रविवार, 17 सितंबर 2017

योगी सरकार में कानून व्यवस्था समाप्त

योगी सरकार में कानून व्यवस्था समाप्त हो चुकी है-रणधीर सुमन
मलूकपुर में किसानों को कम्युनिस्ट पार्टी जिला सहसचिव ने किया संबोधित
बाराबंकीं। योगी सरकार में कानून व्यवस्था समाप्त हो चुकी है। कानून व्यवस्था बनाने के  नाम पर लोगों को पकड कर एनकाउंटर किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब माकपा कार्यालय बाराबंकी को लूटकर गिराने वाले लोगों की गिरफ्तारी करने के बजाय भू-माफियाओ को संरक्षण दिया जा रहा है। यह विचार मलूकपुर में किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि किसान कर्जे में किसानों को खूब ठगा गया है। कम्युनिस्ट पार्टी जिला सचिव ब्रज मोहन वर्मा ने कहा कि आलू के दाम किसानो को नहीं मिल रहा है। उल्टे योगी सरकार हिन्दू मुस्लिम दंगे करवाने के अलावा कोई कार्य नहीं हैं। किसानों की सभा को सम्बोधित करते हुए प्रवीण कुमार ने कहा कि किसानों के आगे इस सरकार को उखाड़ फेंकने के आलावा कोई विकल्प नहीं है। सभा में गिरीश चन्द्र, वीरेंद्र कुमार, हनुमान प्रसाद, अरूण कुमार, राम नरेश आदि प्रमुख लोग थे।       भूपेन्दर पाल सिंह

योगी सरकार में कानून व्यवस्था समाप्त

योगी सरकार में कानून व्यवस्था समाप्त हो चुकी है-रणधीर सुमन
मलूकपुर में किसानों को कम्युनिस्ट पार्टी जिला सहसचिव ने किया संबोधित
बाराबंकीं। योगी सरकार में कानून व्यवस्था समाप्त हो चुकी है। कानून व्यवस्था बनाने के  नाम पर लोगों को पकड कर एनकाउंटर किया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब माकपा कार्यालय बाराबंकी को लूटकर गिराने वाले लोगों की गिरफ्तारी करने के बजाय भू-माफियाओ को संरक्षण दिया जा रहा है। यह विचार मलूकपुर में किसानों को संबोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि किसान कर्जे में किसानों को खूब ठगा गया है। कम्युनिस्ट पार्टी जिला सचिव ब्रज मोहन वर्मा ने कहा कि आलू के दाम किसानो को नहीं मिल रहा है। उल्टे योगी सरकार हिन्दू मुस्लिम दंगे करवाने के अलावा कोई कार्य नहीं हैं। किसानों की सभा को सम्बोधित करते हुए प्रवीण कुमार ने कहा कि किसानों के आगे इस सरकार को उखाड़ फेंकने के आलावा कोई विकल्प नहीं है। सभा में गिरीश चन्द्र, वीरेंद्र कुमार, हनुमान प्रसाद, अरूण कुमार, राम नरेश आदि प्रमुख लोग थे।       भूपेन्दर पाल सिंह

शनिवार, 16 सितंबर 2017

काँग्रेस मठाधीश ने अपने प्यादोँ से प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को घेरा


उत्तर प्रदेश मेँ निष्प्राण पडी काँग्रेस मेँ प्रत्यक्ष या परोक्ष कब्जेदारी को लेकर अभी भी घात प्रतिघात जारी हैँ और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष फिलहाल इन चालोँ मेँ फँसते दिखाई दे रहे हैँ ।
ऊपरी तौर पर अभी उत्तर प्रदेश काँग्रेस मेँ भले अभी सब ठीक ठाक दिखाई दे रहा हो लेकिन पर्दे के पीछे तलवारेँ भाँजे जाने की शुरूआत हो चुकी है , वजह है काँग्रेस हाईकमान की निगाह मेँ काफी दिनोँ से सँदिग्ध और अपनी सीट बचाने के लिए काँग्रेस की दर्जनोँ सीटेँ समाजवादी पार्टी के हाथ गिरवीँ रखने वाला एक चर्चित मठाधीश बाकी क्षत्रपोँ को प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को अपने प्यादोँ के जरिए अपनी घेरेबन्दी मेँ कामयाब होता दिखाई दे रहा है ।
दर असल वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मेँ खुद से जुडे कार्यकर्ताओँ की सँख्या के लिहाज से निप्स अकेले हैँ । उनके साथ केवल एक कार्यकर्ता है जो कानपुर का युवा व्यवसाई और साधनसम्पन्न व्यक्ति है लेकिन राजनीतिक समझ और जमीनी पकड के लिहाज से शून्य है , चर्चा है कि राजबब्बर को सँसाधन वही उपलब्ध करवा रहा है और राजबब्बर की राजनीतिक हैसियत का उसी अनुपात मेँ लाभ उठा रहा है । उसकी यह कार्यशैली आमतौर पर प्रदेश काँग्रेस कमेटी मेँ बैठने वालोँ को अखर रही है लेकिन राजबब्बर की राहुल गाँधी पर मजबूत पकड के चलते ये पीसीसी ब्राँड काँग्रेसजन खुद को मजबूर पा रहे हैँ । इसका पूरा फायदा हाईकमान की निगाह मेँ सँदिग्ध उस शातिर मठाधीश ने उठाया और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री के कार्यकाल मेँ पीसीसी मेँ घुसेडे गए अपने प्यादोँ के जरिए वर्तमान अध्यक्ष को पूरी तरह से अपने घेरे मेँ ले लिया ।
इस लिहाज से अगर यह कहा जाए कि वर्तमान अध्यक्ष दिखाने के अध्यक्ष तो खुद हैँ लेकिन पर्दे के पीछे से काँग्रेस की बागडोर उस मठाधीश ने थाम रखी है ।
अब स्थिति यह है कि उस मठाधीश की पकड से राजबब्बर को निकालने के लिए गोलबँदी का दौर शुरू हो चुका है और इस विपक्षी लाबी का कहना है कि राजबब्बर ने उस मठाधीश के प्यादोँ के घेरे से खुद को बाहर ना निकाला तो 2019 मेँ काँग्रेस भाजपा से नहीँ आपस मेँ ही लडती दिखाई देगी ।
इतने दिनोँ तक बाकी क्षत्रप तो चुप रहकर मौके का इँतजार कर रहे थे लेकिन विगत 13 सितँबर को इन्दिरा गाँधी जन्मशती समारोह मेँ राजबब्बर ने यह मौका खुद बाकी मठाधीशोँ को सौप दिया जब इस समारोह का मीडिया सँयोजन प्रदेश काँग्रेस के मीडिया प्रमुख व पूर्वमँत्री सत्यदेव त्रिपाठी की जगह उस मठाधीश की विधायक बेटी व एक अपने एक अन्य प्यादे के हाथ मेँ दिलवा दिया । तिहत्तर वर्षीय सँघर्षशील नेता सत्यदेव त्रिपाठी के लिए यह बडा आघात था और इससे आहत होकर उन्होने त्यागपत्र देने का मन बना लिया था । किन्तु यह बात फैलते ही बाकी क्षत्रप और अन्य उपेक्षित काँग्रेसी सत्यदेव त्रिपाठी के इर्दगिर्द इकट्ठा होने लगे और उन पर इस्तीफा ना देकर काँग्रेस के हित मेँ तन कर खडे होने का दबाव बनाया और वे इसमेँ कामयाब भी हुए ।


-भूपिंदर पाल सिंह

रविवार, 10 सितंबर 2017

संघी गिरोह भविष्य में तर्कवादी लोगों की हत्याएं कर सकता है


 बाराबंकीं। संघी गिरोह की हिन्दुवत्व वाली विचारधारा अब अपने असली चेहरे के साथ मैदान में आ गई है। जिसका परिणाम नरेंद्र दाभोलकर गोविंद पंसारे कुलर्गी व गौरी लंकेश की हत्या हैं। भविष्य में यह लोग तर्कवादी लोगों की हत्याएं कर सकते है। 
                   उक्त विचार व्यक्त करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कौंसिल बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओ को संबोधित करते हुए सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि इस उग्रवादी विचार धारा से देश की एकता और अखंडता को खतरा है। पार्टी इस संबंध में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक जन जागरूकता अभियान चलाएगी। 
                        कौंसिल सदस्यों को संबोधित करते हुए सचिव ब्रजमोहन वर्मा ने कहा कि गांव-गांव जाकर जनसभाओं के माध्यम से किसान कर्जों की फर्जी त्रण-माफी का पर्दाफाश किया जाएगा। 15 सितंबर को अतरोरा व 16 से जनसभा से जन-जागरूकता अभियान की शुरूआत होगी।
                  बैठक में कौंसिल के वीरेंद्र कुमार, प्रवीन कुमार, मुनेश्वर बक्श वर्मा, राम नरेश वर्मा, अमर सिंह प्रधान कैलाश आदि वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

-भूपिंदर पाल सिंह

शुक्रवार, 8 सितंबर 2017

संघी हत्यारे बुद्धिजीवी लोगों की हत्याएं कर रहे हैं


बाराबंकी। अखिल भारतीय नौजवान सभा व आल इण्डिया स्टूडेण्ड फेडरेशन की कन्या कुमारी से चलकर हूसैनीवाला जाने वाली लॉन्ग मार्च को जनपद हरदोई में रोके जाने व पत्रकार गौरी लंकेश की निर्मम हत्या के विरोध में प्रदेश व देश की तानाशाह सरकार के तानाशही रवैये के खिलाफ अखिल भारतीय नौजवान सभा के कार्यकर्ताओ द्वारा पुलिस लाइन तिराहे पर प्रदेश सरकार का पुतला फूंक कर विरोध प्रदर्शन किया गया।
                    प्रदर्शन का नेतृत्व नौजवान सभा जिलाध्यक्ष अधिवक्ता बी0पी0सिंह व जिला महामंत्री प्रित्युश कान्त शुक्ल ने किया। इस दौरान कार्यकर्ताओ ने सरकार विरोधी नारे भी लगाये। 
               प्रदेश सरकार का पुतला जलाने से पूर्व गाँधी भवन में आयोजित सभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि जब से देश व प्रदेश में मोदी-योगी सरकारों आयी है, तब से लोकतंत्र समाप्त हो गया है और संघी हत्यारे गिरोह बुद्धिजीवी लोगों की हत्याएं कर रहे हैं। 
                    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव ब्रज मोहन वर्मा ने कहा कि किसान ऋण माफी योजना जनता के साथ धोखा है।
भाकपा के जिला सहसचिव डॉ0 कौसर हुसेन ने कहा कि नौजवानों और छात्रों के लांग मार्च को हरदोई पुलिस ने योगी के इशारे पर रोक कर लोकतंत्र की हत्या कर दी है। विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय सिंह, रामनरेश वर्मा, वीरेंदर कुमार, मुनेश्वर, बशत, राकेश, समाजसेवी मयंकर यादव, अधिवक्ता विजय कुमार सिंह, अधिवक्ता पुष्पेन्द्र सिंह, अधिवक्ता राजेंद्र बहादुर सिंह, अधिवक्ता कर्मवीर सिंह, अधिवक्ता आनद सिंह, अधिवक्ता मन्नू लाल चौरसिया, अधिवक्ता गौरी रस्तोगी, अधिवक्ता नीरज वर्मा, अरुण यादव, अवधेश यादव समेत आदि लोगो ने विरोध प्रदर्शन किया।

- भूपिंदर पाल सिंह 

रविवार, 3 सितंबर 2017

केरल और नम्बूदिरीपाद

ईएमएस नम्बूदिरीपाद विरल अनुभव-
ई.एम.एस. नम्बूदिरीपाद विश्व में विरल कम्युनिस्टों में गिने जाते हैं। आम तौर पर कम्युनिस्टों की जो इमेज रही है उससे भिन्न इमेज ईएमएस की थी। मुझे निजी तौर पर ईएमएस से सन् 1983 की मई में मिलने और ढ़ेर सारी बातें करने का पहलीबार मौका मिला था। मैं उन दिनों जेएनयू में भारत का छात्र फेडरेशन का अध्यक्ष था।  
  
       जेएनयू को अधिकारियों ने अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया था मैं दिल्ली में ही माकपा के किसी सांसद के वी पी हाउस स्थित एम पी फ्लैट में रहता था,पैसे नहीं थे इसलिए माकपा के केन्द्रीय दफ्तर की रसोई में खाना खाता था। इस रसोई में सभी केन्द्रीय दफ्तर के कर्मचारी खाना खाते थे और सभी पोलिट ब्यूरो सदस्य भी खाना खाते थे। जेएनयू में विख्यात मई आंदोलन चल रहा था। 450 से ज्यादा छात्र तिहाड़ जेल में बंद थे। सैंकड़ों छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन ने निष्कासित कर दिया था। इस अवस्था में आंदोलन को बीच में छोड़कर घर नहीं जा सकता था।
 
       माकपा के केन्द्रीय दफ्तर में और आम सभाओं में मैंने कईबार ईएमएस को देखा और सुना था लेकिन करीब से देखने और बात करने का मौका इस बार ही मिला था। मैं उस क्षण को आज भी भूल नहीं सकता जब ईएमएस ,हरिकिशन सुरजीत,वासव पुन्नैया, बी.टी. रणदिवे एक साथ खाना खा रहे थे और मैं खाना खाने के लिए हॉल में घुसा। मेरे साथ केन्द्रीय दफ्तर के एक कॉमरेड थे।
     भारत के कम्युनिस्ट आंदोलन के इन चार महापुरूषों को मैंने पहलीबार करीब से देखा, मेरे साथ आए कॉमरेड ने इन सभी से मेरा परिचय कराया और बातों ही बातों में मेरे साथी कॉमरेड ने सुरजीत से कहा कि मैं ज्योतिषाचार्य हूँ और पार्टी मेम्बर हूँ,संभवतः युवाओं में संस्कृत की पृष्टभूमि से कम्युनिस्ट पार्टी में आया अकेला सदस्य था। जेएनयू के कॉमरेड मुझे पंडित कहकर पुकारते थे।
    
       उस समय ईएमएस ने मजाक में सवाल किया क्या तुम यह बता सकते हो भारत में क्रांति कब होगी ? कम से कम पार्टी को तुम्हारे ज्ञान का खुछ लाभ तो मिले । मैंने तुरंत मजाक में कहा आप मुझे सटीक समय बताएं जब आप लोग भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से वाकआउट करके बाहर आए थे मैं आपको क्रांति की सटीक भविष्यवाणी बता दूँगा। मेरे इस कथन के बाद क्रांति और ज्योतिष पर वहां उपस्थित सभी ने अपने बड़े ही रोचक विचार रखे।
    
      मैंने पहलीबार देखा कि माकपा के दफ्तर में सभी एक जैसा खाना खा रहे थे, सभी कॉमरेड अपने जूठे बर्तन धो रहे थे,सभी पोलिट ब्यूरो सदस्य भी अपने बर्तन स्वयं साफ कर रहे थे। इतने बडे कम्युनिस्ट नेताओं की इस सादगी और अनौपचारिकता का मेरे ऊपर गहरा असर पड़ा। उसके बाद ईएमएस से मुझे कईबार लंबी बातें करने का मौका मिला।

     ईएमएस बेहतरीन इंसान,महान देशभक्त, लोकतंत्र के पुजारी और गंभीर बुद्धिजीवी थे। उनके पास किसी भी जटिल बात को सरलतम ढ़ंग से कहने की कला थी। वे प्रत्येक बात को जीवनानुभवों की कसौटी पर कसते थे। भारत के स्वाधीनता संग्राम में उन्होंने सक्रिय भाग लिया था।
      हमारे देश में नेता अनेक हुए हैं, लेकिन देश निर्माता कम नेता हुए हैं। भारत में आधुनिक केरल के निर्माता के रूप में ईएमएस की केन्द्रीय भूमिका रही है। ईएमएस के पास भारत के साथ केरल का विज़न था। वे केरल के जर्रे-जर्रे से वाकि़फ थे। केरल में कम्युनिस्टों की पहली सरकार 1957 में उनके नेतृत्व में बनी। यह वह जमाना था जब कांग्रेस के पास नेहरू,पटेल आदि सभी दिग्गज नेता थे, देश की आजादी के नेतृत्व का विजय मुकुट इनके माथे पर रखा था। ऐसे में कम्युनिस्टों का किसी पूंजीवादी मुल्क में मतपत्रों के जरिए सत्ता में आना विश्व की विरल घटना थी।
 
       कांग्रेस का सारा नेतृत्व ईएमएस और उनके साथी कॉमरेडों की आभा के सामने फीका पड़ चुका था। आजादी मिलने के मात्र 10 साल के अंदर कांग्रेस को देश और राज्य के अप्रासंगिक सिद्ध करना महान घटना थी। उस समय आम जनता में कांग्रेस को हराना अकल्पनीय काम था। लेकिन ईएमएस की मेधा, जनता के प्रति वचनवद्धता, राजनीतिक साख और लोकतांत्रिक राजनीतिक कार्यक्रम के आगे कांग्रेस बुरी तरह विधानसभा चुनाव में हारी। ईएमएस पहलीबार केरल के मुख्यमंत्री  बने।
     उनके मंत्रीमंडल की कार्यप्रणाली और पंडित नेहरू और कांग्रेसी नेताओं की कार्यप्रणाली में जमीन आसमान का अंतर था। उन दिनों प्रधानमंत्री ,केन्द्रीय मंत्री और राष्ट्रपति दिल्ली के बंगलों में शानदार जिंदगी जी रहे थे। कारों के काफिले से चलते थे और गांधी के विचारों के राही होने का दावा कर रहे थे। राष्ट्रपति से लेकर केन्द्रीय मंत्रियों तक के लिए आए दिन शानदार नई कारें खरीदी जा रही थीं।
      इसके विपरीत ईएमएस ने जो मंत्रीमंडल बनाया था वह सही मायने में क्रांतिकारी -गांधीवादी था। स्वयं ईएमएस साईकिल से मुख्यमंत्री कार्यालय जाते थे, साईकिल के पीछे उनका टाइपराइटर बंधा रहता था, सभी मंत्री किराए के मकानों में रहते थे। पार्टी के द्वारा निर्धारित जीवनयापन के खर्चे में गुजारा करते थे। केरल के मुख्यमंत्री और मंत्रियों की इस सादगी के सामने देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सादगी की चमक फीकी थी। सारी दुनिया के कॉमरेड अचम्भित थे कि चुनाव के जरिए केरल में कॉमरेड शासन चला रहे हैं।
     भारत के कम्युनिस्टों और क्रांतिकारियों ने आजादी की जंग में जबर्दस्त कुर्बानियां दीं और बाद में लोकतंत्र के निर्माण के लिए सबसे ज्यादा कुर्बानियां दीं। भारत के कम्युनिस्टों ने ईएमएस जैसे क्रांतिकारी की लोकतंत्र की महान सेवाओं के जरिए यह दिखाया है कि राज्य का मुख्यमंत्री कैसा होता है।
   आधुनिक केरल के निर्माण में कम्युनिस्टों की भूमिका को देखें और आज के मुख्यमंत्रियों की भूमिका और राजनीति देखें तो सही ढ़ंग से समझ सकते हैं कि मुख्यमंत्री को सीईओ नहीं राज्य निर्माता होना चाहिए। पूंजीपतियों-सामंतों का चाकर नहीं जनता का सेवक-संरक्षक और मार्गदर्शक होना चाहिए।
    ईएमएस के व्यक्तित्व की खूबी थी कि वे बेहद सरल,ईमानदार और सहज इंसान थे। उन्हें पार्टी से जितना प्यार था लेखन और अध्ययन से भी उतना ही प्यार था। वे प्रतिदिन लिखते और पढ़ते थे। संभवतः भारत के वे अकेले राजनेता हैं जिन्होंने भारत की राजनीति, संस्कृति,इतिहास,साहित्य,मार्क्सवाद चतुर्वेदी पर सबसे ज्यादा लिखा है। उनके द्वारा लिखित सामग्री 100 से ज्यादा खंड़ों में मलयालम में है,जो क्रमशः प्रकाशित हो रही है। यह सामग्री उन्होंने नियमित लेखक के नाते लिखी है। देश-विदेश की समस्याओं और नीतिगत सवालों पर ईएमएस का विज़न ,कर्म और लेखन आज भी हमारे लिए नई रोशनी देता है।   जगदीश्वर चतुर्वेदी

गुरुवार, 17 अगस्त 2017

पिछली सरकार को योगी सरकार ने बेहतर साबित कर दिया-हीरालाल यादव


माकपा नेताओ ने गाँधी भवन में धरना देकर जिला प्रशासन को सौपा 5 सूत्रीय ज्ञापन
गैर जनपदों से आये कार्यकर्ताओ ने जुलूस निकाल गिराये गये कार्यालय का किया निरीक्षण

बाराबंकी। योगी सरकार ने घोषणा की थी कि प्रदेश के गुण्ड़े उत्तर प्रदेश छोड़ दे! वरना जेलो मे होगे! वही माकपा दफ्तर योगी की पुलिस की मदद से भू-माफियाओ ने लूट-पाट कर दफ्तर को गिरा दिया। और मुख्यमंत्री को सूचना देने के बाद भी कोई कार्यवाही नही हुई। यह विचार गांधी भवन मे धरना देते हुये मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य महासचिव हीरालाल यादव ने कहा कि पिछली सरकार को योगी सरकार ने बेहतर साबित कर दिया है। और इनके राज्य में विपक्षी दलो के कार्यालय भी सुरक्षित नही है। माकपा पूर्व विधायक दीनानाथ ने कहा कि माकपा का दफ्तर ट्रस्ट का दफ्तर है। जो ट्रस्ट ने पार्टी को दिया था। वही माकपा के प्रदेश कमेटी सदस्य प्रेमनाथ राय ने कहा कि अगर प्रशासन यह समझता है कि हम चुप रहेगे तो वह उसकी नसमझी है। धरना कारियो को भाकपा राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन, लखनऊ जिला सचिव प्रदीप शर्मा, अशोक तिवारी फैजाबाद मण्ड़ल, सत्यभान सिंह आदि ने सम्बोधित किया। धरना सभा के दौरान पार्टी नेताओ द्वारा जिलाधिकारी को सम्बोधित 5 सूत्रीय ज्ञापन पत्र नायब तहसीलदार को सौपा। ज्ञापन मे कहा गया है कि रुपेश सोनी तथा उसके साथियो के उपर जबरन अपहरण करने, अवैध रुप से कार्यालय भवन ढहाने, लूटपाट करने तथा धमकी देने की धाराओ मे मुकदमा कायम कर उन्हे गिरफ्तार किया जांए। पार्टी कार्यालय को उसके पूर्व रुप से बहाल कराया जाये। ट्रस्ट की जमीन व मकान की कथित खरीद ब्रिकी के साथ सम्पूर्ण प्रकरण की जांच कराई जांए। रुपेश सोनी के अवैध कारनामो मे पुलिस की मिली-भगत तथा पार्टी कार्यालय ढहाने, लूटपाट करने की खुली छूट देने की जांचकर सख्त कार्यवाही की जांये। रुपेश सोनी के साथ आये गुण्ड़ो को चिन्हित कर उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जांए। इसके पश्चात माकपा कार्यकर्ताओ ने जुलूस निकालकर धनोखर चौराहा पर गिराये गये माकपा कार्यालय का निरीक्षण किया। और वहा पर सभा आयोजित कर कार्यकर्ताओ को सम्बोधित किया। इस मौके पर रामेश्वर प्रसाद यादव, सतीश कुमार, राजेन्द्र बहादुर सिंह, गणेश सिंह अनूप, आदि नेता मौजूद रहे।

भूपिंदर पाल सिंह

बुधवार, 9 अगस्त 2017

देशी अंग्रेजों भारत छोड़ो




गुंडों द्वारा पुलिस से मिलीभगत कर माकपा कार्यालय गिराए जाने के मामले ने पकड़ा तूल

क्रांति दिवस पर किसान सभा ने किया जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन
योगी सरकार मे कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने मे गोरखपुरी गैंग का पूरा हाथ - रणधीर सिंह सुमन 


बाराबंकी। योगी सरकार लोकतन्त्र मे ऐसी हरकते कर रही है। जो अग्रेजो के शासनकाल को भी पीछे छोड़ रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण माकपा कार्यालय को लूटवाकर गिरवा दिया है। प्रदेश की कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने मे इनके गोरखपुरी गैंग का पूरा हाथ है। यह विचार गांधी भवन मे किसान सभा द्वारा आयोजित क्रांन्त दिवस पर अंग्रेजो भारत छोड़ो’ के दिन किसानो की मांगो को पूरा करो वरना भारत छोड़ो आन्दोलन बैठक व गुण्डो द्वारा पुलिस से मिली-भगत कर माकपा कार्यालय गिराये जाने के विरोध में आयोजित सभा में किसान सभा के राज्य कौसिल सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद देश के अन्दर तीन लाख किसानो ने आत्महत्या कर ली है। और लगभग चार लाख करोड़ लोगो का रोजगार छीन चुका है। नये रोजगार का सृजन नही हो रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि पहले विदेशी अंग्रेज किसान मजदूरो को तंग कर रहे थे। उससे कही ज्यादा यह देशी अंग्रेज तंग कर रहे है। उनके समय मे किसान जिन्दा था। इनके समय मे किसान आत्महत्या कर रहा है। किसानो से ही देश चल रहा है। इसलिए किसानो को जिन्दा रखने के लिए उनको प्रति माह दस हजार रुपये पेंशन दिया जाना आवश्यक है। पार्टी जिला सहसचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि योगी सरकार किसानो के कर्जे माफ करने के सवालो पर सत्ता पर आई थी। लेकिन अभी तक किसी भी किसानो का कर्जा माफ नही किया गया। सभा मे शिवदर्शन सिंह, डा0 विनोद यादव, प्रवीण कुमार, रामनरेश वर्मा, अमर सिंह प्रधान, सरदार भूपिन्दर पाल सिंह , प्रित्यूशकान्त शुक्ला आदि किसान नेताओ ने अपने विचार रखे। सभा के पश्चात लाल झण्ड़ा लिये किसानो ने देशी अंग्रेजो भारत छोड़ो, योगी मोदी गद्दी छोड़ो किसानो को पेंशन दो आदि नारो के साथ गांधी भवन से जुलूस निकाल कर जिलाधिकारी कार्यालय पर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मुख्यमंत्री को सम्बोधित माकपा कार्यालय गिराये जाने का शिकायती प्रार्थना पत्र अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को दिया। जुलूस में रामेश्वर यादव, निर्मल वर्मा, राजेन्द्र सिंह राणा, गणेश सिंह अनूप, कर्मवीर सिंह, अवधेश यादव, अमर सिंह गुड्डु, सतीश कुमार, गिरीश चन्द्र, विजय प्रताप सिंह आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

- भूपिंदर पाल सिंह 

रविवार, 6 अगस्त 2017

माकपा कार्यालय पर लुटपाट पुलिस व सरकार की मिलीभगत

माकपा कार्यालय पर लुटपाट पुलिस व योगी सरकार की मिलीभगत - रणधीर सिंह सुमन

1962 मे बने कम्युनिस्ट कार्यालय पर पुलिस की मौजूदगी में गुंडों ने किया कब्जे का प्रयास बिल्डिंग में लूटपाट, अपरहण कर कार्यालय सहायक को बनाया गया बंधक दबंगों के कब्जे से छुट पीड़ित कार्यालय सहायक की नहीं दर्ज की गयी रिपोर्ट शिकायत करने पहुचे सहायक से पूर्व नगर कोतवाली पुलिस की आव-भगत में बैठे आरोपी


बाराबंकी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दफ्तर पर बीती शनिवार की रात्रि गुंडों ने लुटपाट करते हुए जमकर उत्पात मचाया। वहा मौजूद कार्यालय सहायक का अपरहण कर बिल्डिंग को अपने कब्जे में लेकर गिराने का कार्य किया गया। पुलिस की मिलीभगत से गुंडे पूरी रात कार्यालय में रखे सामान, महत्वपूर्ण कागजातों समेत वहा कार्यालय सहायक को भी साठ-गाठ कर बंधक बना लिया गया। मामला शनिवार की शाम का है। जहा पहले फिल्मी अंदाज में कार्यालय पहुचे दबंगों ने कार्यालय सहायक रामेश्वर प्रसाद यादव को बंधक बनाया। बाद में पुराना निब्लेट तिराहा स्थित एक मकान में बंधक बनाकर कैद कर दिया गया। जिसके बाद रविवार की भोर में बंधक रामेश्वर को छोड़ दिया गया। जब वापस कार्यालय पहुचे सहायक ने देखा तो कार्यालय तहस-नहस हो चुका था। बावजूद रविवार की सुबह नगर कोतवाली शिकायत करने पहुचे पीड़ित से पहले ही आरोपी रुपेश सोनी अपने अन्य साथियों समेत नगर कोतवाली पुलिस की खुशामद मे जुटा हुआ था। बावजूद पीड़ित की न तो अपरहण करने की रिपोर्ट दर्ज की गयी। बावजूद सूत्र बता रहे है की इस पूरे प्रकरण में नगर कोतवाली पुलिस के ईमानदार अफसरों ने अपनी जमकर जेब गर्म की।

कम्युनिस्ट कार्यकर्ता के साथ हुई घटना से आये उबाल ने की आन्दोलन की तैयारी जब पीड़ित ने लगायी मुख्यमंत्री से गुहार
माकपा जनपद बाराबंकी के कार्यालय सहायक रामेश्वर प्रसाद यादव का अपरहण कर कार्यालय में रखे सामान व बिल्डिंग को गिराने के मामले में नगर कोतवाली पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही न किये जाने से आहत पीड़ित ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाते हुए जेब गर्म करने वाले दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।
बॉक्स आरोपी समेत 14 अन्य पर पूर्व में दर्ज हो चुका है धोखाधडी का मुकदमा
दबंगों द्वारा कार्यालय सहायक को बंधक बनाकर किये गए अपरहण के बाद डायल 100 पर दबंगो के उत्पात की सूचना दी गयी। बावजूद मौके पर पहुची पुलिस आरोपियो को भैया बाबू करती हुई दिखाई दी। कार्य रुकवाए जाने की जगह पर आरोपियों से साठ-गाठ करती हुये डायल 100 पुलिस को देखा गया।
कार्यालय सहायक रामेश्वर प्रसाद यादव द्वारा पूर्व में थाना नगर कोतवाली पर आरोपी रुपेश सोनी समेत 14 अन्य लोगो पर कार्यालय पर कब्जा करना व जालसाजी कर कार्यालय की ट्रस्ट भूमि को फर्जी तरीके से बैनामा कराये जाने के मामले में लगभग 5 माह पूर्व ही मुकदमा दर्ज कराया गया था। बावजूद आरोपियों से मोटी रकम वसूल कर कुंडली जमाये बैठी नगर कोतवाली पुलिस का दोगला चेहरा जनता के सामने आज उजागर हो गया।

पुलिस के संरक्षण में गिराया गया माकपा कार्यालय

क्या है पूरा मामला

आरोपी की खुशामद में दिखाई दी नगर कोतवाली पुलिस रात भर पुलिस के संरक्षण में चले बिल्डिंग गिराने के मामले में सुबह उच्चाधिकारियों को लगातार फोन पर सूचना दिए जाने के बाद भी नगर कोतवाली पुलिस मौके पर नहीं पहुची। बावजूद दिन के लगभग 1 बजे अपर पुलिस अधीक्षक को पार्टी राज्य कौसिल सदस्य रणधीर सिंह सुमन द्वारा पूरे मामले की जानकारी देने पर आनन् फानन में पहुची पुलिस ने किसी भी दबंग को गिरफ्तार नहीं किया। मौके पर काम बंद कराने के नाम पर केवल लीपा-पोती करती रही।
योगी सरकार में विरोधी दलों के कार्यालयों के ऊपर कब्जा करवाकर लूटपाट व अपरहण जैसे कार्य पुलिस के संरक्षण में शुरू हो गए है। जिसकी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी घोर निंदा करती है। पार्टी के राज्य परिषद् सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि जिस तरह से कल माक्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के बाराबंकी कार्यालय को गिराया गया है। और लूटपाट की गयी है। वो भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला धब्बा है। दफ्तर गिराने वाला व्यक्ति पुलिस की आव-भगत में बैठा हुआ था। अपरहण से लेकर की गयी लुटपाट पुलिस की मिली भगत व योगी सरकार के इशारे पर हो रही है। जिसके बाद जनपद समेत प्रदेश में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी बड़े पैमाने पर आन्दोलन चलायेगी।
धनोखर चौराहा स्थित फोटो वाली गली में सन 1962 से माकपा का कार्यालय उक्त बिल्डिंग में स्थित है। त्रस्त की भूमि है। बावजूद षड़यंत्र कर फर्जी तरीके से लिए गए बैनामे के बाद कार्यालय पर कब्जा करने पहुचे दबंगों ने कार्यालय पर कब्जा करते हुए बिल्डिंग को तहस-नहस कर गिरवा दी गयी। सूत्र बताते है कि इस पुरे मामले में नगर कोतवाली पुलिस ने मोटी रकम नीचे दबाकर बड़े पैमाने पर कार्यालय में कब्जा करवाने का प्रयास किया। राज्य परिषद् सदस्य रणधीर ने कहा पूरे प्रदेश में होगा आन्दोलन नौजवान सभा जिला महामंत्री ने की घटना की निंदा
अखिल भारतीय नौजवान सभा जिला महामंत्री पंडित प्रित्युश कान्त शुक्ल ने माकपा कार्यालय पर गुंडों द्वारा किये गए कब्जे के प्रयास पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यो की घोर निंदा की जाती है। जब प्रदेश में विपक्ष के कार्यालय ही सुरक्षित नहीं है तो आम जन की सुरक्षा की उम्मीद भी लगाना गलत है? पार्टी कार्यालय पर जो कब्जा करने का प्रयास किया गया है वो अपराध है। और पुलिस को जल्द से जल्द कार्यवाही करनी चाहिए।

- सरदार भूपिंदर पाल सिंह

सोमवार, 31 जुलाई 2017

किसानो को जिन्दा रहने के लिए कौरवो का विनाश करना होगा

राजेन्द्र यादव

बाराबंकी किसानो को अब धर्म युद्ध लड़ना होगा| किसानो को जिन्दा रहने के लिए इस धर्म युद्ध में कौरवो का विनाश करना होगा| यदि किसान धर्म युद्ध में कौरवो का विनाश नहीं कर पाते है तो आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा| उक्त विचार ग्राम अजगना जहागीराबाद में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के किसान सम्मलेन में किसान सभा के प्रांतीय महामंत्री पूर्व विधायक राजेन्द्र यादव ने कही| पूर्व विधायक ने आगे कहा की आडानी, अम्बानी की नौकरी करने वाले सत्तारूढ़ दल के लोग किसानो का भला नहीं कर सकते है| इसलिए किसानो का कर्जा नहीं माफ़ कर रहे है| उद्योगपतियों का कर्जा माफ़ करने में यह भाजपा सरकार सबसे आगे है| सम्मलेन को संबोधित करते हुए किसान सभा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा की मोदी योगी सरकारे किसानो की जमीनों को बिकवा लेना चाहती है | इसीलिए किसानो को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं दिया जा रहा है| भारतीय कम्नुनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि किसानो को १० हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन देकर उनकी आत्म हत्याओ को रोका जा सकता है| सम्मलेन को डॉ. कौसर हुसैन, जिलाध्यक्ष नौजवान सभा सरदार भूपिंदर पाल सिंह, जिला महामंत्री पंडित प्रित्युश कान्त शुक्ल, प्रवीन कुमार, मुनेश्वर बक्श वर्मा, विनोद कुमार यादव आदि ने संबोधित किया| सम्मलेन सभा में पूर्व प्रधान अमर सिंह गुड्डू, संतराम, अमर सिंह, दलसिंगार, गिरीश चन्द्र, राजेश सिंह, रामनरेश वर्मा, पुष्पेन्द्र सिंह, अवधेश यादव, प्रदीप वर्मा, गिरीश चन्द्र आदि मौजूद रहे| अध्यक्षीय भाषण शिवदर्शन वर्मा ने दिया तथा संचालन किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया|

बुधवार, 26 जुलाई 2017

अडानी, अम्बानी की नौकरी छोडो’

बाराबंकी। योगी मोदी की सरकार नही चलेगी, नही चलेगी, किसान कर्जो की माफी, किसानो का नरसंहार बन्द करो। अडानी, अम्बानी की नौकरी छोडो’, जेल में तेरी जगह है कितनी, देखा है और देखेगें, हर जोर जुल्म के टक्कर पर संघर्ष हमारा नारा है, आदि गगनभेदी नारो के साथ देवा रोड़ स्थित गांधी भवन से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का जेल भरो जुलूस शुरु होकर पटेल तिराहे होते हुये जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। जंहा पर कार्यकर्ताओ ने जमकर नारेबाजी करते हुये अपनी गिरफ्तारी देनी चाही। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पूरे देशभर में किसानो की समस्याओ को लेकर जेल भरो आन्दोलन किया जा रहा है। देश-प्रदेश की सत्तारुढ़ दल की किसान विरोधी नीतियो के कारण प्रतिदिन किसान आत्म-हत्यांए कर रहा है। किसानो ने आन्दोलन के दौरान यह मांग कि किसानो को उनकी फसलो की सरकारी लागत मूल्य के हिसाब से लाभकारी मूल्य निर्धारित किया जाये। जेल भरो आन्दोलन जुलूस में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समेत अखिल भारतीय नौजवान सभा व किसान सभा कार्यकर्ताओ ने हिस्सा लिया। आन्दोलन के दौरान बृजमोहन वर्मा, रणधीर सिह सुमन, जिलाध्यक्ष नौजवान सभा सरदार भूपिन्दर पाल सिंह, पंड़ित प्रत्यूशकान्त शुक्ला, डा0 कौशर हुसैन, अनिल बौझड़, मंयकर यादव, रामतेज यादव, गिरीश चन्द्र, रामनरेश वर्मा, सन्तराम प्रधान, विनय कुमार सिंह, अमर सिंह, दलसिंगार, विनोद यादव, मुनेश्वर बक्श वर्मा, शिवदर्शन वर्मा, शम्भू वर्मा, जितेन्द्र वर्मा, सुभाष वर्मा, शाहिद अली, रमेश चन्द्र, राजेन्द्र बहादुर सिंह राणा, कर्मवीर िंसह, सुरेश यादव, आशूतोष वर्मा, लवकुश, धीरेन्दर, अम्बिका, अमर सिंह गुड्डू, प्रदीप यादव, कपिल वर्मा, सलाम मोहम्मद आदि प्रमुख लोग शामिल रहे। उपजिलाधिकारी एस0पी0सिंह व क्षेत्राधिकारी नगर श्वेता श्रीवास्तव ने धारा 144 का उल्लंघन न होने पर गिरफ्तारी से मना कर दिया।