गुरुवार, 17 मई 2012

मालिक ने गाली देते हुए भागने के लिए कहा

15 मई, 2012 को ओखला औद्योगिक क्षेत्र के फेस 1 की फैक्ट्री नं़ 274 (फैक्ट्री के गेट पर नं़ के अलावा फैक्ट्री के नाम तक नहीं लिखा है) में शाम लगभग 4 बजे आग लगी। मजदूरों ने बताया कि उस वक्त फैक्ट्री में लगभग 100 मजदर कार्यरत थे। इस फैक्ट्री में मेंहदी (हेयर डाई) बनाने का काम होता है जिसमें ज्वलनशील केमिकल का प्रयोग होता है। इस फैक्ट्री में दो बार पहले भी आग लग चुकी है। आग फैक्ट्री के तीसरे माले पर लगी जिस पर मशीनें लगी हुई हैं ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग तुरंत ही फैक्ट्री के अन्य भागों में फैल गयी। करीब 1516 अग्निशमन गाड़ियों ने दोाई घंटे की मेहनत के बाद आग पर काबू पायी। आग बुझने के बाद तीन मजदूरों को जली हुई अवस्था में बाहर निकाला गया। पुलिस ने इनको पहले होली फेमली निजी हस्पताल में लेकर गई। लेकिन यह पुलिससिया मामला होने के कारण होली फेमली हस्पताल ने उन्हें इलाज (ाई से तीन घंटे तक उनको कोई भी प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाया) करने से मना करा दिया। उसके बाद पुलिस उन्हें सफदरजंग हस्पताल में भर्ती कराया जहां पर उन्हें आईसीयू में रखा गया।
इलाज के दौरान मान सिंह पुत्र राम प्रकाश उम्र लगभग 22 वर्ष की मॢत्यु हो गयी जो कि इस कम्पनी में 6 वर्ष से कार्यरत थे लेकिन उनके पास कम्पनी का किसी तरह की परचिय पत्र, ईएसआई कॉर्ड तक नहीं थे। मान सिंह की मां जो कि नेत्रहीन हैं और उनके गांव के लोग मान सिंह के शव को ले जाने के लिए आये थे जो कि किराये के मकान में तेहखण्ड में रहते थे। दिपू कुमार पुत्र राम चन्द्र उम्र लगभग 19 वर्ष जो कि गोरखपुर से हैं और अपनी मां और भाई के साथ संगम बिहार में रहते हैं और इस कम्पनी में लगभग 5 वर्ष से कार्यरत थे उनकी हालत बहुत ही नाजुक बनी हुई है और सफदरजंग हस्पताल के आईसीयू वार्ड नं़ 22, कमरा नं़ 8 में जिन्दगी और मौत से जूझ रहे हैं। उनकी मां, बहन, भई, जीजा और आसपड़ोस के लोग वार्ड के बाहर जमे हुए हैं उनकी बहन जो कि अपने दो छोटे बच्चों जिनकी उम्र करीब 6 महीना और दो साल होगी उनको वार्ड के बाहर इस लू भरी गर्मी में नीचे जमीन पर ही लेटा रखी हैं। दिलीप कुमार पुत्र सहदेव महतो, उम्र 38 वर्ष जो कि अपने भाई के साथ जे़जे़ कैम्प संजय कॉलोनी ओखला में रहते हुए इस कम्पनी में लगभग 5 वर्ष से काम कर रहे हैं वो भी वार्ड नं 22 के कमरा नं़ 10 में अपनी जिन्दगी से जूझ रहे हैं।
अस्पताल में जब कोई भी इस परिवार से मिलने जा रहे हैं तो तुरंत ही मालिक के करिन्दे और मैनेजमेंट चौकना होकर एक दूसरे को फोन करते हुए इकट्ठा हो जाते हैं और इन परिवारों को झूठी दिलसा दे रहे हैं कि सब ठीक हो जायेगा और वे लोग किसी के बहकावे में नहीं आयें। यह तो एक दुर्घटना थी जिसमें मालिक का कोई दोष नहीं हैं। ये मैनेजमेंट के लोग बाहर से घटना की जानकारी के लिये गये लोगों से उलझ पड़ते हैं और धमकी देते हैं कि जो करना होगा जाओ कर लेना। ब्लड देने के लिए ये मजदूरों को बुला रखे हैं जो खुद ही बहुत कमजोर हैं। मैनेजमेंट द्वारा मॢतक मान सिंह के मां को बहलाफुसला कर मामले को रफादफा कर लिया गया लेकिन किसी भी बात का खुलासा नहीं किया गया कि मॢतक की मां के साथ फैक्ट्री मालिक की क्या बात हुई जब कि मान सिंह कि माता जी दृष्टिहिन हैं। इसी तरह घायल दीपू व दिलीप के परिवार वालों पर दबाव मामले को सुलझाने का दबाव बनाया जा रहा है।
पुलिस अभी तक इस मामले में किसी को भी गिरफ्तार नहीं की है और न ही मॢतक या घायल मजूदरों के परिवार वालों के बताया है कि क्या कानूनी कार्रवाई हो रही है। इसमें से सभी परिवार वाले निरक्षर हैं जिनको किसी भी प्रकार की हक अधिकारों की कोई जानकारी नहीं है। अपुष्ट खबरों के अनुसार ये भी बताया जा रहा है कि अभी तीनचार मजदूर लापाता हैं जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। मिडिया के लिये भी यह खबर कोई खबर नहीं रही। यह खबर किसी भी इलेक्ट्रानिक या प्रिंट मिडीय द्वारा आम जनता तक नहीं पहुंचाया गया और न ही इन परिवारों की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की गई।
इसमें से किसी भी मजदूर के पास जो कि लगभग 56 वर्ष से काम कर रहे हैं कोई भी पहचान पत्र व ईएसआई कार्ड तक नहीं दिया गया है। पीएफ और बाकी श्रम कानूनों को लागू करना तो दूर की बात है। इतने बड़े हादसे के बाद भी कोई श्रम अधिकारी इन परिवार वालों से नहीं मिला। इतने लम्बे समय से काम करने के बावजदू इन मजदूरों को चार से पांच हजार रुपये प्रतिमाह ही मिलता था जो कि दिल्ली सरकार के न्यूनतम वेतन से बहूत ही कम है। इस फैक्ट्री में दो बार पहले आग लग चुकने के बाद भी किसी आग लगने पर किसी तरह के बचाव के उपाय नहीं किये गये थे।
फैक्ट्री नं़ 278 के मजदूर ने बताया कि जब वह टी लंच में बाहर निकला था तो फैक्ट्री नं़ 274 से धुंआ निकलते देखा वह तुरंत 274 के पास दौर कर गया और फैक्ट्री के शिशे को तोड़ने के लिए बोला जिससे कि धुआं निकलता रहे लेकिन फैक्ट्री नं़ 274 के मालिक ने गाली देते हुए भागने के लिए कहा।
-सुनील कुमार

2 टिप्‍पणियां:

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सुमन
लोकसंघर्ष