गुरुवार, 6 फ़रवरी 2020

भाजपा को एक पाखंडी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी  के महासचिव डी राजा ने भाजपा को एक पाखंडी पार्टी करार देते हुए कहा है कि यह अपने ‘नापाक मंसूबों’ को छिपाने के लिए लोगों को गुमराह करने के लक्ष्य के साथ कई सुरों में बोलती है।





राजा ने कहा कि लोगों को भाजपा के पाखंड को समझना चाहिए। मंगलको संसद में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा दिए गए एक लिखित उत्तर पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए उन्होंने यह कहा।
भाकपा नेता ने भगवा पार्टी की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘भाजपा कई सुरों में बोलती है। पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर कोई बातें नहीं की जा रही। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि एनआरसी लागू की जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा अपने नापाक मंसूबों को छिपाने के लिए देश को गुमराह कर रही है और हर किसी को पार्टी (भाजपा) के इस पाखंड को समझना चाहिए।
भाकपा महासचिव ने कहा, ‘‘भाजपा-आरएसएस गठजोड़ भारत के धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना को एक खतरा है। सभी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मिल कर लड़ने और एकजुट प्रतिरोध शुरू करने की जरूरत है।’’
उन्होंने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) न सिर्फ मुसलमानों के प्रति भेदभावपूर्ण है बल्कि यह आदिवासियों, दलितों और समाज के गरीब तबकों के भी खिलाफ है।
भाकपा की राष्ट्रीय परिषद बैठक के समापन दिवस पर बोलते हुए राजा ने कहा कि अब भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को विनिवेश के लिए निशाना बनाया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि भाकपा की सदस्यता अगले तीन-चार साल में 10 लाख का आंकड़ा छूये। सभी स्तर पर हमारे संघर्ष को शुरू करने के लिए यह जरूरी है। ’’
राजा ने कहा कि भाकपा ने अपनी नीति निर्माण इकाई में युवाओं को रखने का फैसला किया है।

गुरुवार, 19 दिसंबर 2019

देश की दूसरी आजादी के लिए काले अंग्रेजों से लडना होगा

बाराबंकी देश व प्रदेश में अघोषित आपात काल चल रहा है प्रशासनिक तंत्र भाजपा कार्यकर्ता के रूप मंे काम कर रहा है
धारा-144सी0आर0 पी0सी0 नाम पर काले कानूनों का विरोध करने वालों का दमन किया जा रहा है। भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी द्वारा एन0आर0सी0 व सी0ए0बी0 जैसे काले कानूनों के विरोध में आयोजित धरने को सम्बोंधित करते हुए भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि मोदी और अमित शाह को देश के नागरिकों की चिंता नहीं है लेकिन अपने मौसेरे भाई पाकिस्तान के नागरिकों की सबसे ज्यादा चिंता है। धरनासभा को सम्बोधित करते हुए पार्टी के जिला सहसचिव डाॅ0 कौसर हुसैन ने कहा कि आजादी की पहली लड़ाई गोरे अंग्रेजो से लड़ी गयी थी और अब देश की दूसरी आजादी की लड़ाई काले अंग्रेजो से लड़नी पड़ेगी।
पार्टी के जिला सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि पहले अंग्रेज काले कानूनों का निर्माणा कर मजदूरों और किसानों को जेलो में निरूद्ध किया जाता था और अब यहाँ हिटलरी अन्दाज में देश को चलाने की कोशिश की जा रही है। 10 दिसम्बर से किसान आवारा पशुओं के खिलाफ क्रमिक भूंख हड़ताल पर थे और प्रशासन के कानो पर जँू नहीं रंेग रही हैै।ं
पार्टी के जिला सचिव वृजमोहन वर्मा ने कहा कि एस0आर0सी0 व सी0ए0बी0 कानून का कम्युनिष्ट पार्टी आखरी दमतक विरोध करेगी और इस कानून की रंगाबिल्ला की जोड़ी को वापस लेना पड़ेगा।
धरना कर्मियों को प्रवीन कुमार, विनय कुमार सिंह, भुनेश्वर, रमेश वर्मा, राम दुलारे यादव, दीपक पटेल आदि कम्युनिष्ट नेताओं ने भी सम्बोधित किया।

बुधवार, 27 नवंबर 2019

संघ जरा भी नैतिक नहीं है - रणधीर सिंह एडवोकेट

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ दल द्वारा राष्ट्रपति शासन हटाने व अल्पमत की सरकार का गठन कराने व विधायकों को खरीदने का षड़यंत्र करने में मुख्य रूप से दोषी अमित शाह को अविलम्ब गृहमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए, नैतिकता की बात करने वाले संघ के लोग कर्नाटक व महाराष्ट्र में जिस तरह से कार्य किया है वह उनके असली चेहरे को उजागर करता है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित एक दिवसीय धरने को गांधी भवन में सम्बोधित करते हुए राष्ट्रीय परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि ‘‘सांड चर रहे हैं खेत, मोदी बेच रहे हैं देश’’ का नारा देश में चरितार्थ हो रहा है। धरना सभा को सम्बोधित करते हुए जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि सांड़ों की वजह से प्रदेश में किसान मर रहे हैं एक सांड ने अजगना में किसान बाबू लाल को मार देने से मृत्यु हो गई। किन्तु सरकार इस तरह की घटनाओं में भी मृतकों की कोई मदद नहीं कर रही है। धरना सभा को सह सचिव डाॅ0 कौशल हुसैन ने कहा कि सरकार पूर्व में जारी सुविधाओं को भी जनता से छीन रही है। जैसे बाराबंकी से चारबाग तथा चारबाग से माती होते हुए फतेहपुर जाने वाली बसों को बंद कर दिया है। जनता परेशान है सरकार चुप है। किसान सभा के उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार ने कहा कि योगी सरकार में बिजली के गलत बिल भेंजकर ग्रामीण जनता का उत्पीड़न किया जा रहा है। किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि नहरों की सफाई नहीं हुई है, टेल तक पानी नहीं जा रहा है। भाजपा सरकार में किसानों की दुर्दशा बहुत ही दयनीय है। धारना सभा को पार्टी के सह सचिव शिव दर्शन वर्मा ने सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार किसानों को लाभकारी मूल्य न देकर छोटे किसानों का धान भी नहीं खरीद रही, गन्ना किसानों का भुगतान नहीं हो रहा है। धरना सभा को मो0 कदीर, दीपक, विष्णु त्रिपाठी, मुनेश्वर बख्श आदि नेताओं ने सम्बोधित किया। धरने में दल सिंगार, गिरीश चन्द्र, अमर सिंह प्रधान, वीरेन्द्र कुमार, रामनरेश वर्मा, काशीराम आदि प्रमुख कम्युनिस्ट नेता व कार्यकर्ता मौजूद रहे।


मंगलवार, 26 नवंबर 2019

गृह मंत्री इस्तीफा दें - अतुल कुमार अंजान

अनैतिकता पर नैतिकता की जीत--- अमित शाह इस्तीफा दे ---भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी महाराष्ट्र के घटना चक्र से अब यह साफ हो गया कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र की सरकार ने प्रधानमंत्री के इशारे पर अमित शाह के गृह मंत्रालय के सांठगांठ के साथ  महाराष्ट्र राज्यपाल का पद का दुरुपयोग कर कर अनैतिक,  अलोकतांत्रिक देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार को सत्ता पर बैठाया था l  अजित पवार के पहले और देवेंद्र फडणवीस ने बाद में राज्यपाल को सौंप   इस्तीफे के बाद नीत पर अरे अनीति  और दुष्कर्म भरी राजनीति का अंत हो गया l  प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री को इस बड़े देश में  सिर्फ बड़ी नैतिकता की बात ही करने का अधिकार नहीं वरुण इस बड़े देश में बड़ा दिल रखने की भी जरूरत है l  जिसका परिचय उन्होंने महाराष्ट्र की घटना चक्र में नहीं दिया l उनके अश्वमेध का घोड़ा महाराष्ट्र में लहूलुहान होकर के आजाद मैदान में गिरा पड़ा है  l राज्यपाल काली टोपी लगाकर तिरछी नजर से संविधान को हलाक करने की कोशिश कर रहे थे l  उन्हें शिकस्त मिली और सुप्रीम कोर्ट ने भारत के संविधान और एसआर बोम्मई के मामले में दिए गए निर्णय की इज्जत को बचा लिया  l भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेता  अतुल कुमार अनजान ने  कहा कि इस पूरे घटना चक्र में  काले पर्दे के पीछे  बैठकर  गृह मंत्री अमित शाह ने जो खेल खेला  और पराजय का मुंह देखा , अब उन्हें तत्काल  देश के गृह मंत्री के पद से त्यागपत्र दे देना चाहिए l

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

शौकत आजमी अभिनेत्री के अलावा मजदूर किसान आंदोलन को समर्पित सच्ची कम्युनिस्ट थी

प्रगतिशील लेखक संघ के अग्रणी नेता, सुप्रसिद्ध शायर व कम्युनिस्ट आंदोलन के महत्पूर्ण अगुवा कैफी आजमी की पत्नी शौकत आजमी का निधन हो गया है।
जब कैफी आजमी ने यह शायरी पढनी शुरू कि--
'कद्र अब तक तेरी तारीख ने जानी ही नहीं, तुझमें शोले भी हैं बस अश्क फिशानी ही नहीं। तू हकीकत भी है दिलचस्प कहानी ही नहीं, तेरी हस्ती भी है इक चीज जवानी ही नहीं। अपनी तारीख का उन्वान बदलना है तुझे उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे...।'

हैदराबाद के एक मुशायरे में कैफी आजमी ने जैसे ही अपनी मशहूर नज्म 'औरत' को सुनाया, उस समय अपने भाई के साथ मुशायरे में पहली सफ (लाइन) में बैठीं शौकत, कैफी पर अपना दिल हार बैठीं। इस इश्क में वह यह भी भूल गईं कि उनकी मंगनी किसी और से हो चुकी है। अपनी मोहब्बत में उन्होंने हर इम्तेहान को पास किया और आखिर में शौकत, शौकत आजमी बन गईं। आजमगढ़ के फूलपुर के मेजवां में जन्मे मशहूर शायर, लेखक व गीतकार कैफी आजमी की पत्नी, मशहूर सिने तारिका शबाना आजमी और कैमरामैन बाबा आजमी की मां शौकत आजमी की मां थी।
शौकत आज़मी भी इप्टा के आयोजनों में काफी सक्रिय रहीं. उन्होंने इप्टा के कई नाटकों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं और इस आंदोलन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
शौकत आजमी अभिनेत्री की भूमिका के अलावा मजदूर किसान आंदोलन को समर्पित सच्ची कम्युनिस्ट थी।

रविवार, 17 नवंबर 2019

गुरुदास दास गुप्ता देश के महानायक थे

संसदीय राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ गुरुदास गुप्ता ने निभाई थी अहम भूमिका-सुमन
पूर्व सांसद कामरेड़ गुरुदास दास गुप्ता का निधन मजदूर आन्दोलन की बड़ी क्षति
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कामरेड़ की स्मृति में आयोजित की शोकसभा

बाराबंकी। गुरुदास गुप्ता साम्यवादी आंदोलन के ही नहीं देश के महा नायक थे। और संसदीय राजनीति में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को मजबूत दिशा दी थी। उक्त उदगार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन नें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय सचिव व 5 बार के सांसद रहे कामरेड गुरुदास गुप्ता की स्मृति में गांधी भवन में आयोजित शोक सभा में व्यक्त कियें।  श्री सुमन ने आगें कहा कि कामरेड गुरुदास दास की मृत्यु मजदूर आंदोलन की बड़ी क्षति है। जो अपूर्णनीय है। पार्टी नेता प्रवीण कुमार ने कहा कि कामरेड गुरुदासदास को सरकार से एक करोड़ रुपये मिले थे। जिसे उन्होंने मजदूर आन्दोलन को दे दिया था। किसान सभा अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि कामरेड गुरुदास दास अपनी बातें खुलकर रखने के लिए मशहूर थे। मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में वित्त वर्ष 2012-13 के बजट पर तीखी टिप्पणी करते हुए दासगुप्ता ने कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी की कोई आवश्यकता नहीं थी, यह बजट तो कोई भी लिपिक तैयार कर सकता था। पार्टी के सहसचिव शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम केस को मनमोहन सिंह के कर्तव्य की चूक बताया। अंत में पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि दासगुप्ता का जन्म 3 नवंबर 1936 को हुआ था। वे 1985 में पहली, 1988 में दूसरी और 1994 में तीसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद दासगुप्ता 2004 और 2009 में दो बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। शोक सभा में दलसिंगार, अमर सिंह, वीरेन्द्र कुमार गिरीश चन्द्र मास्टर रामविलास वर्मा रामलखन वर्मा आदि मौजूद थे। अंत में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धाजंलि अर्पित की गई।
सीएबी से भी जुड़े रहे दासगुप्ता
2004 में लोकसभा पहुंचने के बाद दासगुप्ता वित्त समिति और पब्लिक अंडरटेकिंग समिति के सदस्य भी रहे। 2009 में वे भाकपा संसदीय दल के नेता भी चुने गए थे। राजनीति से इतर दासगुप्ता को क्रिकेट और रवींद्र संगीत में बेहद रुचि थी। वे बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) से भी जुड़े रहे और उन्होंने कैब के सदस्य के रूप में काम किया।

मंगलवार, 5 नवंबर 2019

अधिवक्ताओं के खिलाफ गोदी मीडिया का दुष्प्रचार अभियान

अधिवक्ता और पुलिस संघर्ष दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन पुलिस की जात्तीयों के खिलाफ कोई उचित फोरम न होने के कारण आये दिन संघर्ष की स्थिति पैदा हो जाती है, मूल समस्या को देखने के बजाय टुकड़ो-टुकड़ों में समस्या का समाधान करने की कोशिश के कारण आये दिन विस्फोटक स्थिति पैदा हो जाती है, अधिवक्ताओं के पास ज्यादातर शिकायतें पुलिस की होती हैं, और उनके द्वारा की जा रही मारपीट और वसूली की शिकायतें अधिवक्ताओं को बराबर मिलती है जिससे युवा, ईमानदार अधिवक्ताओं के मन में उनके प्रति घृणा उत्पन्न होती है, उस घृणा के कारण आये दिन संघर्ष में बदल जाती है, इन घटनाओं के पीछे अधिवक्ताओं का कोई निजी मामला न होकर जनता के प्रति पुलिस द्वारा किये जा रहे अत्याचार के कारण अधिवक्ताओं की सहानुभूति गुस्से के रूप में प्रदर्शित होती है।

दिल्ली पुलिस के जवान इस समय काली पट्टी बांधकर मुख्यालय के बाहर जुटे हैं और अपने लिए इंसाफ की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भी वर्दी के पीछे एक इंसान हैं, हमारा भी परिवार है। हमारी पीड़ा कोई क्यों नहीं समझता।

पुलिसवालों का सवाल है कि मानवाधिकार हमारे लिए नहीं है क्या। हमें कोई भी मारता-पीटता रहे और हम शांत रहें। हमें इंसाफ चाहिए और अगर पुलिस कमिश्नर हमारी बात नहीं सुनते तो हम गृहमंत्रालय तक जाएंगे। वहां तक शांतिपूर्ण मार्च करेंगे।
यह सब करते समय पुलिस यह नहीं है कि जब वह ज्यादिती करती है तब उसकी यह मनोदशा नहीं होती है।


दिल्ली पुलिस द्वारा अधिवक्ताओं के खिलाफ प्रदर्शन करना सरकारी तंत्र की विफलता है, अभी तक सरकार ने पुलिस के द्वारा की जा रही जात्तीयों के खिलाफ कोई उचित फोरम तैयार नहीं किया है, अपितु महाभ्रष्ट से भ्रष्ट पुलिस अधिकारी कानून व्यवस्था का रखवाला बना रहता है, और फर्जी मुठभेड़ द्वारा आरोपियों की बटेर व मुर्गों की भांति हत्या की जा रही है। उनको दण्डित करने में समाज व न्यायपालिका पूर्णरूप से विफल है।
अधिवक्ता चूंकि सीधे समाज से जुड़ा हुआ व्यक्ति है मोहलले से लेकर हर स्तर पर पुलिस द्वारा की जा रही जात्तीयों व भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करने की इच्छा इस तरह के संघर्षों को जन्म देती है, आज जरूरत इस बात की है कि संगठित अपराधी गिरोह जो वर्दी के नाम पर समाज का उत्पीड़न कर रहे हैं उनको चिंहित कर दण्डित किया जाए, गोदी मीडिया वकीलों की छवि को धूमिल कर रही है। जिसका कोई औचित्य नहीं है, अधिवक्ताओं के खिलाफ जारी दुष्प्रचार बंद किया जाये। अधिवक्ता समाज उगता हुआ सूरज है, ब्रिटिश कालीन भारत में जब कोई मोर्चा रखने के लिए तैयार नहीं था तब गांधी, नेहरू, पटेल जैसे अधिवक्ताओं ने अपना पेशा छोड़कर अंग्रेजी सम्राज्यवाद का सूरज डुबो दिया था, आज उन्हीं के पद चिन्हों पर चलने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ गोदी मीडिया दुष्प्रचार कर रही है।

रणधीर सिंह सुमन, एडवोकेट
अधिवक्ता चेम्बर, कक्ष सं0 27,
सिविल कोर्ट, बाराबंकी
मोबाइल: 9450195427

गुरुवार, 31 अक्तूबर 2019

महान कम्युनिस्ट नेता गुरुदास दास गुप्ता का निधन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व सांसद और वामपंथी नेता गुरुदास दासगुप्ता का 83 वर्ष की उम्र में निधन
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी  के दिग्गज नेता और पूर्व सांसद गुरुदास दासगुप्ता का गुरुवार को निधन हो गया। गुरुदास 83 वर्ष के थे। अपने राजनीतिक जीवनकाल में वह तीन बार राज्यसभा और दो बार लोकसभा के सदस्य रहे।


उनके परिवार में पत्नी और बेटी हैं। दासगुप्ता पिछले कुछ महीने से फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे।

पश्चिम बंगाल में भाकपा के सचिव स्वपन बनर्जी ने बताया कि कोलकाता स्थित अपने निवास पर सुबह छह बजे दासगुप्ता का निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित थे। खराब स्वास्थ्य के कारण उन्होंने पार्टी के सभी पद छोड़ दिए थे लेकिन वे भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के सदस्य थे।


गुरुदास दासगुप्ता को देश के दिग्गज वामपंथी नेताओं में गिने जाते रहे हैं। 1985 में पहली बार गुरुदास राज्यसभा सांसद निर्वाचित किए गए। इसके बाद 1988 में उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए चुना गया।

वहीं, 1994 में तीसरी बार दासगुप्ता को राज्यसभा सासंद चुना गया। हालांकि वह तीन बार राज्यसभा सांसद रह चुके थे। इसके बाद भी 2004 में उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा और वह जीते भी। इस दौरान वह वित्त समिति और पब्लिक अंडरटेकिंग समिति के सदस्य भी रहे।

2004 के बाद गुरुदास दासगुप्ता 2009 के लोकसभा चुनावों में मैदान में उतरे और एक बार फिर जीत हासिल की। इस बार उन्हें लोकसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का संसदीय दल का नेता भी चुना गया। इस दौरान वह कई संसदीय समितियों से जुड़े रहे।

गुरुदास दासगुप्ता को संगीत और क्रिकेट से बेहद लगाव था। दासगुप्ता बंगाल क्रिकेट संघ से भी जुड़े रहे और उन्होंने वहां कैब के सदस्य के रूप में काम किया। गुरुदास दासगुप्ता का जन्म तीन नवंबर 1936 को हुआ था।

गुरुदास दासगुप्ता अपनी बातें खुलकर रखने के लिए मशहूर थे। मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में वित्त वर्ष 2012-13 के बजट पर तीखी टिप्पणी करते हुए दासगुप्ता ने कहा था कि केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में प्रणब मुखर्जी की कोई आवश्यकता नहीं थी, यह बजट तो कोई भी लिपिक तैयार कर सकता था।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अंजान ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार कोलकाता में किया जाएगा।
-रणधीर सिंह सुमन 

मंगलवार, 22 अक्तूबर 2019

गजेंद्र सिंह एक इंकलाबी शख्सियत थे



बाराबंकी। आज देश में प्रेस की आजादी, बोलने की आजादी, लिखने की आजादी सब पर अंकुश लगाया जा रहा है, वर्तमान सरकार में लोकतंत्र व इंसानियत सिसक रही है, खौफ के माहौल में देश कब तक रहेगा और यह परिस्थितियाँ देश को किस ओर ले जायेंगी यह एक विचारणीय प्रश्न है। यह विचार प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री हाजी फरीद महफूज किदवई ने गांधी भवन सभागार में पूर्व विधायक एवं सामाजिक एवं साहित्यिक प्रतिभाओं के धनी स्व0 गजेन्द्र सिंह की बरसी के अवसर पर आयोजित स्मृति सभा में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि हमें निराश होने की जरूरत नहीं है यह वह देश है जहां एक फकीर सिफत व्यक्ति ने हाथ में छड़ी लेकर ऐसी ताकतों को देश से भगा दिया जिसके बारे में यह कहा जाता था कि उनका सूरज कभी अस्त  नहीं होता था। गजेन्द्र सिंह जैसी इंकलाबी शख्सियत की प्रांसगिकता आज पहले से कही अधिक है। पूर्व विधायक राकेश मिश्रा ने गजेन्द्र सिंह को श्रद्धांजलि प्रस्तुत करते हुए कहा कि वह उनसे पहली मुलाकात में ही बहुत प्रभावित हुए वह साधारण से दिखने वाले व विशाल प्रतिभाओं के धनी व्यक्ति थे और सच्चे जनप्रतिनिधि थे जनता व समाज के प्रति उनका समर्पण भाव ही उन्हें महान व्यक्ति बनाता है। पूर्व विधायक व इण्डियन लायर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष परमात्मा सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि गजेन्द्र सिंह फकीरी मिजाज रखते थे उन्होंने विधायक की कुर्सी कभी अपने ऊपर चढ़ने नहीं दिया बल्कि अपने समाजसेवी व्यक्तित्व को विधायक की कुर्सी पर सदैव हावी रखा।
रिहाई मंच के संयोजक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद शुऐब ने कहा कि आज गजेन्द्र सिंह जैसे लोगों की देश में बहुत जरूरत है क्योंकि वर्तमान सत्ताधारियों ने देश को एक जेल में परिवर्तित करने की ओर कदम बढ़ा दिये हैं और इसकी शुरूआत कश्मीर से उन्होंने कर दी।
उ0प्र0 कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव फवाद किदवई स्व0 गजेन्द्र सिंह को श्रंद्धाजलि अर्पित करते हुए कहा कि वो हम सब जवानों के नायक एवं प्रेरणा स्रोत है उन्होंने कहा कि आज के जो नौजवान पीढ़ी राजनीति में कदम रख रही है उन्हें गजेन्द्र सिंह के व्यक्तित्व का अध्ययन करना चाहिए और उसका अनुसरण भी करना चाहिए।
सभा की अध्यक्षता कर रहे जिला बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष बृजेश दीक्षित अपने कुछ संस्मरण व यादों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें दादा गजेन्द्र सिंह का स्नेह सदैव प्राप्त रहा, उन्होंने उनसे बहुत कुछ सीखा, उन्होंने दादा गजेन्द्र सिंह के व्यक्तित्व पर एक स्मारिका प्रकाशित करने की सलाह कार्यक्रम के आयोजक एवं सुपुत्र वरिष्ठ अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन को दी।
सभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा व जिला टैक्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन वैश्य व महंत बी0पी0 दास, सिटी इण्टर कालेज के प्राचार्य विजय प्रताप सिंह, हुमायूं नईम खा आदि ने अपने अपने विचार रखें।
इस सभा के अंत में रणधीर सिंह सुमन ने आये हुए अतिथिगणों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर गांधी समारोह के अध्यक्ष राजनाथ शर्मा, अजय सिंह गुरूजी, दिलीप गुप्ता, प्रदीप सिंह, उपेन्द्र सिंह, भूपेन्द्र पाल सिंह शैंकी, राहीबुल कादिर, पाटेश्वरी प्रसाद, किसाान सभा के अध्यक्ष
विनय कुमार सिंह, प्रवीन कुमार, शिव दर्शन वर्मा, पुष्पेन्द्र यादव, विजय प्रताप सिंह, श्याम सिंह, अलाउद्दीन, अंकुल वर्मा, विभव मिश्रा, अनवर अली, श्याम सुन्दर दीक्षित, निशांत अहमद आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे।

रणधीर सिंह सुमन
मोबाइल: 9450195427