लो क सं घ र्ष !
लोकसंघर्ष पत्रिका
रविवार, 1 फ़रवरी 2026
स्वाहा हुए 8 लाख करोड़-सोना चांदी डांवाडोल
स्वाहा हुए 8 लाख करोड़... अब आगे क्या
बजट के दौरान शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव दिखाई दिया. सेंसेक्स इंट्राडे के दौरान 2400 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में 750 अंकों तक की गिरावट आई थी.
शेयर बाजार में रविवार, बजट के दिन शेयर बाजार दिनभर हिचकोले खाता रहा. इंट्राडे के दौरान बजट में सिर्फ हुए एक ऐलान के कारण सेंसेक्स करीब 24000 अंक टूटकर 80,500 के नीचे आ गया. वहीं निफ्टी50 750 अंक गिर गया और 25,500 के नीचे आ गया था.
सोना ₹13000 और चांदी ₹26000 टूटी।
शनिवार, 31 जनवरी 2026
49000 करोड़ का एक प्रतिशत लेकर सम्पूर्ण कर्ज माफ
◆ कॉमेडी सुनिए..ख़ूब मज़ा आएगा
~ पोस्टर में लेफ्ट में पुनीत गर्ग है
~ चोर अनिल अंबानी का "हाईएस्ट पेड" गुर्गा
~ इसे Rcom के 40,000 करोड़ के फ्रॉड में गिरिफ़्तार किया गया है😆
👉 जब कि Rcom का 49,000 करोड़ का क़र्ज़ 455 करोड़ में ख़त्म किया गया था..1% ले कर क़र्ज़ मा'फ़ी हुई थी
👉 और मैंने क़र्ज़ ख़त्म होने के 3 महीने पहले लिखा था कि 1000 करोड़ के अंदर अंदर इस क़र्ज़ को ख़त्म किए जाने की अफ़वाह थी..
~ कहा जा रहा है कि पुनीत गर्ग इस पूरी चोरी का मास्टरमाइंड है..अबे हूतिया समझ रखा है?
~ अनिल अंबानी इस पूरी चोरी का मास्टरमाइंड क्यों नहीं है? मालिक तो अनिल अंबानी था
◆ इस पुनीत गर्ग को स्वर्गीय अमर सिंह का क़रीबी भी बताया जाता था..बेशक पुनीत गर्ग चोरी में शामिल रहा होगा..मगर मास्टरमाइंड नहीं हो सकता है..
◆ पुनीत गर्ग को बमुश्किल 100 करोड़ मिले होंगे..100 करोड़ भी बहुत ज़्यादा होते हैं..मगर अनिल दिलदार इंसान था तो 100 करोड़ लिखा है..
◆ Rcom की 49,000 करोड़ की चोरी में कौन कौन शामिल थे यह पूरी दुनिया जानती है..महामानव डायरेक्ट हिस्सादार था
~ साला देश का 49,000 करोड़ खा गए
~ चोर अनिल दिवालिया बन गया
~ Rcom बिक गई, कबाड़ हो गई
~ और एक मा'मूली प्यादे को अरेस्ट किया?
~ मुमकिन है कि पुनीत गर्ग से ख़तरा हो👈
👉 एक बाप की औलाद हो तो आर्थिक आतंकी अनिल अंबानी को कमर में रस्सी डाल कर मुंबई की सड़कों पर पैदल चलाते हुए जेल ले जाओ..सारा खेल तो अनिल का है..
👉 Rcom कांड में मुकेश अंबानी की भी जांच होना ज़रूरी है..यह बात मैं लगातार लिखता रहा हूं..अगर मुकेश सेठ ईमानदार साबित हुआ तो क्लीन चिट दे देना..
◆ इतने सालों बा'द Rcom में कार्रवाई का मतलब है कि "Rcom की लाश" अब तक पूरी तरह से जली नहीं है..और किसी के हाथ कुछ लगा है जिस से पूरा गैंग ख़ौफ़ज़दा है
✋ अनिल अंबानी पहला शख़्श था जिस ने "वाइब्रेंट गुजरात" में मोदी को भारत का PM एलान किया था..मेरे पास अनिल का वो VDO भी है..मगर मैं उस VDO को पोस्ट नहीं करता क्योंकि फेसबुक पर अनिल "ब्लैकलिस्ट" है..मेरी ID ब्लॉक हो जाएगी
👉 पूरे 12 साल चोरी/क़त्ल की प्लानिंग, चोरी/क़त्ल करना और चोरी/क़त्ल के सुबूत मिटाने में निकाल दिए..पुनीत गर्ग की ज़िंदगी की हिफ़ाज़त की दु'आ करता हूं..
धंधा लो - चंदा दो गैंग का राज है
◆ क्या आप यक़ीन करेंगे कि 9000 करोड़ का मालिक IT रेड के ख़ौफ़ से ख़ुद को गोली मार कर ख़ुदकुशी कर सकता है? यक़ीन करना नामुमकिन है
◆ सी जे रॉय साहब, रियल एस्टेट कंपनी "कॉन्फिडेंट ग्रुप" के मालिक, ने IT रेड के दौरान ख़ुद को गोली मार ली और दुनिया को अलविदा' कह दिया..
◆ वारदात को सिलसिलेवार तरीक़े से समझिए
~ दोपहर 12 बजे IT की टीम पहुंचती है
~ दोपहर 2 बजे सी जे रॉय दफ़्तर पहुंचे
~ 2.30 पर IT अफ़सर ने काग़ज़ दिए
~ रॉय साहब से काग़ज़ पर दस्तख़त करने कहा
~ 3 बजे रॉय साहब प्राइवेट केबिन में गए
~ 3.10 पर ख़ुद को गोली मार ली
~ 3.30 पर हॉस्पिटल ने उन्हें मृत बता दिया
◆ ये कोई मज़ाक़ चल रहा है कि एक इतना बड़ा उद्योगपति मामूली IT रेड से ख़ुद की ज़िंदगी ख़त्म कर ले? ऐसी IT रेड बड़े उद्योगपतियों का रोज़ का काम होता है
◆ IT वाले आए थे या IT की आड़ में कोई और ही आया था? क्या रॉय साहब का क़त्ल करने की कोई साज़िश थी?
◆ IT केंद्र सरकार की है..वित्तमंत्री सीतारमण का डिपार्टमेंट है..और सीतारमण मोदी के मातहत काम करती है..सीतारमण को जवाब देना है..
◆ IT रेड के ज़रि'ए भारत में क्या क्या किया गया है इस बात से पूरा भारत वाक़िफ़ है..
👉 कर्नाटक में रॉय साहब से वुसूली और राज़ी ना होने पर उन का क़त्ल करने की अफ़वाह चल रही है..और सच्चाई शायद ही कभी सामने आएगी
👉 अगर आप को याद हो तो "कैफ़े कॉफ़ी" के मालिक का भी मशकूक/संदेहजनक हालात में क़त्ल हुआ था..आज तक कोई फ़ैसला नहीं हुआ है..
✋ इस वक़्त भारत में इस वक़्त "चंदा दो, धंधा लो" गैंग काम कर रहा है..अगर किसी ने चंदा नहीं दिया तो उस की जान लेने में कोई हिचक नहीं है..
👉 जब राजा ही क़ातिल हो तब उस के लोग भी शार्प शूटर ही होंगे..
विदेश राज मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज करने का आदेश
⚖️ गोंडा MP/MLA कोर्ट से विदेश राज्यमंत्री को झटका
निगरानी वाद व स्थगन प्रार्थना पत्र खारिज, लगातार अनुपस्थिति बनी वजह
गोंडा की एमपी/एमएलए कोर्ट ने विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया के लिए दायर निगरानी वाद और स्थगन प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। यह आदेश अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे) राजेश कुमार तृतीय की अदालत ने पारित किया। कोर्ट ने यह फैसला निगरानीकर्ता पक्ष की लगातार अनुपस्थिति को आधार बनाकर लिया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निगरानीकर्ता (मंत्री पक्ष) की ओर से बार-बार कोई उपस्थित नहीं हो रहा था, जबकि विपक्षी अजय सिंह लगातार न्यायालय में उपस्थित रहे। कई बार पुकार लगाने के बावजूद निगरानीकर्ता पक्ष की ओर से न तो कोई अधिवक्ता उपस्थित हुआ और न ही कोई ठोस कारण प्रस्तुत किया गया।
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🧾 स्थगन पर जताई गई आपत्ति
विपक्षी पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि निगरानीकर्ता पक्ष बार-बार स्थगन प्रार्थना पत्र देकर सुनवाई से बचने का प्रयास कर रहा है और मामले को आगे नहीं बढ़ने देना चाहता।
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📌 क्या है पूरा मामला
बीते 11 अगस्त को गोंडा एमपी/एमएलए कोर्ट ने मनकापुर थाना क्षेत्र के भिठौरा गांव निवासी अजय सिंह के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए मनकापुर कोतवाली को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश में विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया, उनके निजी सचिव राजेश सिंह, पिंकू, सहदेव यादव और कांति सिंह के नाम शामिल थे।
आरोप है कि इन लोगों ने एक महिला की जमीन को धोखाधड़ी से किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया। जब पीड़िता मनीषा ने इस संबंध में शिकायत की, तो कथित रूप से सुलह का दबाव बनाया गया और बाद में झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई।
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🔍 निगरानी वाद हुआ खारिज
एमपी/एमएलए कोर्ट के एफआईआर दर्ज करने के आदेश को चुनौती देते हुए विदेश राज्यमंत्री की ओर से उच्च अदालत में निगरानी वाद दायर किया गया था, जिसे बाद में एमपी/एमएलए कोर्ट के एडीजे राजेश कुमार तृतीय की अदालत में स्थानांतरित किया गया। यहां सुनवाई के दौरान मंत्री पक्ष की लगातार गैरहाजिरी के चलते अदालत ने निगरानी वाद को खारिज कर दिया।
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🗣️ विपक्षी अजय सिंह का बयान
निगरानी वाद खारिज होने के बाद विपक्षी अजय सिंह ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2012 में मनकापुर क्षेत्र में जमीन खरीदी थी, जिसे कथित रूप से योजनाबद्ध तरीके से हड़पने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने पहले ही भारतीय न्याय संहिता की धारा 173(4) के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था और अब वे चाहते हैं कि पुलिस निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करे।
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📍 आगे की स्थिति
निगरानी वाद खारिज होने के बाद अब निचली अदालत के एफआईआर दर्ज करने के आदेश के अमल का रास्ता साफ माना जा रहा है।
पुलिस एनकाउंटर प्रमोशन पाने के लिए कर रही है - उच्च न्यायालय
यूपी पुलिस के ‘हाफ एनकाउंटर’ तरीके पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा- पुलिस अधिकारी सिर्फ तारीफ, समय से पहले प्रमोशन और सोशल मीडिया पर वाहवाही के लिए अनावश्यक रूप से गोली चला रहे हैं।
हाईकोर्ट ने 6 पॉइंट पर गाइडलाइंस जारी की है। जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की बेंच ने साफ चेतावनी दी- अगर पुलिस एनकाउंटर मामलों में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन नहीं हुआ तो जिले के SP, SSP और पुलिस कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट की अवमानना के दोषी माने जाएंगे।
हाईकोर्ट ने कहा-आरोपी को सज़ा देने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां कानून संविधान के अनुसार चलता है, न कि व्यक्तिगत सोच के आधार पर।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कई मामलों में पुलिस अधिकारी जानबूझकर आरोपी के घुटने के नीचे पैर में गोली मारते हैं, ताकि मामला ‘हाफ एनकाउंटर’ कहलाए और वे बहादुरी का श्रेय ले सकें। कानून की नजर में यह तरीका पूरी तरह अस्वीकार्य है।
यह सख्त आदेश शुक्रवार को कोर्ट ने एक आरोपी की जमानत याचिका मंजूर करते हुए दिया। आरोपी को पुलिस एनकाउंटर में गंभीर चोटें आई थीं। कोर्ट ने पाया कि एनकाउंटर में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, जिससे हथियार इस्तेमाल करने की जरूरत और उसकी अनुपातिकता पर सवाल खड़े होते हैं।
रिश्वतखोरी में गिरफ्तार पुलिस निरीक्षक जंगली सुवर की तरह चिल्ला रहे हैं। जब हाफ एंकाऊटर होता तो क्या होता।
पुलिस न्याय पालिका पर दबाव डाल कर मनचाहे आदेश पाप्त कर रही है - उच्च न्यायालय
पुलिस न्याय पालिका पर दबाव डाल कर मनचाहे आदेश पाप्त कर रही है - उच्च न्यायालय
उच्च न्यायालय की चिंता बिल्कुल यथार्थ है और व्यवहार में पुलिस न्यायिक अधिकारियों से मन चाहे आदेश प्राप्त कर लेती है
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की पुलिस व्यवस्था को लेकर बेहद सख्त और चौंकाने वाली टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में पुलिस अधिकारी नियमित रूप से जजों पर, खासकर चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) पर, मनचाहे आदेश दिलवाने के लिए दबाव बना रहे हैं और यह स्थिति उत्तर प्रदेश को पुलिस स्टेट की ओर धकेल रही है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने राज्य सरकार के वकील से कहा कि कोर्ट उत्तर प्रदेश को पुलिस स्टेट बनने से रोकेगा। यह टिप्पणी उन्होंने राजीव कृष्णा और अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद से बातचीत के दौरान की।
कोर्ट ने डीजीपी और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का निर्देश दिया था। उनसे यह बताने को कहा गया था कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आरोपियों के पैरों में गोली मारने यानी तथाकथित ‘एनकाउंटर कल्चर’ पर रोक लगाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह पाया कि खासकर सेवा में नए पुलिस अधिकारी, जिला अदालतों में न्यायिक अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि लगभग हर जिले में कानून और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का खुला उल्लंघन हो रहा है। जस्टिस देशवाल ने टिप्पणी की कि उन्हें ऐसा एक भी मामला नहीं मिला, जहां कानून या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सही ढंग से पालन किया गया हो।
कोर्ट ने कहा कि जब भी कोई न्यायिक अधिकारी या CJM किसी मामले में पुलिस से यह सवाल करता है कि आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया, तो अक्सर उस जिले के पुलिस अधीक्षक और न्यायिक अधिकारी के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। यह अब आम चलन बन गया है कि SP किसी खास आदेश के लिए न्यायिक अधिकारी पर दबाव डालना शुरू कर देता है।
जस्टिस देशवाल ने यह भी खुलासा किया कि पुलिस और न्यायपालिका के बीच बढ़ते टकराव को शांत करने के लिए एक CJM का तबादला तक करना पड़ा। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह समस्या किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में यही हाल है।
कोर्ट ने कहा कि उन्हें जिला जजों से लगातार फीडबैक मिल रहा है कि युवा पुलिस अधिकारी, खासकर IPS अधिकारी, खुद को न्यायिक अधिकारियों से ऊपर समझने लगते हैं और उन पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि अगर पुलिस किसी आदेश से संतुष्ट नहीं है तो उसके पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं, वह जिला जज के सामने रिवीजन दाखिल कर सकती है या आदेश को ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकती है, लेकिन दबाव बनाना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि बार एसोसिएशन के नेताओं से उन्हें इनपुट मिले हैं कि कई बार वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सीधे कोर्टरूम में घुसकर न्यायिक अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं, जो न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ है।
जस्टिस देशवाल ने इस बात पर जोर दिया कि पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के बीच आपसी सम्मान बेहद जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने दो टूक कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि वह किसी न्यायिक अधिकारी से श्रेष्ठ है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई न्यायिक अधिकारी मंच पर बैठा होता है, चाहे वह जूनियर डिवीजन का ही क्यों न हो, उस समय वह कोर्टरूम में मौजूद हर व्यक्ति से ऊपर होता है। जस्टिस देशवाल ने यह भी बताया कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट के जजों को निर्देश दिए हैं कि निरीक्षण के दौरान भी वे मंच से न उठें, क्योंकि उस समय प्रोटोकॉल के अनुसार न्यायिक अधिकारी सर्वोच्च होता है।
डीजीपी राजीव कृष्णा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि यदि कहीं प्रोटोकॉल का पालन नहीं हो रहा है तो उसे सख्ती से लागू कराने के निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कानून की गरिमा सर्वोपरि है और इसमें कोई दो राय नहीं हो सकती।
अंत में कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि पुलिस और न्यायपालिका के बीच अहंकार का टकराव किसी भी तरह से जनता के हित में नहीं है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि सजा देने की शक्ति केवल न्यायपालिका के पास है, पुलिस के पास नहीं। डीजीपी ने भी इस बात से सहमति जताई कि पुलिस को हर हाल में कानून के दायरे में रहकर ही काम करना होगा।
काम से जुड़ा तनाव यानी वर्क प्रेशर एक ऐसा कारण है, जो लोगों को समलैंगिक बनने के लिए प्रेरित करता है
मलेशिया के एक मंत्री के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है कि काम से जुड़ा तनाव यानी वर्क प्रेशर एक ऐसा कारण है, जो लोगों को समलैंगिक बनने के लिए प्रेरित करता है। मलेशियाई मंत्री ने संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में ये बात कही है जिसके बाद ऐसे दावों को लेकर बहस शुरू हो गई है। उनके बयान की नागरिकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर मजाक उड़ाते हुए आलोचना की। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, मलेशिया के प्रधानमंत्री विभाग (धार्मिक मामलों) के मंत्री डॉ. जुल्किफली हसन ने कहा कि वर्क प्रेशर उन कारणों में से एक हो सकता है जो लोगों को LGBT जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
मंत्री जुल्फिकली विपक्षी पार्टी PAS की सांसद सीटी जैलाह मोहम्मद यूनुस के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। सीटी जैलाह ने मलेशिया में LGBT रुझानों के बारे में जानकारी मांगी थी। लिखित जवाब में मंत्री ने कहा कि सामाजिक प्रभाव, यौन अनुभव, काम का तनाव और अन्य व्यक्तिगत कारक संभावित कारणों की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने 2017 की एक स्टडी का हवाला देते हुए कहा कि LGBT जीवशैनली में जाने के लिए ये कारक प्रभावित कर सकते हैं। अपने जवाब में उन्होंने लिखा कि धार्मिक प्रथाओं में कमी भी इसमें योगदान दे सकती है।
समलैंगिक #संघ #वर्क प्रेशर
शुक्रवार, 30 जनवरी 2026
भाजपा सरकार ने लोकतंत्र का गला मरोडा- डाँ राम चन्द्र सरस
भाजपा सरकार ने लोकतंत्र का गला मरोडा- डाँ राम चन्द्र सरस
भाजपा सरकार ने लोकतंत्र पर किये जा रहे हमले किए जा रही है ग्राम विकास बैंक चुनाव में जबरदस्त धांधली पर सचिव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी डाँ रामचन्द्र सरस पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है ।
डॉ सरस ने बताया कि उप्र सहकारी ग्राम बिकास बैक लिमिटेड की शाखाओं के चुनाव में चुनाव अधिकारियों ने सत्तारूढ़ दल के नेताओं के इशारे पर नामांकन रद्द कर चुनाव सम्पन्न कर दिए।
जनता से वोट न मिलने से भयभीत भाजपा सरकार ने पूरे प्रदेश की शाखाओ मे अपने उम्मीदवारो के अलावा पहले तो पर्चा खरीदने से रोका ।
जिन शाखाओ मे लोग जैसे तैसे पर्चे खरीद लिये वहां के निर्वाचन अधिकारियों पर भाजपा के सांसद बिधायक,मंत्री व जिलाध्यक्ष नगर पंचायत व नगर पालिका के चेयर मैनो द्वारा दबाव बना नौकरीछीन लेने का भय दिखाकर सभी जगहो के बिरोधी दल के उम्मीदवार के पर्चे खारिज करा कर अपने लोगो को निर्विरोध चुने जाने का स्वांग रचा हैं । पार्टी इसे लोकतंत्रिक हत्या करार देते हुए इस क्रत्य की कडी निन्दा करती है ।
तथा सहकारिता बिभाग के राज्य निर्वाचन आयोग से पुनः लोकतंत्रिक ढंग से चुनाव कराये जाने की मांग करती हैं ।
एक हिन्दू मुख्यमंत्री के समय में शंकराचार्य का सम्मान न बचा
27 जनवरी को शंकराचार्य जी और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई।
यह बैठक शंकराचार्य जी के मेला क्षेत्र छोड़ने से लगभग 15 घंटे पहले हुई थी।
बैठक में प्रशासन ने यह स्वीकार किया कि शंकराचार्य जी को ससम्मान स्नान न करा पाना एक गंभीर प्रशासनिक चूक थी।
अधिकारियों ने खेद व्यक्त किया और यह आश्वासन भी दिया कि वे पालकी सहित ससम्मान स्नान कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
साथ ही यह भी कहा गया कि भविष्य में सभी पीठाधीश्वर शंकराचार्यों के स्नान में पूरा सहयोग किया जाएगा।
लेकिन यहीं पर बात रुक नहीं गई।
शंकराचार्य जी की ओर से गए प्रतिनिधियों ने स्पष्ट मांग रखी—
कि इस गंभीर त्रुटि के लिए प्रशासन सार्वजनिक रूप से शंकराचार्य जी से क्षमा याचना करे।
इस पर अधिकारियों ने कहा—
हम सार्वजनिक माफी नहीं मांग सकते, केवल खेद जता सकते हैं।
जब यही बात लिखित रूप में मांगी गई,
तब भी प्रशासन तैयार नहीं हुआ।
स्पष्ट शब्दों में कह दिया गया—
“यह संभव नहीं है।”
यही वह क्षण था,
जब प्रश्न केवल स्नान का नहीं रहा,
बल्कि शंकराचार्य की गरिमा और सम्मान का बन गया।
इसी के बाद शंकराचार्य जी अपने निर्णय पर अडिग रहे
और बिना स्नान किए ही मेला क्षेत्र छोड़ने का फैसला लिया।
28 जनवरी की प्रातः
शंकराचार्य जी मेला क्षेत्र से प्रस्थान कर गए।
यह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं था—
यह सनातन परंपरा, संत मर्यादा
और धर्मगुरुओं के सम्मान का प्रश्न है।
निर्णय इतिहास करेगा…
पर प्रश्न आज भी जीवित है।
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देश की वर्तमान परिस्थितियों में एकजुट संघर्ष का आह्वान-डी राजा
देश की वर्तमान परिस्थितियों में एकजुट संघर्ष का आह्वान
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी समारोह के समारोह के बाद पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद बैठक
आयोजित की गई।
अपने उद्घाटन भाषण में महासचिव डी राजा ने आगामी विधानसभा और संसद चुनावों में भाजपा को पराजित करने के उद्देश्य से सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शक्तियों को एकजुट होने का आल्वान करते हुए, देश की परिस्थितियों को समझकर संयुक्त संघर्ष छेड़ने की अपील की। उन्होंने घोषणा की कि केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी जैसे राज्यों में होने वाले चुनावों में भाजपा के खिलाफ सशक्त संघर्ष किया जाएगा।
साथ ही उन्होंने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा 12 फरवरी को आहूत राष्ट्रीय स्तर की आम हड़ताल को भाकपा द्वारा पूर्ण समर्थन दिये जाने की चौषणा भी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पार्टी समर्थन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हड्ताल में सक्रिय भूमिका निभाएगी।
डी. राजा ने कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी समारोह के अवसर पर खम्मम में आयोजित विशाल जनसभा और राष्ट्रीय परिषद की बैठक पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने वाली साबित हुई है। उन्होंने बताया कि चंडीगढ़ में पिछले सितंबर में आयोजित 25 वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद यह पहली राष्ट्रीय परिषद की बैठक थी।
वर्षों में अनेक त्यागों और संघर्षों के माध्यम से हमेशा जनता के पक्षा में खड़े रहकर संघर्ष किया है। खम्मम में आयोजित विशाल जुलूस और जनसभा ने कम्युनिस्ट पार्टी की ताकत को प्रदर्शित किया है। उन्होंने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए तेलंगाना और आंध प्रदेश की पार्टी
इकाइयों को बधाई दी। डी. राजा ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और संवैधानिक मूल्यों पर लगातार हमला हो रहा है। संसद,न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता को जानबूझकर समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाजों को दबाने के लिए दमनकारी रवैया अपना रही है।
उन्होंने कहा कि मजदूरों, किसानों, कर्मचारियों और मध्यम वर्ग के अधिकारों पर अभूतपूर्व हमला हो रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण तेजी से किया जा रहा है और राष्ट्रीय संपत्तियाँ कारपोरेट घरानों को सौंपी जा रही है। इससे बेरोजगारी बढ़ी है और सामाजिक असमानता गहरी हुई है।
डी. राजा ने आह्वान किया कि आम लोग मोदी सरकार की करपोरेट-परस्त नीतियों के खिलाफ एकजुट हो और देश के संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करें। इसके साथ ही पार्टी को सांगठनिक रूप से मजबूत करने और जनांदोलनों को खड़ा करने और तेज करने पर भी निर्णय किये गये।
खम्मम में भाकपा शताब्दी समारोह के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय स्तर की समापन जनसभा तथा तीन दिनों तक चली राष्ट्रीय परिषद की बैठक संपन्न हुई। इस अवसर पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में डी. राजा ने राष्ट्रीय परिषद की बैठकों में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। इस सम्मेलन में भाकपा के राज्य सचिव एवं विधायक के. सांधासिवाराव, राष्ट्रीय सचिव पल्ला वेंकट रेड्डी, रामकृष्ण पांडा, के. रामकृष्ण, राज्य सचिवालय सदस्य भागम हेमंत राव, खम्मम जिला सचिव दंडी सुरेश तथा बढ़ादि-कोठागुडेम जिला सचिव साबीर पाशा उपस्थित थे।
गुरुवार, 29 जनवरी 2026
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