शनिवार, 3 दिसंबर 2011

पत्थर की दीवार


तीरगी के बादल से
जुगनुओं की बारिश से
ऱक़्स में शरारे हैं
हर तरफ़ अँधेरा है
और इस अँधेरे में
हर तरफ़ शरारे हैं
कोई कह नहीं सकता
कौन सा शरारा कब
बे़क़रार हो जाये
शोलाबार हो जाए
इनक़्लाब जाए

-अली सरदार जा़फरी

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सुमन
लोकसंघर्ष