रविवार, 17 फ़रवरी 2019

पाकिस्तान के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को समाप्त कर आर्थिक हड्ड़ी तोड़ने का काम करें सरकार-रणधीर सिंह सुमन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा सेनपुरवा में आयोजित की गयी श्रद्धाजंलि सभा

बाराबंकी। पुलवामा में अर्द्ध सैनिक बलो को सच्ची श्रद्धाजंलि यही होगी कि सरकार पाकिस्तान के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को तुरन्त समाप्त कर पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ की हड्ड़ी तोड़ने का काम करें। उक्त विचार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पुलवामा मे अर्द्ध सैनिक बलो के जवानो की शहादत पर ग्राम सेनपुरवा बंकी में आयोजित श्रद्धाजंलि सभा को सम्बोधित करते हुये राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कही। श्री सुमन ने आगे कहा कि नौजवानो की शहादत से पूरा देश शहीद नौजवानों के साथ खड़ा है। लेकिन कुछ साम्प्रादायिक शक्तियां देश की एकता और अखण्ड़ता को कमजोर करने के लिये राजनीत कर रही है। जिसकी हम सब निंदा करते है। श्रद्धाजंलि सभा को सम्बोधित करते हुये पार्टी जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि शहीद होने वाले नौजवान हमारे घरो के हैं। जो मजदूर, किसान घरो से आते है। उनको पेशन तक नही दी जा रही है। सरकार को चाहिये कि पेशन सुविधा बहाल करते हुये अन्य सुविधा प्रदान करे। जिला सह-सचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि जिस तरह मजदूर और किसान के हालात अच्छे नही है। उसी तरह अर्द्ध सैनिक बलो को जो सुविधाये मिलनी चाहिये नही मिल पा रही है। श्रद्धाजंलि सभा को प्रवीन कुमार, किसान सभा अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मुनेश्वर बक्श वर्मा ने भी सम्बोधित किया। सभा की अध्यक्षता पूर्व प्रधान अरुण वर्मा ने की। सभा में महेन्द्र यादव, रामनरेश, जैनुल आबदीन, मयूर सिह, गिरीश चन्द्र वर्मा, परमेन्द्र वर्मा, अशोक मौर्य, वीरेन्द्र कुमार वर्मा, कुलदीप, ताराचन्द्र, अशोक कुमार राव, आशुराम, अनुपम वर्मा, नन्हेलाल, रामविलास वर्मा, आदि मौजूद रहे। सभा के पूर्व 2 मिनट का मौन रख शहीदो को श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। 

मंगलवार, 8 जनवरी 2019

चौकीदार-चोर गिरोह की विदाई जनता तय कर रही है


बाराबंकी। चौकीदार-चोर-पेटकटवा गिरोह ने बैंक,बीमा बिजली सरकारी कर्मचारी संविदा कर्मचारी आशाबहू शिक्षामित्र आंगनबाड़ी पंचायत मित्र सहित संगठित और अंसगठित मजदूरों की तनख्वाहों में बढोत्तरी न करके कटौती की है इस तरह से आम जनता को भरपूर रोटी न मिल सके जिससे न वह जिन्दा रह सके न मर सके। 
यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित जिला अधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा  कि चौकीदार-चोर गिरोह की विदाई जनता मन में तय कर चुकी है इनके पास सी0 बी0आई0 के अलावा कोई अस्त्र नहीं है जो विरोध के स्वर को दबा सके। पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा मॅहगाई आसमान छू रही है सरकार गौशाला खोलने का नाटक कर रही है। क्या गौशाला में साँड़ और नीलगाय व बन्दरों को भी बन्द किया जायेगा। 
पार्टी के सहसचिव ड़ा0 कौसर हुसैन ने कहा कि किसानों की हालत दयनीय है और 2014 से सरकार ने उनकी बेहतरी के लिए कोई कार्य नहीं किया है वही पार्टी के सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि सरकार आरक्षण को हथियार बनाकर सत्ता में आने का जो ख्वाब देख रही है वह मात्र सरकार की जुमलेबाजी हैं। जब नौकरियां ही नहीं है तो आरक्षण कहाँ देगी सरकार?
किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि राफेल घोटाले से लेकर बैंक घोटालों में सत्तारूढ़ दल का हाथ है इन घोटालों की वजह से देश की अर्थ व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है। 
प्रदर्शन में गिरीशचन्द, रामनरेश, प्रवीनकुमार, दलसिंगार, मुनेश्वरबक्स, राजेन्द्र बहादुर सिंह एडवोकेट, विनीतकुमार वमार्, अभिषेक वमार्, जैनुल आबदीन, सुरेश यादव ,वीरेन्द्र कुमार, महेन्द्र, राजेश सिंह, रमेश सिंह, दिग्विजय सिंह, मुशाहिद अली, जियालाल वर्मा , सत्यवान, अमर सिंह परमेन्दर वर्मा विनोद कुमार यादव आदि प्रमुख कम्युनिस्ट नेता शामिल थे।

मंगलवार, 18 दिसंबर 2018

अलीबाबा और राफेल दलाल


बाराबंकी ! राफेल घोटालेे  लिप्त  मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में झूठा शपथ पत्र देकर जाँच सम्बन्धी याचिकाएं को तो खारिज करा लिया है किन्तु उनके इस भ्रष्टाचार को जनता माफ नहीं करेगी।
यह सम्बोधन करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह ‘सुमन’ ने राफेल-अलीबाबा और चोर गैंग के खिलाफ पार्टी के प्रदर्शनकारियों  से कहा कि मोदी सरकार के साथ किसी भी विशेषज्ञ का काम करना सम्भव नहीं है। उनकी जड़ता के कारण रिजर्व बैंक आफ इण्डिया के गवर्नर उर्जित पटेल भी इस्तीफा देकर निकल चुके हैं। पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि खेती को गौवंशीय पशु जबरदस्त नुकसान कर रहे हैं जिनकी रोकथाम करने में सरकार असफल है। उत्तर भारत में गौवंशियों को पूज्यनीय बना रखा है और देश के दूसरे हिस्सों से यह लोग उनका मांस निर्यात कर रहे हैं। पार्टी के सहसचिव डा0 कौसर हुसेन ने कहा कि आवारा पशुओं के ऊपर सरकार तुरन्त रोक लगावे। पार्टी के सहसचिव शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि प्रदेश में किसानों को न्यूनतम लाभकारी मूल्य मिलने के बजाय धान, आलू की खरीद न होने के कारण किसान बर्बाद हो गया है। किसानों ने आलू सड़कों पर फेंक दिया है।
किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार गाय और गंगा और ईश्वर की जाति निर्धारित करने में मस्त है अपनी नाकामयाबी को छिपाने के लिए अब यह राम मंदिर का राग अलापने लगी है।
प्रदर्शनकारियों  में राम नरेश वर्मा, गिरीशचन्द्र वर्मा, दल सिंगार, अमरसिंह, गुड्डू, वीरेन्द्र वर्मा, मुनेश्वर बक्स, प्रवीण कुमार, राजेन्द्र बहादुर सिंह, गौरी रस्तोगी, भूपेन्द्र पाल सिंह, राम विलास वर्मा, सहजराम, शिवराम, श्रवन कुमार, महेन्द्र यादव, संदीप तिवारी, मुशाहिद अली, धमेन्द्र शर्मा, परमेन्द्र वर्मा, कैलाश, बद्री यादव, देशराज, प्रमोद, रिंकू, रूपचन्द्र आदि प्रमुख लोग थे।
जिलाधिकारी कार्यालय पर अतिरिक्त जिलाधिकारी संदीप गुप्ता ने आकर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन लिया।

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

चोर ही चौकीदार है


राफेल घोटाला, नोटबन्दी घोटाला, जी0एस0टी0 घोटाला और अब सी0बी0आई0 जैसी संस्था को नष्ट कर मोदी देश को दिवालिया बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
‘चोर ही चैकीदार’ है, ‘नारे के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेे जुलूस निकाला जुलूस में  शामिल लोगों को सम्बोधित करते हुए पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह ‘सुमन’ ने यह उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक आफ इण्डिया को डरा धमकाकर 3.6 लाख करोड़ रूपये लेकर अपनी विदेेश यात्राओं  के मद में  खर्च कराना चाह रहे हैं।

पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि पाटी मोदी के भ्रष्टाचारों  का खुलासा करने के लिए बराबर जुलूस प्रदर्शन कर रही है वहीं क्षेत्रीय दल मोदी की मदद के लिए चुप्पी साध रखी है यह देश के लिए खतरनाक सन्देश है। पार्टी के सहसचिव डा0 कौसर हुसेन ने कहा कि सत्तारूढ़ दल अपने भ्रष्टाचारों  को छिपाने के लिए मन्दिर राग अलाप रही है उसको मन्दिर-मस्जिद से कोई लेना-देना नहीं है। सहसचिव शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि योगी सरकार किसानों  की धान खरीद मामले में असफल हो चुकी है और किसानों  का धान विचैलिए बारह सौ रूपये कुन्तल खरीद रहे हैं सरकार विचैलिए को फायदा देने के लिए धान खरीद की नौटंकी कर रही है।
किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि किसान समस्याओं  लेकर 29 व 30 दिसम्बर को दिल्ली प्रदर्शन करेगी जिसमें  जिले से काफी संख्या में किसान जायेंगे.
                    जुलूस में राम नरेश वर्मा, दल सिंगार, गिरीश चन्द, अमर सिंह प्रधान, मुनेश्वर बक्स, प्रवीन वर्मा, महेन्द्र यादव, अशोक मौर्य, परमेन्द्र वर्मा, नवीन वर्मा, सहदेव वर्मा, रामविलास, आशीष शुक्ला, राजेन्द्र, बहादुर सिंह, करमवीर सिंह, सरदार भूपेन्द्र पाल सिंह अधिवक्ता गिरीश चन्द, गौरी रस्तोगी आदि प्रमुख कार्यकर्ताओं  ने हिस्सा लिया।

रविवार, 11 नवंबर 2018

मौलाना आज़ाद के पद चिन्हों पर चल कर देशी अंग्रेजों को भगाया जा सकता है

  1.              बाराबंकी -मौलाना आजाद की स्वतंत्रता संग्राम में उनकी  कुर्बानियों  ने देश को आजाद करानेमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है उनके पद चिन्हों पर चल कर देशी अंग्रेजों को भगाया जा सकता है 
  2.                      यह विचार व्क्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन नें आज आवाज फाउडेशन बाराबंकी की ओर से आयोजित   भारत रत्न प्रथम शिक्षामंत्री एवम् स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना अबुल कलाम आजाद के  जन्म दिवसके अवसर  देसीआन बैंकवट हाल में सम्बोधित हुए आज़ाद को  हिन्दू-मुस्लिम एकता का अग्रदूत बताया. 
  3. आज़ाद जन्म दिवस सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ  आई0पी0एस0 मंजूर अहमद  मुख्य अतिथि ने मौलाना आजाद के बतौर प्रथम शिक्षा मंत्री किये गये कारनामों के उजागर किया तथा शिक्षा हासिल करने  पर जोर देने दिया .  जवाहर लाल नेहरु महाविद्यालय के प्रवक्ता र्डॉ0 राजेश मल्ल ने कहा कि मौलाना आजाद जैसे खुले जहन नेताओं की इस समय भारत को बहुत जरूरत है.
  4.                                              जलसे का संचालन पूर्व सदस्य जिला पंचायत  मो0 मोहसिन ने किया। उक्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से इरफान कुरेशी, फरहान वारसी, दानिश खान, जियउर्रहमान नफीस मियाँ, मो0 अकरम, अमरनाथ मिश्रा, कमल भल्ला, संजीव मिश्रा, जलील यार खाँ, उमेर किदवाई, हुमाँयु नईम खाँ, डॉ0 अहमद जावेद, सरदार चरनजीत सिंह , विशाल सिंह, फजल इनाम मदनी ,चौ0 तालिब नजीब, तारिक, जीलानी आदि शहर के सैकड़ो सम्मानित लोग उपस्थित रहे।  जलसे की सदारत शाह अनवर जमाल किदवई ने किया


मंगलवार, 30 अक्तूबर 2018

पूर्व विधायक की स्मृति सभा का हुआ आयोजन


स्वः गजेन्द्र सिंह जो वादा करते उसे पूरा करते थे: फरीद महफूज किदवई

राजनीतिक युग में जनता के सर्व सुलभ राजनेता थे: फवाद किदवई
पूर्व मंत्री बोलते हुए 

बाराबंकी। वर्तमान समय में अब देश में ऐसी सरकारें सत्तारूढ है। जो अपने अल्पसंख्या में रहने वाले नागरिकों के दमन करने पे उतारू है। उनकी यह संविधान विरोधी हरकते देश की एकता और अखण्डता के लिए खतरा है। उक्त विचार स्व0 दादा गजेन्द्र सिंह की स्मृति सभा में पूर्व मंत्री फरीद महफूज किदवई ने व्यक्त किये। पूर्व मंत्री ने स्मृति सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वः गजेन्द्र सिंह जो वादा करते थे। उसको पूरा करते थे। अब यह बात वर्तमान राजनीतिज्ञो में नहीं है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी महासचिव फवाद किदवई ने कहा दादा गजेन्द्र सिंह अपने राजनीतिक युग में जनता के सर्व सुलभ राजनेता थे। वह कर्तव्यनिष्ठ व ईमानदार थे। प्रदेश सरकार में मंत्री प्राप्त दर्जा व पूर्व विधायक परमात्मा सिंह ने कहा कि दादा के साथ हम भी विधायक थे और वे विधानसभा में अपनी बातों को प्रभावशाली तरीके से रखते थे। संजय सेतु के निर्माण की मंजूरी उन्हीं के अथक प्रयासों से हुई थी। इसके अतिरिक्त सभा को पत्रकार तारिक खान, सिटी इण्टर कालेज प्रधानाचार्य विजय प्रताप सिंह, प्रशान्त कुमार मिश्रा, नवीन सेठ, वसीम राईन, बृजमोहन वर्मा, बार पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र प्रताप सिंह बब्बन, सेल्स ट्रेक्स बार अध्यक्ष पवन वैश्य, हुमाँयू नईम खान, उपेन्द्र सिंह, अनवर जमाल, महंत बी0पी0 दास, राजेश सिंह आदि लोगों ने भी संबोधित किया। सभा का संचालन अधिवक्ता विभव मिश्रा व अध्यक्षता बृजेश कुमार दीक्षित ने की। 
श्री फवाद किदवई मल्यांपर्ण करते हुए 
                   स्मृति सभा में वरिष्ठ अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन, अजय गुरू, श्याम सुन्दर दीक्षित, विनय दास, विनय कुमार सिंह, शिव दर्शन वर्मा, मो0 कदीर, एहशान बेग, जैनुल कदर, विजय प्रताप सिंह, निर्मल वर्मा, पुष्पेन्द्र सिंह, विनोद कुमार यादव, गिरीश, राजेन्द्र सिंह, कर्मवीर सिंह, भूपिंदर पाल सिंह, प्रवीन कुमार, महेन्द्र यादव, डा0 कौशर हुसैन, रईस अहमद, कादरी, आनन्द सिंह, अमर प्रताप सिंह, पूर्णांशु सिंह, नीरज वर्मा, कमल सिंह चन्देल, कलीम किदवई, अख्तर पत्रकार अवधेश आदि मौजूद रहे।

बुधवार, 24 अक्तूबर 2018

प्रधानमंत्री मोदी खुद राफेल घोटाले में संलिप्त है-रणधीर सिंह सुमन

  1.   बाराबंकी। भ्रष्टाचार के कारण आज सी0बी0आई0 मुख्यालय को सील करना पड़ गया है। प्रधानमंत्री मोदी स्ंवय राफेल घोटाले में संलिप्त है। 
  2.                           उक्त आरोप लगाते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने राष्ट्र व्यापी पार्टी द्वारा द्वारा आयोजित प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुये व्यक्त किये। श्री सिंह ने आगे कहा कि देश मे भ्रष्टाचार अपनी सीमायें तोड़ रहा है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई कार्यवाही सम्भव ही नही रह गई है।
  3.                             पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई बड़ी मुश्किल है। क्योकि भ्रष्टाचारियो ने धर्म का आवरण ओढ़ रखा है। इसलिये आवश्यक है कि धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखा जाये। पार्टी के जिला सहसचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि राफेल घोटाले में जैसे उच्चतम न्यायालय ने पूछताछ शुरु की। कि विदेश राज्यमंत्री सीतारमण भ्रष्टाचार को दबाने के लिये पेरिस पहुंच गई। पाटी सह-सचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि नोटबन्दी घोटाला, राफेल घोटाले ने देश की अर्थ व्यवस्था को नष्ट कर दिया है। 
  4.                         
    किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार िंसह ने कहा कि राफेल घोटाले की लडाई आगे तक लड़ी जायेगी। प्रदर्शन में प्रवीण कुमार, मुनेश्वर, गिरीश चन्द्र, वीरेन्द्र कुमार, रामनाथ, गौरी रस्तोगी, राजेन्द्र सिंह राणा, नीरज वर्मा, दल सिंगार, महेन्द्र यादव, रामशंकर शर्मा, बलीराम, रामनरेश, सुरेश, सर्विन्द्र कुमार, रामविलस, कल्लूराम आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रविवार, 30 सितंबर 2018

मनुष्यता ही मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है- डॉ सुभाष राय

 बाराबंकी. मनुष्यता ही मनुष्य का सबसे बड़ा गुण है मनुष्यता का अभाव सत्ता के शिखर पर बैठे हुए राजनीतज्ञों में है जिस कारण से सामाजिक व्यवस्था नष्ट हो रही है.
             यह उद्गार व्यक्त करते हुए लोकसंघर्ष पत्रिका द्वारा आयोजित महंत गुरुशरण दास श्रद्धांजलि समारोह को संबोधित करते हुए जनसन्देश टाइम्स के संपादक डॉ सुभाष राय ने कहा कि जब मनुष्य को मनुष्य नहीं माना जा रहा था तब जगजीवन दास साहेब ने सतनाम संप्रदाय की स्थापना कर सभी जातियों और धर्मों के लोगों को मनुष्यता के रास्ते पर चलने की राह दिखाई थी और उसी संप्रदाय के प्रथम पावा कमोलीधाम के महंत गुरुशरण दास जी थे. जिनका इस देश के अन्दर सामाजिक एकरूपता को बनाये रखने में महत्वपूर्ण योगदान था. 
                            जनपद के सुप्रसिद्द साहित्यकार डॉ श्यामसुन्दर दीक्षित ने कहा कि  देश और प्रदेश में हिन्दू-मुस्लिम एकता का जो वटवृक्ष चला आ रहा था उसको नया जीवन प्रदान करने में महंत जी की प्रमुख भूमिका रही है. जनेस्मा के प्रोफेसर डॉ राजेश मल्ल ने कहा कि सतनाम संप्रदाय ने विश्व भर में एकता का सन्देश दिया था जो आज भी प्रासंगिक है. पत्रकार तारिक खान ने कहा कि महंत जी इस जनपद के गौरव थे और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया. गाँधी ट्रस्ट के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा ने कहा कि महात्मा गाँधी के रास्ते पर चलकर ही इस देश को बचाए और बनाये रखा जा सकता है. जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित ने कहा कि ब्राह्मणवादी व्यवस्था के निंदक भी ब्राह्मणवादी जीवन जीना चाहते हैं इस विसंगति को दूर किया जाना चाहिए. 
         अध्यक्षीय भाषण देते हुए सुप्रसिद्ध कहानीकार शिवमूर्ति ने कहा कि साहित्य में सतनाम साहित्य का महत्वपूर्ण योगदान है और हिंदी साहित्य में सतनाम संप्रदाय के सन्तों ने जो रचनाएं लिखी हैं उन रचनाओं ने हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है.
                     श्रद्धांजलि सभा को विनय दास, रणधीर सिंह सुमन, बाबा पत्रकार, बृजमोहन वर्मा, हिसाल बारी किदवई, अजय गुरूजी, श्रवण कुमार, जिला टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन कुमार वैश्य, निशांत द्विवेदी, महंत हरिशरण दास, डॉ एस एम हैदर आदि लोगों ने सभा को संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन विभव मिश्र एडवोकेट ने किया.   

                  श्रद्धांजलि सभा में सुरेन्द्र प्रताप सिंह 'बब्बन', प्रदीप सिंह एडवोकेट, पुष्पेन्द्र कुमार सिंह, भूपिंदर पल सिंह 'शैंकी', अजीत सिंह, शिव दर्शन वर्मा, अमर प्रताप सिंह, गिरीश चन्द्र, डॉ कौसर हुसैन, मो. कदीर, आलम, राहुल दास, अमर सिंह प्रधान, राम नरेश वर्मा, विनोद तिवारी, अवधेश यादव, प्रत्युष कान्त शुक्ला  नीरज वर्मा, सीताकान्त शुक्ला, आशीष कुमार, विनय कुमार सिंह व संत शरण दास एडवोकेट आदि प्रमुख लोग थे.

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

चोर चौकीदार और भगवा कसाईखाना: भाकपा का जुलुस

गली-गली में शोर हैं चौकीदार ही चोर हैं या भगवा कसाई खाना बंद करो जैसे नारे लगाते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जलूस निकाला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद के सदस्य रणधीर सिंह  सुमन ने सम्बोधित करते हुए कहा कि नरेन्द्र दामोदर मोदी ने राफेल घोटाले में कमीशन खाया है और सरकार को क्षति पहुंचाने के लिए एच.ए.एल (HAL) को ठेका न दिलवा कर 2019 का चुनाव लड़ने के लिए अपने मालिक से चुनावी चंदा प्राप्त कर लिया है.
            पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन  वर्मा ने कहा कि भगवा पुलिस भगवा कसाई खाने के रुप में तब्दील हो गई है और एक समुदाय विशेष के लोगों को पकड़  कर अलीगढ़ से लेकर बाराबंकी तक एनकाउंटर के नाम पर वध कर रही है. पार्टी के जिला सहसचिव डॉ कौसर हुसेन ने कहा कि मोदी सरकार को हटाने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी 2019 तक आन्दोलन चला कर संघर्ष करेगी। पार्टी के जिला सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि इस सरकार में किसान आत्महत्याएं कर रहा है, किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है वहीं अधिकारी बाढ राहत घोटाला करके मालामाल हो रहे हैं.
              प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह दलसिंगार व गिरीश चन्द्र कर रहे थे. प्रदर्शन में अमर सिंह प्रधान, मुनेश्वर बक्श, रामनरेश वर्मा, प्रवीण कुमार, महेंद्र यादव ने कहा वीरेंद्र कुमार, अशोक मौर्य, सहजराम, सुरेश रैना, दिनेश रावत आदि प्रमुख कम्युनिस्ट नेता शामिल शामिल थे.



1964 का पश्चिम बंगाल दंगा

मेरी पत्रकारिता की जिन्दगी में इस तरह के मामलात अक्सर पेश आए जब मुझे दोहरी जिम्मेदारी का निर्वाह करना पड़ा। अखबार के साथ मिल्लत के मसलां व मामलात में अमली तौर पर हिस्सा लेना पड़ता था। आजाद हिन्दुस्तान में मुस्लिम नेतृत्व के समाप्त हो जाने के पश्चात अखबार के संपादक को ही लोग हर मर्ज की दवा और हर मसले का हल समझने लगे। मुझसे जहाँ तक संभव होता, मुस्लिम समस्याआें को अखबार के माध्यम से और जनता के प्लेटफार्म से पेश करता रहा। 1964 में प0 बंगाल पर भीषण साम्प्रदायिक दंगे का कहर टूट पड़ा। यह कांग्रेसी नेता प्रफुल्ल चन्द्र सेन की हुकूमत का दौर था डॉ0 बी0सी0 राय गुजर गए थे। हुआ यह कि कश्मीर में दरगाह हजरत बल से ‘‘मूए मुबारक’’ (दाढ़ी का बाल) चोरी हो जाने के कारण जम्मु-कश्मीर में गम व गुस्से की आग भड़क उठी। वजीर आजम कश्मीर की हुकूमत को 1952 में समाप्त कर बख्शी गुलाम मुहम्मद को केन्द्र सरकार ने सत्ता सौंप दी थी। अवाम का असल क्रोध बख्शी गुलाम मुहम्मद के खिलाफ था, वही उनका निशाना थे । पूरे कश्मीर में भीषण हिंसा व तबाही की घटनाएं पेश आइंर्। पश्चिम बंगाल में भी हिसात्मक विरोध प्रदर्शन कश्मीर की घटना पर प्रारम्भ हुए, साथ ही पूर्वी पाकिस्तान ( आज का बंगला देश) में जल्द ही हिसात्मक प्रदर्शन व परिणाम स्वरूप साम्प्रदायिक हिंसा का दौर शुरू हो गया, जिसके नतीजे में वहाँ के अल्पसंख्यक हिन्दुआें को भारी जान माल का नुकसान हुआ। पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिम बंगाल हिन्दू शरणार्थियां की आमद शुरू हो गयी। कलकत्ते के कुछ अखबारां ने इसे खूब बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, तो कलकत्ते व पास के जिलां की सौहार्द्रता का माहौल बिगड़ने लगा और साल के प्रारम्भ में साम्प्रदायिक घटनाआें के इक्का-दुक्का मामले पेश आए। 
कलकत्ता से मिले हुए बाटा नगर में दंगा भड़क उठा। मुसलमानां के सैकड़ां घर जला दिए गए।
भुवनेश्वर (उड़ीसा) में कांग्रेस का अधिवेशन चल रहा था। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इसे संबोधित करते हुए बेहोश हो कर गिर पड़े। अफरा-तफरी मच गई। पं0 नेहरू को फौरन दिल्ली ले जाया गया। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पी0सी0 सेन भुवनेश्वर से उड़े तो रास्ते में साम्प्रदायिक दंगे से जलते हुए बाटा नगर का हवाई नजारा करते हुए कलकत्ता पहँचे। अब साफ दिख रहा था कि पश्चिम बंगाल में बड़े साम्प्रदायिक दंगे का बादल फटने वाला है। दोपहर का वक्त था, मैं अखबार के दफ्तर में व्यस्त था कि एक मुखबिर ने आकर खबर दी कि आज रात ठीक आठ बजे अंटाली के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फसाद बरपा होगा। यह खबर मिलते ही मैं जकरिया स्ट्रीट खिलाफत कमेटी के दफ्तर मैंं चला गया। जाने से पहले मुल्ला जान मुहम्मद को फोन कर दिया था कि कुछ और लोगां को बुला लें, जरूरी सलाह करनी है। दंगे की खबर सुनकर सभी परेशान हुए और तय पाया कि हम लोग फौरन राइटर्स बिल्डिंग जाकर मुख्यमंत्री से भेंट करें और दंगे को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने पर जोर डालें।
मेरा प्रस्ताव था कि ऐसी आशंका है कि यह दंगा बड़े सुनियोजित ढंग से बड़े पैमाने पर होगा। यह भी संभव है कि मुसलमानां को दंगाग्रस्त बस्तियां से बचाकर सुरक्षा पूर्ण ढंग से निकालना पड़े तो हम लोग मुख्यमंत्री से प्रार्थना करें कि बचाव के इस कार्य में वह हमें गोरखा पुलिस का विशेष दल उपलब्ध करांएँ। इसी के साथ-साथ हम चार-पाँच ट्रकां का भी प्रबन्ध कर लें वरना ऐन वक्त पर कुछ बनाए नहीं बनेगा। मुल्लाजान ने मेरे इस प्रस्ताव का यह कहते हुए विरोध किया कि वह 1950 ई0 वाली गलती दोबारा नहीं करेंगे कि मुसलमान अपनी बस्तियाँ खालीकर दें और उस पर गैरां का कब्जा हो जाएगा। मीटिंग में मौजूद अन्य व्यक्तियां ने भी मुल्लाजान की बात से अपनी सहमति जताई। मैंने एक बार फिर अपनी बात को दोहराते हुए कहाकि यदि दंगाइयां का हमला इतना तीव्र हुआ कि मुसलमान ठहर न सके तो ऐसी हालत में संवदेनशील क्षेत्रां से असुरक्षा की स्थिति में उन्हें गुजरना होगा और उनको अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा, परन्तु मुल्लाजान अपनी राय पर कायम रहे तो मैं खामोश हो गया। हम लोगां का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री पी0सी0 सेन से मिलने पहुँचा। हमसे पहले कम्यूनिस्ट पार्टियां के लीडर बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री से मिलने आए थे और उनसे सख्त शब्दां में दंगे को फैलने से रोकने की मांग कर रहे थे। उनके जाने के बाद हम लोग मुख्यमंत्री से मिले। वह आंखें बंद किए हुए आराम से झूलन कुर्सी पर झूलाझूल रहे थे। उनके मंत्री विजय सिंह नहार पास बैठे थे। हम ने मुख्यमंत्री को सूचना दी कि आज रात 8 बजे कलकत्ते में दंगां का सिलसिला अंटाली जिले से प्रारम्भ होगा। यदि कलकत्ता को बचाना है तो पहले अंटाली को बचाना होगा। वहाँ के थानेदार को इसी समय हटाकर किसी योग्य व मजबूत थानेदार को वहाँ भेजें। पी0सी0 सेन ने हमारी बात सुनने के पश्चात कलकत्ता पुलिस कमश्निर को आदेश दिया कि अंटाली थाना प्रभारी को हटाकर वहाँ दूसरा अफसर तुरन्त भेजो। इस आदेश का पालन अंटाली व कलकत्ता में दंगा भड़ककर शान्ति होने के दो माह पश्चात हुआ। उसी समय मुख्यमंत्री के पास बाटा नगर के दंगा पीड़ित अपनी फरियाद लेकर आ गए, कि ‘‘हमारा घर बार सब लूट मारकर के जला दिया गया है, 250 से अधिक घर जलाए जा चुके हैं। हजारां की संख्या में मुसलमान मर्द, औरतें व बच्चे बेघर व तबाह हो गए थे।
 मगरिब से पहले हम लोग खिलाफत कमेटी के दफ्तर लौट आए। ठीक 8 बजे टेलीफोन की घंटी बजी। मुल्ला जी ने मेरी ओर और मैंने उनकी ओर देखा दोनां को एक साथ यही शंका हुई कि यह दंगा प्रारम्भ होने की खबर होगी। फोन मैंने उठाया तो कोई बदहवास शख्स फरियाद कर रहा था कि अंटाली में दंगाइयां ने बड़े पैमाने पर हमला करके नरसंहार प्रारम्भ कर दिया है, हमें यहाँ से निकालो। उन दिनां अंटाली क्षेत्र में बड़ी मुस्लिम बस्ती आबाद थी और मुसलमानां के रबड़ व चमड़े के बड़े कारखाने वहाँ थे। अब फोन लगातार बज रहा था और उधर से एक ही सदा आ रही थी कि हम लोग दंगाइयां से घिर गए हैं हमको बचाओ। मुल्ला जी ने मंत्री विजय सिंह नहार को फोन किया तो उनका रूखा जवाब आया कि आप को अंटाली के मुसलमानां की चिंता है मगर हमारी ठाकुर बाड़ी को मुसलमानां ने बर्बाद कर दिया है। यह सूखा जवाब मिलने के बाद उन्हांने मुख्यमंत्री पी0सी0 सेन को फोन लगाया। वह राजभवन कम्पाउन्ड में रहते थे। शादी विवाह नहीं किया था लंडूरे थे। बाल-बच्चां के दुख दर्द से अपरिचित थे। उनके आदमी ने फोन पर बताया कि मुख्यमंत्री सो रहे हैं और उन्हें किसी हालत में जगाया नही जा सकता। उधर से मायूस होकर मुल्लाजी ने कहा कि हम लोग अंटाली चलते हैं। मुल्लाजी के पास जीप थी, उसमें जब मैं आगे बैठने लगा तो मुल्ला जी ने मुझे धक्का देकर नीचे उतार दिया और कहा ‘‘तेरे बच्चे हैं, पीछे बैठो’’। मुल्ला जी की यह हमदर्दी वाली बात आज भी मुझे याद है।
जीप जकरिया स्ट्रीट से निकली तो वेलिंगटन स्कवायर से होकर धर्मतल्ला और मौला अली का रास्ता नहीं पकड़ा जो सीधे अंटाली जाता था बल्कि स्पलेनेड, चौरन्गी और पार्क स्ट्रीट होते हुए हम लोग पार्क सर्कस मैदान से अंटाली की ओर मुड़े तो सड़क बन्द थी, पुलिस ने रूकावटें खड़ी कर दी थीं, भारी संख्या में पुलिस फोर्स मार्ग रोके खड़ी थी और सामने पूरा क्षेत्र शोलां की लपेट में था। आकाश सुर्ख हो रहा था। जलती हुई बस्ती से चीख व पुकार साफ सुनाई दे रही थी। हमने आगे बढ़ना चाहा तो पुलिस वालां ने अपनी राइफलें तान ली। एक अफसर ने आगे बढ़कर हमें आगाही दी कि ‘‘वापस चले जाओ वरना गोली चला देंगे। हम बेबस होकर खिलाफत दफ्तर वापस लौट आए। पूरी रात आँखां में कटी, फोन लगातार बजता रहा, दंगा अंटाली से भी आगे फैल रहा था। मजलूम मुसलमान मदद की गुहार लगा रहे थे, हम बेबस थे, कहने के लिए कुछ नहीं था, सिर्फ फरियाद सुनकर फोन रख देते थे, इसी में सुबह हो गयी तो मालूम हुआ कि अंटाली में आबाद पूरी बस्ती जलकर राख हो गई। रबड़ और चमड़े के कारखाने भी जलकर तबाह हो गए। पूरा क्षेत्र मुसलमानां से खाली हो गया। जिसका जहाँ सींग समाया, पनाह ली। हमने बचाव की तैयारी नहीं की थी, मंसूबे के अन्तर्गत दंगे का उद्देश्य मुस्लिम बस्तियां को खाली कराके उस पर कब्जा करना था, ताकि वहाँ अपनां की नयी आलीशान बस्तियाँ बसायी जाएँ। पुलिस पूरी तरह से दंगाइयां का साथ दे रही थी। दूसरे दिन कलकता शहर में दूर-दूर तक दंगा फैल गया और हजारां, लाखां की संख्या में तबाह बर्बाद व बेघर मुसलमान, बूढ़े, महिलाएं व बच्चे जकरिया स्ट्रीट व कोलूटोला के फरयामां पर ठंड के जमाने में पड़ गए जितनी बिल्डिंग थी सब पनाह गज़ीनां (शरणार्थियां) से भर गयी। कलकत्ता शहर में कर्फ्यू लग गया। शरणार्थियां के खाने-पीने के बन्दोबस्त करने के लिए क्षेत्र के सैकड़ां नौजवान मैदान में आ गए। फिर भी पनाहगजीनां की हालत काबिलेरहम थी। भोजन व दवा की सख्त कमी थी। घायलां को अधिकांशतः इस्लामियां अस्पताल ले जाया जाता। दूसरे और तीसरे दिन यह आलम था कि चीटियों की तरह पनाह गजीनां का रैला आ रहा था। चाँदनी क्षेत्र भी खाली होने लगा था।
दंगे के तीसरे दिन ऐसा लग रहा था कि कलकत्ता व उसके समीपवर्ती क्षेत्र मुसलमानां से खाली हो जाएंगे। प्रेस के कारण मेरा व मेरी कार का पास बन गया था। दिन और रात मैं सिर्फ चंद घंटे अखबार के दफ्तर और घर में, बाकी समय खिलाफत दफ्तर में या जहाँ-तहाँ से किसी दंगा पीड़ितां को बचाकर लाने में कट जाता, मुश्किल से दो तीन घंटे सोने को मिलते। एक सुबह आँख अभी खुली ही थी कि कोलूटोला से मुफस्सिर कुरान मौलाना हकीम मोहम्मद जमां हुसैनी का फोन आया, वह अपने मतब में थें, कैनिंग स्ट्रीट, कोलूटोला व चूना गली (फेयर्स लेन) तक पुलिस ने अंधाधुन्ध फायरिंग कर दी। हकीम साहब के फोन पर गोलियाँ चलने की आवाजें आ रही थीं। हमला दो तरफा था। उधर पुलिस गोलियाँ बरसा रही थी और दूसरी ओर सेन्ट्रल एवेन्यू से कोलूटोला में दंगाई बम मारते और आग लगाते बढ़ रहे थे। लोगां ने मौके पर एक मंत्री को भी देखा। किसी तरह दंगाई पस्पा हुए और गोलियाँ चलना भी बंद हुईं। पनाहगजीं बहुत भयभीत हो गए। उनको समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह कहाँ जाएं अब कौन-सी जगह सुरक्षित बची है ? मैं उजलत में तैयार होकर खिलाफत दफ्तर भागा। हर ओर अफरा-तफरी व दहशत का आलम था। पुलिस फायरिंग से कई लोग मर गए थे, कई घायल हो चुके थे। कोलूटोला और जकरिया स्ट्रीट के क्षेत्र भी जब पनाहगजीनां के लिए सुरक्षित नहीं रहे तो वह अपना बोरिया-बिस्तर समेटने लग गए। मालूम हुआ कि  बरबाद मुसलमानां के काफिले अब कलकत्ता मैदान में डेरा डालेंगे। इसका मतलब यह था कि कलकत्ते के मुसलमान किधर जांएगे यह किसी को नहीं मालूम। क्या पूर्वी पाकिस्तान कूच करेंगे ? किसी को कुछ नहीं पता था कि मंजिल कहाँ है और बादे हवादिस के थपेड़े उन्हें किधर ले जाएँगे? स्थिति काफी संगीन व मायूसकुन थी।
खिलाफत दफ्तर पहुँच कर मैंने प्रस्ताव रखा कि प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को फोन करते हैं परन्तु वह तो गंभीर रूप से बीमार होकर बिस्तर पर पड़े हुए हैं। इन्दिरागांधी से बात की जाए। उस समय इन्दिरा जी का कोई ओहदा नहीं था। 
              प्रधानमंत्री के घर ट्रेक कॉल बैक की गईं, चन्द मिनट में लाइन मिल गई, फोन इन्दिरा जी ने उठाया। मैंने विस्तार से कलकत्ता के हालात बताकर उनसे निवेदन किया कि कलकत्ते के मुसलमानां को उजड़ने से बचा लीजिए। इन्दिरा जी ने हालात सुनकर काफी चिन्ता व्यक्त की। मैंने कहा कि कलकत्ते को बचाने की एक ही सूरत है कि उसे फौज के सुपुर्द कर दिया जाए क्यांकि दंगा सुनियोजित है और प्रादेशिक हुकूमत खामोश हैं, पुसिल दंगाइयां के साथ मिली हुई है। इन्दिरा जी ने कहा कि घबराइए नहीं अपना फोन नंबर दीजिए, मैं थोड़ी देर में आप को फोन करती हूँ। खिलाफत कमेटी का फोन नम्बर उन्हें दे दिया और पन्द्रह बीस मिनट बाद इन्दिरा जी का फोन आ गया कि कलकत्ता शहर को फौज के हवाले किया जा रहा है। जनरल चौधरी फौरन कलकत्ता के लिए रवाना हो रहे हैं और शाम तक गृह मंत्री गुलजारी लाल नन्दा कलकत्ता पहुँचेगें। दो घंटे के भीतर फौजी दस्ते बैरेकां से निकल पड़े और जनरल चौधरी भी कलकत्ते आ गए। फौज ने शहर का चार्ज लेते ही लाल बाजार पुलिस हेड र्क्वाटर पर कब्जा किया। कुछ पुलिस वालां को फौजियां ने पीट भी दिया। पुलिस की गश्ती गाड़ियां की फौज ने तलाशी लेना शुरू कर दी। कुछ गाड़ियां से बम बरामद होने की भी सूचना मिली। दंगे की तीव्रता इस कद्र थी कि रात तक शहर के कई क्षेत्र जल चुके थे। केन्द्रीय गृह मंत्री गुलजारी लाल नन्दा भी कलकत्ता आ गए थे और अपनी आँखां से शहर का दृश्य देख रहे थे। नन्दा जी ने खिलाफत दफ्तर पहुँच कर मुल्लाजान मुहम्मद को साथ लिया और दौरे पर निकल पड़ें। मुझसे यह गलती हुई कि अपनी खटारा आस्टिन कार खुद चलाकर मैं उनके पीछे हो लिया परन्तु केला बगान में बुरी तरह फंस गया। पूरा क्षेत्र दंगाइयां के कब्जे में था। इमारतें और दुकानें जल रही थीं। फायर ब्रिगेड अपनी पसन्द के अनुसार इमारतां की आग बुझाते फिर रहे थे। बाकी को जलने के लिए छोड़ देते थे। एक स्थान पर सड़क पर जलता हुआ मलबा पड़ा था, मैंने बेवकूफी से जलती हुई लकड़ी के लठ्ठे पर गाड़ी चढ़ा दी गाड़ी फंस गई। अब स्थिति यह हुई कि गाड़ी में बैठे-बैठे मैं जल मरूँ या गाड़ी से बाहर किसी दंगाई के बम का निशाना बनूँ। गाड़ी पर प्रेस लिखा हुआ था, उसे देखकर फायर ब्रिगेड वालां ने मदद की और मेरी गाड़ी को जलते हुए लकड़ी के लठठे से निकाला। अब नन्दाजी के पीछे जाना फजूल था वह न जाने  किधर निकल गए हो। मैंने अपने दफ्तर का रूख कर लिया और पहली लीड स्टोरी इस घटना की बनाकर घर जाकर सो रहा। दूसरी सुबह गृहमंत्री भारत सरकार, गुलजारीलाल नन्दाजी के साथ दौरे पर मुझे निकलना था। उन की गाड़ी में पीछे की सीट पर मुल्ला जी और मैं नन्दा जी के साथ बैठे, आगे की सीट पर विजय सिंह नहार थे। हमारी गाड़ी के साथ न पुलिस और न मिलेट्री की गाड़ी थी। जकरिया स्ट्रीट से निकलकर कालेज स्ट्रीट में चले तो मेडिकल कालेज से आगे बढ़ते ही ईडेन हॉस्पिटल रोड पर दंगाइयां की भीड़ नजर आई जो आग लगा रही थी। पुलिस वाले बंदूकें लिए तमाशबीन बने खड़े थे। नन्दा जी ने यह दृश्य देखा तो बर्दाश्त न कर सके। वह गाड़ी से उतरे और पुलिस को फटकारा कि गोली क्यां नहीं चलाते, फायरिंग हुई, आठ दंगाई हताहत होकर गिरे। चार मौके पर मारे गए और चार घायल हो गए। सामने वाली गली के मोड़ पर मन्दिर था। उसके सामने भी भीड़ जमा थी। नन्दा जी जोश में आकर भीड़ की ओर ललकारते हुए बढ़े तो मैंने और मुल्लाजी ने दौड़कर उन्हें पकड़ा और गाड़ी में बिठाया। गाड़ी आगे बढ़ी तो वैलिंगटन स्क्वायर पार कर के हम एक तंग गली में दाखिल हुए। यह स्मिथ लेन थी और उसी से मिली हुई डाक्टर लेन। दोनां ही इलाके सुनसान थे, दंगाइयां ने पूरा इलाका खाली करा लिया था। यहाँ से चले तो हम लोग खिजिरपुर पहुँचे, वहाँ नजरअली बस्ती में दाखिल हुए तो देखा कि बहुत से लोग घरेलू सामान अपने सिर पर उठाकर भागे चले जा रहे हैं। नन्दाजी समझे कि यह भयभीत मुसलमान है जो घर छोड़कर भाग रहे हैं। मैंने नन्दाजी को बताया कि यह दंगाई है जो लूट का सामान लेकर भाग रहे हैं। इसी दौरान वहाँ पुलिस कमिश्नर आ गए, उनके साथ पुलिस बल भी था नन्दा जी ने उन से कहा कि वह इन दंगाइयां पर गोली चलाए। पुलिस कमिश्नर का जवाब था कि उनके पास रिवाल्वर नहीं है। नन्दा जी यह उत्तर सुनकर तिलमिला गए उनके सब्र का बान्ध टूट रहा था, कहा अब वापस चलते हैं। सब देख लिया। खिजिरपुर से वह सीधे लालबाजार पुलिस हेड क्वार्टर आए और एक घंटे बाद खबर आई कि पुलिस कमिश्नर को हटा दिया गया है।

-तारिक खान
मोबाइल :  9455804309
लोकसंघर्ष पत्रिका सितम्बर 2018 में प्रकाशित 

गुरुवार, 20 सितंबर 2018

जनगीतों का सामाजिक सन्दर्भ

डॉ राजेश मल्ल 
साहित्य अपने अन्तिम निष्कर्षों में एक सामाजिक उत्पाद होता है। कत्र्ता के घोर उपेक्षा के बावजूद समय और समाज की सच्चाई उसके होठों  पर आ ही जाती है। ऐसे में जब कविता का मूल भाव समाज परिवर्तन हो तो समाज में निहित द्वन्द्व, अन्त र्विरोध अत्यन्त स्वाभाविक रूप से कविता में घुल-मिलकर प्रवाहित होते हैं। ‘जनगीतों’ का स्वरूप कुछ ऐसे ही बना-रचा हुआ है। सामाजिक अन्तः सम्बन्ध और उनमें निहित असमानता के तनावपूर्ण रूप जनगीतों  के मूल विषय हैं।
जनगीतों में सर्वाधिक गैर बराबरी तथा शोषण और उत्पीड़न के सन्दर्भ चित्रित हुए हैं। लगभग सभी गीतों  का आधार तथा दृष्टि इस बात से परिचालित है कि जो लोग अपने मेहनत से दुनिया का सृजन करते हैं वही समाज में उपेक्षा और उत्पीड़न का शिकार हैं। चूंकि समाज का ताना-बाना, मूलतः एक विशाल शोषणकारी तन्त्र द्वारा संचालित है जिसमें मेहनतकश अवाम के लिए कुछ भी नहीं है और मुठ्ठीभर लोगों  के लिए ‘सब कुछ है।’ इसलिए जनगीतों का इसके विरुद्ध संघर्ष और परिवर्तन का स्वर प्रमुख है। इस रूप में जनगीतों के भीतर एक शोषण और अन्याय से भरे समाज का चित्रण हुआ है तो दूसरी ओर इसके बदलने की बेचैनी का।


समाज अपने व्यापक तथा सीमित दोनों  अर्थों में व्यक्ति, परिवार, जाति समूह गांव, रिश्ते-नाते, देश आदि से बँधा होता है। लेकिन उसके बीच मौजूद असमान रूप तथा उत्पीड़नकारी सम्बन्ध निरन्तर संचालित होते हैं। जनगीतों में मौजूद समाज इस नुक्ते को साफ कर के चलता है कि सारे सामाजिक सम्बन्ध मात्र शोषक-शोषित के बीच बँटे हुए होते हैं। इस रूप में जनगीतों का समाजशास्त्र शास्त्रीय किस्म का समाज नहीं है बल्कि लूट और उत्पीड़न से संचालित समाज है जिसे बदलने की बेहद जरूरत है। लेकिन इसके कथन की शैली तथा रूपकों में भिन्नता एक नये आवर्त और उठान के साथ आता है जिससे एक ताजगी बनी रहती है। इस सन्दर्भ में महत्वपूर्ण तथ्य है कि एक पूरा का पूरा समाज और उसके बुनियादी द्वन्द्व जनगीतों का यह विशेष सामाजिक सन्दर्भ है।
आहृवान’ नाट्य टोला का प्रसिद्ध गीत है जो ‘हमारा शहर’ फिल्म में गाया भी गया है। पूरे गीत में भारतीय समाज के मुख्य तथा अन्य सामाजिक अन्तविर्रोधों को बेहद खूबसूरती से उठाया गया है। प्रत्येक बन्द अलग-अलग सामाजिक गतियों  को चित्रित-वर्णित करते हैं। पहले बन्द में कृषक समाज का चित्र रखा गया है-

अपनी मेहनत से भाई धरती की हुई खुदाई
माटी में बीज बोया, धरती भी दुल्हन बनाई
पसीना हमने बहाया, जमींदार ने खूब कमाया
साहूकार के कर्ज ने हमको गांव से शहर भगाया।
अरे दाने-दाने को मजदूर तरसे जीने की कठिनाई
ऐसी क्यों हे भाई......................।

गीत एक बारगी किसान के मजदूर बनने की प्रक्रिया और गांव से उजड़ने के कारणांे का खुलासा करता है। समस्या उस समाज की है जिसमें जमींदार और साहूकार अभी भी मौजूद हैं और नये तरीके से ‘धरती को दुल्हन’ की तरह अपने पसीने से सजाने वाले किसान को बदहाल बना देते हैं। इसी क्रम में गीत के क्रमशः अपने अगले बन्दों में एक-एक सामाजिक समूह की बिद्रूपताआंे को उठाया गया है तथा-

अपनी मेहनत से भाई, धरती की हुई खुदाई
माटी से गारा बनाया, माही से ईंट बनाई
धनवान को मिली सुविधा, सुख चैन भुलाया हमने
अरे अपना ही रहने का घर नहीं है भाई। यह बिल्डरों  का राज है।
खाने को दाना नहीं पीने को पानी नहीं रहने को घर नहीं पहनने को कपड़ा नहीं। यह कैसा राज है भाई।

इसी क्रम में बुनकरों  की सामाजिक स्थितियों  तथा उनके कर्म की उपेक्षा का चित्र है यथा-

अपनी मेहनत से, रूई को सूत बनाया
उसको चढ़ा पहिये पर, कपड़ा हमने बनाया
कपड़े पर रंग-बिरंगे झालर चढ़ाई हमने
टी0बी0 को अपनाया, माल लिया मालिक ने अरे हम अध नंगे मुर्दाघाट पर कफन की भी महंगाई। ऐसा क्यों है भाई।

किसानों,मजदूरों,बुनकरों,दलितों की विडम्बना पूर्ण स्थितियों के बिदू्रप चित्रों तथा विडम्बना मूलक सामाजिक सन्दर्भो से भरे पड़े हैं जनगीत। बल्कि उनकी रागिनी उनके दुःख पीड़ा की ठंडी लहर सी निर्मित होती है।
जनगीतों का सारा ध्यान मेहनतकश अनाम तथा उसके श्रम की लूट पर टिका हुआ है। ब्रज मोहन के गीत कुछ इस तरह हैं:-

धरती को सोना बनाने वाले भाई रे
माटी से हीरा उगाने वाले भाई रे
अपना पसीना बहाने वाले भाई रे
उठ तेरी मेहनत को लूटे हैं कसाई रे।
मिल, कोठी, कारें, ये सड़कें  ये इंजन
इन सब में तेरी ही मेहनत की धड़कन
तेरे ही हाथों  ने दुनिया बनाई
तूने ही भर पेट रोटी न खाई.........।

कहने का अर्थ यह कि एक ऐसा समाज जो मेहनत कश के अपार श्रम के लूट पर टिका है वह समाज नहीं चल सकता। उसे बदलने की जरूरत है। निश्चय ही यही जनगीतों का महत्वपूर्ण सामाजिक सन्दर्भ है। श्रम जीवी समाज की दुःख, पीड़ा, गरीबी और दुश्वारियों  के चित्रण के साथ जनगीत उस बुनियादी अन्तर्विरोध को उठाते हैं जो मानव समाज को आगे ले जाने में समर्थ हैं अर्थात श्रम और पूंजी का अन्तर्विरोध। शील ने इसे साफ शब्दों में रचा है-

हँसी जिन्दगी, जिन्दगी का हक हमारा।
हमारे ही श्रम से है जीवन की धारा।

ऐसे समाज में जहाँ समस्त श्रमजीवी समाज यथा मजदूर, किसान, दलित स्त्री उत्पीड़ित है उसे बदलने की जरूरत है। यह आकस्मिक नहीं कि जनगीत समाज परिवर्तन के लिए निरन्तर संघर्ष के लिए पे्ररित करते दिखते हैं। इस रूप में जनगीत का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू समाज परिवर्तन तथा एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण विशेष सामाजिक सन्दर्भ है। यहाँ यह भी साफ होना चाहिए कि जनगीत किसी अमीर और व्यक्गित उन्नति का पाठ नहीं रचते बल्कि उनका सारा जोर समाज बदलने का आहृवान, संघर्ष, प्रेरणा और नवीन समाज के स्वप्न से भरा हुआ है।
जनगीत विशुद्ध रूप में सामाजिक हैं उनका ध्येय शोषण पर टिके समाज को बदलकर नये समाज का सृजन है, यही उनका मान है यही लय है और यही छन्द। साहिर का प्रसिद्ध गीत है-यह किसका लहू है कौन मरा। उसकी चन्द पंक्तियों  का उल्लेख जरूरी है:-

हम ठान चुके हैं अब जी में
हर जलियाँ से टक्कर लेंगे
तुम समझौते की आस रखो
हम आगे बढ़ते जाएँगे
हमंे मंजिल आजादी की कसम
हर मंजिल पे दोहराएँगें ।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना तो अपने गीत में एक साथ शोषण तन्त्र के तमाम रूपों  तथा कारणों को चित्रित करते हैं और उसके खिलाफ एक साथ जंग का ऐलान करते हैं। अपने आस-पास बिखरी समस्याओं की पहले वे व्याख्या करते हैं-

यह छाया तिलक लगाये जनेऊ धारी हैं
यह जात-पात के पूजक हैं
यह जो भ्रष्टाचारी हैं।
यह जो भू-पति कहलाता है जिसकी साहूकारी है।
उसे मिटाने और बदलने की करनी तैयारी है।

इसी गीत का अगला बंद है-

यह जो तिलक मांगता, लड़के की धौंस जमाता है। 
कम दहेज पाकर लड़की का जीवन नरक बनाता है। 
पैसे के बल पर यह जो अनमेल विवाह रचाता है। 
उसे मिटाने और बदलने की तैयारी है।
जारी है-जारी है आज लड़ाई जारी है।

संघर्ष के आहृवान का दूसरा मुकाम संघर्ष से नये समाज को प्राप्त करने का है। बल्ली सिंह का प्रसिद्ध गीत है-
ले मशालें  चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के, पूछती है झोपड़ी और पूछते खेत भी, कब तलक लुटते रहेंगे लोग मेरे गांव के। बिन लड़े कुछ भी नहीं मिलता यहां यह जानकर अब लड़ाई लड़ रहे हैं, लोग मेरे गांव के।
जनगीत कार एक नये समाज रचना के लिए प्रतिबद्ध है। वह समाज जो शोषण-उत्पीड़न से मुक्त बराबरी समानता का हो। मेहनत कश अवाम का हो। गरीब मजदूर किसान की दुश्वारिया जहां न हों, जहाँ स्वास्थ्य शिक्षा की सबके लिए व्यवस्था हो। उसे उम्मीद है कि शोषण का पूरा ढांचा एक दिन गिरेगा। ब्रेख्त के शब्दों में -

एक दिन ऐसा आयेगा
पैसा फिर काम न आयेगा
धरा हथियार रह जायेगा
और यह जल्दी ही होगा
ये ढाँचा बदल जायेगा.........।

इस प्रकार जनगीत बेलौस तरीके से समाज के मुख्य अन्तर्विरोध को उठाते हैं। उनके लिए मेहनत की लूट और पूँजीवादी निजाम महत्वपूर्ण सामाजिक सच्चाई है। लेकिन वे यहीं नहीं रुकते वे इसे बदलने के लिए संघर्ष की हामी भरते हैं। परिवर्तन में आस्था व्यक्त करते हैं। एक लम्बी तथा दीर्घ कालिक संघर्ष को सजाये गीत नये समाज के स्वप्न को धरती पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध हैं। श्रम और पूंजी के इस जंग में वे श्रम के सभी पक्षकारों को आमन्त्रित करते हैं-

गर हो सके तो अब कोई शम्मा जलाइए
इस अहले सियासत का अन्धेरा मिटाइए 
अब छोड़िये आकाश में नारा उछालना, 
आकर हमारे कन्धे से कन्धा मिलाइए। 
क्यों  कर रहे हैं आँधी के रुकने का इन्तजार,
ये जंग है, इस जंग में ताकत लगाइए।

-डॉ राजेश मल्ल
मोबाइल: 9919218089
लोकसंघर्ष पत्रिका सितम्बर 2018 में प्रकाशित