रविवार, 17 नवंबर 2019

गुरुदास दास गुप्ता देश के महानायक थे

संसदीय राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुरुदास गुप्ता ने निभाई थी अहम भूमिका-सुमन
पूर्व सांसद कामरेड़ गुरुदास दास गुप्ता का निधन मजदूर आन्दोलन की बड़ी क्षति
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कामरेड़ की स्मृति में आयोजित की शोकसभा

बाराबंकी। गुरुदास गुप्ता साम्यवादी आंदोलन के ही नहीं देश के महा नायक थे। और संसदीय राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को मजबूत दिशा दी थी। उक्त उदगार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन नें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव व 5 बार के सांसद रहे कामरेड गुरुदास गुप्ता की स्मृति में गांधी भवन में आयोजित शोक सभा में व्यक्त कियें।  श्री सुमन ने आगें कहा कि कामरेड गुरुदास दास की मृत्यु मजदूर आंदोलन की बड़ी क्षति है। जो अपूर्णनीय है। पार्टी नेता प्रवीण कुमार ने कहा कि कामरेड गुरुदासदास को सरकार से एक करोड़ रुपये मिले थे। जिसे उन्होंने मजदूर आन्दोलन को दे दिया था। किसान सभा अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि कामरेड गुरुदास दास अपनी बातें खुलकर रखने के लिए मशहूर थे। मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में वित्त वर्ष 2012-13 के बजट पर तीखी टिप्पणी करते हुए दासगुप्ता ने कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी की कोई आवश्यकता नहीं थी, यह बजट तो कोई भी लिपिक तैयार कर सकता था। पार्टी के सहसचिव शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम केस को मनमोहन सिंह के कर्तव्य की चूक बताया। अंत में पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि दासगुप्ता का जन्म 3 नवंबर 1936 को हुआ था। वे 1985 में पहली, 1988 में दूसरी और 1994 में तीसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद दासगुप्ता 2004 और 2009 में दो बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। शोक सभा में दलसिंगार, अमर सिंह, वीरेन्द्र कुमार गिरीश चन्द्र मास्टर रामविलास वर्मा रामलखन वर्मा आदि मौजूद थे। अंत में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि अर्पित की गई।
सीएबी से भी जुड़े रहे दासगुप्ता
2004 में लोकसभा पहुंचने के बाद दासगुप्ता वित्त समिति और पब्लिक अंडरटेकिंग समिति के सदस्य भी रहे। 2009 में वे भाकपा संसदीय दल के नेता भी चुने गए थे। राजनीति से इतर दासगुप्ता को क्रिकेट और रवींद्र संगीत में बेहद रुचि थी। वे बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) से भी जुड़े रहे और उन्होंने कैब के सदस्य के रूप में काम किया।

मंगलवार, 5 नवंबर 2019

अधिवक्ताओं के खिलाफ गोदी मीडिया का दुष्प्रचार अभियान

अधिवक्ता और पुलिस संघर्ष दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन पुलिस की जात्तीयों के खिलाफ कोई उचित फोरम न होने के कारण आये दिन संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है, मूल समस्या को देखने के बजाय टुकड़ो-टुकड़ों में समस्या का समाधान करने की कोशिश के कारण आये दिन विस्फोटक स्थिति पैदा हो जाती है, अधिवक्ताओं के पास ज्यादातर शिकायतें पुलिस की होती हैं, और उनके द्वारा की जा रही मारपीट और वसूली की शिकायतें अधिवक्ताओं को बराबर मिलती है जिससे युवा, ईमानदार अधिवक्ताओं के मन में उनके प्रति घृणा उत्पन्न होती है, उस घृणा के कारण आये दिन संघर्ष में बदल जाती है, इन घटनाओं के पीछे अधिवक्ताओं का कोई निजी मामला न होकर जनता के प्रति पुलिस द्वारा किये जा रहे अत्याचार के कारण अधिवक्ताओं की सहानुभूति गुस्से के रूप में प्रदर्शित होती है।

दिल्ली पुलिस के जवान इस समय काली पट्टी बांधकर मुख्यालय के बाहर जुटे हैं और अपने लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भी वर्दी के पीछे एक इंसान हैं, हमारा भी परिवार है। हमारी पीड़ा कोई क्यों नहीं समझता।

पुलिसवालों का सवाल है कि मानवाधिकार हमारे लिए नहीं है क्या। हमें कोई भी मारता-पीटता रहे और हम शांत रहें। हमें इंसाफ चाहिए और अगर पुलिस कमिश्नर हमारी बात नहीं सुनते तो हम गृहमंत्रालय तक जाएंगे। वहां तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।
यह सब करते समय पुलिस यह नहीं है कि जब वह ज्यादिती करती है तब उसकी यह मनोदशा नहीं होती है।


दिल्ली पुलिस द्वारा अधिवक्ताओं के खिलाफ प्रदर्शन करना सरकारी तंत्र की विफलता है, अभी तक सरकार ने पुलिस के द्वारा की जा रही जात्तीयों के खिलाफ कोई उचित फोरम तैयार नहीं किया है, अपितु महाभ्रष्ट से भ्रष्ट पुलिस अधिकारी कानून व्यवस्था का रखवाला बना रहता है, और फर्जी मुठभेड़ द्वारा आरोपियों की बटेर व मुर्गों की भांति हत्या की जा रही है। उनको दण्डित करने में समाज व न्यायपालिका पूर्णरूप से विफल है।
अधिवक्ता चूंकि सीधे समाज से जुड़ा हुआ व्यक्ति है मोहलले से लेकर हर स्तर पर पुलिस द्वारा की जा रही जात्तीयों व भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करने की इच्छा इस तरह के संघर्षों को जन्म देती है, आज जरूरत इस बात की है कि संगठित अपराधी गिरोह जो वर्दी के नाम पर समाज का उत्पीड़न कर रहे हैं उनको चिंहित कर दण्डित किया जाए, गोदी मीडिया वकीलों की छवि को धूमिल कर रही है। जिसका कोई औचित्य नहीं है, अधिवक्ताओं के खिलाफ जारी दुष्प्रचार बंद किया जाये। अधिवक्ता समाज उगता हुआ सूरज है, ब्रिटिश कालीन भारत में जब कोई मोर्चा रखने के लिए तैयार नहीं था तब गांधी, नेहरू, पटेल जैसे अधिवक्ताओं ने अपना पेशा छोड़कर अंग्रेजी सम्राज्यवाद का सूरज डुबो दिया था, आज उन्हीं के पद चिन्हों पर चलने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ गोदी मीडिया दुष्प्रचार कर रही है।

रणधीर सिंह सुमन, एडवोकेट
अधिवक्ता चेम्बर, कक्ष सं0 27,
सिविल कोर्ट, बाराबंकी
मोबाइल: 9450195427

गुरुवार, 31 अक्तूबर 2019

महान कम्युनिस्ट नेता गुरुदास दास गुप्ता का निधन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सांसद और वामपंथी नेता गुरुदास दासगुप्ता का 83 वर्ष की उम्र में निधन
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी  के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद गुरुदास दासगुप्ता का गुरुवार को निधन हो गया। गुरुदास 83 वर्ष के थे। अपने राजनीतिक जीवनकाल में वह तीन बार राज्यसभा और दो बार लोकसभा के सदस्य रहे।


उनके परिवार में पत्नी और बेटी हैं। दासगुप्ता पिछले कुछ महीने से फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे।

पश्चिम बंगाल में भाकपा के सचिव स्वपन बनर्जी ने बताया कि कोलकाता स्थित अपने निवास पर सुबह छह बजे दासगुप्ता का निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे। खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने पार्टी के सभी पद छोड़ दिए थे लेकिन वे भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के सदस्य थे।


गुरुदास दासगुप्ता को देश के दिग्गज वामपंथी नेताओं में गिने जाते रहे हैं। 1985 में पहली बार गुरुदास राज्यसभा सांसद निर्वाचित किए गए। इसके बाद 1988 में उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए चुना गया।

वहीं, 1994 में तीसरी बार दासगुप्ता को राज्यसभा सासंद चुना गया। हालांकि वह तीन बार राज्यसभा सांसद रह चुके थे। इसके बाद भी 2004 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और वह जीते भी। इस दौरान वह वित्त समिति और पब्लिक अंडरटेकिंग समिति के सदस्य भी रहे।

2004 के बाद गुरुदास दासगुप्ता 2009 के लोकसभा चुनावों में मैदान में उतरे और एक बार फिर जीत हासिल की। इस बार उन्हें लोकसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का संसदीय दल का नेता भी चुना गया। इस दौरान वह कई संसदीय समितियों से जुड़े रहे।

गुरुदास दासगुप्ता को संगीत और क्रिकेट से बेहद लगाव था। दासगुप्ता बंगाल क्रिकेट संघ से भी जुड़े रहे और उन्होंने वहां कैब के सदस्य के रूप में काम किया। गुरुदास दासगुप्ता का जन्म तीन नवंबर 1936 को हुआ था।

गुरुदास दासगुप्ता अपनी बातें खुलकर रखने के लिए मशहूर थे। मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में वित्त वर्ष 2012-13 के बजट पर तीखी टिप्पणी करते हुए दासगुप्ता ने कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी की कोई आवश्यकता नहीं थी, यह बजट तो कोई भी लिपिक तैयार कर सकता था।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार कोलकाता में किया जाएगा।
-रणधीर सिंह सुमन 

मंगलवार, 22 अक्तूबर 2019

गजेंद्र सिंह एक इंकलाबी शख्सियत थे



बाराबंकी। आज देश में प्रेस की आजादी, बोलने की आजादी, लिखने की आजादी सब पर अंकुश लगाया जा रहा है, वर्तमान सरकार में लोकतंत्र व इंसानियत सिसक रही है, खौफ के माहौल में देश कब तक रहेगा और यह परिस्थितियाँ देश को किस ओर ले जायेंगी यह एक विचारणीय प्रश्न है। यह विचार प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री हाजी फरीद महफूज किदवई ने गांधी भवन सभागार में पूर्व विधायक एवं सामाजिक एवं साहित्यिक प्रतिभाओं के धनी स्व0 गजेन्द्र सिंह की बरसी के अवसर पर आयोजित स्मृति सभा में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि हमें निराश होने की जरूरत नहीं है यह वह देश है जहां एक फकीर सिफत व्यक्ति ने हाथ में छड़ी लेकर ऐसी ताकतों को देश से भगा दिया जिसके बारे में यह कहा जाता था कि उनका सूरज कभी अस्त  नहीं होता था। गजेन्द्र सिंह जैसी इंकलाबी शख्सियत की प्रांसगिकता आज पहले से कही अधिक है। पूर्व विधायक राकेश मिश्रा ने गजेन्द्र सिंह को श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हुए कहा कि वह उनसे पहली मुलाकात में ही बहुत प्रभावित हुए वह साधारण से दिखने वाले व विशाल प्रतिभाओं के धनी व्यक्ति थे और सच्चे जनप्रतिनिधि थे जनता व समाज के प्रति उनका समर्पण भाव ही उन्हें महान व्यक्ति बनाता है। पूर्व विधायक व इण्डियन लायर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष परमात्मा सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि गजेन्द्र सिंह फकीरी मिजाज रखते थे उन्होंने विधायक की कुर्सी कभी अपने ऊपर चढ़ने नहीं दिया बल्कि अपने समाजसेवी व्यक्तित्व को विधायक की कुर्सी पर सदैव हावी रखा।
रिहाई मंच के संयोजक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद शुऐब ने कहा कि आज गजेन्द्र सिंह जैसे लोगों की देश में बहुत जरूरत है क्योंकि वर्तमान सत्ताधारियों ने देश को एक जेल में परिवर्तित करने की ओर कदम बढ़ा दिये हैं और इसकी शुरूआत कश्मीर से उन्होंने कर दी।
उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव फवाद किदवई स्व0 गजेन्द्र सिंह को श्रंद्धाजलि अर्पित करते हुए कहा कि वो हम सब जवानों के नायक एवं प्रेरणा स्रोत है उन्होंने कहा कि आज के जो नौजवान पीढ़ी राजनीति में कदम रख रही है उन्हें गजेन्द्र सिंह के व्यक्तित्व का अध्ययन करना चाहिए और उसका अनुसरण भी करना चाहिए।
सभा की अध्यक्षता कर रहे जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित अपने कुछ संस्मरण व यादों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें दादा गजेन्द्र सिंह का स्नेह सदैव प्राप्त रहा, उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा, उन्होंने दादा गजेन्द्र सिंह के व्यक्तित्व पर एक स्मारिका प्रकाशित करने की सलाह कार्यक्रम के आयोजक एवं सुपुत्र वरिष्ठ अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन को दी।
सभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा व जिला टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन वैश्य व महंत बी0पी0 दास, सिटी इण्टर कालेज के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह, हुमायूं नईम खा आदि ने अपने अपने विचार रखें।
इस सभा के अंत में रणधीर सिंह सुमन ने आये हुए अतिथिगणों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर गांधी समारोह के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा, अजय सिंह गुरूजी, दिलीप गुप्ता, प्रदीप सिंह, उपेन्द्र सिंह, भूपेन्द्र पाल सिंह शैंकी, राहीबुल कादिर, पाटेश्वरी प्रसाद, किसाान सभा के अध्यक्ष
विनय कुमार सिंह, प्रवीन कुमार, शिव दर्शन वर्मा, पुष्पेन्द्र यादव, विजय प्रताप सिंह, श्याम सिंह, अलाउद्दीन, अंकुल वर्मा, विभव मिश्रा, अनवर अली, श्याम सुन्दर दीक्षित, निशांत अहमद आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे।

रणधीर सिंह सुमन
मोबाइल: 9450195427

सोमवार, 7 अक्तूबर 2019

अटल सरकार से मोदी सरकार आगे

अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार ने तीन आतंकवादियों को कंधार ले जाकर छोड़ा था वहीँ मोदी सरकार ने  11 आतंकवादियों को तालिबान को सौंप दिया और उसके बदले में तीन इंजिनियर की रिहाई कराई. अपहरण और फिरौती का उद्योग इन राष्ट्रवादी सरकारों में फल-फूल रहा है. कूटनीतिक साहस क्षमता का कहीं भी प्रदर्शन करने में ये सरकारें असफल हो रही हैं लेकिन अपने भाषणों में ये रुस्तमे विश्व हैं. इजराइल का नाम हमेशा रटने वाली यह सरकारें यह भी सबक नही ले पायीं कि कैसे आतंकियों के अपरहण उद्योग से निपटा जा सकता है. विश्व में कई घटनाएं ऐसी हुई हैं जिसमें आतंकियों को पकड़ा गया है या मारा गया है और अपर्हित लोगों को छुड़ाया गया है. 
 11 आतंकियों की अदला-बदली रविवार को किसी गुप्त स्थान पर हुई। छोड़े गए 11 आतंकियों में शेख अब्दुर रहीम और मौलावी अब्दुर राशिद शामिल है। दोनों क्रमश: कुनूर और निमरोज प्रांत के लिए तालिबान के गर्वनर के रूप में काम कर चुके हैं.
दोनों तरफ से रिहाई की प्रक्रिया अफगानिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत जल्मे खलीलजाद और तालिबान के प्रतिनिधि मुल्ला अब्दुल गनी बरदार के बीच बैठक में हुई।  
               अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मौलाना मसूद अजहर को रिहा किया गया था. इसी शातिर आतंकी ने साल 2000 में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया था. जिसका नाम 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के बाद सुर्खियों में आया था. 
         दूसरा आतंकी अहमद उमर सईद शेख. इस आतंकवादी को 1994 में भारत में पश्चिमी देशों के पर्यटकों का अपहरण करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. इसी आतंकी ने डैनियल पर्ल की हत्या की थी. अमेरिका में 9/11 के हमलों की योजना तैयार करने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. बाद में डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसे 2002 में गिरफ्तार कर लिया था.
           तीसरा आतंकी मुश्ताक अहमद ज़रगर. ये आतंकी रिहाई के बाद से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में उग्रवादियों को प्रशिक्षण देने में एक सक्रिय हो गया था. भारत विरोधी आतंकियों को तैयार करने में उसकी खासी भूमिका थी.
अटल सरकार में अप्रहत प्लेन अमृतसर  में रुका हुआ था लेकिन हमारे कमांडों वहां तक नहीं पहुँच पाते हैं. ऐसा बोला जाता है कि उनको विमान से एयरपोर्ट भेजना था लेकिन किसी भी विमान का इंतजाम नहीं हो पाया था. और जब वह सड़क के रास्ते गये तो वहां भरी जाम की वजह से देरी हो जाती है.  
                          भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के तत्कालीन प्रमुख ए. एस. दौलत ने अपनी अंग्रेजी पुस्तक 'कश्मीर:द वाजपई ईयर्स' में भी कहा है कि भारत उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया था। दौलत ने अपनी पुस्तक में इस महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख नहीं किया कि उस अपहृत विमान में उनकी खुफिया एजेंसी रॉ का एक अधिकारी भी बैठा था जिसका नाम शशि भूषण सिंह तोमर था। यह अधिकारी काठमाण्डू स्थित भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी के तौर पर कार्य कर रहा था। तोमर की तत्कालीन कैबिनेट सचिव एन.के. सिंह से नजदीकी रिश्तेदारी थी।
अपहृत विमान में इतना ईंधन नहीं था कि उसे लाहौर या कंधार ले जाया जाता। इस कारण उसे अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरना पड़ा, जहां अपहृर्ताओं ने गुरुग्राम निवासी रूपन कत्याल नामक एक यात्री को इतना घायल कर दिया कि बाद में उसकी विमान में ही मृत्यु हो गई थी। 25 वर्षीय कत्याल शादी के बाद हनीमून मनाने काठमाण्डू गया हुआ था। विमान में उसकी पत्नी रचना सहगल उसके साथ थी।
             

अमृतसर हवाई अड्डे को दिल्ली स्थित क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का निर्देश था कि किसी तरह विमान को वहीं रोक कर रखा जाए पर ईंधन न भरा जाए। इस बीच हवाई अड्डे के निदेशक विजय मुलेकर के पास एक फोन आया जिसमें एक आदमी ने यह निर्देश दिया कि हवाई जहाज में ईंधन भर दिया जाए और उसे आगे उड़ान भरने दी जाए। फोन करने वाले आदमी ने अपना नाम सी. लाल बताया और कहा कि वह गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव है। विजय मुलेकर ने उसकी बात नहीं मानी और कहा कि 'मैं केवल दिल्ली स्थित क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की ही बात मानूंगा।' जांच करने पर पता चला कि वह फोन एक यूरोपीय देश से आया था। यूरोप से आए इस फोन वाली घटना का जिक्र अंग्रेजी समाचार पत्रिका 'इंडिया टुडे' के 10 जनवरी, 2000 अंक में किया गया है। इस घटना की चर्चा अंग्रेजी पुस्तक 'आईसी 814 हाइजैक्ड! द इनसाइड स्टोरी' में भी पृष्ठ संख्या 203 पर की गई है। वहां सी. लाल की जगह जे. लाल लिखा हुआ है।
                इन्डियन एयरलाइन्स  फ्लाईट 814 (VT-EDW) का अपहरण शुक्रवार, 24 दिसम्बर 1999 को  लगभग 05:30 बजे विमान के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के कुछ ही समय बाद कर लिया गया था। जिसको इब्राहिम अतहर, बहावलपुर, पाकिस्तान, शाहिद अख्तर सईद, कराची, पाकिस्तान, सन्नी अहमद काजी, कराची, पाकिस्तान, मिस्त्री जहूर इब्राहिम, कराची, पाकिस्तान, शकीर, सुक्कुर, पाकिस्तान ने किया था.
पाकिस्तान से हर समय मुकाबला करने वाले लोग अमेरिकी साम्राज्यवाद के भी समर्थक हैं लेकिन पाकिस्तान अमेरिकी साम्राज्यवाद का मुख्य चहेता देश है और पाकिस्तान के माध्यम से ही तालिबान का निर्माण हुआ था. दोनों घटनाओं में तालिबान शामिल था और अफगानी 11 आतंकियों को छुड़ाने में उसके मुख्य भूमिका रही है लेकिन देश के नीति नियंता अमेरिकी मोह में फंस कर सही निर्णय लेने में असमर्थ साबित होते हैं. यही देश का दुर्भाग्य है.

-रणधीर सिंह सुमन 

गुरुवार, 3 अक्तूबर 2019

किसका भय सता रहा है ?


सन 2017 में भीमा कोरेगांव हिंसा के मामले में सुप्रसिद्ध पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नौलखा जेल में निरुद्ध है। उन पर आरोप है कि 31 दिसंबर 2017 को भीमा कोरेगांव में एल्गर परिषद की बैठक हुई थी और अगले दिन वहां हिंसा शुरू हो गई थी। उक्त मामले में उच्चतम न्यायालय में गौतम नौलखा  प्रथम सूचना रिपोर्ट रद्द करने की याचिका पर सुनवाई  से पिछले सोमवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गगोई  से ने अलग कर लिया था,जिसका कोई भी कारण उन्होंने नहीं बताया था।
 आज न्यायमूर्ति  रवींद्र भट्ट ने भी उनकी याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया है। पिछले 3 दिनों में न्यायमूर्ति एन. वी. रमाना न्यायमूर्ति  आर. सुभाष रेड्डी न्यायमूर्ति वी..आर. गवई सुनवाई से अपने को अलग कर चुके हैं और किसी भी न्यायमूर्ति ने सुनवाई से अलग होने का कोई भी कारण नहीं बताया है। गौतम नौलखा  के ऊपर दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट में कवि वर वराराव, सुधा भारद्वाज. वेरोम गोंजाल्विसज  व  अरुण फरेरा भी है। जिसमें वरवरा राव की जेल में हालत गंभीर है।
अगर माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति गण बैगर कोई कारण बताए लोगों की सुनवाई नहीं करेंगे तो विधि का शासन और संविधान की रक्षा कौन करेगा? अगर किसी भय या कार्यपालिका के दबाव या अन्य किसी कारण से सुनवाई नहीं होती है तो कैसे न्याय का शासन चलेगा? यह गंभीर प्रश्न व्यवस्था के समक्ष खड़ा हो गया है? आपातकाल में भी कुछ इसी तरह की स्थितियां पैदा हुई थी, जिसका खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ा था। आज जब जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन, संविधान, कानून व्यवस्था जैसे गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं उस समय भी अगर न्यायपालिका मौन है तो किस तरह से लोकतंत्र संविधान सुरक्षित रहेगा। अगर भारतीय न्यायपालिका किसी के दबाव में है तो यह और भी गंभीर स्थित है।
-रणधीर सिंह सुमन 

बुधवार, 2 अक्तूबर 2019

गांधी के हत्यारों का स्वांग


गांधी के शारीरिक हत्या के बाद अब उनके हत्यारे विचारों की हत्या कर उनका मजाक बना रहे हैं। जनता कुपोषण और भुखमरी का शिकार हो रही है दूसरी तरफ शौचालय निर्माण युद्ध स्तर पर हो रहे हैं बगैर खाए शौचालय इस्तेमाल योजना चल रही है। भारी संख्या में नौकरी पेशा लोगों की नौकरियां छीनी जा है। भारी संख्या में बच्चें एनीमिया के शिकार हो गए हैं। पढें लिखें नौजवान बेरोजगार हैं। बैक के घोटाले बाज विदेश बेरोकटोक भाग रहे हैं।
जनता के ऊपर तरह - तरह के टैक्स लगाकर  भूखों मरने के लिए मजबूर कर दिया है।
राज्य पुनर्गठन के नाम पर पूरे राज्य को जेल बना दिया गया है। आपातकाल से भी ज्यादा गिरफ्तारयां की गयी है। असम लाखों लाखों लोगों को कैद में कर श्रद्धांजलि दी जा रही है।
देश को 1947 की स्थिति में वापस ले जाया जा रहा है। बीएसएनएल, डाक, बीमा, रेलवे, बैंक व रिजर्व बैंक तक तबाह हो गए हैं। विदेश में भी साख समाप्त हो रही है। वहीं हत्यारों का स्वांग जारी है। कोई सफाई अभियान के नाम साफ सडकें साफ कर रहा है। कोई प्लास्टिक को इकट्ठा कर नया ड्रामा कर है। विधानसभा का विशेष सत्र हो रहा है। गांधी को शैतान की औलाद बताने वाले और गांधी के हत्यारे एक सुर में गीत गा रहे हैं।
आज सुप्रसिद्ध गांधी वादी विचारक हिमांशु कुमार ने लिखा है - - -
गोडसे को लगा कि गांधी राष्ट्रभक्त नहीं है ,

गोडसे को यह भी लगा कि मैं ज्यादा राष्ट्रभक्त हूँ,

तो गोडसे नें गांधी को गोली से उडा दिया ,

यह है इनका राष्ट्रभक्ति पर फैसला करने का तरीका,

और यह है इनकी समझ,

इस समझ और इस तरीके से यह सबकी राष्ट्रभक्ति पर फैसला करने वाले न्यायाधीश बने घूमते हैं,

यही मूर्खता हिंदुत्व की राजनीति का आधार है,

जिस राष्ट्र की यह भक्ति करते हैं इनके उस राष्ट्र में देश की जनता नहीं है,

इनके सपने के राष्ट्र में आदिवासी नहीं हैं, दलित नहीं हैं, मुसलमान नहीं हैं, इसाई नहीं हैं, कम्युनिस्ट नहीं हैं, कांग्रेस नहीं है, केजरीवाल नहीं है,

इनका राष्ट्र कल्पना का राष्ट्र है ,

सचमुच का देश नहीं ,

इनसे कभी पूछिए कि अच्छा तुम मुसलमानों को इतनी गाली बकते हो,

तो अगर तुम्हारे मन की कर दी जाय तो तुम मुसलमानों के साथ क्या करोगे ?

क्योंकि तुम भारत से मुसलमानों के सफाए के नाम पर हज़ार दो हज़ार को ही मार पाते हो ,

भारत में तो करीब बीस करोड़ मुसलमान हैं,

क्या करोगे इनके साथ ?

क्या सबको मारना चाहते हो ?

या सबको हिन्दू बनाना चाहते हो ?

या सबको भारत से बाहर भगाना चाहते हो ?

क्यों नफरत करते हो उनसे ?

करना क्या चाहते हो ?

तो यह संघी बगलें झाँकने लगते हैं,

मेरे एक दोस्त नें एक बार एक संघी नेता से पूछा,

कि आप अखंड भारत फिर से बनाने की बात संघ की शाखा में करते हैं ,

और कहते हो कि अफगानिस्तान, बंगलादेश, पकिस्तान  सबको मिला कर  अखंड भारत बनाना है ,

लेकिन यह सभी देश तो मुस्लिम बहुल हैं ,

तो अगर इन्हें भारत में मिलाया गया तो भारत में मुसलमान बहुमत में हो जायेंगे

और अगर हम इन्हें हिन्दू बनाना चाहते हैं तो इतनी बड़ी आबादी को हम थोड़े से हिन्दू कैसे बदल पायेंगे ?

इस पर वह संघी नेता आंय बायं करने लगे और कोई जवाब नहीं दे पाए,

आरएसएस की कोई समझ नहीं है ,

ये मूर्खों और कट्टरपंथियों का जमावड़ा है,

इनका काम भाजपा के लिए वोट बटोरने और उसके लिए हिन्दू युवकों के मन में ज़हर भरते रहने का है,

राष्ट्रीय स्वयं सेवक सेवक संघ नें जितना नुकसान भारत का किया है उतना कोई विदेशी शत्रु भी नहीं कर पाया ,

भारत के युवा जब तक खुले दिमाग और खुली समझ वाले नहीं बनेंगे ,

जब तक युवा देश की जाति , सम्प्रदाय और आर्थिक लूट की समस्या को हल नहीं करेंगे ,

भारत इसी दलदल में लिथडता रहेगा ,

यह साम्प्रदायिक जोंकें भारत का खून ऐसे ही पीती रहेंगी,
-हिमांशु कुमार
आज जरूरत इस बात की है कि गांधी के हत्यारों के स्वांग करने वालों से देश को मुक्ति दिलाने का संकल्प लें और देश को बचाएं।
-रणधीर सिंह सुमन

शनिवार, 28 सितंबर 2019

मनुष्य की वधशालाओं की पोल खुली

 पुलिस उपाधीक्षक सीबीआई   एन. पी. मिश्रा ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सीबीआई के  संयुक्त निदेशक ए. के. भटनागर ने झारखंड में 14 निर्दोष लोगों को फर्जी एनकाउंटर करके मार डाला था।  मरने वालों के परिवार के सदस्यों ने पहले ही यह आरोप लगाया था कि मरने वालों को पकड कर मार डाला गया है। पुलिस उपाधीक्षक सीबीआई एन. पी. मिश्रा ने  5 पेज का पत्र प्रधानमंत्री को भेजा है।
एनकाउंटर देशभर में हमेशा  विवाद का विषय रहा है कि एनकाउंटर में लोगों को पकड़कर गोली मारकर उनकी हत्या कर दी जाती है। लेकिन सरकारें इस कृत्य को कानूनी जामा पहनाकर हत्या को सही मुठभेड़ साबित करती है। जबकि वास्तविकता यह है  पुलिस या अन्य एजेंसियां जो देश भर में  एनकाउंटर करती  हैं उसमें ज्यादातर उनके व्यक्तियों को घरों से पकड़ कर वह मुडभेड दिखा कर उनकी हत्या कर दी जाती है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों के संबंध में इस तरह के मामले उजागर होते ही उसकी विश्वसनीयता के ऊपर प्रश्न चिन्ह लग जाता है। कुछ वर्षों पूर्व गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को एक अवैध संगठन घोषित कर दिया था। लेकिन माननीय उच्चतम न्यायालय ने अवकाश के दिन न्यायालय को खोल कर उक्त आदेश को स्थगित कर दिया था। सीबीआई को उच्चतम न्यायालय ने ही तोते की संज्ञा दी थी। लेकिन वर्तमान संदर्भ में विपक्ष के नेताओं को प्रताड़ित करने का काम केंद्रीय जांच ब्यूरो के माध्यम से किया जा रहा है। लेकिन न्यायपालिका प्रक्रिया वश रोक लगाने में असमर्थ है। भारतीय कानूनों के अनुसार किसी भी व्यक्ति को पकड़कर मार देना हत्या का अपराध  है और अगर सरकार या सरकारी संगठन हत्या करके मुडभेड दिखाते हैं तो लोकतंत्र कैसे देश में रहेगा।  हर आदमी का विश्वास कैसे सरकार के ऊपर होगा। इसके ऊपर प्रश्नचिन्ह बहुत पहले से लग रहा है और अधिकारी अपनी प्रोन्नत के लिए के लिए इस तरह के कृत्य करते हैं। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट या एनकाउंटर से जुड़े हुए लोग अपनी किसी विशेष योग्यता की बजाए हत्या करके उच्च पदस्थ होते हैं जिससे ईमानदार कानून के मानने वाले अधिकारी कुंठित हो जाते हैं।  इस व्यवस्था के तहत उन हत्यारे अधिकारियों की संपत्तियों में भी कई हजार गुना बढ़ोतरी होती  देखी जा सकती है। सरकारी एजेंसियों द्वारा मुठभेड के नाम पर की जा रही हत्याएं समाज के लिए व लोकतंत्र के लिए के लिए घातक है।
विधि के शासन की अवधारणा का लोप होता जा रहा है। अधीनस्थ न्यायालय भ्रष्ट अभियोजन अधिकारियों के अभिकर्ता के रूप में कार्य करने के कारण आम आदमी की हत्याएं मुडभेड के नाम पर होती है।
लोगों में यह विश्वास घर करता जा रहा है कि बदला लेने के लिए इन एजेंसियों की मदद से मुडभेड के नाम पर हत्‍या करवा लो।
मनुष्य की आधुनिक वधशालाएं है
- रणधीर सिंह सुमन 

शुक्रवार, 27 सितंबर 2019

यह कश्मीर में क्या हो रहा है?

'पेशे से वकील होने के नाते आप की विचारधारा कठोर है क्योंकि आप क्रिमिनल केस लड़ते हैं जो विभिन्न अदालतों में अलगाववादियों के खिलाफ विचाराधीन है।
' विषय है.... आप बार एसोसिएशन का दुरुपयोग कर रहे हैं जिससे संवैधानिक प्रणाली में दिए गए दर्जे के मुताबिक सम्मान के साथ माना जाता है।'
जम्मू और कश्मीर सरकार ने 4 अधिवक्ताओं को पुराने कानून पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत उक्त आरोप लगाते हुए गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार अधिवक्ताओं में जम्मू हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मियां अब्दुल कयूम भी शामिल हैं अन्य अधिवक्ताओं में नाजिर अहमद रोंगा, अनंतनाग बार एसोसिएशन के अध्यक्ष फयाज अहमद सोदागर तथा बारामूला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अब्दुल सलीम राठेर शामिल है।
नाजिर अहमद रोंगा मुरादाबाद सेंट्रल जेल मियाँ अब्दुल कयूम को आगरा सेंट्रल जेल में बंद कर रखा गया है।
जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 व 35 ए की कार्रवाई के बाद भारी संख्या में अधिवक्ताओं, राजनेताओं, लेखकों, पत्रकारों को गिरफ्तार कर देश की विभिन्न जेलों में कैद रखा गया है। लोकतंत्र, स्वतंत्रता, संविधान को जम्मू और कश्मीर में जिस तरीके से परिभाषित कर  लागू किया जा रहा है वह भारतीय संविधान कि गोडसे वादी  व्याख्या तो हो सकती है लेकिन  डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान जिसे 26 जनवरी को भारतीय गणतंत्र में लागू  किया गया था। वह संविधान नहीं हो सकता है। भारतीय संविधान का रक्षक उच्चतम न्यायालय  मौन हैं। यही लोकतंत्र का दुर्भाग्य है।

बुधवार, 25 सितंबर 2019

हम बंदर से मनुष्य बने पर यह सरकार फिर से बंदर बनाने की ओर ले जा रही है.

लोकसंघर्ष पत्रिका के तत्वावधान में लखनऊ में धर्म निरपेक्षता और सामाजिक विकास की चुनौतियां गोष्ठी का आयोजन हुआ

लखनऊ 25 सितंबर 2019. चर्चित पत्रिका लोकसंघर्ष की ओर से यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में धर्म निरपेक्षता और सामाजिक विकास की चुनौतियां विषय पर गोष्ठी का आयोजन हुआ. वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश्वर चतुर्वेदी, ताहिरा हसन ने विचार व्यक्त किए अध्यक्षता मुहम्मद शुऐब ने की.

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश्वर चतुर्वेदी ने कहा कि हम  बंदर से मनुष्य बने पर यह सरकार फिर से बंदर बनाने की ओर ले जा रही है. मीडिया की स्वतंत्रता अब एक
जुमला हो गई है. हमें तय करना होगा कि हम सत्य के साथ हैं कि धर्म के. कब तक 70 लाख लोग कश्मीर में कैद रहेंगे. खबर नहीं छापेंगे तो क्या सत्य सामने नहीं आएगा. बाबरी मस्जिद विध्वंस के वक़्त भी खबरें कत्ल की गईं पर सच्चाई पूरी दुनिया जानती है. आपातकाल से ज्यादा आज लोग कश्मीर में बंद हैं. मैं जानना चाहता हूं कि क्यों हम चुप हैं. हमें याद करना होगा अम्बेडकर को उन्होंने कहा था कि देश महत्वपूर्ण नहीं, राष्ट्र महत्वपूर्ण नहीं हैं, धर्म महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण है तो मनुष्य. वो मनुष्य क्या कश्मीर में हो रही ज्यादतियों पर आँखे मूंद लेगा.

रिहाई मंच अध्यक्ष और लोकसंघर्ष पत्रिका के मुख्य सलाहकार मुहम्मद शुऐब ने कहा कि सामाजिक विकास के साथ आर्थिक विकास भी बेहद जरूरी है.

प्रबंध संपादक लोकसंघर्ष पत्रिका रणधीर सिंह सुमन ने बताया कि पत्रिका का मौजूदा अंक कश्मीर के विकास को लेकर सरकार के विरोधाभासी रवैये पर केंद्रित है. कश्मीर को लेकर मसीहुद्दीन संजरी, स्वामी अमृत पाल सिंह 'अमृत', ऐशालीन मैथ्यू, निताशा कौल, सत्यम श्रीवास्तव, ईश मिश्रा और हफ़ीज़ के लेख महत्वपूर्ण हैं.
लोकसंघर्ष पत्रिका की ओर महंत वी पी दास को गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया है

गोष्ठी में बाबा बीपी दास, महंत देव्या गिरी, सृजनयोगी आदियोग, डॉ. राघवेंद्र प्रताप सिंह, रॉबिन वर्मा, एडवोकेट पुष्पेंद्र, नीरज, विजय प्रताप सिंह, श्याम सिंह, अंकुल वर्मा, गिरीश चंद्र, वैभव मिश्रा, बृजमोहन वर्मा, गणेश सिंह अनूप, शिवदर्शन वर्मा, प्रवीण वर्मा, भूपिंदर पाल सिंह, राजेन्द्र सिंह राणा, वसीम राइन, सलाम मोहम्मद, आनंद प्रताप सिंह, अरविंद वर्मा, रमा सिंह, अमर प्रताप सिंह आदि लोग उपस्थित रहे. संचालन तारिक़ खान ने किया.

गुरुवार, 12 सितंबर 2019

महात्मा गांधी के विरोध का रवैया राष्ट्रविरोधी

बाराबंकी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन एडवोकेट ने गुरूवार को जिलाधिकारी डाॅ. आदर्श सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और अधिशाषी अधिकारी के विरूद्ध एक मांग पत्र सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा है कि विगत सन् 1978 से निरंतर आयोजित होने वाले गांधी जयन्ती समारोह के कार्यक्रम हेतु नगर पालिका परिषद का मैदान और हाल आरक्षित किया जाता रहा है। लेकिन सत्तासीन लोग महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती के कार्यक्रम हेतु नगर पालिका परिषद का मैदान और हाल आरक्षित करने से मना कर रहे है। इससे यह साफ तौर पर जाहिर है कि सत्ता पर बैठे लोगों का महात्मा गांधी की विचारधारा से दूर दूर तक को कोई वास्ता नहीं है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महात्मा गांधी की विचारधारा को आत्मसात करते हुए स्वच्छता अभियान से आम आदमी को जोड़ने का प्रयास कर रहे है। यही नहीं सीएम योगी आदित्यनाथ महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती पर 48 घण्टे विधानसभा का विशेष सत्र चलाकर महात्मा गांधी की विचारधारा का अनुसरण करने की योजना बना रहे है। ऐसे में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और अधिशाषी अधिकारी का महात्मा गांधी के प्रति रवैया राष्ट्र विरोधी प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे की विचारधारा का समर्थन करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान पर दुःख प्रकट करते हुए उन्हें चेतावनी दी थी। जिसके बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने माफी मांगी थी। इन सबके के बावजूद कुछ तथाकथित भाजपा नेता एक बार फिर महात्मा गांधी को अपमानित करने का काम कर रहे है। वह भी तब जब भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मना रहा है। ऐसे में जनपद के कुछ गैर राजनीतिक एवं अपराधिक चरित्र वाले लोग कभी भगवान तो कभी महापुरूषों को अपमानित करने से नहीं चूकते। श्री सिंह ने डीएम डाॅ. आदर्श सिंह से मांग की है कि उक्त प्रकरण के संदर्भ में जल्द ही कोई निष्कर्ष निकालकर गांधी जयन्ती के कार्यक्रम हेतु नगर पालिका परिषद का मैदान एवं हाल आरक्षित का करने का निर्देश जारी करें।

रणधीर सिंह सुमन
9450195427