गुरुवार, 18 जनवरी 2018

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

उत्तर प्रदेश मेँ कठिन होती काँग्रेस की डगर

उत्तर प्रदेश मेँ काँग्रेस की राह किसी भी तरफ से आसान होती नहीँ दिख रही बल्कि दिन-ब-दिन यह डगर और कठिन ही होती चली जा रही है । प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष पद से मधुसूदन मिस्त्री और निर्मल खत्री को हटाकर गुलाम नबी आजाद और राजबब्बर को लाया गया तब सोचा गया था कि काँग्रेस यहाँ मजबूत होगी लेकिन राजबब्बर की कारगुजारियोँ से काँग्रेस कार्यकर्ताओँ मेँ ही असँतोष सीमाएँ लाँघता दिखाई दे रहा है । कुछ दिनो पहले प्रदेश अध्यक्ष द्वारा प्रखर समाजवादी और पूर्व मँत्री को अपमानित कर के मीडिया प्रभारी पद से हटाया गया वह भी काँग्रेस की महिला विधायक मोना मिश्रा द्वारा अपने अधिकारोँ का मीडिया विभाग मेँ अतिक्रमण करने के बाद , तब भी यह प्रकरण सोशल मीडिया मेँ काफी चर्चित हुआ था और इस न्यूज पोर्टल ने भी वह खबर आप लोगोँ तक पहुँचायी थी ।
उसके बाद कुछ अपने आसपास कुछ अल्पज्ञात चेहरोँ का घेरा बना लेने से सँघर्षशील कार्यकर्ताओँ से उनकी दूरियाँ बढने लगीँ । उसके कुछ ही दिन बाद काँग्रेस के पुराने और चर्चित नेता स्वयँ प्रकाश गोस्वामी को जन आन्दोलन समिति से हटाकर उनके कमरे मेँ ताला डलवा दिया गया जबकि इन्होने स्वयँ ही स्वयँप्रकाश गोस्वामी को यह पद सौँपा था । इतने पर ही राजबब्बर नहीँ रुके , उन्होने काँग्रेस के पुराने नेताओँ के पर कतरने शुरू किए । जिनके पर कतरे गए उनमेँ पूर्व मँत्री रामकृष्ण द्विवेदी से लेकर हनुमान त्रिपाठी तक के नाम शामिल हैँ ।
काँग्रेस जनोँ को एक झटका तब भी लगा जब दरबारी नाम के व्यक्ति को जिसे लखनऊ के प्रशासनिक गलियारोँ मेँ आर्थिक दलाल के रूप मेँ जाना जाता है उसे लाकर कोषाध्यक्ष का पद सौँप दिया । काँग्रेसजनो को यह जोर का झटका और जोर से तब लगा जब दरबारी के यहाँ एक जन्मदिन पार्टी मेँ प्रदेश अध्यक्ष ने खुद उसके घर जाकर कोषाध्यक्ष पद पर नियुक्तिपत्र जन्मदिन के तोहफे के रूप मेँ उसे पेश किया ।
यहाँ तक भी गनीमत थी , नगर निकाय चुनावोँ मेँ मेयर से लेकर सभासदोँ तक के टिकट बेचे जाने की खबरेँ सामने आने से राजबब्बर की ठेकेदार चौकडी एक बार फिर चर्चा मेँ आई । इस मामले मेँ तो काँग्रेस कार्यालय मेँ जूतमपैजार तक हुई और दूर तक इस घटना की गूँज सुनाई दी ।
कल फिर काँग्रेस की पतनशीलता लोगोँ को दिखाई दी जब पार्टी के नव निर्वाचित अध्यक्ष राहुल गाँधी पार्टी की कमान सँभालने के बाद पहली बार लखनऊ होकर अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी गए लेकिन लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर उनके स्वागत मेँ कुलजमा दो सौ कार्यकर्ता ही इकट्ठा हो पाए उनमेँ से भी पचास से ज्यादा लोग और गाडियाँ उन्नाव की पूर्व साँसद अनु टँडन लेकर आई थीँ ।
इस सँवाददाता ने इतनी कम भीड का कारण जानने के लिए कुछ प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओँ से बात की तो उनका साफ़ कहना था कि जब चँद ठेकेदार और दलाल ही पद पा रहे हैँ और अध्यक्ष जी की जेब भर रहे हैँ तो भीड भी वही इकट्ठा करेँ ।
इस बढते असँतोष और प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली देखते हुए तो यही लग रहा है कि उत्तर प्रदेश काँग्रेस मेँ कभी भी बगावत का विस्फोट हो सकता है ऎसे मेँ 2019 काँग्रेस के लिए प्रतिकूल परिणाम भी दे सकता है ।

- भूपेंदर पाल सिंह

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

योगी सरकार की नीतियों के कारण किसान ठंडक में खेतों में सोने को मजबूर

भाकपा कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियो के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन
ठंड़क भरी रात में फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं किसान - रणधीर सिंह सुमन
 
बाराबंकीं। प्रदेश मे योगी सरकार के आने के बाद आवारा पशुओ की संख्या उनकी नीतियो के कारण बढ़ गई है। जिससे खेती किसानो करने वाले लोग अपनी फसलो को बचाने के लिये ठड़क भरी रातो में खेत की रखवाली करने को मजबूर है। उसके भी बावजूद लगभग 50 प्रतिशत फसले आवारा पशुओ द्वारा नष्ट की जा चुकी है। योगी इस विकराल समस्या का समाधान करने मे असमर्थ है। प्रदेश मे पूर्व की सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रो मे सबको बिजली मिले इसके लिये विद्युत दरो को कम करके रखा था। लेकिन वर्तमान सरकार ने अत्याधिक बिजली दामो को बढ़ा दिया है। जिससे गरीब आदमियो को विद्युत कनेक्शन जारी रखना दुर्भर हो गया है। उक्त बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने विरोध प्रदर्शन करने के पश्चात् जिलाधिकारी कार्यालय पर व्यक्त किये। पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि धर्म के आधार पर जनता को लड़ाने के अतिरिक्त इस केन्द्र व प्रदेश की सरकार के पास कोई एजेन्ड़ा नही है। तो वही पार्टी सह सचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि मॉब-लीचिंग के कारण अल्पसंख्यको का जीवन मुश्किल है। अराजकता का दौर जारी है। अराजकतत्वो द्वारा लोगो की पीट-पीटकर मारने की घटनांए बड़ी है। किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि आलू जैसी नकदी फसलो के दाम नही मिल पा रहे है। धान खरीद की व्यवस्था इनके करीबी सिर्फ झूठ बोलने के अतिरिक्त कोई कार्य नही है। प्रदर्शनकारियों मे दलसिंगार, अमर सिंह, रामनरेश वर्मा, गिरीश चन्द्र, प्रवीन कुमार, मुकेश, गणेश सिंह अनूप, नीरज वर्मा, अवधेश यादव, वीरेन्द्र कुमार, प्रमोद वर्मा, नरेन्द्र यादव, पूर्णश प्रताप सिंह, राजेश सिंह, सुरेश यादव मौजूद रहे।

 - भूपिंदर पाल सिंह "शैंकी"

बुधवार, 13 दिसंबर 2017

लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --अदनान कफील 'दरवेश "


लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --शेर अली अफरीदी


लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --कन्हैया कुमार


लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --गिरीश पंकज का आलेख ---साहिर


लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017


मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

हारने के बाद भी जीत का जश्न

प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक शगुन गौतम 80 वर्षीय अल्पसंख्यक मतदाता की पिटाई करते हुए
उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव में नगर निगम की कुल 16 सीटों में से 14 सीटें जीतकर सत्तारूढ़ डाल भाजपा ने मीडिया के माध्यम से जनता के ऊपर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का प्रयास शुरू किया है कि उसने स्थानीय निकाय में भारी सफलता हासिल की है जबकि नगर पालिका परिषद् अध्यक्ष कुल 198 पदों में भाजपा ने मात्र 70 पद पर जीत हासिल की है. वहीँ नगर पंचायत अध्यक्ष के कुल 438 पदों पर भाजपा ने मात्र 100 पदों पर जीत हासिल की है लेकिन नगर निगम के चुनावों के परिणाम को आधार बना कर पूरे देश में सत्तारूढ़ दल जीतने का दावा करने से बाज नही आ रही है.बीजेपी के 3,656 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है पार्टी के सभी उम्मीदवारों में से 45 फीसदी बीजेपी के उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी जमानत जब्त हुई है। वहीं नगर पंचायत सदस्य के चुनाव में बीजेपी को मात्र 11.1 फीसदी सीट पर जीत मिली है।
           स्थानीय निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ आदित्यनाथ ने दो हफ़्तों में 33 जनसभाएं की. प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ मिश्रा, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा सहित मंत्रियों ने पूरे प्रदेश में धनबल व सरकार का प्रयोग करते हुए जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिश की लेकिन सफलता हाथ नही लगी.
        उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के गृह जनपद कौशाम्बी में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. यहां तक कि जिस वार्ड में केशव का घर पड़ता है वहां भी बीजेपी की हार हुई है.सभी 6 नगर पंचायतों में भाजपा की जबरदस्त हार हुई है. वहीँ, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने गोरखपुर जिले के जिस वार्ड में अपने मत का प्रयोग किया था वहां भी भाजपा हार गयी है.  इसी तरह उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ दल के मंत्रियों के अथक प्रयास करने के बावजूद अधिकांश प्रत्याशी चुनाव हार गये हैं लेकिन मीडिया द्वारा चुनाव जीतने का जश्न मनाया जा रहा है. लगता नहीं है कि सरकार में बैठे हुए लोग विवेकशील व्यक्ति हैं या लफ्फाजों या गप्पबाजों के गिरोह के सरगना हैं. 
        जहाँ तक निष्पक्ष चुनाव कराने की बात है वहां पर योगी सरकार स्थानीय निकाय चुनाव में सही मतदाता सूची भी नहीं बनवा पायी थी. मतदाता सूची में सैकड़ों नाम उसी वार्ड में कई बार थे. फिर वही नाम दूसरे वार्डों में भी थे और ऐसे लोगों के नामों की फर्जी आईडी सत्तारूढ़ दल द्वारा देकर मतदान कराया जा रहा था. देखने में यह भी आया है कि सत्तारूढ़ दल के कई प्रत्याशी फर्जी आईडी प्रूफ बनाने की मशीने भी लगाये हुए थे. मतदाताओं को डराने और धमकाने का काम मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी पुलिस बल के साथ कर रहे थे. हिन्दुस्तान अखबार में बाराबंकी जनपद की एक फोटो प्रकाशित हुई है जिसमें एसडीएम व सीओ एक मतदाता को पोलिंग स्टेशन के सामने मुर्गा बनाये हुए हैं और बाकी पुलिस बल उस दृश्य का आनंद ले रहा है.
                   बाराबंकी, प्रतापगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों में चुनाव मशीनरी को संचालित करने वाले बड़े अधिकारीयों ने नियोजित तरीके से अल्पसंख्यक बाहुल्य मतदान केन्द्रों पर सुबह से ही तोड़फोड़ व मतदाताओं की पिटाई का अभियान चला रखा था जिससे अल्पसंख्यक मतदाता अपने मत का प्रयोग न कर सकें. क्या यह योगी सरकार की निष्पक्षता का सबूत है ? 
              लोकतंत्र में प्रचार तो चलता है लेकिन नागपुर की संघी प्रयोगशाला दुष्प्रचार करने में माहिर है.  भाजपा अपनी नीतियों के कारण हार रही है लेकिन जनता में यह भ्रम पैदा किया जा रहा है कि वह जीत रही है. 

रणधीर सिंह सुमन 

मोदीयुग में बढ़ी है सूदखोरी

सूदखोर द्वारा पिटाई
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद किसानो की आत्महत्याएं बढ़ी हैं उसका मुख्य कारण यह भी है कि वित्तीय संस्थाएं छोटे किसानो को ऋण देने में आनाकानी करने लगी हैं जिससे विश्व बैंक, NCAER के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के 21% ग्रामीण परिवारों पर औपचारिक लोन बकाया था लेकिन 40 % ग्रामीण परिवारों पर अनौपचारिक ऋण है जो यह प्रदर्शित करता है कि अधिकांश किसान सूदखोरों, भू स्वामियों व दलाल तबके के कर्ज के मकडजाल में फंसा हुआ है. अधिकतम ब्याज दरें होने के कारण ग्रामीण परिवार उस सूदखोरी के कर्ज को अदा नहीं कर सकता है. जिससे लघु व सीमान्त किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर होते हैं. 
                      मोदी की पार्टी के कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में सूदखोरी का धंधा करते हैं और अधिकतम ब्याजदरों को वसूलने के लिए वह बल प्रयोग करते हैं और भगवा अंगौछे के कारण उनके खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं हो पाती है अक्सर यह भी देखने में आया है कि उनके दबाव के कारण पीड़ित किसान आत्म हत्या कर लेते हैं लेकिन पुलिस आत्म हत्या के दुष्प्रेरण का मुकदमा भी दर्ज नही करती है. 
                 एक समाचार के अनुसार मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित पलज गांव निवासी संजीव पुत्र नकली प्रजापति ने करीब 8 महीने पहले बेटी की शादी के लिए सूदखोर से ब्याज पर 50 हजार रुपये लिए थे। संजीव बहादपुर निवासी रणतेज उर्फ काला नाम के इस सूदखोर को अब तक 75 हजार रुपये दे चुके हैं, लेकिन सूदखोर का कहना है कि 50 हजार की रकम के लिए ब्याज के साथ सवा लाख रुपये बनते है। संजीव को यह रकम चुकानी ही होगी। इसी रकम की वसूली को लेकर रणतेज लगातार संजीव पर दबाव बना रहा था। जिसके बाद रणतेज ने संजीव की चप्पल से पिटाई की।
           शहरी क्षेत्रों में निचले स्तर के कर्मचारी, मजदूर भी इन सूदखोरों के कर्ज जाल में फंसे हुए हैं इनकी ब्याज की दरें काम से काम 10% मासिक है जिसको लेने वाला व्यक्ति अदा करने में अक्षम होता है और फिर अपराधी, पुलिस व सूदखोरों के गुंडे अपने पौरुष बल के ऊपर वसूली करते हैं. हंटरों से पिटाई, पकड़ कर गुप्त गोदामों में बंधक बनाना व घर के अन्दर बंद कर घरेलू काम लेना प्रमुख है. 
            मोदी व विभिन्न प्रदेशों में भाजपा शासित सरकारें इस दिशा में कोई कदम उठाने को तैयार नही हैं और पहले से बने साहूकार अधिनियम जैसे कानूनों को दरकिनार कर दिया गया है. जिससे आर्थिक रूप से कमजोर तबकों का जीना हराम हो गया है और वह दास प्रथा की तरफ वर्तमान सामाजिक व्यवस्था को ले जा रहे हैं. 

रणधीर सिंह सुमन 

शनिवार, 4 नवंबर 2017

लोकतन्त्र बचाना है तो व्यक्ति के चरित्र को गिरने से बचाना होगा-प्रो0 जगदीश्वर

बाराबंकी। लोकतन्त्र की मजबूती वह उसकी सुरक्षा जनता के अधिकारो की सुरक्षा पर निर्भर है। लोकतन्त्र बचाना है तो व्यक्ति के चरित्र को गिरने से बचाना होगा। उक्त विचार देश के प्रखर साहित्यकार वह स्तम्भकार प्रो0 जगदीश्वर चतुर्वेदी ने गाधी भवन मे लोकसंघर्ष पत्रिका द्वारा आयोजित  "लोकतन्त्र के स्तम्भो की गिरती साख"आयोजित गोष्ठी मे व्यक्त किए ।.

 उन्होने आगे कहा कि लोकतन्त्र मे राष्ट्रवाद की धारणा वह चाहे समाजवाद के नाम पर हो। साम्यवाद के नाम पर हो। यह धर्म के नाम पर हो। वह उसके आस्तित्व के लिये घातक है। श्री चतुर्वेदी ने कहा लोकतन्त्र मे असहमति ही उसकी ताकत व बुनियाद है। लोकतन्त्र मे रहने वाले हर व्यक्ति को अपने व्यवहार मे मानवता के गुणो का समावेश करना होगा और एक-दूसरे के हितो की रक्षा करना होगा।
                                     देश की वर्तमान अर्थ-व्यवस्था पर चिन्ता व्यक्त करते हुये श्री चतुर्वेदी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने देश की पूरी अर्थ-व्यवस्था को ही ध्वस्त कर डाला। यह एक चिन्ता का विषय है। आज थोडे से लोगो के पास ही अधिकांश सम्पत्ति है। शेष कंगाली की ओर बढ़ रहे है। लोकतन्त्र चल-सम्पत्ति से चलता है अचल सम्पत्ति से नही। वर्तमान सरकार ने देश की सारी चल सम्पत्ति बैको मे जमा करा दी। जिससे समाज का हर व्यक्ति प्रभावित हुआ। 
    आयोजित गोष्ठी में बृजमोहन वर्मा, लोकसंघर्ष पत्रिका प्रबन्ध सम्पादक रणधीर सिंह सुमन, सिटी इण्टर कालेज प्रधानाचार्य विजय प्रताप सिंह, डा0 एस0एम0हैदर ने भी सभा में अपने विचार रखे।            
                                     संचालन मो0 तारिक खान ने किया। इस अवसर पर सेवानिृवत्त न्यायाधीश एम0ए0खान, जिला बार अध्यक्ष सुरेन्द्र बहादुर सिंह बब्बन, बृजेश दीक्षित, पं.  राजनाथ शर्मा, जलील यार खान, इ0 जहीन उल-कदर, जी मल कासिम, मो0 मोहसिन, तालिब नजीब कोकब, फजल इनाम मदनी, निषाद अहमद, मो0 इखलाक, सरदार भूपिन्दर पाल सिंह शैन्की, उपेन्द्रसिंह , शैलेन्द्र सिंह, प्रदीप सिंह, डा0 विकास यादव, वसीम राईन, दिलीप गुप्ता, कर्मवीर सिंह, पवन वर्मा, पवन वैश्य, पुष्पेन्द्रसिंह विजय प्रताप सिंह, आनन्द प्रताप सिंह, नीरज वर्मा, राजेन्द्र बहादुर सिंह राणा, अवधेश यादव, चैधरी वकार, कलीम यूसुफ आदि मौजूद रहे।
-भूपिन्दर पाल सिंह