लो क सं घ र्ष !
लोकसंघर्ष पत्रिका
सोमवार, 9 फ़रवरी 2026
शर्मदार न्यायपालिका प्रधानमंत्री का क्षेत्र न्यायालय का स्थगन-अधिकारियों द्वारा मकानों का ध्वस्तीकरण
शर्मदार न्यायपालिका प्रधानमंत्री का क्षेत्र न्यायालय का स्थगन-अधिकारियों द्वारा मकानों का ध्वस्तीकरण
वाराणसी दाल मंडी में व्यापारी ने अपनी दुकान फूंक दी:खुद पर भी पेट्रोल छिड़का, बुलडोजर चलते देख लोग रोते-गिड़गिड़ाते रहे
वाराणसी की दाल मंडी में प्रशासन ने जर्जर 21 मकानों-दुकानों में से 18 को ढहा दिया। बुलडोजर और हथौड़े से मकानों-दुकानों को तोड़ा गया। इससे पहले एक व्यापारी ने खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। मकान के पहले फ्लोर पर खड़े होकर सुसाइड करने की चेतावनी देने लगा। यह देखकर अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। अधिकारी उसे समझाने लगे।
नाराज व्यापारी ने कहा- हमारा मकान जर्जर नहीं है। प्रशासन बेवकूफ नहीं बना सकता। अगर मकान गिराया तो हमें मुआवजा चाहिए। ये लोग जर्जर बताकर मुआवजा देने से बचना चाहते हैं। यह कहते हुए उसने दुकान में आग लगा दी। इसके बाद पुलिस ने मुश्किल से आग बुझाई।
कई अन्य लोगों ने भी बुलडोजर एक्शन का विरोध किया। वे प्रशासन के अधिकारियों से 10 दिन की मोहलत मांगते रहे। तमाम लोग रोते-बिलखते दिखे। इस दौरान हंगामा करने वाले 8 लोगों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस उन्हें खींचते हुए ले गई, कुछ लोगों की पिटाई भी की। दाल मंडी में सड़क चौड़ी करने के लिए जर्जर मकानों-दुकानों पर बुलडोजर चल रहा है। दाल मंडी में अब तक की यह एक दिन में सबसे बड़ी कार्रवाई है।
प्रधानमंत्री बनने के पहले अनवर इब्राहीम को 2 बार जेल हुई। आरोप अप्राकृतिक संबंध का था।
प्रधानमंत्री बनने के पहले अनवर इब्राहीम को 2 बार जेल हुई। आरोप अप्राकृतिक संबंध का था। मलयेशिया में यह अपराध है।
1998 में अपने ड्राइवर सहित अन्य पुरुषों के साथ संबंध बनाए। नौ वर्ष की सजा हुई। हालांकि 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिलीज कर दिया।
2008 में उनके पूर्व सहायक ने आरोप लगाया कि अनवर ने उनसे बलपूर्वक अप्राकृतिक संबंध बनाया। 2014 में उन्हें पाँच वर्ष की सजा हुई। मगर 2018 में नई सरकार बनने पर राजा ने उन्हें पूर्ण क्षमादान दिया और रिहा किया।
खैर।
दोस्ती बनी रहे। Reborn Manish
रविवार, 8 फ़रवरी 2026
संघी भाजपाई नेताओं के झूठ का पर्दाफाश लखनऊ में एक भी बांग्लादेशी व रोहंगडियां मुस्लिम नहीं मिला
संघी भाजपाई नेताओं के झूठ का पर्दाफाश
लखनऊ में एक भी बांग्लादेशी व रोहंगडियां मुस्लिम नहीं मिला
उत्तर प्रदेश समेत देश के अलग-अलग राज्यों में दक्षिणपंथी समूह लगातार अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों के घुसपैठ करने का दावा करते रहे हैं. दक्षिणपंथी के विरोध और दबाव की वजह से बांग्ला भाषी मुसलमानों को जबरन बांग्लादेश में पुशबैक कर दिया गया. देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी अवैध घुसपैठ के दावे किए जा रहे थे. इस मामले की जांच पड़ताल के लिए लगातार प्रशासन एक्टिव भी रहता था.
लखनऊ में कथित अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की तलाश को लेकर लंबे समय से चल रही सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब पुलिस की जांच ने अलग तस्वीर पेश की है. योगी सरकार के दौर में बार-बार उठे दावों और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाए जाने के आरोपों के बीच चली व्यापक सत्यापन मुहिम के बाद राजधानी पुलिस का कहना है कि शहर में एक भी अवैध बांग्लादेशी नागरिक की पहचान नहीं हो सकी है.
लखनऊ पुलिस ने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की जांच के लिए कई महीने तक बड़े पैमाने पर सत्यापन मुहिम चलाई. लखनऊ पुलिस ने स्वीकार किया कि राज्य की राजधानी में गैरकानूनी रूप से रह रहे किसी भी बांग्लादेशी नागरिक की पुष्टि नहीं हुई. यह नतीजा उन लगातार राजनीतिक दावों और आरोपों के बावजूद सामने आया है, जिनमें कहा जाता रहा कि शहर की झुग्गी बस्तियों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी मौजूद हैं.
पुलिस ने क्या कहा?
सीनियर अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग थाना क्षेत्रों में व्यापक जांच की गई. खास तौर पर झुग्गी बस्तियों और घनी आबादी वाले इलाकों को फोकस में रखा गया, जहां यह आशंका जताई जा रही थी कि कुछ लोग खुद को असम से आए प्रवासी बताकर रह रहे हैं. इस अभियान में घर-घर सत्यापन, दस्तावेजों की सख्त जांच और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय शामिल था. हालांकि, जांच के दौरान कहीं भी किसी अवैध बांग्लादेशी नागरिक की मौजूदगी की पुष्टि नहीं हो सकी.
'इंकलाब' ने लखनऊ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार के हवाले से बताया कि पुलिस को जांच के दौरान कोई भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या नहीं मिला. उन्होंने बताया कि ज्यादातर कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी असम के बारपेटा और कामरूप जिलों से जुड़े पाए गए.
बीजेपी नेताओं के दावों की खुली पोल
इस मामले को लेकर पहले पूर्व आईपीएस और बीजेपी के राज्यसभा सदस्य बृज लाल, मेयर सुषमा खर्कवाल और राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने नगर निगम से जुड़े कूड़ा उठाने वालों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या बताते हुए उनकी जांच की मांग की थी. कुछ नेताओं ने यह भी दावा किया था कि राजधानी में दो लाख से ज्यादा बांग्लादेशी रह रहे हैं.
सियासी दबाव के बाद राजधानी पुलिस ने सभी थाना प्रभारियों और एलआईयू टीम को शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थित झुग्गी बस्तियों की जांच का आदेश दिया था. इसी कड़ी में 18 नवंबर को मेयर सुषमा खर्कवाल ने गोमती नगर के जोन-4 स्थित विनीत खंडर में बने पोर्टेबल कंपैक्टर ट्रांसफर स्टेशन (PTS) का अचानक दौरा किया. वहां उन्होंने कथित तौर पर अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों या रोहिंग्याओं की पहचान के लिए सफाई कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच कराई. खास तौर पर असम से जुड़े कर्मचारियों के कागजात की पुष्टि की गई ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सफाई या कचरा प्रबंधन के काम में कोई बांग्लादेशी या रोहिंग्या तैनात न हो.
इसके बाद 4 दिसंबर को मेयर ने गड़ंबा थाना क्षेत्र के पास फूलबाग कॉलोनी और इंदर नगर में भी बांग्लादेश और म्यांमार से आए कथित अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए जमीनी जांच शुरू की. उन्होंने आरोप लगाया था कि समाजवादी पार्टी के एक पार्षद की शह पर इलाके में अवैध रूप से बांग्लादेश से आए लोगों को बसाया जा रहा है.
'नहीं मिला एक भी रोहिंग्या या बांग्लादेशी'
मेयर सुषमा खर्कवाल के सख्त रुख के बाद पुलिस सक्रिय हुई और थाना प्रभारियों को बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की तलाश के निर्देश दिए गए. इस काम में एलआईयू को भी लगाया गया है. पुलिस ने गोमती नगर, हजरतगंज, आशियाना, गड़ंबा, गोसाईंगंज, कृष्णा नगर और अन्य थाना क्षेत्रों की झुग्गी बस्तियों में जाकर रहने वाले लोगों के प्रमाणपत्र और दस्तावेजों की जांच की.
फिलहाल जांच के दौरान राजधानी पुलिस को किसी भी बांग्लादेशी या रोहिंग्या नागरिक की पहचान नहीं हुई है. जॉइंट कमिश्नर बबलू कुमार के अनुसार ज्यादातर झुग्गी बस्तियों की जांच पूरी कर ली गई है और वहां काम करने वाले अधिकतर लोग असम के बारपेटा, कामरूप और आसपास के इलाकों से जुड़े पाए गए हैं.
जब एपस्टिन छोटे बच्चों को मार कर तल कर मेहमानों को खिलाता था,
जब एपस्टिन छोटे बच्चों को मार कर तल कर मेहमानों को खिलाता था,
और उनका खून गिलास में डाल कर पिया जाता था,
तब बच्चों ने अल्लाह भगवान गॉड वाहेगुरु सब को याद किया,
लेकिन किसी ने बच्चों की मदद नहीं की,
अल्लाह ने कहा मैं तुम्हारा इम्तेहान ले रहा हूँ तुम्हें तुम्हारे सबर का मर्तबा आखिरत के रोज मिलेगा
और तुम पर जुल्म करने वालों का हिसाब हश्र के रोज़ किया जायेगा,
बच्चों ने पूछा की अखीरत कितने वक्त बाद आएगी?
तो पता चला कि करीब 60 अरब साल के बाद पृथ्वी का अंत होगा तब इन सब का हिसाब किया जाएगा और इन्हे सजा दी जाएगी |
फिर बच्चों ने हिंदुओं के भगवान से प्रार्थना की कि हमें बचा लो लेकिन उसने भी मदद नहीं की |
भगवान ने कहा तुमने पिछले जन्म में अपराध किए थे इसलिए मैं तुम्हें इस जन्म में सजा दे रहा हूं |
इसी तरह के जवाब गॉड और वाहेगुरु ने भी दे दिए |
लेकिन बच्चों की मदद किसी ने नहीं की |
-हिमांशु कुमार
शनिवार, 7 फ़रवरी 2026
भाजपा सरकार के अधिकारी है घूसखोर पंडत जी के निर्माता
भाजपा सरकार के अधिकारी है घूसखोर पंडत जी के निर्माता
फिल्म का नाम "घूसखोर पंडत"।
निर्माता हैं नीरज पांडे और अभिनेता है मनोज बाजपेयी। दोनों ब्राह्मण। मनोज बाजपेयी के भाई सुजीत कुमार बाजपेयी लेटरल एंट्री से बीजेपी सरकार में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर पहुंचे।
कहने का अर्थ यह कि मौजूदा समय में सरकार में शासक भी वही और हस्तक्षेप कर्ता भी वही, विरोधी भी वही, निर्माता भी वही तो फिर अपमानित, अनादर या बदनाम करने वाले लोग किसको समझा जाय?
शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026
एप्सटीन फाइल्स के बारे में कार्ल मार्क्स ने बहुत पहले से ही लिख दिया था-अरविंद राजस्वरुप
एप्सटीन फाइल्स के बारे में कार्ल मार्क्स ने बहुत पहले से ही लिख दिया था
" हमारे पूंजीपतियों को ,मजदूरों की बहू बेटियों को अपनी मर्जी के मुताबिक इस्तेमाल करने से संतोष नहीं होता , वेश्याओं से भी उनका मन नहीं भरता इसलिए एक दूसरे की बीवियों पर हाथ साफ करने में उन्हें विशेष आनंद प्राप्त होता है।"
यह 1848 में कार्ल मार्क्स ने "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में" लिखा था ।
(सर्वहारा और कम्युनिस्ट' के चैप्टर से)
Epstein Files में सामने आए भारतीय नाम:
नरेंद्र मोदी विश्व गुरु
दीपक चोपड़ा
वेलनेस गुरु, जिनका नाम फाइलों में पाया गया।
अनिल अंबानी
भारतीय व्यवसायी, जिनका नाम फाइलों में सबसे अधिक बार आने वालों में से एक है।
मीरा नायर
फिल्म निर्माता, जिनका नाम 2009 की एक पार्टी के संदर्भ में आया।
अनुराग कश्यप
प्रसिद्ध बॉलीवुड निर्देशक, जिनका नाम ईमेल संवाद में सामने आया।
नंदिता दास
अभिनेत्री और फिल्म निर्माता।
हरदीप सिंह पुरी
केंद्रीय मंत्री, जिनका नाम ईमेल संवाद में सामने आया।
छोटी-छोटी 12, 13 ,14 साल की लड़कियां, चेहरे से मासूमियत झांकती हुई , उम्र में अपने से तीन तीन ,चार चार गुना बड़े लोगों की गोद में बैठी है ,या ऐसी स्थिति में है जिसकी कल्पना भी कोई शरीफ व्यक्ति नहीं कर सकता।
जो लोग हैं, वह समाज के 'बड़े-बड़े' लोग हैं। बड़े-बड़े इनवर्टेड कोमाज में।
तस्वीर देखकर दिल खौलता है।
कैसे भारत सरकार में बैठे सरकार से जुड़े लोग उस दरिंदे एपिस्टिन से बात कर सकते थे? अथवा उस गलीज़ को मेल कर सकते थे अथवा उससे कोई दलाली बट्टा करवा सकते थे?
जरा उस दरिंदे के बारे में जाने।
जेफरी एपस्टीन (Jeffrey Epstein) को मुख्य रूप से 2008 में सजा हुई थी।
30 जून 2008 को फ्लोरिडा (Florida) की एक राज्य अदालत में उसे दो आरोपों में गिल्टी प्लीड किया: एक नाबालिग (18 साल से कम उम्र की लड़की) से वेश्यावृत्ति के लिए प्रलोभन (procuring a child for prostitution) और वेश्या से संबंध बनाने का (soliciting a prostitute)।
उस अपराधी को 18 महीने की सजा सुनाई गई, लेकिन एक विवादास्पद प्ली डील (plea deal) के तहत वह केवल लगभग 13 महीने जेल में रहा (जिसमें वर्क रिलीज़ की सुविधा भी शामिल थी)।
बाद में 2019 में उसे नए संघीय आरोपों (sex trafficking of minors) पर गिरफ्तार किया गया था, लेकिन ट्रायल से पहले ही 10 अगस्त 2019 को जेल में उसकी मौत हो गई (आत्महत्या मानी गई)।
हमारे भारतवासी कहते हैं वो भारत की पुरानी संस्कृति से जुड़े हुए हैं !
अब यहां तो मासूम बच्ची हैं। अधम नीचता की पराकाष्ठा है।
गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026
एपस्टीन फ़ाइलों में साहब और उनके ब्लैकमेलर के नाम है भारतीय जांच एजेंसियों में दम नहीं है कि जांच कर ले।
एपस्टीन फ़ाइलों में साहब और उनके ब्लैकमेलर के नाम है
भारतीय जांच एजेंसियों में दम नहीं है कि जांच कर ले।
40,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी का मामला, अनिल अंबानी के भारत छोड़ने पर लगी रोक
40,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी का मामला, अनिल अंबानी के भारत छोड़ने पर लगी रोक: सुप्रीम कोर्ट
बिज़नेस
40,000 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी का मामला, अनिल अंबानी के भारत छोड़ने पर लगी रोक: उच्चतम न्यायालय
सुप्रीम कोर्ट ने ED को विशेष जांच दल गठित करने का निर्देश दिया. मामले में देरी की आलोचना की. बैंक अधिकारियों और कंपनियों के प्रबंधन के बीच मिलीभगत और साजिश की निष्पक्ष जांच का आदेश दिया
संघी आडवानी पर उस की बहू श्रीमती गौरी आडवानी ने ही "शारीरिक शोषण" के इल्ज़ाम लगाए थे.
◆ संघी आडवानी पर उस की बहू श्रीमती गौरी आडवानी ने ही "शारीरिक शोषण" के इल्ज़ाम लगाए थे..गौरी आडवानी लाल कृष्ण आडवानी के बेटे जयंत आडवानी की पत्नी थी..
● 19 नवम्बर 2004, आडवानी की बहू गौरी आडवानी ने अटल और संघ चीफ सुदर्शन को ख़त लिख कर बताया
👉 आडवानी मेरा शारीरिक और मानसिक शोषण कर रहें है..एक ससुर ख़ुद की बहू का शारीरिक शोषण कर रहा था..
● गौरी आडवानी ने लिखा कि आप दोनो को ये बातें मा'लूम है..मैं इन बातों को शब्दों मे ब्यान नही कर सकती..इन बातो से हिंदू समाज शर्म से अपना सर झुका लेगा..
● गौरी आडवानी ने लिखा कि लाल कृष्ण आडवानी चरित्रहीन है..आर्थिक, नैतिक रूप से भ्रष्ट है ..
● अभी तक आडवानी की काली करतूतें जनता के सामने नहीं आयी है..लेकिन मैंने आप लोगो को सब कुछ बताया है ..
● अगर लाल कृष्ण आडवानी की करतूतें जनता के सामने आ गई तो लोगो का ससुर - बहू के पवित्र रिश्ते पर से विश्वास उठ जाएगा..BJP खत्म हो जायेगी ..
● मेरे ससुर होने के बावजूद लाल कृष्ण आडवानी ने रिश्ते की मर्यादा को नहीं समझा और मानसिक, शारीरिक रूप से मेरा शोषण करते रहे..
● गौरी आडवानी ने मांग की थी कि लाल कृष्ण आडवानी को बीजेपी से निकाल दिया जाए..
~ गौरी आडवानी लाल कृष्ण आडवानी की प्राईवेट सेक्रेटरी हुआ करती थी..बा'द में लाल कृष्ण आडवानी के बेटे जयंत से शादी हुई थी
~ गौरी आडवानी का कहना था कि आडवानी परिवार में शादी उनकी ज़िंदगी की सब से बड़ी ग़लती थी..
~ गौरी आडवानी ने कहा था कि लाल कृष्ण आडवानी एक धोका है..उस की ज़ाती ज़िन्दगी और जनता के बीच ईमेज भी एक झूट है..
~ लाल कृष्ण आडवानी ने गंदगी, अनैतिक और शर्मनाक तरीक़े से अपनी बहू के साथ व्यवहार किया..
~ लाल कृष्ण आडवानी ने बहू के आत्मसम्मान, नैतिक मूल्यों और मानव अधिकारों का उल्लंघन किया..
★ ये है लाल कृष्ण आडवानी का चरित्र जो उस की बहू ने प्रेस कांफ्रेंस कर ख़त लिख कर बताया था..
★ भक्तों के लिए यह शॉक हो सकता है..मगर मुझ जैसे लोगो ने इस बात को लगातार बताया है..सच्चाई आडवानी को बतानी है..
= कांग्रेस के माननीय और आदरणीय प्रवक्ताओं से गुज़ारिश है कि लाल कृष्ण आडवानी पर बहू गौरी आडवानी के इल्ज़ामात को पुरज़ोर तरीक़े से बोलिए..
= अटल की लिवइन पार्टनर श्रीमती राजकुमारी कौल पर भी बोलिए..अटल की 'अय्याशियों का कच्चा चिट्ठा खोलिए
= मोदी मानसी सोनी कांड पर भी खुल कर बोलने की अपील है..बीजेपी नेताओं के "सेक्स कांड का चित्रहार" बजा डालिए..
✋ मोदी हो कोई भी संघी हो, अब इन पर सीधा बोलने का वक़्त है..जब कांग्रेस के नेताओं पर ग़लत बोला जा रहा है तब हमें सच और सही बोलने में शर्म नहीं आनी चाहिए..बहुत हुआ सम्मान
तडीपार जब गृहमंत्री होगें ...बंगाल पुलिस ने दिल्ली में ली दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की तलाशी?
तडीपार जब गृहमंत्री होगें ...बंगाल पुलिस ने दिल्ली में ली दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की तलाशी?
बोनट खोलकर इंजन को स्कैन किया गया. फिर गाड़ी के दरवाजे खोलकर अंदर चेकिंग हुई. जैसे पुलिस संदेह होने पर संदिग्धों की गाड़ी चेक करती है उसी तरह बकायदा आगे से पीछे तक पूरी गाड़ी चेक की जाती है.
सिस्टम यानी ढांचा लोकतांत्रिक व्यवस्था को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सिस्टम समन्वय करता है, सबके अधिकार तय करता है. ये तय करता है कि व्यवस्था ठीक से चलती रहे. सोचिए अगर इस सिस्टम का अतिक्रमण हो, सिस्टम में शामिल लोग ही अपने अधिकार का उल्लंघन करें तो क्या होगा. निश्चित तौर पर अराजकता फैलेगी. आज हम अधिकारों के अतिक्रमण वाली ऐसी ही सोच का विश्लेषण करेंगे.
एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें गाड़ी के बोनट पर नंबर प्लेट के ऊपर लाल रंग से दिल्ली पुलिस लिखा है. यानी ये गाड़ी दिल्ली पुलिस की है. इसका बोनट खुला है. और कुछ लोग गाड़ी के आसपास मौजूद हैं.
क्यों चेक हुई दिल्ली पुलिस की गाड़ी
गाड़ी खराब नहीं है. उसकी चेकिंग हो रही है. इसलिए बोनट खोला गया है. पुलिस की गाड़ी की चेकिंग सुनकर आश्चर्य मत कीजिए. ये सही है कि दिल्ली पुलिस के काफिले में शामिल गाड़ियों की चेकिंग हो रही है. चेकिंग भी बिहार, यूपी या कर्नाटक में नहीं दिल्ली में ही हो रही है. और चेकिंग करनेवाले भी पुलिसकर्मी ही हैं. दिल्ली पुलिस के काफिले में शामिल गाड़ियों की चेकिंग कैसे हुई, ये आपको बताते हैं.
बोनट खोलकर इंजन को स्कैन किया गया. फिर गाड़ी के दरवाजे खोलकर अंदर चेकिंग हुई. जैसे पुलिस संदेह होने पर संदिग्धों की गाड़ी चेक करती है उसी तरह बकायदा आगे से पीछे तक पूरी गाड़ी चेक की जाती है.
जो लोग दिल्ली पुलिस के काफिले में शामिल गाड़ी को चेक कर रहे हैं, उन्हें दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं है. सोचिए ये कैसा गजब हो रहा है कि जिस दिल्ली पुलिस को दिल्ली में दूसरों की गाड़ी की सुरक्षा जांच करनी चाहिए वो अपनी गाड़ी की जांच करवा रही है. मतलब ये कैसी व्यवस्था है और ऐसा क्यों हुआ अब इसे समझि
बंगाल के पुलिस अफसरों ने की चेक
वीडियो में जो लोग दिल्ली पुलिस की गाड़ी की चेकिंग कर रहे हैं वो बंगाल पुलिस के अधिकारी हैं. जहां दिल्ली पुलिस की गाड़ी की जांच हो रही है वो दिल्ली का बंग भवन है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली दौरे पर हैं. प्रोटोकॉल के मुताबिक दिल्ली पुलिस की टीम ममता बनर्जी को सुरक्षा देने के लिए बंग भवन पहुंची थी.
लेकिन यहां दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की तलाशी हुई. ये भारत के इतिहास में पहली बार हुआ जब दिल्ली की जमीन पर, दिल्ली पुलिस के क्षेत्राधिकार में, दूसरे प्रदेश की पुलिस ने दिल्ली पुलिस की गाड़ियों की जांच की. ये अविश्वास है या राजनीति- इसपर चर्चा करेंगे. लेकिन पहले समझते हैं कि दिल्ली पुलिस किस प्रोटोकॉल के तहत बंग भवन पहुंची थी.
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
मोदी सरकार की विफलता का आईना है बांग्लादेश का रद्द किया भारतीय आर्थिक जोन प्रोजेक्ट
मोदी सरकार की विफलता का आईना है बांग्लादेश का रद्द किया भारतीय आर्थिक जोन प्रोजेक्ट
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार ने मिलिट्री और डिफेंस इंडस्ट्री में क्षमता बढ़ाने के लिए चटोग्राम के मीरशराई में कैंसिल किए गए इंडियन इकोनॉमिक जोन की प्रस्तावित जगह पर एक डिफेंस इकोनॉमिक जोन बनाएगी। यह फैसला मोहम्मद यूनुस की अध्यक्षता में आयोजित बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन अथॉरिटी (BEZA) के गवर्निंग बोर्ड की मीटिंग में लिया गया।
ढाका: बांग्लादेश ने चटगांव के मिरसराय इलाके में प्रस्तावित इंडियन इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट को किया रद्द कर दिया है। यूनुस सरकार ने इसके बजाय उसी जमीन पर एक डेडिकेटेड डिफेंस इंडस्ट्रियल जोन बनाने का ऑप्शन चुना है। यह ऐलान दो दिन पहले बांग्लादेश इकोनॉमिक जोन अथॉरिटी (BEZA) और बांग्लादेश इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट अथॉरिटी (BIDA) के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चौधरी आशिक महमूद बिन हारून ने हाल ही में चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस की अध्यक्षता में हुई एक हाई-लेवल गवर्निंग बोर्ड मीटिंग के बाद किया। यूनुस सरकार ने यह फैसला नई दिल्ली में अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के सार्वजनिक भाषण के बाद किया है। यूनुस सरकार के इस फैसले से भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव और ज्यादा बढ़ने की आशंका है।
इंडियन इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट क्या था
रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश में 2015 में मिरसराय इलाके में इंडियन इकोनॉमिक जोन प्रोजेक्ट को लेकर एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को साइन किया गया था। इसके अंतर्गत बांग्लादेश के नेशनल स्पेशल इकोनॉमिक जोन फ्रेमवर्क के अंदर मिरसराय में सैकड़ों एकड़ जमीन और बागेरहाट के मोंगला में एक और साइट को विकसित करना था। इसके लिए भारत ने बांग्लादेश को रियायती दरों पर लाइन ऑफ क्रेडिट भी दिया था।
बांग्लादेश ने क्या कारण बताया
इस प्रोजेक्ट का मकसद भारत और बांग्लादेश में इंडस्ट्रियल कोलैबोरेशन और इकोनॉमिक इंटीग्रेशन को बढ़ावा देना था। यूनुस सरकार का दावा है कि बांग्लादेश की तरफ से इंटरनेशनल टेंडर की इजाज़त देने समेत प्रोग्रेस के लिए बार-बार रिक्वेस्ट करने के बावजूद, कोई खास तरक्की नहीं हुई। बांग्लादेशी अधिकारियों का दावा है कि इस प्रोजेक्ट में दिए गए फंड का सिर्फ लगभग एक परसेंट ही इस्तेमाल हुआ। भारतीय कॉन्ट्रैक्टर ने बहुत कम दिलचस्पी दिखाई, जिससे प्रोजेक्ट को 2025 के बीच तक G2G फ्रेमवर्क से डीलिस्ट कर दिया गया।
अब डिफेंस इंडस्ट्रियल पार्क बनाएगा बांग्लादेश
BEZA की चौथी गवर्निंग बोर्ड मीटिंग में लिए गए एक पॉलिसी फैसले में, मिरसराय में पहले से दी गई खाली ज़मीन में से लगभग 850 एकड़ को अब मिलिट्री इकोनॉमिक ज़ोन या डिफेंस इंडस्ट्रियल पार्क के लिए तय किया गया है। इस पहल का मकसद बांग्लादेश की घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को बढ़ाना है, जिसमें मिलिट्री इक्विपमेंट, कंपोनेंट और उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी बनाने पर फोकस किया जाएगा।
डिफेंस इकोनॉमिक जोन में कौन करेगा निवेश
डिफेंस इकोनॉमिक जोन में प्रोडक्ट मैन्युफैक्चरिंग और संभावित इन्वेस्टर्स के बारे में सवालों के जवाब में, आशिक चौधरी ने कहा कि बांग्लादेश के साथ दोस्ताना संबंध रखने वाले कई देशों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि इस समय यह बताना संभव नहीं है कि कौन से मिलिट्री उपकरण बनाए जाएंगे, क्योंकि यह डिमांड के आधार पर तय किया जाएगा। BEZA गवर्निंग बोर्ड की मीटिंग में कई अन्य मुद्दों को भी पॉलिसी मंज़ूरी दी गई। मुख्य फैसलों में से एक फ्री ट्रेड जोन स्थापित करना था।
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