज्यवाद से अमरीकी साम्राज्यवाद के सफर में सरकारों का संचालन अपने मुनाफे के लिए कारपोरेट सेक्टर करने लगा है। सरकारे उसकी इच्छानुसार नही चलती है तो उन सरकारों को उन्हे साम्राज्यवाद नेस्तनाबूत कर देता है।
    यह विचार शहीद भगत सिंह के बलिदान दिवस के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय परिषद सदस्य कामरेड अशोक मिश्रा ने कहा कि आज सत्तारूढ दल और विपक्षी दल दोनो पार्टियों  को कारपोरेट सेक्टर ही संचालित कर रहा है। उनके चुनाव का खर्चा कारपोरेट सेक्टर ही उठा रहे है। जनेस्मा प्रवक्ता डा0 राजेश मल्ल ने कहा कि अमेरिकी साम्राज्यवाद नंगा हो चुका है और इराक से लेकर उत्तरी माली तक अपनी सरकारे अपने फौजो के दम पर बना रहा है।
    पार्टी के सहसचिव कामरेड रणधीर सिंह सुमन संगोष्ठी में बोलते हुए कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव की सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब उनका जन्म पडोसी के घर मे न होकर हमारे घर में जन्म ले। बेईमान भ्रष्ट अफसर दुश्मनों के घर में हो जिससे उनका आत्मसम्मान गिरे।
    पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि ब्रिटिश साम्राज्यवाद से तो मुक्ति पा ली गयी थी किन्तु अमरीकी साम्राज्यवाद से छुटकारा पाना बडा दुष्कर कार्य है क्योकि एन0जी0ओ0 के माध्यम से सेवा भाव का ड्रामा करते हुए अमरीकी साम्राज्यवाद का बढावा दे रहा है।
    पार्टी के सहसचिव डा कौसर हुसैन ने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि भगत सिंह के बम दर्शन को नवजवानों के बीच में ले जाया जाये जिससे नवजवान क्रान्तिकारी के रास्ते पर चल सके।
    गांधी भवन में आयोजित शहीद भगत सिंह की पुण्य तिथि पर कार्यक्रम का शुभारम्भ कामरेड अशोक मिश्रा ने भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव के चित्रों पर माल्र्यापण कर किया। संगोष्ठी को अनूप कल्याणी, श्री राम सुमन, बलराम सिंह, डा0 एस0एम0 हैदर, पवन वैश्य, आदि ने सम्बोधित किया।
    कार्यक्रम में विपतराम ,विनय दास, पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, नीरज वर्मा, निर्मल वर्मा, डा0 उमेश चन्द्र वर्मा, आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन विनय कुमार सिंह ने किया।

नीरज कुमार वर्मा

2 टिप्‍पणियां:

vijai Rajbali Mathur ने कहा…

डॉ गिरीश ने बताया कि गांधी जी ने 'बम की पूजा' शीर्षक पर्चा लिख कर भगत सिंह का मखौल उड़ाया था जिसका जवाब भगत सिंह ने 'बम का दर्शन' नामक पर्चा लिख कर दिया था। हम लोगों को भगत सिंह का साहित्य लेकर जनता के बीच मे जाना होगा। http://vijaimathur.blogspot.in/2013/03/blog-post_23.html

vijai Rajbali Mathur ने कहा…

गांधी जी ने एक कटुता पूर्ण लेख 'बम की पूजा' लिखा था.इसके जवाब में भगवती चरण वोहरा ने 'बम का दर्शन ' लेख लिखा.सत्यार्थ प्रकाश के अनुयायी भगत सिंह के लिए बम का सहारा लेना आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि उसके रचयिता स्वामी दयानंद अपनी युवावस्था -३२ वर्ष की आयु में १८५७ की क्रांति में सक्रिय भाग खुद ही ले चुके थे.दयानंद जी पर तथाकथित पौराणिक हिन्दुओं ने कई बार प्राण घातक हमले किये और उनके रसोइये जगन्नाथ के माध्यम से उनकी हत्या करा दी,उनके बाद आर्य समाज में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के हितैषी आर.एस.एस.की घुसपैठ बढ़ गयी थी.अतः भगत सिंह आदि युवाओं के लिए अग्र-गामी कदम उठाना अनिवार्य हो गया था.अतः 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन 'का गठन कर क्रांतिकारी गतिविधियाँ संचालित की गयीं. http://krantiswar.blogspot.in/2013/03/blog-post_23.html