मंगलवार, 31 मार्च 2026

अमित शाह की अज्ञानता शर्मनाक है - डी राजा

अमित शाह की अज्ञानता शर्मनाक है - डी राजा लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का बयान इतिहास को व्हाट्सएप फॉरवर्ड के स्तर तक गिरा देता है। यह दावा करना कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी रूसी कम्युनिस्ट पार्टी की एक "शाखा" थी, न केवल गलत है, बल्कि यह शर्मनाक अज्ञानता भी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का जन्म 1925 में कानपुर में भारत के अपने उपनिवेश-विरोधी आंदोलन से हुआ था; इसे उन मज़दूरों, किसानों और क्रांतिकारियों ने आकार दिया था जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ लड़ रहे थे। इसके औपचारिक गठन से पहले भी, कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों को "क्राउन (ब्रिटिश राजसत्ता) के खिलाफ युद्ध छेड़ने" के षड्यंत्र के मामलों में जेलों में डाला जा रहा था। ब्रिटिश औपनिवेशिक हलकों में कम्युनिज्म का खौफ इतना ज़्यादा था। क्या संघ ऐसा एक भी उदाहरण दिखा सकता है? भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अनगिनत मुक्ति आंदोलनों की तरह रूसी क्रांति से वैचारिक प्रेरणा ली, लेकिन इसका कार्यक्षेत्र और व्यवहार हमेशा भारतीय वास्तविकताओं में ही निहित रहा। यह कम्युनिस्ट विचारधारा ही थी जिसने भगत सिंह और सूर्य सेन जैसे शहीद और क्रांतिकारी, सोहन सिंह भकना जैसे उपनिवेश-विरोधी लड़ाके, एम. सिंगारवेलु जैसे मज़दूर आंदोलन के अग्रदूत, स्वामी सहजानंद सरस्वती जैसे किसान नेता और वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जैसे निडर देशभक्त पैदा किए।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को निशाना बनाने के अपने छिछले प्रयास में, अमित शाह ने सर्वोच्च बलिदानों और संघर्षों की इस पूरी विरासत का अपमान किया है। और संघ का क्या? इसकी वैचारिक और सांगठनिक जड़ें स्पष्ट रूप से विदेशी और चिंताजनक हैं। बी.एस. मुंजे जैसी हस्तियों ने बेनिटो मुसोलिनी के साथ संपर्क रखा, और एम.एस. गोलवलकर ने एडॉल्फ हिटलर की नीतियों की प्रशंसा की। इससे भी ज़्यादा चौंकाने वाली बात संघ के अपने पहले महासचिव, बालाजी हुद्दार का सफर है; वे हेडगेवार की आज्ञाकारिता और भारत को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अधीन रखने में उनकी मिलीभगत से इतने निराश हुए कि उन्होंने संघ छोड़ दिया और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गए। जहाँ एक ओर कम्युनिस्टों को औपनिवेशिक सत्ता का सामना करने के लिए जेल, प्रतिबंध और दमन झेलना पड़ा, वहीं दूसरी ओर संघ आज्ञाकारी बना रहा और उपनिवेश-विरोधी संघर्षों से दूर रहकर ब्रिटिश सत्ता की मिलीभगत में शामिल रहा। काला पानी की बैरकें कम्युनिस्ट क्रांतिकारियों से भरी हुई थीं, जबकि दक्षिणपंथी विचारधारा की हस्तियाँ ब्रिटिश पेंशन पर पल रही थीं। यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जो लोग आज "विदेशी संबंधों" की बात करते हैं, वे खुद वैश्विक सत्ता केंद्रों और कॉरपोरेट हितों के साथ जुड़े हुए हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी सार्वजनिक रूप से इज़रायल को "पितृभूमि" कहते हैं, और भारतीय जनता पार्टी डोनाल्ड ट्रम्प के "एपस्टीन वर्ग" की सेवा करती है, तो देशभक्ति पर उनके भाषण खोखले और बेमानी लगते हैं। ज़मीनी हकीकत कहीं ज़्यादा कड़वी है: आदिवासियों का विस्थापन, कॉरपोरेट को खुश करने के लिए हिंसा, और दक्षिणपंथी उग्रवाद का ऐसा माहौल जिसमें मॉब लिंचिंग और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हावी है—ये ही संघ भाजपा की राजनीति के असली नतीजे हैं। भारत में वामपंथ आज भी स्वाभाविक, लोकतांत्रिक और लोगों के संघर्षों से जुड़ा हुआ है। इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने से पहले, गृह मंत्री के लिए बेहतर होगा कि वे उसका अध्ययन करें। संसद तथ्यों की हकदार है, न कि दुष्प्रचार की।

गुरुवार, 26 मार्च 2026

मोदी नामा आ गया है पढे

मधु किश्वर ने ‘मोदीनामा’ लिखा था। अब इन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सनसनीखेज़ आरोप लगाए हैं। ऐसे आरोप लगाने के बावजूद क्या इन मोहतरमा पर कोई कार्रवाई होगी? यदि कोई शख्स प्रधानमंत्री मोदी पर अशोभनीय टिप्पणी कर देता है तो भाजपा शासित राज्यों की पुलिस उस शख्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया करती है। अब यहां प्रधानमंत्री के चरित्र पर ऐसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, क्या कोई कार्रावाई होगी? मुझे सुब्रमण्यम स्वामी और मधु किश्वर आदि की नरेंद्र मोदी जी से संबंधित निजता संबंधी ग़लीज़ टिप्पणियों में कोई रुचि नहीं है। इन दोनों पर भरोसा करके कीचड़ में लिथड़ना मेरे विवेक को गवारा नहीं है। देश में और दुनिया में बहुत कुछ ग़लत किया जा रहा है और हो रहा है। सवाल सिर्फ़ यह है कि मैं उसमें शामिल हो जाऊँ या नहीं? मैं बिना किसी मैटीरियल के कुछ स्त्रियों (जो सांसद और मंत्री हैं) को लांछित करने के अविश्वसनीय और मौक़ापरस्त लोगों के दावे के विस्तार का माध्यम नहीं बनना चाहता। एप्सटीन के गैंग पर नाबालिग बच्चों के अपहरण, बलात्कार और हिंसा का मामला है। दो बालिग़ लोगों की सहमति से बने संबंध का नहीं। एक क़ानूनन अपराध है और दूसरा नहीं। -शीतल पी सिंह (वरिष्ठ पत्रकार) ABP NEWS की एंकर रोमाना कह रही जो खुद तलवे के साथ मलाई भी चाट रही हैं। पता यह करना है, मलाई अलग से मिलती है या तलवे पर लगाकर। मधु किश्वर से सबूत मांग रही और कह रही है मलाई खाई हो तो मत बोलो लेकिन यही बात अगर राहुल गांधी के लिए कोई लिखता तो रोमाना सबूत मांगती? अंजना और रुबिका लियाकत पीछे छूट गई, आती ही होंगी महामानव के बचाव में। -ए के स्टालिन अमिताभ श्रीवास्तव- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कट्टर अंधभक्त रह चुकी मधु किश्वर ने उन पर बेहद संगीन और सनसनीख़ेज़ आरोप लगाये हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर अंग्रेज़ी में धड़ाधड़ पोस्ट करते हुए मधु किश्वर ने मोदी के बारे में महिलाओं को लेकर जो टिप्पणियां की हैं वो सीधे चरित्र हनन के दायरे में आती हैं। उन्होंने नरेंद्र मोदी के साथ-साथ अलग-अलग संदर्भ-प्रसंग में आनंदीबेन पटेल, हरदीप पुरी, स्मृति ईरानी( मधु किश्वर ने उन्हें 12वीं पास कहा है), अमित मालवीय (इनके लिए porn pedler विशेषण इस्तेमाल किया है) मानसी सोनी, प्रदीप शर्मा का भी ज़िक्र किया है। उन्होंने मानसी सोनी से जुड़े मामले की विवादास्पद सीडी देखने का दावा भी किया है। उनकी टिप्पणी में भीमटे-मीमटे जैसे शब्द भी आए हैं जो उनकी कट्टरपंथी घृणा, झल्लाहट और मानसिक असंतुलन की तरफ इशारा करते हैं। मधु किश्वर 2014 में नरेंद्र मोदी की कट्टर समर्थक के तौर पर अचानक राष्ट्रीय मीडिया में तेज़ी से उभरी थीं। उससे पहले दिल्ली-मुंबई के एक्टिविस्ट सर्किल में उनकी पहचान स्त्री मुक्ति के सवालों पर सक्रिय नारीवादी सामाजिक कार्यकर्ता और महिलाओं के मुद्दों से जुड़ी पत्रिका ‘मानुषी’ की संपादक के तौर पर थी। ‘मोदीनामा’ लिखने वाली कट्टर समर्थक से मोदी की कट्टर आलोचक बन जाने और सार्वजनिक तौर पर इतना ज़हर उगलने के पीछे मधु किश्वर की अपनी महत्वाकांक्षाओं पर पानी फिर जाना भी एक बड़ी वजह हो सकती है। ऐसी सोच और सत्ता का समर्थन करने वाली मधु किश्वर खुद को दूध का धुला साबित करने की कोशिश कर रही हैं,जबकि इससे वह खुद सवालों के घेरे में आ जाती हैं। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद एक दशक से ज़्यादा के समय के दौरान मधु किश्वर की छवि निहायत अगंभीर किस्म की, कट्टर , ज़हरीली सांप्रदायिक सोच वाली महिला की बनी है और उनकी साख शून्य के स्तर पर पहुंच चुकी है। मधु किश्वर ने अपनी टिप्पणी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जैसे आरोप लगाये हैं वैसे आरोप अगर विपक्ष के किसी नेता से जुड़े होते तो बीजेपी और उससे जुड़े संगठन, तमाम बुद्धिजीवी आसमान सिर पर उठाये होते। सारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सवाल यह भी मधु किश्वर पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई है? सुब्रमण्यम स्वामी भी लंबे समय से मोदी के बारे में अनाप-शनाप बातें कहते आ रहे हैं लेकिन उन पर भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कोई अन्य अगर इस तरह की बात कहीं लिख दे, कह दे तो उसको सीधे जेल में डाल दिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट भी जमानत नहीं देगा। मधु किश्वर जो कह रही हैं वह अगर सच है तो सबसे बड़ी अपराधी तो वह खुद हैं जो किसी लालच में ऐसी सत्ता का अंधा समर्थन करती रहीं। अगर अपने कहे को लेकर ईमानदार हैं तो प्रेस कान्फ्रेंस करें और सब सबूत सहित सामने रखें। यह भी कि अगर ज़रा से विरोध से अकाउंट बंद करवा दिए जाते हैं, लोगों को जेल में डाल दिया जाता है लेकिन मधु या स्वामी के खिलाफ कुछ नहीं होता तो यह अपने आप में सवाल खड़े करता है। -अशोक कुमार पांडेय (लेखक और पत्रकार) एपस्टीन फाइल का इंडियन वर्जन सामने आया है, सरेंडर जी की आत्मकथा लिखने वाली महिला ने अवतारी पुरुष को व्यभिचारी पुरुष बताया है। ये वो सच है, जिसे किताब में छुपा लिया गया था? हम क्या चाहते, अज़ादी! एपस्टीन गैंग से, आज़ादी!! -कन्हैया कुमार (कांग्रेस नेता) पहले मोदी जी के चरणों में लोट रही थी उचित स्थान नहीं मिला तो अब मोदी जी को गाली देते हुए लौट रही हैं! अवसर वादी लोग किसी के सगे नहीं होते वो सिर्फ़ अलफ़ायदा ग्रुप के सदस्य होते हैं ऐसे लोगो से कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिये! सांप्रदायिक व्यक्ति किसी भी तरफ़ दिखे पर वो समाज का दुश्मन होता है। क्यों मधु किश्वर जी? वैसे मोदी जी तो शुरू से ऐसे ही थे! -सुरेंद्र राजपूत देश के प्रधानमंत्री पर महिलाओं के शोषण के गंभीर आरोप लग रहे हैं। यह आरोप लगाने वाला कोई और नहीं बल्कि उनकी बायोग्राफी लिखने वाली एक महिला हैं। महिला के आरोपों के अनुसार, मोदी जी ने महिलाओं का शोषण किया और बदले में उन्हें महत्वपूर्ण पद दिए। मोदी जी ने कई महिलाओं की जासूसी भी कराई। अब सवाल उठ रहा है कि जब प्रधानमंत्री पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं, तो क्या इसकी निष्पक्ष जांच होगी? महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर सवाल उठे हैं और इनका जवाब पूरा देश माँग रहा है। -आम आदमी पार्टी जब तक फायदा मिल रहा था, तब तक गुणगान करते रहो , महानतम बताते रहो । जैसे ही लाभ बंद हुआ या आगे कोई उम्मीद नहीं दिखे तो उसी व्यक्ति का चरित्र हनन !! ये सिर्फ मौका-परस्ती है, नैतिक पतन की पराकाष्ठा है और भारतीय राजनीति में इसकी कोई जगह नहीं होनी चाहिए। खासकर जब बात देश के प्रधानमंत्री जैसे पद की हो । आप को नरेंद्र मोदी की नीतियाँ पसंद नहीं है तो आलोचना कीजिए। काम करने का तरीक़ा पसंद नहीं है तो सवाल उठाइए लेकिन चरित्र हनन ? और उसमें महिला सांसदों को घसीटना निहायत ग़लत और निंदनीय है । -विनोद कापड़ी (वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्मकार) सत्ता की ताकत के दंभ से दग्ध भाजपा ने खुद ही व्यक्तिगत और ओछे आरोपों की शुरुआत की। देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू पर भरी संसद में निशिकांत दुबे जैसों ने ओछे आरोप लगाए और पूरी सरकार लोकसभा अध्यक्ष सुनते रहे, तालियां बजाते रहे, हंसते रहे। मुझे द्रौपदी का चीरहरण याद आया जिसे देखकर कौरव अट्टहास कर रहे थे। अब फिर भाजपा की सुपरिचित, मधु किश्वर ने पीएम मोदी और अन्य लोगों पर तमाम तरह के आरोप लगाए हैं। यकीनन किसी भी आरोप पर वो चाहे किसी के खिलाफ हो यूंही विश्वास नहीं किया जा सकता। लेकिन सवाल तो खड़ा होगा ही कि ऐसा क्यों हो रहा है कि यह सब खबरें भाजपा के भीतर से ही आ रही हैं? मधु किश्वर ने अलग अलग वक्त में तमाम लोगों को लेकर तमाम तरह के दावे किए हैं लेकिन पब्लिक डिस्कोर्स में वह सब नहीं कहा का सकता। मैंने भी उनके लिखे के अनुदित हिस्से को हटा दिया है। लेकिन भाजपा को अपने भीतर झांकना होगा। कांग्रेस की तारीफ करनी होगी कि पार्टी के किसी भी नेता ने मधु किश्वर के खुलासे के बाद कोई सतही टिप्पणी नहीं की है। -आवेश तिवारी (कांग्रेस आई टी सेल) सबूत मांगने वाले प्रचारकों के लिए संजय कुमार सिंह- बहुत सारे संघी प्रचारक सबूत मांगते हैं। अभी भी ढूंढ़ रहे हैं। ऐसे लोगों से कहना है कि मुझे कोई जल्दी नहीं है। जो जैसे आ रहा है, सार्वजनिक हो रहा है। सोशल मीडिया से हटवाने के तनाशाही पूर्ण कानून और उसे लागू करने के बावजूद। मेरे पास कोई नया या अलग सबूत नहीं है। जो है उसे संजीव भट्ट ने पेश किया था। अभी तक जेल में हैं। इसलिए, और अब मुझे नहीं लगता कि किसी को कोई जल्दी है। सबूत जितनी देर से मिलेगा खुलासा उतना बढ़िया और ज्यादा होगा। संजीव भट्ट को सुन लिया गया होता तो भ्रष्टाचार पर अध्याय नहीं होता और भ्रष्टाचार पर कार्रवाई हो रही होती तो अध्याय को हटवाने की जरूरत ही नहीं होती। यही नहीं, संजीव भट्ट को सुना गया होता तो हरदीप पुरी नहीं होते, एपस्टीन नहीं होता। सुब्रमण्यम स्वामी तो बोलते रहे हैं किसका नहीं बिगड़ा। नेशनल हेरल्ड मामला चल ही रहा है या चलाया ही जा रही है। लेकिन उनके बोलने का असर हुआ कि मधु किश्वर ने अपना अनुभव लिखा। उन्हें मैं नहीं पढ़ता था लेकिन अब पढ़ा, अनुवाद पोस्ट किया तो सबसे तेजी से पढ़ा जा रहा है। लाइक शेयर हो रहा है। अभी और भी लोग हैं, सब को लिखना बोलना पड़ेगा। अगर आपके लिए इतना कम है तो लगे रहिए, इंतजार कीजिए अशोक खैरात के वीडियो देखिए। हेमंत बिसव सरमा की राजनीति समझिए। ममता बनर्जी का विरोध कीजिए। नीतिश कुमार की माला जपिए। शिन्दे को महान मानिए। रेवन्ना, भूषण और सेंगर को भूल जाइए। वैसे, किस चीज का सबूत (वीडियो) चाहते हैं आप? अगर वीडियो ही चाहिए तो कन्हैया का वीडियो कहां है? सजा क्यों नहीं हो रही है। और एआई के जमाने में वीडियो बनाना कितनी देर का काम है? कन्हैया को बिना सबूत बदनाम नहीं किया गया? उस समय तो वह किसी बड़े या सार्वजनिक पद पर भी नहीं था। फिर क्यों किया गया? समझना होगा कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य के अलावा सेक्स करते हुए वीडियो किसी मूर्ख का ही रिकार्ड हो या कोई शातिर ही रिकार्ड कर पाएगा। स्वेच्छा से ही कोई करे तो अलग बात है। पर उसकी जरूरत क्यों है? अगर शातिर की बात करूं तो चिन्मयानंद का उदाहरण है, उनका वीडियो सबने देखा था। लेकिन हुआ क्या – आरोप लगया गया कि वीडियो ब्लैकमेल करने के लिए बनाया गया था। अब एक शक्तिशाली व्यक्ति को ब्लैकमेल करने के लिए वीडियो बनाने वाला या वाली शातिर तो होगा ही पर वह अपने बचाव के लिए बनाएगा या वसूली के लिए? दोनों संभव है और समझना मुश्किल नहीं है। वसूली के लिए भी हो तो क्या नंगे होकर मालिश करवाना (और करने के लिए मजबूर करना) सामान्य है? मानसी सोनी के साथ गलत हुआ यह वीडियो होगा तभी मानेंगे आप? उसके साथ जो सब हुआ और वह अपनी बात कहने के लिए उपलब्ध नहीं है – क्या यह पर्याप्त नहीं है कि उसके साथ गलत हुआ। वैसे भी बलात्कार का मामला तो है ही नहीं। सहमति से या दबाव डालकर मजबूर करने का मामला है। सफलता का भी दावा नहीं है। मधु किश्वर ने यही लिखा है कि उन्हें भी शक था। वे दूर रहीं। और भी अनुभव है। अब शिक्षा मंत्री बनाने की बात हो तो आप कहिए कि मधु किश्वर और स्मृति ईरानी में कौन योग्य लगता है कौन बना और इसके बाद सबूत का क्या करेंगे? अगर सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध तथ्यों का यह विवरण, विश्लेषण या प्रस्तुति व्यर्थ है तो कुछ किया नहीं जा सकता है। आप नजरअंदाज करने के लिए स्वतंत्र हैं। पर सबूत की जरूरत किसलिए है। बलात्कार या सेक्स करने का तो आरोप ही नहीं है। बताया जा रहा है कि ऐसा हो सकता है। आप मत मानिए। सबूत मांग कर आप बता रहे हैं कि आप व्यक्ति विशेष को बदनामी से बचाना चाहते हैं। मेरा या किसी का उद्देश्य बदनाम करना नहीं है। मुझे तो जरूरत भी नहीं लगती है। सजा देने की मांग भी बेमतलब है। कोई नहीं कर रहा है। आपको लगता है कि ऐसा व्यक्ति आपका नेता है – ठीक है, कोई दिक्कत नहीं है – तो यही कहिए। सबूत मत मांगिए, सबूत मुद्दा नहीं है। जो काम गवाह करता है वह सबूत नहीं करता और संजीव भट्ट की गवाही का क्या हश्र हुआ हम जानते हैं। क्यों हुआ होगा अब समझ ना मुश्किल नहीं है। इसीलिए मैं कहता हूं संजीव भट्ट की बात मान ली गई होती तो यह सब नहीं होता। नुकसान भाजपा और आरएसएस का हुआ है तो देखना-समझना उन्हें था। हम-आप क्यों परेशान हों या लड़ें। अगर आपके पास सुप्रीम कोर्ट का अच्छा वकील नहीं है, केंद्र के नेताओं के साथ अच्छे संबंध नहीं हैं… तो उस लंबे ट्वीट के साथ किसी भी लेवल पर इंगेजमेंट मत करिए. नोटिस आएगा, तो सम्हालते नहीं बनेगा. -सिद्धांत मोहन (पत्रकार) यह ठीक नहीं मैडम! राजीव ध्यानी- आप तो देश की जानी मानी एकेडमिशियन, लेखक, संपादक और पत्रकार हैं. विद्वान और अति सम्मानित महिला हैं. आप 75 साल के बुज़ुर्ग नेता का इस तरह चरित्र हनन कैसे कर सकती हैं. आप तो जानती हैं कि पार्टी कार्यकर्ताओं, उद्योगपतियों, सरकारी अधिकारियों, जजों, मीडियाकर्मियों समेत लाखों लोग उन्हें सिर्फ एक बड़े नेता ही नहीं मानते बल्कि किसी देवपुरुष की तरह उन पर आस्था रखते हैं. तो फिर देश के लाखों लोगों की आस्था से खेलने का हक़ आपको किसने दिया मै’म? आरोप लगाने के बाद आप ज़्यादा से ज़्यादा यही तो कहेंगी न, कि मेरे पास तथ्य और प्रमाण हैं. तो क्या? तथ्य क्या आस्था से ऊपर रखे जा सकते हैं? वह जो सबसे बड़ा फ़ैसला आया था, वह तथ्य पर आधारित था या आस्था पर? आग से खेल लीजिए, लेकिन आस्था से न खेलिए मैडम! किसी सामान्य नेता पर आरोप होता, तो अलग बात थी. आप तो संत समान बुज़ुर्ग पर आरोप लगा रही हैं. वह भी बड़े जघन्य क़िस्म के. क्या उन्हें देख कर लगता है कि वे ऐसा कर सकते हैं? आपने कहा कि उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है. आप ख़ुद ही सोचिए, कि जिसे ब्लैकमेल किया जा रहा है उसे दोषी मानना चाहिए या ब्लैकमेल करने वाले को. आपने तो विक्टिम को ही अपराधी बता दिया. आपने भावना को आहत किया है मैडम. इसलिए अपराधी बुज़ुर्गवार नहीं, बल्कि आप हैं. भडास फार मीडिया से साभार

बुधवार, 25 मार्च 2026

शर्म तुम्हें तो आती होगी - मोहन भागवत

शर्मनाक मोहन भागवत तुम्हारी सरकार में दुर्घटना के आरोपी पूर्व मंत्री को पुलिस स्टेशन में जमीन पर बैठा रखा है। जब आपकी सरकार नहीं होगी तब थाने में बैठने के लिए तैयार रहना। शर्म तुम्हें भी आती होगी लखनऊ राजमार्ग पर मलाक हरहर के पास चंदापुर गांव स्थित कोल्ड स्टोरेज में सोमवार दोपहर हुए हादसे के मामले में स्टोरेज संचालक पूर्व मंत्री अंसार अहमद उर्फ पहलवान, उसके पुत्र मंजूर व भतीजे अलाउद्दीन को मंगलवार देर शाम पुलिस ने जेल भेज दिया।

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

रसोई गैस संकट : इस तरह क्यों थूकिये कि मुंह पर वापस आये?

रसोई गैस संकट : इस तरह क्यों थूकिये कि मुंह पर वापस आये? निर्मल रानी अमेरिका, इस्राईल व ईरान के बीच छिड़े युद्ध के बीच पूरा विश्व कच्चे तेल व गैस की आपूर्ति को लेकर चिंतित है। युद्ध छिड़ते ही भारत में भी इसका प्रभाव साफ नजर आने लगा। अमेरिका, इस्राईल व ईरान युद्ध के कारण ईरान के नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ हारमूज में शिपिंग रुक गई है। गौरतलब है कि भारत मध्य पूर्व से अपनी 60 से लेकर 90% तक एल पी जी गैस व कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से करता है। स्ट्रेट ऑफ़ हारमूज जल मार्ग बाधित होने के कारण ही सरकार ने घरेलू गैस उपयोगको प्राथमिकता देते हुये कामर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति लगभग बंद कर दी है। साथ ही घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये जबकि कमर्शियल में 115 रूपये तक की बढ़ोतरी की भी की गयी है। इस दौरान रसोई गैस के लिये जगह जगह लोगों की कतारें देखने को मिली। कहीं कहीं से तो ब्लैक मार्केटिंग की खबरें भी सुनाई दीं। लोगों में गैस की किल्लत की शंका से दहशत फैल गयी। इससे विशेषकर व्यवसायिक क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ क्योंकि लगभग 90% होटल-रेस्तरां कमर्शियल एल पी जी सिलेंडर पर निर्भर हैं। राष्ट्रीय रेस्टॉरेंट एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने इसे एक ऐसा संकट बताया जो 5.7 ट्रिलियन रुपये टर्नओवर और 80 लाख नौकरियों वाले वर्ग को खतरे में डाल रहा है। देश के अनेक होटल्स व रेस्तरां में मेन्यू में कटौती करते हुये रोटी, डोसा, पूरी, फ़ाई सामग्री, चाय-कॉफ़ी, हॉट ड्रिंक्स आदि हटा दिए गए। इसके बजाये केवल राइस-दाल, सैंडविच या कोल्ड ड्रिंक्स आदि ही परोसे जा रहे हैं। उदाहरण स्वरूप बेंगलुरु व चेन्नई सहित तमिलनाडु में हजारों छोटे रेस्त्रां पूरी तरह या कहीं कहीं आंशिक रूप से बंद हो गये। बेंगलुरु होटल एसोसिएशन के अनुसार इस संकट से औसतन 25-30 प्रतिशत का राजस्व घाटा हुआ है। सबसे ज्यादा मार भोपाल में पड़ी जहाँ 40 प्रतिशत व्यापार प्रभावित हुये। कई लोगों ने तो अपनी दुकानें भी बंद कर दीं। कुछ होटल व रेस्त्रां इंडक्शन या इलेट्रिक ओवन का प्रयोग करने लगे हैं। अचानक इंडक्शन की बढ़ती मांग के चलते कई जगहों से तो इंडक्शन व स्टोव के भी आउट ऑफ़ स्टॉक होने की खबरें आई हैं। इस संकट का सामना करने के लिये सरकार द्वारा रिफाइनरी उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ने का समाचार है। जबकि कुछ राज्यों में केरोसिन व कोयला आपूर्ति करने की अस्थायी अनुमति भी दी गयी है। यदि आगे भी यही स्थिति बानी रही तो रेस्टॉरेंट इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर बंदी और बेरोजगारी का खतरा है। संकट की इस घड़ी में देश के अनेक नेता संसद से सड़कों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2018 में विश्व जैव ईंधन दिवस के अक्सर पर बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में दिये गये उस 'दिव्य ज्ञान' को याद कर रहे हैं जिसमें उन्होंने एक ऐसे चायवाले की कहानी सुनाई थी जो नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाता था। इस कार्यक्रम में उन्होंने बायो ईंधन की संभावनाओं पर बात करते हुए एक चाय वाले की कहानी का जिक्र किया था जो गंदे नाले से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल करके चाय बनाता था। उन्होंने बताया था कि एक छोटे शहर में नाले के पास चाय का ठेला लगाने वाला कोई व्यक्ति था। उस नाले से दुर्गंध और गैस निकलती थी, तो उसने सोचा कि इस गैस का इस्तेमाल क्यों न करें। उसने एक बर्तन को उल्टा करके उसमें छेद किया, पाइप डाला, और नाले की गैस को पाइप के जरिए अपने चूल्हे तक पहुंचाया। फिर उसी गैस से चाय बनाने लगा। मोदी जी ने इसे "सिपल सी टेक्नोलॉजी" कहा और बायो ईंधन की क्षमता का उदाहरण दिया। बस मोदी के इसी बयान को देश के विपक्षी नेताओं व युवाओं द्वारा न केवल याद किया जा रहा है बल्कि देश में सैकड़ों जगहों से इसी फ़ार्मूले से चाय बनाने की नाकाम कोशिश करते हुये अनेक लोगों की वीडिओ भी वायरल हो रही हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने तो सुल्तानपुर इस संकट का सामना करने के लिये सरकार द्वारा रिफाइनरी उत्पादन 25 प्रतिशत तक बढ़ने का समाचार है। जबकि कुछ राज्यों में केरोसिन व कोयला आपूर्ति करने की अस्थायी अनुमति भी दी गयी है। यदि आगे भी यही स्थिति बानी रही तो रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर बंदी और बेरोजगारी का ख़तरा है। संकट की इस घड़ी में देश के अनेक नेता संसद से सड़कों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2018 में विश्व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में दिये गये उस 'दिव्य ज्ञान' को याद कर रहे हैं जिसमें उन्होंने एक ऐसे चायवाले की कहानी सुनाई थी जो नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाता था। इस कार्यक्रम में उन्होंने बायो ईंधन की संभावनाओं पर बात करते हुए एक चाय वाले की कहानी का जिक्र किया था जो गंदे नाले से निकलने वाली गैस का इस्तेमाल करके चाय बनाता था। उन्होंने बताया था कि -' एक छोटे शहर में नाले के पास चाय का ठेला लगाने वाला कोई व्यक्ति था। उस नाले से दुर्गंध और गैस निकलती थी, तो उसने सोचा कि इस गैस का इस्तेमाल क्यों न करें। LPG GAS SHORTAGE IN INDIA में बाकायदा नाली में पाइप डालकर गैस चूल्हा जलाने का प्रयास भी किया, लेकिन चूल्हा नहीं जला। उन्होंने कहा, "मोदी जी कहते हैं नाली की गैस से चाय बनाओ, लेकिन यह संकट मोदी सरकार ही लाई है।" कुछ लोगों ने व्यंग्य किया कि प्रधानमंत्री के 'ज्ञान' से प्रभावित व प्रेरित तमाम "लोग नाले की गैस से चाय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया मीम्स और रील्स में "अनपढ़ राजा" कहकर मोदी का मजाकउड़ाया गया, जहां नाली को गैस से चाय बनने का असफल प्रयास प्रदर्शित किया गया। मोदी के इसी 'दिव्य ज्ञान' के पुराने वीडियो शेयर व रीशेयर करते हुये उन पर व्यंग्य कसे गए। विपक्ष ने तो इस संकट को सरकार की असफल विदेश नीति और तैयारी की नाकामी बताया है। तृणमूल कांग्रेस सांसद व पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इनाले की गैस से चाय बनाने वाले पुराने बयान का व्यंग्यात्मक उल्लेख करते हुए सरकार पर तीखा तंज किया और गैस संकट पर सवाल उठाए। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अगर प्रधानमंत्री की इस लगटर गैसङ्ग वाली सोच को गंभीरता से लेकर उस पर शोध किया होता, तो आज देश में एलपीजी की ऐसी कमी और सिलेंडर के दामों में यह भारी बढ़ोतरी नहीं देखनी पड़ती। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि सरकार दावा करती है कि कोई बड़ा संकट नहीं है, तो फिर एलपीजी सिलेंडर के दाम क्यों बढ़ाए गए हैं और गरीब व मध्यम वर्ग पर इतना बोझ क्यों डाला जा रहा है। कई जगह तो पुलिस वालों को उन युवकों को रोकते हुये भी देखा गया जो नाले से गैस निकालने का प्रदर्शन करते हुये प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गये इस दिव्य ज्ञान की खिल्ली उड़ा रहे थे। सवाल यह है कि कोई साधारण व्यक्ति यदि इस तरह की बातें करे तो उसकी इतनी चर्चा भी न हो परन्तु जब देश के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति इस तरह का 'ज्ञान' बांटने लगे तो उसका मजाक उड़ाया जाना स्वभाविक है। इसके अलावा भी मोदी इसतरह की अनेक बातें कर चुके हैं जोकि तथ्यात्मक व वैज्ञानिक रूप से गलत साबित हुई हैं। बादल में रडार का काम न करने का उनका दावा भी ऐसा ही एक 'दिव्यज्ञान' था जिसका पूरी दुनिया ने ख़ासकर वैज्ञानिकों ने काफी मजाक उड़ाया था। ऐसे गैरतार्किक व अवैज्ञानिक तर्क2828 देने से पहले किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति की यह जरूर सोचना चाहिये कि 'इस तरह क्यों बुकिये कि मुंह पर वापस आये '?

नून_रोटी खाएंगे योगी जी को #जिताएंगे कहने वाले #एटा जिले के #पंडित_अंकित पांडे को भाजपाइयों ने जूतों से पीटा

#नून_रोटी खाएंगे योगी जी को #जिताएंगे कहने वाले #एटा जिले के #पंडित_अंकित पांडे को भाजपाइयों ने जूतों से पीटा और गोली मारकर घायल कर दिया और फिर इनके ऊपर ही #FIR दर्ज करवा दी// अब कल तक जो पंडित जी एटा जिले में #सपा_सरकार को बदनाम करने के लिए ये कह देते थे कि अहीरों की गुंडई चरम पर है लेकिन अब संपूर्ण पंडित #ब्राह्मण_समाज उस जाति का नाम नहीं ले पा रहा है जिसकी गुंडई का अंकित पांडे शिकार हो गए क्योंकि योगी आदित्यनाथ जी को आवाज दबाना बहुत बेहतर आता है// सपा सरकार में इतना तो था हर किसी को मुंह खोलने की आजादी थी // अब तो जूते खा कर भी गर्व नहीं बोल पा रहे हैं l,

सोमवार, 16 मार्च 2026

युवाओं के दम पर नया कम्युनिस्ट विकल्प होगा तैयार-डी राजा

युवाओं के दम पर नया कम्युनिस्ट विकल्प होगा तैयार-डी राजा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रही है. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद देश की दूसरी सबसे पुरानी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शताब्दी वर्ष के अवसर पर आज रांची में धूमधाम से समारोह आयोजित कर रही है. झारखंड राज्य परिषद की ओर से आयोजित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शताब्दी वर्ष समारोह में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस दौरान प्रदेश कार्यालय भवन के नवनिर्माण की आधारशिला भी रखी गई. समारोह में पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री शिवकुमार मुखर्जी, झारखंड प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक सहित अन्य वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे. राजधानी रांची के अटल वेंडर मार्केट के चौथे तले पर बने सभागार में यह शताब्दी वर्ष समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कन्हाईमल पहाड़िया ने की. 100 वर्ष का इतिहास जनता के हितों के लिए संघर्ष से भरा: डी. राजा राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने कहा कि पार्टी ने स्थापना काल से अब तक के 100 वर्षों के इतिहास में जनसरोकार के मुद्दों पर लगातार संघर्ष किया है. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी केवल चुनाव के लिए नहीं है, हम जनता की समस्याओं को लेकर जन संघर्ष के लिए हैं. डी. राजा ने झारखंड में जल, जंगल और जमीन की लड़ाई को अभी भी अधूरा बताया और कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी इसे पूरा करेगी. उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान कई साथियों को खोया है, फिर भी जनता के हित में जनआंदोलन नहीं छोड़ा गया. जन आंदोलन के माध्यम से जन विश्वास जीतकर झारखंड में एक मजबूत विकल्प बनने का प्रयास किया जाएगा. आरएसएस का आजादी की लड़ाई में कोई योगदान नहीं: डी. राजा समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में डी. राजा ने कहा कि पूरे देश में सीपीआई अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष धूमधाम से मना रही है. आरएसएस भी अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष मना रहा है, लेकिन देश की आजादी की लड़ाई में उसका कोई योगदान नहीं है. अगर आरएसएस का कोई योगदान है तो उसे सामने लाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमने पूर्ण स्वराज के नारे के साथ अंग्रेजों और फ्रांसीसियों को देश से भगाया. अब केंद्र की भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करना है. सीपीआई और वाम दलों को मजबूत करके ऐसा किया जाएगा. इसी रणनीति पर पार्टी आगे बढ़ रही है. देश का किसान संकट के दौर से गुजर रहा है: शिवकुमार मुखर्जी समारोह को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री और किसान नेता शिवकुमार मुखर्जी ने कहा कि आज देश के किसान गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे हैं. दुनिया में युद्ध के नाम पर हाहाकार मचा हुआ है, निर्दोष लोगों की हत्या हो रही है और पूंजी की लड़ाई चल रही है. उन्होंने झारखंड के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि यहां मजबूत कम्युनिस्ट पार्टी की जरूरत है. झारखंड के युवाओं के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी है. आने वाले दिनों में चुनौतियों को स्वीकार करते हुए पार्टी आगे बढ़ेगी. हम केवल चुनाव के लिए नहीं, बल्कि जनता के सवालों को लेकर जन संघर्ष के लिए हैं. झारखंड में सरकार के संरक्षण में हो रही है खनिज संपदा की लूट: महेंद्र पाठक झारखंड प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि राज्य की खनिज संपदाओं की लूट सरकार के संरक्षण में माफियाओं के माध्यम से हो रही है. चाहे केंद्र की सरकार हो या राज्य की, दोनों जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा में असफल रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार जबरन किसानों की जमीन लूट रही है, लेकिन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी लड़ेगी और जीतेगी. झारखंड में युवाओं को साथ लेकर एक नया और मजबूत वाम विकल्प तैयार किया जाएगा, जो आने वाले दिनों में जनता की आकांक्षाओं को लेकर जन संघर्ष को तेज करेगा. समारोह में मुख्य रूप से महासचिव डी. राजा, पूर्व मंत्री शिवकुमार मुखर्जी, प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक, सीपीआई राष्ट्रीय परिषद सदस्य पी.के. पांडे, कन्हाईमल पहाड़िया, महादेव भंते, जैनेंद्र तथागत, देवांशु सिंह, हिमांशु सिंहराम, जिला सचिव (रांची) अजय सिंह, सोनिया देवी, अर्जुन कुमार यादव, नीरज सिंह, चंदेश्वर सिंह, विकास कुमार वर्मा, संतोष कुमार रजक, अजय कुमार सिंह, धर्मवीर सिंह, अंबुज ठाकुर, अनिरुद्ध कुमार, गयानाथ पांडेय, गौरव रवानी, शंभू मोहाली, रुचिर कुमार तिवारी, मनोज ठाकुर, श्यामल चक्रवर्ती, स्वामीनारायण चक्रवर्ती, गणेश महतो, राजेंद्र यादव, नूनू चंद महतो, स्वयंवर पासवान, चुन्नू पांडे, अब्दुल्लाह अंसारी, इम्तियाज खान, अली अंसारी, कमालुद्दीन, मनोज महतो, चितरंजन महतो सहित राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से आए सीपीआई नेता शामिल हुए.

मंगलवार, 10 मार्च 2026

योगेन्द्र राणा की जूतों से पिटाई

ये है #ठाकुर योगेंद्र सिंह राणा कुछ दिन पहले इन्होंने #समाजवादी पार्टी की सांसद आदरणीय इकरा हसन जी को गाली गलौज एवं #अभद्र टिप्पणी की थी तब बहुत #हंगामा भी हुआ था उसके बाद पुलिस ने FIR भी की थी लेकिन ठाकुर साहब की #योगी जी से अच्छी पकड़ होने के कारण #पुलिस ने इनका कुछ नहीं कर पाया था तब से आए दिन ये अपनी #धौंस आम जनमानस को दिखाता रहता है आज ये #मुरादाबाद के एक चर्चित डॉक्टर लक्ष्मण सिंह से #भिड़ गए फिर क्या डाक्टर साहब ने एक के बाद एक कई जूता और थप्पड़ों की बरसात कर दी बेचारे योगेन्द्र राणा जान बचाकर #भागते हुए नजर आए योगेन्द्र राणा की मार का वीडियो सोशल #मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है देखते है अब आगे क्या होता है #india #appreciation #selflove #sermon #praiseandworship #holiday #churchservice #tribute #praise #appreciationpost

सोमवार, 9 मार्च 2026

हमारा वास्तविक दुश्मन पूंजीवाद है-राजेन्द्र यादव

बांदा। हमारा वास्तविक दुश्मन पूंजीवाद है । जो अपने उत्पादन की क्वॉन्टिटी कम करता जा रहा है मूल्य दिन दूना रात चौगुना बढा रहा हैं यह विचार व्यक्त करते हुए आल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेन्द्र यादव पूर्व विधायक ने कहा कि मौजूदा सरकार ने हमारी गाढी कमाई के पब्लिक सेक्टर के बिभागो को निजी हाथो मे सौप रहा है । जहां हमारे बच्चो से बारहः घंटे काम लेकर उनका खून निचोड़कर जीने भर का भोजन भर दिया जा रहा हैं। हमे हिन्दू मुस्लिम मे उलझा कर पूजीपतियों का हित साधा जा रहा हैं ।किसानो के युवा लडके जो सरकारी नौकरी के लिए दिनरात मसक्सत करते है उन्हे सरकारी नौकरियो से बंचित किया जा रहा हैं । मोदी सरकार पूरी तरह से अमेरिका के हाथो मे बिक चुकी हैं । यदि अमेरिका से ट्रेड डिल समझौता किया है । अमेरिका का खाद्यान्न हमारी धरती पर आया तो यहां का किसान पूरी तरह से टूट जायेगा । डा रामचन्द्र सरस ने कहा जैसै कर्मचारी अधिकारी जाति पाति से ऊपर उठकर अपनी मांगे के लिए एक जुट होते हैं उसी तरह किसानो को अपने हितो के लिए एक होना पडेगा । सभा को मदन भाई पटेल ,अवधेश पटेल, उमा सिंह भइया लाल पटेल ने सभा का सफल संचालन किया ।किसान पंचायत बरौली आजम ग्राम मे महेन्द्र सिंह पटेल की अध्यक्षता मे सम्पन्न हुई।

मंगलवार, 3 मार्च 2026

ईरान के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन - लखनऊ सांसद राजनाथ किसके साथ?

ईरान के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन - लखनऊ सांसद राजनाथ किसके साथ? ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमलों के खिलाफ दिल्ली में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी विरोध प्रदर्शन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दिल्ली में ईरान पर अमेरिकी साम्राज्यवादी और ज़ायोनी इजरायली हमलों की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन, एक संप्रभु राष्ट्र को निशाना बनाने और पश्चिम एशिया और उससे परे शांति को खतरे में डालने वाले इस खतरनाक तनाव की कड़ी आलोचना की गई। प्रदर्शन को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रीय सचिव अमरजीत कौर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दिल्ली राज्य परिषद के सचिव और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रोफेसर दिनेश वार्ष्णेय , सीपीआई (एम) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात, सीपीआई (एम) दिल्ली राज्य के सचिव अनुराग सक्सेना, सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, आरएसपी के सचिव आर.एस. डागर, एसयूसीआई के सचिव प्राण शर्मा और सीजीपीआई के बिरजू नाइक ने संबोधित किया। इनके अलावा सीपीआई (एमएल) न्यू डेमोक्रेसी और फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता भी उपस्थित थे। वक्ताओं ने ईरान के खिलाफ इस आक्रामकता के तहत अमेरिका-इजराइल गठबंधन द्वारा अयातुल्ला अली खामेनेई, उनके परिवार और अन्य ईरानी नेताओं की हत्याओं की कड़ी निंदा की। उन्होंने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन और संप्रभुता पर हमला बताते हुए चेतावनी दी कि ऐसी आक्रामकता वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा है। विरोध प्रदर्शन में केंद्र सरकार के रुख की भी आलोचना की गई और भारत से एकतरफा सैन्य आक्रामकता का दृढ़ता से विरोध करके अपनी स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा को कायम रखने का आह्वान किया गया। सीपीआई दिल्ली राज्य के कई नेता और एआईटीयूसी, एआईवाईएफ और एनएफआईडब्ल्यू सहित जन संगठनों के प्रतिनिधि भी एकजुटता दिखाने के लिए उपस्थित थे।
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