रविवार, 25 सितंबर 2016

सरकारें किसानो के वोट से बनती हैं

 सरकारें किसानो के वोट से बनती हैं लेकिन सरकार में आने के बाद राजनीतिक दल उद्योगपतियों के हाथ के मोहरे हो जाते हैं. केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद लगभग दो लाख से अधिक किसानो ने आत्महत्याएं कर ली हैं. 
यह विचार किसान सभा के प्रांतीय महासचिव राजेंद्र यादव पूर्व विधायक ने गाँधी मूर्ती हजरतगंज लखनऊ के समक्ष किसानो के दुसरे दिन के धरना सभा को संबोधित करते हुए कहा कि किसानो को आत्महत्या से बचाने के लिए दस हज़ार रुपये प्रतिमाह की पेंशन केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर अविलम्ब घोषित करें. जब समय आता है तो कभी केंद्र सरकार लाखों-लाख करोड़ रुपये के कर व कर्जे उद्योगपतियों के माफ़ कर देती है और समय आने पर राज्य सरकारें भी यह कार्य करती हैं. किसानो व खेत मजदूरों की बात आते ही इनके खजाने में दमड़ी भी नहीं बचती है.
किसान सभा के संरक्षक व पूर्व विधायक जयराम सिंह ने कहा कि मोदी सरकार की प्रमुखता से ध्यान  कॉरपोरेट और मैन्यूफैक्चरिंग पर है, उसकी प्राथमिकता में कृषि क्षेत्र  नहीं आता है. यही कारण है कि मोदी सरकार के पहले साल में किसानों का संकट घटने की बजाय बढ़ा है.
किसान सभा के अध्यक्ष इम्तियाज बेग ने कहा कि पिछले बजट में सरकार ने 1,000 करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री सिंचाई योजना का ऐलान किया था, लेकिन जिस देश में करीब 60 फीसदी कृषि योग्य भूमि ग़ैर-सिंचित है वहां हर खेत को पानी पहुँचाने के लिए यह राशि बेहद कम है.
 किसान सभा मथुरा की नेता सुश्री राधा चौधरी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के दो ही उपाय हैं. पहला, उसकी पैदावार और उपज का दाम बढ़ाना और दूसरा, उत्पादन लागत को कम करना. इन दोनों मोर्चों पर मोदी सरकार ने अभी तक कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है. जबकि कृषि क्षेत्र का संकट बढ़ा है. किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं. 
किसानो की सभा को अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन ने संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि किसान संघर्ष को नयी दिशा देते हुए वैचारिक आधार भी देने की आवश्यकता है. जिससे सशक्त किसान आन्दोलन पैदा हो सके. 
बाराबंकी किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि गेंहू के दाम प्रति कुंतल 7600 रुपये तथा धान के दाम 5100 रुपये प्रति कुंतल दिलाया जाए.
किसान सभा द्वारा 24 सितम्बर से 28 सितम्बर 2016 तक विधानसभा के बगल में स्थित गाँधी मूर्ति के समक्ष धरना प्रदर्शन चल रहा है. किसान सभा की मांग है कि राष्ट्रीय किसान आयोग की संस्तुतियों को केंद्र और राज्य सरकारें तत्काल लागू करें, साठ वर्ष के सभी स्त्री-पुरुष किसानो, खेत मजदूरों, ग्रामीण दस्तकारों को 10 हजार मासिक पेंशन केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देना सुनिश्चित करें. , किसानो के सभी सहकारी और सरकारी कर्जे माफ़ किये जाए और कृषि उत्पादों का लाभकारी मूल्य दिया जाए., भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को तत्काल वापस लिया जाए., केरल राज्य की भांति किसान कर्ज एवं आपदा रहत ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाए., नहरों में टेल तक पानी पहुँचाया जाए खेती किसानी के लिए बढ़ी बिजली दरें तुरंत वापस लिया जाए, नंदगंज, रसड़ा, छाता, देवरिया और औराई चीनी मिलों को तुरंत चालू किया जाए,  शिक्षा और चिकित्सा व्यवस्था को सरकार अपने हाथ में ले, गन्ने का मूल्य 850 रु प्रति कुंतल कर दिया जाए तथा बकाया भुगतान किसानो को शीघ्र किया जाय, आपदा राहत प्रदेश के सभी किसानो तथा राज्य और केंद्र सरकार की घोषणा के अनुसार पहुँचाया जाए., प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल समाजवादी एक्सप्रेस वे छ: लेन की बनायीं जा रही है इसमें किसानो की उपजाऊ जमीन जा रही है, इसको मऊ-मुहम्मदबाद रोड में जोड़कर बनाया जाए जिससे सरकारी योजना भी पूरी हो जाएगी और किसानो की जमीन भी बच जाएगी, कृषि को बढ़ावा देने हेतु प्रत्येक न्याय पंचायत में एम्.एस.सी. कृषि पास नौजवानों को किसान सहायक के रूप में रखा जाए. खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत 80 प्रतिशत लोगों को इस योजना का लाभ मिलना है जिसमें पात्र गृहस्थों की सूची बनने में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है इसे सही किया जाए तथा राशन वितरण में धांधली हुई जिनकी जांच करायी जाए, समेजित बाल दिवस परियोजना के तहत आंगनबाड़ी केन्द्रों को सक्रिय किया जाए तथा मिलने वाली सुविधाओं में अधिकारियों के स्तर से कमीशनखोरी बंद किया जाए तथा बाल पुष्टाहार बच्चों को दिया जाए इसकी व्यवस्था की जाय, कानून व्यवस्था सत्ता पक्ष के नेताओं, मंत्रियों के हस्तक्षेप के कारण अधिक ख़राब है इसे दुरुस्त किया जाए, फसल बीमा की धनराशि किसानो को तत्काल दिया जाए, प्रदेश के समस्त साधन सहकारी समितियों पर रासायनिक खादों के साथ कीटनाशक दवा प्रमाणिक कंपनियों से व कृषि उपकरण उपलब्ध कराये जाए तथा जो साधन सहकारी समितियां डिफाल्टर हैं उन्हें चालू किया जाए. 

शनिवार, 24 सितंबर 2016

गणवेश धारी राफेल उडा रहे हैं

उरी की घटना के बाद  गणवेश  धारी राफेल विमान
पाकिस्तान के आकाश  में उडा रहे हैं  उनको यह जानकारी  नहीं है  कि आठ हजार करोड़ रुपये  देने के बाद लगभग  तीन साल  बाद फांस  फाइटर  विमान की  सप्लाई  देगा  कतर  और मिश्र के बाद  भारत  का  नम्बर  आता है  भारत की वायुसेना  को 136 राफेल  विमानों की आवश्यकता थी  किन्तु  मोदी  सरकार ने 36 विमानों का सौदा प्रति विमान 1700करोड  में किया है जबकि  कांग्रेस  सरकार 715करोड में खरीद  रही थी तब  भाजपा इसका  विरोध कर रही थी 237 गुना अधिक की मत  दी जा रही है                                               
वैसे अब तक इस विमान के ग्राहक 80 से ज़्यादा देश रहे है और लगभग सभी देशों ने इसे खरीदना वर्षों पहले ही बंद कर दिया है । कई देशों ने इसे ब्लैकलिस्टेड किया हुआ है और कुछ देशों ने तो इसे "expensive garbage" यानि महँगा भंगार तक कह दिया है ।
राफेल विमान बनाने वाली कंपनी dassault aviation ने एशिया में अपने व्यापार के लिए जिस कंपनी को अपना पार्टनर बनाया है वो एक कंपनी भारतीय है । और ये वही कम्पनी है जिसे मोदी सरकार ने डिफेन्स में 100% तक FDI को मंज़ूरी देने के बाद भारत सरकार के लिए लाइज़निंग का ज़िम्मा सौंपा है । ये कंपनी है मुकेश अंबानी की "रिलायंस"                                               
मोदी की मेक इन  इंडिया  के नारे का भी कोई मतलब नहीं  रह गया है और  108विमानो का निर्माण  एच  ए एल  बंगलुरु में  होना था  वह इस  समझौते  में  नहीं है  59000 करोड़ रुपये खर्च कर राफेल  लेना  बुद्धि मानी  नहीं  है लेकिन  अंबानी के प्रधान  सेवक  को  लाभ  पहुंचाने का काम उन्हें करना है
उरी के बहाने  अंबानी को  लाभ देकर  देश को  नुकसान पहुंचाने  के  कार्य  को नई देश भक्ति  परिभाषा मानना होगा  प्राधोगिकी हस्तांतरण  न होना  भी घाटे का सौदा है   खुफिया एजेंसियों का फेल होना और सुरक्षा बलों की चूक को नजरअंदाज करना भी  उचित नहीं है इनकी जिम्मेदारी  को तय  करके  दंडित करना  भी  आवश्यक है   पाकिस्तान  पाकिस्तान  चिल्लाने  से  कोई  अर्थ नहीं  निकलता है    संघी  अफवाह  तो उडा  सकता है  दंगा  करा  सकता है किन्तु  देश  हित की बात  सोच  नहीं  सकता है        
 सुमन    

शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

गोविल्स जंग नहीं शांति चाहिए

रजत शर्मा ने पूछा कि  26/11 की घटना के समय आप इनचार्ज होते तो क्या कर सकते थे ? 

मोदी ने जवाब दिया : पहली बात है जो मैंने गुजरात में किया कर देते मुझे देर नहीं लगती मै आज भी कहता हूँ.  पकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए,  पकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना चाहिए ये लव लैटर लिखना बंद करना चाहिए. ये प्रणव मुखर्जी रोज एक चिट्ठी भेज रहे हैं. वो सवाल भेज रहे हैं ये जवाब देते फिरते हैं. गुनाह वो करे जवाब भारत सरकार दे रही है. 

रजत शर्मा कहते हैं कि लेकिन इंटरनेशनल प्रेशर भी तो होता है उसका भी ख्याल रखना पड़ेगा. 

मोदी ने जवाब दिया : इंटरनेशनल प्रेशर पैदा करने की ताकत आज हिंदुस्तान में है सौ करोड़ का देश का है पूरी दुनिया में हम प्रेशर पैदा कर सकते हैं कोई हम पर प्रेशर कैसे पैदा कर सकता है. ये उलटी गंगा क्यों चल रही है हैरान हूँ जी. पाकिस्तान हम को मार के चला गया , पाकिस्तान ने हम पर हमला बोल दिया मुंबई में और हमारे मंत्री जी अमेरिका गए और रोने लगे "ओबामा-ओबामा ये हमको मार कर चला गया बचाओ बचाओ" ये कोई तरीका होता है क्या ? पडोसी मार के चला गया और अमेरिका जाते हो अरे पाकिस्तान जाओ न. 

रजत शर्मा ने पूछा कि क्या तरीका होता है ? 

मोदी ने जवाब दिया :  पाकिस्तान जो भाषा में समझे समझाना चाहिए.

यह डायलाग किसी फिल्म के नहीं हैं. यह साक्षात्कार नवम्बर 2011 को इंडिया टीवी के रजत शर्मा को नरेन्द्र दामोदर मोदी ने दिया था. आज पठानकोट, गुरदासपुर और उसके बाद अब उरी की घटना इस इंटरव्यू की याद आते ही स्तिथि को बड़ी हास्यास्पद कर देती है. सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ की कटिंग की भरमार हो गयी है प्रतिष्ठित अखबारों में फेक न्यूज़ प्रकाशित करनी शुरू कर दी. उरी घटना के दुसरे दिन आतंकी मुठभेड़ में 10 मारे गए, पीओके में घुसकर सेना ने 20 आतंकी मारे जैसे समाचार आना शुरू हो गए. और अब यह लोग सिन्धु नदी के पानी को रोकने की बात शुरू कर रहे हैं.

आतंकवाद का श्रोत अमेरिकी साम्राज्यवाद है और उसी से इस समय हमारी विदेश नीति के तहत मित्रता है. पाकिस्तान की सेना और आईएसआई अमेरिकी साम्राज्यवाद से संचालित होती है. मोदी साहब आप भी अमेरिका बार-बार जाते हैं. वहां ओबामा को पकड़कर रोते हैं या हँसते हैं. कुछ कर डालिए ओबामा आपका मित्र है, आप बराक कहकर बुलाने की हिम्मत रखते हैं लेकिन पाकिस्तान को आप समझवा नहीं पाते हैं. युद्ध आपके बस की बात नहीं है. कारगिल जैसी नूराकुश्ती अटल बिहारी बाजपेयी लड़ चुके हैं आप भी इसी तरह का उपाय सोच रहे हैं. राफेल खरीद रहे हैं लेकिन सुरक्षा चूकें हो रही हैं उन चूकों के लिए कौन जिम्मेदार है यह आप निश्चित नही कर पा रहे हो. बडबोलेपन के आप माहिर हो. साम्राज्यवाद को जिन्दा रखने के लिए आप युद्ध कर सकते हो लेकिन भारतीय जनता की खुशहाली के लिए कूटनीतिक रास्ता निकलकर शांति का माहौल नहीं बना सकते हो. यही तुम्हारी सबसे बड़ी हार है. जंग की बजाये शांति चाहिए यह समझ विकसित करनी होगी. वैसे भारतीय इतिहास में आधुनिक गोविल्स का खिताब आपको मिल चुका है आप माने या न माने.

सुमन

सोमवार, 19 सितंबर 2016

किसान शहीद क्यों नहीं

देश की सीमा पर तैनात आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों की शहादत को  महिमामंडित  किया जाता है और मैं सवाल करना चाहता हूं  कि आखिर लाशों पर राजनीति कौन कर रहा है । अगर सीमा पर लड़ने वाले सैनिक शहीद कहलाए जाते हैं तो देश का पेट भरने वाले किसान की मौत को शहीद का दर्जा क्यों नहीं दिया जाता ।
  यह विचार फैजाबाद में जनसभा को संबोधित करते हुए  जवाहर  
लाल नेहरु विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि देश का दलित साफ करता है जसमाज की गंदगी और स्वच्छ भारत के नाम पर अखबार में छपता है मोदी का थोबड़ा.
जनसभा को संबोधित करते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि समाज की गंदगी और शहर की गंदगी को दलित समाज और पिछड़े समाज के लोग साफ कर रहे हैं और देश को स्वच्छ बनाने के नाम पर स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का थोबड़ा अखबार में छपता है इतना बड़ा पक्षपात हम नहीं सहेंगे और अपने हक की लड़ाई के लिए लड़ते रहेंगे चाहे हम पर कितने भी ज़ुल्म हों ।
मुझे देशद्रोही कहने वाले बताएं जेएनयू के अलावा हैदराबाद,इलाहाबाद और बंगाल की यूनिवर्सिटी में आखिर क्यों उठी विरोध की आवाज,साजिश के तहत मुझे फसाया गया
        जेएनयू के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा जेएनयू में जो कुछ हुआ अगर उसे छोड़ दिया जाए तो मैं सवाल करना चाहता हूं कि आखिरकार हैदराबाद में रोहित वेमुला ने फांसी क्यों लगाई, इलाहाबाद में महिला छात्र नेता के साथ भेदभाव क्यों हुआ इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में इस सिस्टम के खिलाफ छात्रों ने आवाज क्यों उठाई अगर अपने हक की लड़ाई लड़ना देशद्रोह है तो हां मैं देशद्रोही हूं ।
हमारी आजादी का मतलब सामंतवाद से,मनुवाद से जातिवाद से धर्मवाद से और गरीबी से आजादी है
कन्हैया कुमार ने कहा कि हम जब आजादी मांगने का नारा लगाते हैं तो हम पर देश विरोधी होने और देश की एकता अखंडता और तोड़ने का आरोप लगता है लेकिन हमारी आजादी का मतलब गरीबी भुखमरी जातिवाद धन और मनुवादी सभ्यता से आजादी है जब तक देश में रहने वाले हर नागरिक को समान अधिकार नहीं मिलेगा तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा भले इसके लिए हमें लाठी और गोली खानी पड़े हम खाएंगे । जनसभा के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता अतुल कुमार सिंह सूर्य कांत पांडे सहित बड़ी संख्या में वामपंथी विचारधारा से लोग जुटे रहे ।

रविवार, 18 सितंबर 2016

अब 56 इंच की जबान है

शहीदों को सलाम
बारामूला जनपद के उरी में सेना के 12 यूनिट के बेस पर आतंकी हमले में 17 जवान मारे गए और 19 जवान घायल हैं, 4 आतंकी मारे जा चुके है. दुखद स्तिथि है बगैर लडे फौज मारी जा रही है. चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री के उम्मीदवार से लेकर गृह मंत्री तक पकिस्तान को चुनौती देते हुए चुनाव लड़ रहे थे. तरह-तरह के उत्तेजक डायलॉग बोल रहे थे और नकली राष्ट्रवाद की धारा बहाकर मतदाता को गुमराह कर सरकार बनाने की जोड़तोड़ में लगे थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मौनी बाबा घोषित कर रहे थे अब स्वयं मौन होकर मौनी बाबा की भूमिका आकर ट्वीट कर रहे हैं कि  'दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा'.
          प्रधानमंत्री जी सब कुछ जानते हैं और जान कर अनजान बनने का प्रदर्शन करते हैं. आई एस आई पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी है और पाकिस्तानी सेना को दिशा-निर्देश देने का काम अमेरिका करता है और आज प्रधानमंत्री का व्यक्तिगत दोस्त ओबामा है. सैनिक समझौते किये हैं और उसके बाद भी हमले जारी हैं और बगैर लडे पठानकोट एयरबेस से लेकर उरी बेस तक नुकसान हो रहा है. वहीँ, प्रधानमंत्री अचानक पकिस्तान की  यात्राएं की. शपथ ग्रहण में आमंत्रित किया, उपहारों का आदान-प्रदान किया लेकिन कोई बात काम नहीं आ रही है. विदेश नीति को बदल दिया है. अमेरिका जो पकिस्तान का मित्र था अब अपने देश का मित्र है. अमेरिका चुप है. दुनिया जानती है कि अमेरिका कभी किसी का मित्र नहीं रहा है, जिसका मित्र रहा उसको आस्तीन के सांप की तरह डंसा भी है चाहे वह पकिस्तान ही क्यूँ न हो. आज उसकी दुर्दशा का जिम्मेदार अमेरिका भी है जो अपनी आजादी से लेकर आज तक उसकी गोदी में बैठा रहा है. अब उसकी गोदी में एक तरफ नागपुर मुख्यालय की विदेश नीति बैठी हुई है. गाँधी की हत्या ब्रिटिश साम्राज्यवाद को हारने के कारण हुई थी और ब्रिटिश साम्राज्यवाद के साथ नागपुर मुख्यालय था. अब देश की विदेश नीति अमेरिका परस्त है और उसके बाद भी हमले हो रहे हैं तो यह किसकी जिम्मेदारी है और कौन सी राजनीती का हिस्सा है. मुख्य मामला यह है कि सेना के जवान अदानी और अम्बानी के घरों के नहीं हैं बल्कि  हमारे जैसे मजदूर-किसानो के बेटें हैं. बेटे की मृत्यु होने पर कितना कष्ट होता है इसका एहसास इन राजनीतज्ञों को नहीं है. यह वाही लोग हैं जो कंधार आतंकवादियों को छोड़ने गए थे.
कश्मीर में कथित अलगाव वादियों को लेकर सरकार बनाने के लिए सत्तारूढ़ दल ने हर तरह के समझौते किये थे और तमाम सारे ऐसे लोगों को उम्मीदवार बनाया था जिनकी पृवत्ति अलगाव वादी थी. दुःख है कि सीना 56 इंच का नहीं है जबान 56 इंच की है.
वहीँ, उरी हमले पर बोले लालू प्रसाद- मोदी जी का 56 इंच का सीना सिकुड़ गया है और उनके बेटे तेजस्वी यादव ने कहा कि पाक को लव लेटर भेजने की बजाय कार्रवाई करें मोदी.
जम्मू एंड कश्मीर के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रभारी और भाजपा के संगठन मंत्री राम माधव ने कहा
 अब ‘एक दांत के लिए पूरा जबड़ा’ की नीति अपनानी चाहिए. यह बात कहते हुए राम माधव को जबड़ा तोड़ने के लिए न तो पाकिस्तान के अनुमति की आवश्यकता है और न ही अमेरिका की. दिल्ली में भी सरकार है और कश्मीर में भी सरकार है


सुमन
लो क सं घ र्ष !

शनिवार, 17 सितंबर 2016

जोगेंद्र नाथ मंडल का सांप्रदायिकीकरण

आजादी से पहले पश्चिम बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार बनती थी. जिसमें शेड्यूल्ड कास्ट के नेता जोगेंद्र नाथ मंडल मंत्री होते थे तो वहीँ मुस्लिम लीग के मुख्यमंत्री वाले कैबिनेट में भारतीय जनसंघ के बाद में संस्थापक अध्यक्ष डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी भी होते थे. बंगाल के उप-मुख्यमंत्री रहते हुए मुखर्जी ने अंग्रेज़ गवर्नर को चिट्ठी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन को कुचलने के लिए हर संभव मदद का आश्वासन देते रहते थे.
जोगेंद्र नाथ मंडल बंगाल या देश के अन्दर अनुसूचित जाति, जनजाति के उत्थान के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार थे. पकिस्तान के निर्माण के समय मोहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में पकिस्तान के कानून एवं श्रम मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल बनाये गए. कहा यह भी जाता है कि पकिस्तान के संविधान की रचना भी उन्होंने की. भारत पकिस्तान विभाजन के समय कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू मुसलमानों का कत्लेआम इतिहास की बड़ी घटनाओं में से एक है. पकिस्तान के अन्दर कत्लेआम देख कर हताश व निराश जोगेंद्र नाथ मंडल 8 अक्टूबर 1950 को लियाकत अली मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर भारत वापस आ गए थे . जिन्ना की मृत्यु 11 सितम्बर 1948 को हो गयी जोगेंद्र नाथ मंडल के सारे कसमें वादे जिन्ना के साथ थे.  उनके न रहने के बाद उनका कोई पुरसाहाल नहीं रहा. 
        इस घटना को लेकर संघ विचारक राकेश सिन्हा की नई पत्रिका ‘पाकिस्तान वॉच’ के पहले अंक में प्रकाशित किया गया है और उसके बाद सुनियोजित तरीके से संघ के लोगों ने सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक जोगेंद्र नाथ मंडल के इस्तीफे का सहारा लेकर तथ्यों और परिस्तिथियों के विपरीत जाकर यह साबित करने की कोशिश में संघ परिवार लगा है कि दलित और मुसलमान स्वाभाविक रूप से एक दुसरे के दुश्मन हैं. पाकिस्तान के प्रथम कानून मंत्री जोगेंद्र नाथ मंडल के इस्तीफा से जुड़े कुछ घटनाओं का जिक्र सांप्रदायिक भावना से किया है।
            संघ की नागपुरी विष प्रयोगशाला इस समय जोगेंद्र नाथ मंडल से जुडी हुई तमाम सारे किस्से कहानियां सोशल मीडिया व प्रिंट मीडिया में प्रकाशित करा रहा है जिससे दलितों व मुसलमानों के बीच की दूरी बढ़ सके और इस बात को दबाया जा सके कि धर्म के आधार पर अनुसूचित जातियों का शोषण नहीं किया गया है.ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि संघ व हिन्दू महासभा एक तरफ मुसलमानों के खिलाफ विष वमन कर देश को विभाजित करना चाहते थे तो वहीँ मुस्लिम लीग इस्लाम के मतावलंबियों को लेकर अलग राष्ट्र के निर्माण की मांग कर रही थी. यह दोनों पक्ष अंग्रेजों की एक जोड़ी बैल के दांये व बांये बैल थे. यह  दोनों अंग्रेजों के इशारे पर हमेशा कार्य करने के लिए तत्पर रहते थे देश की एकता और अखंडता से इनका कोई मतलब नहीं था.
संघ इतिहास के तथ्यों को तोड मारोड़ कर एक नया इतिहास तैयार कर रहा है जिसका आधार हिन्दू-मुस्लिम संघर्ष को बढ़ावा देना और अंग्रेजों की गुलामी करने के उसके कार्य को छिपाना है. उसी प्रक्रिया के तहत जोगेंद्र नाथ मंडल सांप्रदायिकीकरण किया जा रहा है

सुमन 

रविवार, 11 सितंबर 2016

हथियारों की संस्कृति विश्व शान्ति के लिए गम्भीर खतरा

  बाराबंकी। हथियारों की संस्कृति विश्व शान्ति के लिए गम्भीर खतरा है। विकसित देश हथियार बनाने का धंधा करते हैं और विकासशील देश उसे खरीदते हैं। आज विश्व में 1.8 मिलियन ट्रीलियन डालर का शस्त्र उद्योग है। जिसमें प्रथम उत्पादक के रूप में अमेरिका का नाम आता है और खरीददारों की सूची में प्रथम स्थान भारत का आ रहा है। उक्त विचार वयोवृद्ध पत्रकार डा0 सुभाष राय ने 'राष्ट्रीय सुरक्षा.कितनी सुरक्षित'  विषयक गोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में अपने उद्बोधन में कही।
                         उन्होनें कहा कि अमेरिका की रक्षानीति उपमहाद्वीप में पहले पाकिस्तान केन्द्रित थी। अब भारत केन्द्रित हो गयी है। जब उसे 80 के दशक में सोवियत यूनियन से निपटना था तो पाकिस्तान का उपयोग किया गया और अब चूंकि चीन उसके आर्थिक साम्राज्य के लिए विगत वर्षों में बड़ा खतरा बनकर उभरा है तो उसका घेराव करने के लिए भारत केन्द्रित रक्षा नीति अपनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री मोदी जी को यह लगता है कि भारत.अमेरिका रक्षा समझौता उनकी 'मेक इन इण्डिया'नीति के लिए लाभप्रद होगा लेकिन उनकी यह गलत फहमी है। यह देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक होगा।
आज हमारे देश में शैक्षिक पिछड़ापन, खाद्य समस्या तथा स्वास्थ्य सम्बन्धि तमाम बुनियादी समस्यायें जिनसे जनता जूझ रही है इसकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। अन्त में उन्होनें असहमत लोगों को जो बिखरे होकर अकेले पड़े हुए हैं को आहवान किया कि राष्ट्रहित में एकजुट हो और संकल्पबद्ध हो।
                गोष्ठी के मुख्य वक्ता गयासुद्दीन किदवई ,पूर्व सदस्य  विधान परिषद  ने कहा कि देश को खतरा बाहरी शक्तियों से नहीं बल्कि बाहरी शक्तियों के एजेन्ट के रूप में छुपे देशद्रोही शक्तियों से है। उन्होनें आर0एस0एस0 को अलकायदा का और बजरंग दल को तालिबान का डुप्लीकेट रूप बताया। उन्होनें प्रधानमंत्री मोदी जी के ऊपर करारा प्रहार करते हुए कहा कि 56इंच का सीना रखने वाले मोदी जी ने अमेरिका के सामने घुटने ठेक दिए हैं। अब हम कह सकते हैं कि 56इंच का सीना नहीं बल्कि जबान 56इंच की है। पाकिस्तानए अफगानिस्तान व मध्य एशिया के कई देशों को बर्बाद करने वाला अमेरिका की नज़रे अब भारत पर हैं।
गोष्ठी में अपने विचार रखते हुए रिहाई मंच के संयोजक मुहम्मद शुऐब एडवोकेट ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे बड़ा खतरा साम्राज्यवादियों से है जो विदेशों में बैठे साम्राज्यवादियों इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होनेें कहा कि देश की सुरक्षा एजेन्सियाँ भी लोगों को बांटने में लगी हुई हैं और धार्मिक भावनाओं में बहकर गुमराह हिन्दू व मुस्लिम युवकों को वह बाकायदा टेªनिंग देती है और देश में अराजकता का माहौल पैदा कर रही है। यासीन भटकल इसका एक स्पष्ट उदाहरण है।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने कहा कि जिन लोगों ने देश की स्वतन्त्रता संग्राम में कोई सहभागिता नहीं की थी वह आज देश के नायक बने हुए हैं और अगर जनता ने इनका असल रूप नहीं जाना तो यह देश के संविधान को बदल डालेगें,इतिहास को तो बदल ही रहें हैं। यह लोग शान्ति के पुजारी लोकतन्त्र के रक्षक महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के समर्थक हैं और राम मन्दिर की जगह गोडसे का मन्दिर बनाने की बात कर रहे हैं।
गोष्ठी में श्याम सुन्दर दीक्षित, बृजमोहन वर्मा, डा0 कौसर हुसैन,डा0 विनय दास, जिला बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष कौशल किशोर त्रिपाठी तथा रणधीर सिंह सुमन ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन मो0 तारिक खान ने किया।
    सभा में डा0 एस0एम0हैदर,अम्बरीश अम्बर सैय्यद अबु अजहर रिजवी, कदीर खान,पुष्पेन्द्र सिंह, भुपेन्द्र सिंह सैंकी,आॅल इण्डिया मुस्लिम पसमान्दा मुहाज के प्रदेश अध्यक्ष मो0 वसीम राईन, मिर्जा कसीम बेग,वीरेन्द्र श्रीवास्तव,यादवेन्द्र यादव, रामनरेश, सतेन्द्र यादव, विनय कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।

शुक्रवार, 9 सितंबर 2016

दिमाग में जहर

अगर मोदी दिल्ली से मुंबई का रेल टिकिट 25 हज़ार का भी कर दे
तब भी एक भी भक्त मूँह नही खोलेगा
भक्तों के अनुसार

मोदी की हार मतलब मुल्लों और कम्युनिस्टों की जीत

और ये बात भक्तगण कभी सहन नहीं कर सकते

ठीक इसी तरह हिटलर ने भी यहूदियों और कम्युनिस्टों का डर दिखा कर सत्ता अपने हाथ मे ले ली थी

फिर हिटलर ने सवा करोड़ लोगों का कत्ल किया ,

लेकिन उसके भी किसी भक्त ने विरोध नही किया था

सत्ता पाने के लिये ठीक वही तरीका संघ ने भारत मे अपनाया है

हर चुनाव से पहले संघ दंगा करता है और फिर मुसलमानों और पाकिस्तान का हव्वा खड़ा करके चुनाव जीतता है

और देखिये डरे हुए लोग मोदी की लात भी खा रहे हैं और गुणगान भी कर रहे है

नौकरी मिले ना मिले , दाल चाहे 2OO रु किलो मिले , पर मुसलमानों और पाकिस्तान को नीचा दिखा दो
लोकसंघर्ष की ओर से ----सौ  जूते  रोज मारो लेकिन पाकिस्तान  को बर्बाद  कर दो
क्या शातिर दिमाग पाया है , क्या चाल खेली है ?

पूरी पीढ़ी को बर्बाद कर दिया नफरत के खेल मे
---हिमांशु कुमार

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

इंद्र-इन्द्राशन और हिन्दुवत्व गिरोह पकड़ा गया- मोदी आर्मी ब्रिगेड का टीनू जैन

हिंदुवत्व का राज स्थापित करने वाले लोग इंद्र और इंद्राशन और मेनका को भूल जाए तो असली देशभक्ति, राष्ट्रवाद, हिन्दुवत्व सब बेकार हो जायेग.मोदी ब्रिगेड का सरगना टीनू जैन मध्य प्रदेश में नागालैंड की लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में गिरफ्तार किया गया है. अपुष्ट शुत्रों से यह भी पता चल रहा है कि यह सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित जैन शाह का रिश्तेदार भी है इस नाते प्रधानमंत्री मोदी साहब के अत्यधिक नजदीक था और संबंधों की आड़ में वह सेक्स रैकेट का संचालन कर रहा था. भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के साथ भी उसकी फोटूवें सोशल मीडिया पर थी. 
                आये दिन नागपुर मुख्यालय को इस तरह के मामले देखने पड़ते हैं. भारतीय जनसंघ के सफ़र से लेकर भाजपा तक के सफ़र में सेक्स रैकेट संचालकों का भी बड़ा योगदान रहा है. जनसंघ के संस्थापकों में से एक बलराज मधोक ने भी अपनी आत्मकथा "जिंदगी का सफर-भाग 3" के पेज न. 25 पर लिखा है-".....मुझे अटल बिहारी और नाना देशमुख की चारित्रिक दुर्बलताओं का ज्ञान हो चुका था। जगदीश प्रसाद माथुर ने मुझसे शिकायत की थी की अटल (बिहारी वाजपेयी) ने 30, राजेंद्र प्रसाद रोड को व्यभिचार का अड्डा बना दिया है। वहाँ नित्य नई-नई लड़कियाँ आती हैं। अब सर से पानी गुजरने लगा है। जनसंघ के वरिष्ठ नेता के नाते मैंने इस बात को नोटिस में लाने की हिम्मत की। मुझे अटल के चरित्र के विषय में कुछ जानकारी थी। पर बात इतनी बिगड़ चुकी है, ये मैं नहीं मानता था। मैंने अटल को अपने निवास पर बुलाया और बंद कमरे में उससे जगदीश माथुर द्वारा कही गई बातों के विषय में पूछा। उसने जो सफाई दी बात साफ़ हो गई। तब मैंने अटल (बिहारी वाजपेयी ) को सुझाव दिया कि वह विवाह कर ले अन्यथा वह बदनाम तो होगा ही, जनसंघ की छवि को भी धक्का लगेगा।....."
इंद्र-इन्द्रशन और हिन्दुवत्व गिरोह मेनकाओं के बगैर नहीं रह सकता है. यह भारतीय समाज में जितनी कुरीतियाँ हैं या बुरे कर्म हैं जिनकी संघ हमेशा निंदा करता रहता है.  वही उसके आचरण में परिलक्षित होती हैं. 
वहीँ, उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम इलाके में स्विफ्ट कार में सवार ड्राइवर ने (नंबर- HR26 AR 9662) बेरिकेडिंग को तोड़कर भागने का प्रयास किया. इसके बाद संदेह होने पर पुलिस ने कार रोककर तलाशी ली तो उसमें से तीन करोड़ रुपए मिले.
इसके बाद पुलिस ने कार में मौजूद अनूप कुमार अग्रवाल और सिद्धार्थ शुक्ला को हिरासत में लिया और उनसे पूछताछ शुरू कर दी.यह दोनों लोग भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए काला धन ला रहे थे. 
यह सब संघ के चरित्रवान लोग हैं एक पुरानी कविता है
कुछ काजल क्रूर कुकर्म पथी, सुजला सुफला में नहाने गए. 
अपना दिल दामन धो न सके, पर दिल्ली में गंगा बहाने चले.

 सुमन 

छात्र नेता पर प्रबंध तंत्र का हमला

एआईएसएफ उ0प्र0 उपाध्यक्ष जीसस चतुर्वेदी और जिला संयोजक रवि शर्मा पर संस्कार पब्लिक स्कूल के प्रबंधक और उनके गुंडों द्वारा जानलेवा हमला किया गया।

मथुरा। महोली रोड स्थित संस्कार पब्लिक स्कूल के खिलाफ संघर्ष कर रही आल इण्डिया स्टूडेन्ट्स फैडरेशन के कार्यकर्ता जब आज दोपहर शांति पूर्वक प्रशासन और जनता का ध्यान आकर्षित करने के लिए छात्रों के साथ महोली रोड प्रताप नगर से गुजरे तो संस्कार पब्लिक स्कूल के प्रबंधक और उनके गुंडे वहाँ पहुँच गए और उन्होंने छात्रों के साथ मारपीट शुरू कर छात्र नेता जीसस चतुर्वेदी पर जानलेवा हमला किया और गम्भीर रूप से घायल कर दिया तथा साथी रवि शर्मा को भी गम्भीर चोट आयीं हैं। ज्ञात हो कि संस्कार पब्लिक स्कूल फर्जी तरीके से सरकार और बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है, स्कूल का भवन अवैध रूप से बनाया गया है, स्कूल के पास कक्षा 5 तक की मान्यता यूपी बोर्ड की मान्यता है जबकि संस्कार स्कूल सीबीएससी बोर्ड के पैटर्न पर बच्चों को कक्षा 12 तक पढ़ा रहा है और सीबीएससी बोर्ड के नाम पर मोटी रकम वसूल रहा है

मंगलवार, 6 सितंबर 2016

भाजपा के नेताओं की सोच कश्मीर समस्या को और पेचीदा बनाएगी


जिस तरह से कश्मीर में छर्रे के बौछार वाली बंदूकों का इस्तेमाल डेढ़ महीने से ऊपर किया जाता रहा यह सोचने वाला विषय है कि क्या भारत के किसी और हिस्से में सरकार एक दिन भी इस तरह का हथियार लोगों के खिलाफ इस्तेमाल कर पाती? लोग शायद बगावत पर उतर आते और सरकार ही चलने देते। सरकार के मंत्री कश्मीर की जनता को हिंसा छोड़ने की नसीहत दे रहे हैं। किंतु बुरहान वानी की मृत्यु के बाद से अब तक के कश्मीर में चले सबसे लम्बे कर्फ्यू में आम जनता से लोगों के मरने के आंकड़े रोज बढ़ रहे थे कि सुरक्षा बलों के लोगों के। सवाल यह है कि किसकी हिंसा ज्यादा जानलेवा या घातक थी? यदि लोगों से हिंसा छोड़ समाधान की दिशा में सहयोग की अपील की जाती है तो सरकार भी सुरक्षा बलों की हिंसा को रोक माहौल को सामान्य बनाने में अपनी भूमिका अदा करनी होगी। 52 दिनों के बाद कर्फ्यू उठाया गया है।

       अरुण जेतली ने साम्बा में अपने भाषण में कहा कि चाहे हथियार का इस्तेमाल करने वाले हों अथवा पत्थर फेंकने वाले दोनों से सख्ती से निपटा जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि वे कश्मीरी युवा के हाथ में पत्थर बंदूक के बजाए पेन, कम्प्यूटर या रोजगार देखना चाहेंगे। रक्षा मंत्री मनोहर परिक्कर ने पाकिस्तान को नर्क कहा है। प्रधान मंत्री कहते हैं हिंसा के लिए उकसाने वाले बच नहीं सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जान चाहे किसी की जाए, युवा हो या सुरक्षाकर्मी, तो यह देश का ही नुकसान है। नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आने वाले शरणार्थियों के लिए रु. 2000 करोड़ की राशि आवंटित करने की घोषणा की है। भाजपा के सभी नेता मानते हैं और अब महबूबा मु्फ्ती से भी कहलवाया जा रहा है कि कश्मीर में जो भी असंतोष है उसके लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है।
      
भाजपा नेताओं की सरलीकृत सोच कश्मीर समस्या को समाधान की दिशा में ले जाकर और पेचीदा बनाएगी।
      
नेताओ ंके बयान से ऐसा लगता है कि विकास से लोगों के असंतोष का दूर किया जा सकता है। किंतु यदि भौतिक विकास से ही लोग संतुष्ट हो जाते तो पड़ोसी सम्पन्न पंजाब का युवा इतने बड़े पैमाने पर नशे का शिकार नहीं होता। क्या सरकार सोचती है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से आने वालों को धन देकर उनकी वफादारी खरीदी जा सकती है? यदि ऐसा होता तो कश्मीर में अन्य राज्यों की अपेक्षा विकास पर ज्यादा धन खर्च करने के बाद आज यह स्थिति होती। कश्मीर के लोग भारत से खुश नहीं हैं। वे तब तक खुश नहीं हो सकते जब तक कश्मीर समस्या का समाधान उनके मन मुताबिक नहीं निकाला जाता। ज्यादातर विशेषज्ञों का कहना है कि यह हल किसी किस्म की स्वायत्ता होगी जो कश्मीरियों को मंजूर हो। कम से कम भारत द्वारा थोपा कोई हल शायद यहां के लोगों को स्वीकार हो। भाजपा नेता जितनी जल्दी यह बात समझ जाएंगे उतनी ही उनकी और कश्मीरियों की तकलीफ कम होगी।
      
कश्मीर में लोगों को भरोसा दिलाने के लिए कि सरकार समाधान के लिए गम्भीर है सुरक्षा बलों को धीरे धीरे हटाना चाहिए। 13 वर्षों में पहली बार सीमा सुरक्षा बल को भी बुलाया गया। सुरक्षा बलों की भूमिका सीमा पर है, उन्हें वहां तैनात रहना चाहिए। अंदरूनी कानून और व्यवस्था जम्मू कश्मीर की सरकार और पुलिए पर छोड़नी चाहिए। आखिर देश में अन्य जगहों पर भी आतंकवादी हमले होते हैं। क्या हर जगह सुरक्षा बलों को न्योता दिया जाता है? और इतने लम्बे समय तक कहीं सुरक्षा बलों को रखा जाता है?
      
अरुण जेतली को सोचना चाहिए कि आम कश्मीरी महिला और बच्चा भी क्यों पत्थर उठा रहा है? पत्थर तो लोग सुरक्षा बलों की हिंसा की प्रतिक्रिया में उठा रहे हैं। बल्कि जेतली को तो कश्मीरियों का धन्यवाद देना चाहिए कि लोग सिर्फ पत्थर ही उठा रहे हैं और बड़े पैमाने पर कोई हिंसा नहीं कर रहे। ऐसे कश्मीरी जो सुरक्षा बलों पर घातक हमले कर सकें उनकी संख्या तो बहुत कम है। सुरक्षा बल तो पत्थरों से अपनी सुरक्षा कर ही सकती हैं। किंतु लोग, जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, अपने को छर्रे के बौछार वाली बंदूकों से कैसे बचाएंगे? इस हथियार से 8 वर्षीय जुनैद का फेफड़ा फटने से या 16 वर्षीय इंशा की आंख जाने से लोगों के पास क्या सुरक्षा है? जितने लम्बे समय से कश्मीरी इन घातक हथियारों को झेल रहे हैं हमें कहना होगा कि कश्मीरी हिसंक नहीं बल्कि बहुत सहनशील हैं। मुख्य मंत्री को शर्म भी नहीं आती कि वे इंशा से अस्पताल में पूछती हैं कि क्या वह उनसे नाराज है? इतना अपमान कहां की जनता झेलेगी? भारत के मुख्य भू-भाग में इस किस्म की हिंसा, शायद आदिवासी इलाके को छोड़, कहीं भी बरदाश्त नहीं की जाती। कश्मीरियों का यह सवाल जायज है कि भारत में छर्रे के बौछार वाली बंदूकों का इस्तेमाल अब तक और कहीं क्यों नहीं किया गया? क्या हम कश्मीरी को अपना उतना नागरिक नहीं मानते जितना अन्य किसी राज्य के नागरिक को? कोई भी संवेदनशील लोकतांत्रिक सरकार इस किस्म के हथियार का इस्तेमाल अपने नागरिकों पर नहीं करेगी। इसे इजराइल फिलीस्तीनी लोगों पर इस्तेमाल करता है परन्तु इजराइल का फिलीस्तीनियों से वैसा रिश्ता नहीं है जैसा कि भारत कश्मीर के साथ होने का दावा करता है।
      
पाकिस्तान को कश्मीर में होने वाली सभी प्रकार की हिंसा के लिए दोषी मान लेना सरकार की ही किरकिरी है। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान का कहीं कहीं लोगों पर प्रभाव है और भारत उसके सामने लाचार है। जिस तरह आज भारत बलूचिस्तान, गिलगित, बल्तिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लोगों के असंतोष का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है वही काम पाकिस्तान ने इतने सालों से कश्मीर में किया है।
      
प्रधान मंत्री कह रहे हैं कि हिंसा के लिए उकसाने वाले बचेंगे नहीं। इस कथन में यह अहंकार झलकता है कि सरकार ही सही है और जनता गलत। क्या नरेन्द्र मोदी अपने कथन को देश के अंदर उनके हिन्दुत्ववादी साथियों द्वारा की गई हिंसा के संदर्भ में भी लागू करेंगे?
      
भाजपा के नेताओं को सभी तरह की परिस्थितियों से निपटने का एक ही तरीका आता है - सख्ती। कश्मीर का मामला बहुत पेचीदा हो चुका है। भाजपा नेता इतना ही कर सकते हैं कि उसे और पेचीदा बनाएं।
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संदीप पाण्डेय