गुरुवार, 12 सितंबर 2019

महात्मा गांधी के विरोध का रवैया राष्ट्रविरोधी

बाराबंकी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन एडवोकेट ने गुरूवार को जिलाधिकारी डाॅ. आदर्श सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और अधिशाषी अधिकारी के विरूद्ध एक मांग पत्र सौंपा। जिसमें उन्होंने कहा है कि विगत सन् 1978 से निरंतर आयोजित होने वाले गांधी जयन्ती समारोह के कार्यक्रम हेतु नगर पालिका परिषद का मैदान और हाल आरक्षित किया जाता रहा है। लेकिन सत्तासीन लोग महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती के कार्यक्रम हेतु नगर पालिका परिषद का मैदान और हाल आरक्षित करने से मना कर रहे है। इससे यह साफ तौर पर जाहिर है कि सत्ता पर बैठे लोगों का महात्मा गांधी की विचारधारा से दूर दूर तक को कोई वास्ता नहीं है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महात्मा गांधी की विचारधारा को आत्मसात करते हुए स्वच्छता अभियान से आम आदमी को जोड़ने का प्रयास कर रहे है। यही नहीं सीएम योगी आदित्यनाथ महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती पर 48 घण्टे विधानसभा का विशेष सत्र चलाकर महात्मा गांधी की विचारधारा का अनुसरण करने की योजना बना रहे है। ऐसे में नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष और अधिशाषी अधिकारी का महात्मा गांधी के प्रति रवैया राष्ट्र विरोधी प्रतीत होता है। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी के हत्यारे नाथुराम गोडसे की विचारधारा का समर्थन करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान पर दुःख प्रकट करते हुए उन्हें चेतावनी दी थी। जिसके बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने माफी मांगी थी। इन सबके के बावजूद कुछ तथाकथित भाजपा नेता एक बार फिर महात्मा गांधी को अपमानित करने का काम कर रहे है। वह भी तब जब भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व महात्मा गांधी की 150वीं जयन्ती विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मना रहा है। ऐसे में जनपद के कुछ गैर राजनीतिक एवं अपराधिक चरित्र वाले लोग कभी भगवान तो कभी महापुरूषों को अपमानित करने से नहीं चूकते। श्री सिंह ने डीएम डाॅ. आदर्श सिंह से मांग की है कि उक्त प्रकरण के संदर्भ में जल्द ही कोई निष्कर्ष निकालकर गांधी जयन्ती के कार्यक्रम हेतु नगर पालिका परिषद का मैदान एवं हाल आरक्षित का करने का निर्देश जारी करें।

रणधीर सिंह सुमन
9450195427

बुधवार, 11 सितंबर 2019

बलात्कारी स्वामी चिंमयानंद को गिरफ्तार करो

बाराबंकी। योगी सरकार बलात्कारियों को खुला संरक्षण दे रही है, इसका जीता जागता उदाहरण भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानन्द की गिरफ्तारी न होना। इसके पूर्व चिन्मयानन्द का बलात्कार का मुकदमा इसी सरकार द्वारा वापस लिया जा चुका है।
 यह आरोप भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शनकारियों को सम्बंधित करते हुए सदस्य राज्य परिषद रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि सरकार दिवालिया हो चुकी है और बिजली जैसे आवश्यक जरूरत के दाम 15 गुना बढ़ा दिया है इस तरह से जनता को लूटा जा रहा है। पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि दिल्ली में 200 यूनिट बिजली उपभोक्ताओं को निःशुल्क है, वहीं उत्तर प्रदेश में लगभग एक यूनिट बिजली का दाम 8 रूपये कर दिया गया है। पार्टी के सह सचिव डाॅ0 कौसर हुसैन ने कहा कि बस स्टेशन को बन्द करके जिला प्रशासन भूमाफियाओं से मिलकर बस अड्डा खाली करा रही है जो जनहित में नहीं है। पार्टी के दूसरे सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि आवारा पशुओं की वजह से किसानों की फसलें नष्ट हो गई हैं, सरकार तुरन्त उसका मुआवजा दे। किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि गांवों में बिजली दे नहीं रहे हैं और बिल 24 घण्टे का वसूलते हैं वहीं किसान सभा के उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार ने कहा कि बलात्कारी चिन्मयानन्द को अविलम्ब गिरफ्तार करके सरकार अपनी निष्पक्षता का परिचय दे।
 प्रदर्शन गांधी भवन से प्रारम्भ होकर जिलाधिकारी कार्यायल पर गगन भेदी नारों के बीच में एक छह सूत्रीय ज्ञापन गिरीश कुमार द्विवेदी व अंकित वर्मा उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा गया।   
 प्रदर्शनकारियों में गिरीश चन्द्र, मुनेश्वर बक्श, सन्तराम प्रधान, अमर सिंह प्रधान, कल्लूराम पूर्व प्रधान, रामनरेश वर्मा, श्याम सिंह, अंकुर वर्मा, सरदार भूपिन्दर पाल सिंह उर्फ शैन्की, अवधेश, सुरेश चन्द्र, रमेश, महेन्द्र यादव, जियालाल, दल सिंगार आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहें।

रविवार, 1 सितंबर 2019

मायावती कश्मीर पर गलत बयानी कर रही है - डी राजा

 जम्मू एवं कश्मीर के बारे में बोलते हुए कहा कि उन्होंने दो बार राज्य का दौरा करने का प्रयास किया परन्तु दोनों बार भाजपा सरकार और राज्यपाल ने उन्हें हवाई अड्डे से बाहर नहीं जाने दिया और उन्हें हिरासत में लेकर वापस लौटने को मजबूर किया। हवाई जहाज में यात्रा कर रहे चन्द स्थानीय यात्रियों ने उन्हें बताया कि पूरे राज्य में हालात बहुत खराब है जबकि सरकार परिस्थितियों के सामान्य होने का दावा कर रही है। सह यात्रियों के अनुसार जीवन रक्षक दवाईयां, चिकित्सा सुविधायें तक आम नागरिकों को नहीं मिल रही है। तनाव के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि अगर स्थितियां सामान्य हैं तो उस राज्य के राजनैतिक नेताओं को रिहा क्यों नहीं किया जा रहा है और वहां पर आम नागरिकों का जीवन सामान्य क्यों नहीं किया जा रहा है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 💃
के नव निर्वाचित महासचिव डी. राजा, सांसद ने लखनऊ में पार्टी के राज्य परिषद सदस्यों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने का कृत्य असंवैधानिक और गैर प्रजातांत्रिक है। संसद के बजट सत्र को लम्बा खीच कर सरकार ने 30 बिलों को बिना चर्चा किये और नियमों के खिलाफ जाकर अपने संख्या बल के आधार पर पारित करा लिया। यहां तक कि उस राज्य का केवल एक भाजपाई सांसद ही संदन में उपस्थित था और बाकी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इस तरह संसद जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं का वजूद समाप्त करने और उन्हें बेमतलब कर देने के प्रयास चल रहे हैं। इस तरह प्रजातंत्र पर खतरा मंडरा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर के विशेष प्राविधान केवल जम्मू एवं कश्मीर राज्य की जनता को ही नहीं प्राप्त हैं बल्कि देश के अन्य तमाम राज्यों को भी संविधान के अनुसार प्राप्त हैं। उसके दुष्परिणाम और बेचैनी देश के दूसरे भागों में भी दिखने लगी हैं। भारत राज्यों का एक गणतंत्र है और उस ढ़ाचे को ही समाप्त करने की साजिश चल रही है। सरकार ने कश्मीर की जनता, वहां के राजनैतिक नेताओं को विश्वास में लेने का प्रयास क्यों नहीं कर रही है और मानवीय मूल्यों की बर्बर हत्या कर रही है।

उन्होंने बसपा सुप्रीमों मायावती पर कश्मीर मामले में संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष डा. अम्बेडकर को गलत तरीके से उद्घृत करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डा. अम्बेडकर की सहमति से ही अनुच्छेद 370 संविधान में शामिल किया गया था। मूलतः डा. अम्बेडकर ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी और आरएसएस तथा हिन्दू महासभा की भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने की मांग को ठुकरा दिया था और उन्होंने भारत को धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणतंत्र बनाने का समर्थन किया था।

भाकपा महासचिव डी. राजा ने आसाम के एनआरसी का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे तरीकों से भाजपा और आरएसएस पूरे देश के माहौल को साम्प्रदायिक कर अपने पक्ष में ध्रुवीकरण के प्रयास कर रहे हैं। एनआरसी के प्रकाशन से कई तरह के सवाल पैदा हो गये हैं और सरकार उनके हल के कोई प्रयास नहीं करना चाहती। क्या होगा, यह अभी तक अनिश्चित है। सरकार को इस मामले पर भी राजनैतिक दलों के नेताओं को विश्वास में लेना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख आरक्षण पर बहस की मांग कर रहे हैं। पहले उन्होंने इस समाप्त करने की मांग की थी। आरएसएस शुरूआती दौर से दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों तथा महिलाओं को समाजिक न्याय का विरोध करती रही है। बहस का उनका मंतव्य मूलतः आरक्षण को समाप्त करवा देने का है। हालात यह है कि सरकारी नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं, भर्ती नहीं की जा रही है और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का निजीकरण कर उनमें भी आरक्षण समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने प्रश्न खड़ा किया कि कितने लोगों को आरक्षण का लाभ इस समय मिल पा रहा है? इस प्रकार मोदी सरकार आरएसएस के दिशानिर्देशन में उसकी हिन्दू राष्ट्र और पूजीपतियों के हितों को पूरा करने की दिशा में ही आगे बढ़ रही है।

भाकपा महासचिव ने कहा कि नोट बंदी और जीएसटी के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था गहरे संकट में फंस चुकी है। इन कदमों से अनौपचारिक क्षेत्र और छोटे एवं मध्य उद्योग पहले ही बर्बाद हो चुके थे। मोदी ने सत्ता में आने पर हर साल दो करोड़ रोजगार सृजित करने का वायदा किया था परन्तु वास्तविकता है कि साढ़े पांच साल के शासन में उन्होंने बेरोजगारी की दर को आजादी के बाद पहली बार चरम पर पहुंचा दिया है। कृषि पहले से ही घाटे का सौदा बन चुकी है। अर्थव्यवस्था को संभालने के बजाय सरकारी खर्चे के लिए सरकारी सम्पदाओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को निजी पूंजी के हाथों बेच रही है और भारतीय रिजर्व बैंक के रिजर्व को भी खाली कर दिया गया है। सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वीकार किया कि आर्थिक मंदी के हालात हैं और भारतीय रूपया विश्व बाजार में अपनीे कीमत खोते हुए इस स्तर पर आ गया है कि 1 अमरीकी डालर को खरीदने के लिए आपको 72 से ज्यादा भारतीय रूपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वे वादा करती हैं कि इससे निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा लेकिन आयात की कीमत हमें कितनी ज्यादा देने होगी, उसका जिक्र नहीं करती है।

बेपरवाह (reckless) विनिवेश की प्रक्रिया चल रही है और सकल उत्पादन जीडीपी भी अपने न्यूनतम स्तर पर है। औद्योगिक उत्पादन तो ऋणात्मक हो चुका है। अगर सरकार के आकड़ों को सही मान लिया जाये तो औद्योगिक उत्पादन की दर आधा प्रतिशत रह गयी है।

उन्होंने कहा कि बैंकों में बड़े पूजीवादी घरानों के ऋण एनपीए होते चले जा रहे हैं, लोगों को देश छोड़ कर भागने दिया गया। उन्होंने 10 सरकारी बैंकों का विलय कर 4 बैंक कर देने की भी निन्दा की कि इससे अंततः बेरोजगारी की गति और बढ़ेगी। उन्होंने सरकारी दावों पर प्रहार करते हुए कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऋण देने की क्षमता बढ़ाने का क्या उद्देश्य है? यह केवल बड़े पूंजीपतियों को और ऋण देने तथा पुराने एनपीए को बट्टे खाते डालने की साजिश के तौर पर किया गया है। इससे किसानों और छोटे व्यापारियों को तो सुविधायें नहीं बढ़ेंगी बल्कि शाखाओं के बंद होने के कारण और बेरोजगारी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस बात को याद रखने की कोशिश नहीं कर रही है कि 2008 की वैश्विक मंदी से भारत अगर बचा रहा था तो उसका एकमात्र कारण भारत का मतबूत सरकारी वित्तीय क्षेत्र था जिसे गर्त की ओर ढकेला जा रहा है।

भाकपा महासचिव डी. राजा ने सभी धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक शक्तियों का आवाहन किया कि वे आरएसएस/भाजपा के साम्प्रदायिक एजेंडे के खिलाफ संघर्ष के लिए एकजुट हों।

उत्तर प्रदेश के राजनैतिक परिदृश्य पर बोलते हुए भाकपा महासचिव डी. राजा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में घोर साम्प्रदायिक और अपराधियों को संरक्षण देने वाली नीतियों को लागू किये हुए जिसका परिणाम मॉब लिंचिंग, दलितों और आदिवासियों पर बढ़ते अत्याचार और बलात्कार के बाद हत्या की घटनाएं अपनी ऐतिहासिक ऊंचाईयों को छू चुकी है। पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल है। उन्होंने रविदास मंदिर, सोनभद्र, उन्नाव जैसी तमाम घटनाओं का उल्लेख किया।

एक प्रश्न के जवाब में होने कहा कि भाकपा उत्तर प्रदेश के उप चुनावों में 7-8 जगहों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। एक दूसरे प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि नरेश अग्रवाल का विधायक पुत्र पार्टी बदल कर भाजपा में चला गया परन्तु न तो अखिलेश यादव ने विधान सभा अध्यक्ष को उसकी सदस्यता रद्द करने का पत्र भेजा और न ही विधान सभा अध्यक्ष ने इस बात का संज्ञान लिया। इसी तरह भाजपा के उन्नाव के विधायक की गिरफ्तारी पर उसे भाजपा से निष्कासित कर दिया परन्तु उसकी भी सदस्यता अभी तक समाप्त नहीं की गयी है।

शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की महान क्रान्तिकारी नेत्री कल्पना दत्त



कल्पना दत्त: लड़के के भेष में अग्रेजों से लड़ने वाली क्रांतिकारी महिला!
-खुर्शीद आलम
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलनों में हर किसी वर्ग और समुदाय ने अपना योगदान दिया. एक तरफ जहां पुरुष क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों से लोहा लिया वहीं महिलाओं ने भी आंदोलनों में कूद कर ईट से ईट बजा दी थी.

उन्हीं महिला क्रांतिकारियों में एक नाम कल्पना दत्त का है, जिन्होंने अंग्रेजों से बड़ी निडरता और साहस के साथ जमकर लोहा लिया था.

इनकी निडरता और वीरता को देखने के बाद ही कल्पना को ‘वीर महिला’ के ख़िताब से नवाज़ा गया था. आज़ादी की लड़ाई में इनके योगदान को देखते हुए इन पर उपन्यास सहित फ़िल्में भी बनाई गईं हैं.

ऐसे में इस क्रांतिकारी महिला के बारे में जानना दिलचस्प होगा…

जब हुई सूर्य सेन से मुलाकात!
कल्पना दत्त का जन्म 27 जुलाई 1913 को चटगांव के श्रीपुर गांव में हुआ था, जो अब बांग्लादेश का हिस्सा है. ये एक मध्यम वर्गीय परिवार से थीं. इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चटगांव से हासिल किया.

1929 में मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद कलकत्ता चलीं गईं. वहां पर विज्ञान में स्नातक के लिए बेथ्यून कॉलेज में दाखिला ले लिया. इस बीच कल्पना मशहूर क्रांतिकारियों की जीवनियाँ भी पढ़ने लगी थीं.

आगे, जल्द ही छात्र संघ से जुड़ गईं और क्रांतिकारी गतिविधियों में रूचि लेनी लगी. इसी महिला छात्र संघ में बीना दास और प्रीतिलता वड्डेदार जैसी क्रांतिकारी महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही थीं.

तभी इनकी मुलाकात स्वतंत्रता सेनानी सूर्य सेन से हुई, जिन्हें ‘मास्टर दा’ के नाम से भी जाना जाता है.

कल्पना इनके विचारों से बहुत प्रभावित हुईं और सूर्य सेन के संगठन ‘इंडियन रिपब्लिकन आर्मी’ में शामिल हो गईं. इसके बाद कल्पना खुलकर अंग्रेजों के खिलाफ अपनी मुहिम छेड़ चुकी थीं.

भेष बदलकर धमाका करने की बनाई योजना!
1930 में जब इस संगठन ने ‘चटगांव शास्त्रानगर लूट’ को अंजाम दिया, तो कल्पना अंग्रेजों की नज़र में चढ़ गई थीं. ऐसे में इन्हें कलकत्ता से पढ़ाई छोड़कर वापस चटगांव आना पड़ा.

हालांकि इन्होंने संगठन का साथ नहीं छोड़ा और लगातार सूर्य सेन के संपर्क में बनी रहीं. इस हमले के बाद कई क्रांतिकारी नेता गिरफ्तार किये गए थे, जो अपने ट्रायल का इन्तेज़ार कर रहे थे. वहीं कल्पना को कलकत्ता से विस्फोटक सामग्री सुरक्षित ले जाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी. कल्पना चटगांव में गुप्तरूप से संगठन के लोगों को हथियार पहुँचाने लगीं.

फिर, कल्पना ने इन क्रांतिकारियों को आज़ाद कराने का फैसला लिया. इसके लिए इन्होंने जेल की अदालत को बम से उड़ाने की योजना बनाई. इनकी इस योजना में प्रीतिलता जैसी क्रांतिकारी महिला भी शामिल थीं.

इसके लिए इनको हथियार प्रशिक्षण की भी ज़रुरत थी. इसीलिए ये रात के सन्नाटे में सूर्यसेन के गांव जातीं और प्रीतिलता के साथ रिवाल्वर शूटिंग में नियमित अभ्यास करने लगी थीं. 

सितम्बर 1931 को कल्पना और प्रीतिलता ने चटगांव के यूरोपीयन क्लब पर हमला करने का फैसला किया. जिसके लिए इन्होंने अपना हुलिया बदल रखा था.

कल्पना एक लड़के के भेष में इस काम को अंजाम देने वाली थीं, मगर पुलिस को इनकी इस योजना के बारे में पता चल चुका था. इसीलिए, अपने मिशन को अंजाम देने से पहले ही कल्पना को गिरफ्तार कर लिया गया.

दोबारा हुईं गिरफ्तार और मिली उम्र कैद की सजा!
बाद में अभियोग सिद्ध न होने पर उनको रिहा कर दिया गया था. जेल से रिहा होने के बाद भी पुलिस उन पर पैनी नज़र रखे हुई थी. यहां तक की उनके घर पर भी पुलिस का पहरा लगा दिया गया था.

परन्तु, कल्पना पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहीं और घर से भागकर सूर्य सेन से जा मिलीं.

इसके बाद ये दो साल तक अंडरग्राउंड हो गईं और गुप्त रूप से क्रांतिकारी आंदोलनों में हिस्सा लेती रहीं. दो साल बीत जाने के बाद पुलिस सूर्य सेन का ठिकाना पता लगाने में सफल रही.

17 फ़रवरी 1933 को पुलिस ने सूर्य सेन को गिरफ्तार कर लिया, जबकि कल्पना अपने साथी मानिन्द्र दत्ता के साथ भागने में कामयाब रहीं. कुछ महीनों तक ये इधर उधर छुपती रहीं, मगर  मई 1933 को ही कल्पना को पुलिस ने घेर लिया था.

कुछ देर तक चली इस मुठभेड़ के बाद कल्पना और उनके साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया. जब इन क्रांतिकारियों पर मुकदमा चलाया गया. तब 1934 में सूर्य सेन और उनके साथी तारकेश्वर दस्तीकार को फांसी की सजा सुनाई गई.

जबकि, कल्पना दत्त को उम्र कैद की सजा हुई.

मिली आज़ादी तो, राजनीति में भी अजमाया हाथ!
21 वर्षीय कल्पना को आजीवन करावास की सजा मुकर्र हो चुकी थी. अब वो किसी भी क्रांतिकारी आंदोलनों का हिस्सा नहीं बनने वाली थीं, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था. 1937 में पहली बार प्रदेशों में मंत्रिमंडल बनाये गए.

तब महात्मा गांधी और रवीन्द्रनाथ टैगोर आदि नेताओं ने क्रांतिकारियों को छुड़ाने की मुहीम छेड़ दी थी. जिसके बाद अंग्रेजों को बंगाल के कुछ क्रांतिकारियों को छोड़ना पड़ा था. उन्हीं क्रांतिकारियों में कल्पना दत्त भी शामिल थीं.

खैर, 1939 में कल्पना जेल से रिहा हुईं.

आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए कल्पना ने कलकत्ता  विश्वविद्यालय में दाख़िला ले लिया. स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद कल्पना भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ गईं. कल्पना जेल के अंदर ही कई कम्युनिस्ट नेताओं के संपर्क में रहीं और उनके विचारों से प्रभावित भी हुई थीं. उस दौरान इन्होंने ने मार्क्सवादी जैसे विचारों को पढ़ना भी शुरू कर दिया था.

1943 में कल्पना भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव पूरन चंद जोशी से विवाह के बंधन में बंध गईं. इस तरह कल्पना दत्त अब कल्पना जोशी बन चुकी थीं. यह वही दौर था, जब बंगाल की स्थिति आकाल और विभाजन के चलते गंभीर थी.

कल्पना ने इस समय बंगाल के लोगों के साथ हमदर्दी बांटी और राहत कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया था. इसके बाद कल्पना देश की आज़ादी के साथ ही भारतीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगी.

इन पर आधारित हैं कई उपन्यास और बॉलीवुड फ़िल्में!
इस दौरान इन्होंने चटगांव लूट केस पर आधारित अपनी आत्मकथा भी लिखी थी. कम्युनिस्ट पार्टी का साथ छोड़ने के बाद कल्पना एक सांख्यिकी संस्थान में कार्य करने लगी, जहां पहले भी वो कुछ दिनों तक काम किया था.

बाद में कल्पना बंगाल से दिल्ली आ गईं और इंडो सोवियत सांस्कृतिक सोसायटी का हिस्सा बनीं. 1979 में कलपना जोशी को इनके कामों को देखते हुए ‘वीर महिला’ की उपाधि से नवाज़ा गया था.

8 फ़रवरी 1995 को कल्पना दिल्ली में इस दुनिया को अलविदा कह दिया था. खैर, कल्पना ने दो बच्चों को जन्म दिया था. जिनका नाम चांद जोशी और सूरज जोशी था. चाँद जोशी एक बहुत बड़े पत्रकार रह चुके हैं. जिनकी पत्नी मानिनी ने इनके ऊपर एक उपन्यास ‘डू एंड डाई: चटग्राम विद्रोह’ लिखा था.

इसी कड़ी में दिलचस्प बात यह है कि 2010 में भारतीय सिनेमा जगत ने भी इन पर आधारित एक फिल्म बनाई थी. इस फिल्म का नाम ‘खेलें हम जी जान से’ जो आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी थीं.

इस मूवी की कहानी मानिनी के उपन्यास से ही ली गई थीं. इसमें अभिषेक बच्चन और दीपिका पादुकोण ने मुख्य किरदार की भूमिका निभाई है. इस फिल्म में चटगांव विद्रोह को बखूबी दिखाया गया, जिसमें लगभग सभी रियल पात्रों को भी दर्शाया गया था.

जिस निडरता और साहस के बल पर कल्पना दत्त जोशी ने देश के लिए खुद को समर्पित कर दिया, वह आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है.


रविवार, 11 अगस्त 2019

सत्तारुढ़ दल भारतीय नागरिकों का दमन कर रहा है

बाराबंकी ।जम्मू और कश्मीर के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 370 व 35ए को समाप्त करने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है इस निर्णय के पश्चात पाक अधिकृत कश्मीर, चीन अधिकृत कश्मीर का दावा स्वत समाप्त हो जाता है क्योंकि अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर को देश के साथ जोडते हुए देश अभिन्न हिस्सा बनाते थे। सत्तारूढ़ दल  पाकिस्तान, चीन  आतंकवाद से नहीं लड़ रहा है बल्कि कश्मीर में रह रहे भारतीय नागरिकों से लड़ रहा है वहां कर्फ्यू लगाकर देश की जनता का दमन  किया जा रहा है सम्मेलन को  ऑल इंडिया किसान सभा के जिला सम्मेलन के दूसरे दिन प्रदेश उपाध्यक्ष श्री सुरेश त्रिपाठी ने किसान प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की जनता को भारतीय नागरिकों के दमन के खिलाफ संघर्ष के मैदान में उतारना पड़ेगा सम्मेलन को किसान सभा के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने संबोधित करते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल किसान विरोधी है और जाति और धर्म के आधार पर बांटकर किसानों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया है किसान सभा जनपद में जगह-जगह सभाएं कर किसानों को संघर्ष के मैदान में उतारेगी सम्मेलन को ब्रजमोहन वर्मा डॉ कौसर  हुसैन, शिव दर्शन वर्मा, रमेश कुमार आदि ने  भी संबोधित किया अंत में विनय कुमार सिंह अध्यक्ष दल सिंगार, प्रवीण कुमार उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मंत्री राम नरेश वर्मा अमर सिंह गुड्डू उपमंत्री तथा रामविलास वर्मा कोषाध्यक्ष चुने गए।

शनिवार, 10 अगस्त 2019

काले लूटेरों की सरकार को भगाएगें

सत्तारूढ़ दल ने देश को आर्थिक गुलामी की ओर बढा दिया है, हम शहीद भगत सिंह के वंशज है, हमने ब्रिटिश साम्राज्यवाद को भगाया है हम किसान विरोधी काले लूटेरों की सरकार को भी भगाएगें ।
यह बात अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री छीत्तर सिंह ने कहा कि सत्तारूढ़ दल की नीतियों के कारण लाखों किसानों ने आत्महत्या कर ली है। सरकार स्वामीनाथन आयोग को लागू नहीं किया है, किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं दे रही है, अनावश्यक मुद्दे को उठाकर किसानों के साथ छल कर रही है।
सम्मेलन को किसान सभा के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन, डॉ कौसर हुसेन, प्रवीनकुमार, शिव दर्शन वर्मा, मुनेश्वरबक्स, आदि प्रमुख नेताओं ने सम्बोधित किया।
संचालन किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने किया। अन्त में वरिष्ठ अधिवक्ता ब्रज मोहन वर्मा ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
सम्मेलन में गिरीशचन्द, रामनरेश वर्मा, वीरेन्द्र कुमार, अशोक मौर्य, दलसिंगार, प्रदीप वर्मा श्रवन कुमार, शिवराम, गोपी चन्द्र, श्याम सिंह व अंकुर वर्मा आदि प्रमुख लोग थे

शनिवार, 3 अगस्त 2019

योगी पुलिस ने लांस नायक संदीप को रात भर कोतवाली में पीटा

योगी पुलिस ने बाराबंकी जनपद निवासी लांस नायक संदीप को हेलमेट न लगाने के कारण रात भर कोतवाली में बंद कर जबरदस्त पिटाई की है।
 पुलिस का आरोप है कि सेना के जवान ने दरोगा से मारपीट की। इसे लेकर पुलिस ने सेना के लांस नायक को गिरफ्तार कर लिया। जिला अस्पताल में मेडिकल के दौरान वकीलों ने विरोध जताया। सिपाही जब सेना के जवान को लेकर कचहरी पहुंचा तो वहां भी वकीलों व वादकारियों ने एकजुट होकर विरोध किया। सिपाही को पीटकर भगा दिया। हंगामा काफी देर तक होता रहा। सेना के बाराबंकी स्थित बम स्क्वाड के कुछ अधिकारी भी कचहरी पहुंचे।
पुलिस का आरोप है कि सेना के जवान संदीप द्वारा दरोगा से मारपीट कर वर्दी फाड़ दी। इसे लेकर पुलिस ने गिरफ्तार कर सरकारी काम में बाधा, मारपीट आदि का मुकदमा दर्ज कर लिया।
उ प्र में योगी सरकार की किसी भी विभाग पर नियंत्रण नहीं रख गया है। विपक्षी दलों के नेताओं के ऊपर फर्जी मुकदमे दर्ज कर
जनता के सवालों को न उठाने देना जंगल राज की मुख्य उपलब्धि है।

शुक्रवार, 2 अगस्त 2019

मोदी का जादू चल नहीं रहा


अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश के बाद भी पाकिस्तान कुलभूषण जाधव के मामले में हठधर्मिता पूर्ण रवैया अपना रहा है। वहीं हर बात पर ट्विट करने वाले प्रधानमंत्री मोदी चुप हैं।
 वहीँ पाकिस्तान ने  कहा कि उसने भारत को शुक्रवार को कुलभूषण जाधव तक मिलने की सुविधा प्रदान की है।
लेकिन भारत ने कहा कि वह अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के फैसले के अनुसार प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहा है और राजनयिक माध्यम  से जवाब देगा।पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा, "हमने भारतीय उच्चायोग को इस शुक्रवार को कांसुलर एक्सेस देने की पेशकश की है। हमे भारत की तरफ से जवाब का इंतजार है।"
पाकिस्तान ने कहा कि एक जिम्मेदार राज्य के कारण , वह जाधव को "पाकिस्तानी कानूनों के अनुसार" कांसुलर एक्सेस प्रदान करेगा, जिसके लिए तौर तरीकों पर विचार किया जा रहा है।
पाकिस्तान के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर, भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा: "हमें पाकिस्तान से एक प्रस्ताव मिला है। हम अभी, प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहे हैं. हम राजनयिक माध्यम के जरिए पाकिस्तान को जवाब देंगे। '
पिछले महीने, हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान को जाधव की सजा और सजा पर  "प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार" करने का आदेश दिया और  इसे  बिना किसी देरी के कांसुलर एक्सेज प्रदान करने के लिए कहा।

कांसुलर एक्सेस क्या होता है...

वियना कन्वेंशन-1961
दुनिया के आजाद देशों के बीच आपसी राजनयिक संबंधों को लेकर सबसे पहले 1961 में वियना कन्वेंशन हुआ। इसके तहत कन्वेंशन में शामिल देशों ने एक अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें राजनियकों को विशेष अधिकार दिए गए। इस संधि में राजनियकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का प्रावधान किया गया। इस संधि के तहत मेजबान देश अपने यहां रहने वाले दूसरे देशों के राजनियकों को खास दर्जा देता है। इस संधि का ड्राफ्ट इंटरनेशनल लॉ कमीशन ने तैयार किया था और 1964 में यह संधि लागू हुई।


फरवरी 2017 में इस संधि पर कुल 191 देशों ने हस्ताक्षर किया है। इस संधि के तहत कुल 54 आर्टिकल हैं। संधि के प्रमुख प्रावधानों के तहत कोई भी देश दूसरे देश के राजनियकों को किसी भी कानूनी मामले में गिरफ्तार नहीं कर सकता है। साथ ही राजनयिक के ऊपर मेजबान देश में किसी तरह का कस्टम टैक्स नहीं लगेगा। इंटरनेशनल कोर्ट में इटली के नौसेना के अफसरों को भारत द्वारा गिरफ्तार किए जाने का मामला इसी संधि के तहत चला था।
अगर पाकिस्तान कुलभूषण जाधव को कांसुलर एक्सेज का दर्जा प्रदान कर दे तो
कुलभूषण जाधव रिहा हो जाएंगे और उनके ऊपर कोई पाकिस्तानी अदालत कार्रवाई नहीं कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश के बाद भी उसको लागू न करवा पाना मोदी की कूटनीतिक विफलता है।

रविवार, 28 जुलाई 2019

दादा गजेंद्र सिंह व विश्वनाथ प्रताप सिंह

KUCH PURANI YAADEN
 Sri Chedi Singh  Ram nagar DWAARA AAYOJIT SAMAROH ME EX PM LATE SRI V P SINGH, EX CM (UP)SRI MULAYAM  SINGH, EX CM(J&K)LATE MUFTI MOHAMMAD SAID SAAB, EX CENTRAL MINISTER SRI BENI PRASAD VERMA JI, LATE SRI PRADEEP YADAV JI Mere Bap LATE SRI  Dada GAJENDRA SINGH, FAREED MEHFOOZ JI...

गुरुवार, 25 जुलाई 2019

सोनभ्रद नरसंहार योगी सरकार की विफलता है

बाराबंकी। सोनभ्रद नरसंहार योगी सरकार की विफलता है और प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर जंगलराज के
कारण हुआ है जैसा मुख्यमंत्री कहते हैं कि कांग्रेस की नीतियों के कारण यह हुआ है वह उनकी गलत बयानी है।
यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि अक्टूबर 2017 को 148 बीघा जमीन आशा मिश्रा ने ग्राम प्रधान यज्ञदत्त व उनके रिश्तेदारों को बेच दी थी खेतिहर आदिवासियों के विरोध के फलस्वरूप तत्कालीन जिला मजिस्टेªट ने दाखिल खारिज रोक दी थी किन्तु योगी सरकार के चहेते अधिकारी के पहुंचने पर दाखिल खारिज प्रशासन की शह पर कब्जा परिवर्तन का कार्य नरसंहार करके होने लगा जिसमें ग्यारह लोगों की हत्या हो जाती है और भारी तादाद में लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं।
पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि दाखिल खारिज करने से लेकर जितने भी प्रशासनिक अधिकारी है वह नरसंहार के दोषी है इसलिए उनको भी 120बी आइ्र0पी0सी0 का अभियुक्त बनाया जाए। पार्टी के सहसचिव शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि आवारा पशुओं के कारण किसानों की खेती बरबाद हो गयी और किसान बरबाद हो गए। वहीं पार्टी के सह सचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि आवारा पशु सड़क पर मैथुन के लिए लड़ाई के कारण शहरी आबादी में काफी लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि हद तो यह हो गयी है कि जिलाधिकारी कार्यालय और दीवानी परिसर में आवारा पशु लड़ते नजर आ रहे हैं परन्तु सरकार इसे रोकने में असफल है। योगी सरकार सिर्फ आवारा पशुओं पर गलत बयानी कर रही है। प्रदर्शनकारी योगी-मोदी मुर्दाबाद। प्रदेश में जंगलराज बन्द करो, आवारा पशुओं पर रोक लगाओ। सोनभद्र नरसंहार के दोषियों को बन्द करो, आदि नारे लगाते हुए गांधी भवन से चलकर पटेल चैराहा होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया और राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्टेªट राम नरायन यादव को सौंपा।
प्रदर्शनकारियों में प्रवीण वर्मा, शिवराम, गिरीश चन्द्र, श्याम सिंह, सरदार भूपेन्द्र पाल सिंह शैकी, राजेन्द्र बहादुर सिंह, दलसिंगार, वीरेन्द्र कुमार, राजेश कुमार, मुनेश्वर बख्श वर्मा, अमर सिंह प्रधान, राम विलास, सुभाष चन्द्र, उमाकान्त, रामेश्वर प्रसाद, महेश प्रसाद, रमेश चन्द्र, अनुपम वर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।



शनिवार, 6 जुलाई 2019

शमीम फैजी महान पत्रकार भी थे - रण धीर सिंह सुमन

कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रीय सचिव के निधन पर हुआ शोकसभा का आयोजन

बाराबंकी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व सम्पादक कामरेड शमीम फैजी के निधन पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शोकसभा का आयोजन किया गया। पार्टी राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुये कहा कि कामरेड शमीम फैजी ने 1965 में नागपुर में पार्टी में शामिल हुए थे। और भारतीय कम्युनिस्ट के मुख्यालय में पार्टी के पत्र-पत्रिकाओं के इंचार्ज बने। और अंतिम सांस तक पार्टी के लेखन कार्य से जुड़े रहे हैं। 1979 में पार्टी के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य, 1993 में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य, 1997 में पार्टी राष्ट्रीय सचिव चुनें गए। नागपूर से प्रकाशित हिटवाडा के सह सम्पादक बने। फैजी 1979 मे उर्दू साप्ताहिक हयात के संपादक व ऐज अंग्रेजी साप्ताहिक के संपादक भी जीवन पर्यंत रहे हैं। उनके निधन से अंग्रेजी, उर्दू, मराठी व हिन्दी की अपूर्णनीय क्षति है वह महान पत्रकार थे। शोकसभा में सचिव ब्रज मोहन वर्मा, शिव दर्शन वर्मा डॉ कौसर हुसैन, विनय कुमार सिंह, प्रवीण कुमार आदि प्रमुख मौजूद रहे।