लार्ड माउंटबेटन ने महात्मा गांधी की हत्या पर किया था तंज!
“ब्रिटिश राज तो अपनी पूरी जिंदगी के कलंक से बच निकला, लेकिन तुम्हारी हत्या ने तुम्हारे ही देश, तुम्हारे ही राज्यों और तुम्हारे ही कंगाल लोगों का काला चेहरा उजागर कर दिया! अगर इतिहास कभी निष्पक्ष नजर आएगा, तो वो तुम्हें ‘ईसा और बुद्ध’ की पंक्ति में खड़ा करेगा !”
लेकिन विडंबना ये है कि कोई क़ौम इतनी नीच, कृतघ्न और स्वार्थी कैसे हो सकती है? जो अपने पितातुल्य संत को छाती में तीन गोलियां ठोंक दे और ऊपर से ‘निर्लज्ज ठसक’ ये कि एक वर्ग इतने पर भी इन हत्यारों को हीरो मान रही है, अफसोस तो दूर, जश्न मनाती है!! क्या यही है वो ‘राष्ट्रभक्ति’ जो चंद लोगों के द्वारा बेची जा रही है?
लॉर्ड माउंटबेटन (तत्कालीन वायसराय)
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सुमन
लोकसंघर्ष