शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

सेना अधिकारियो का चयन होता है या धोखेबाजों का

भारतीय सेना में काफी जांच और परख के पश्चात किसी भी नवजवान को अधिकारी रैंक में चुना जाता है और उसके पश्चात उनको कठिन प्रशिक्षण देने के बाद सेना में अधिकारी रैंक पर नियुक्त किया जाता है लेकिन इस कई दशकों से सेना के ही कार्यवाई से यह पता चलता है की उनके काफी अफसर घोटाले बाज धोखा धडी में लिप्त रहने वाले व्यक्ति हैं कहीं कहीं अधिकारियों के चयन में प्रशिक्षण में कमी रह जाती है जिसके कारण भारतीय सेना विवादों के घेरे में जाती है भारतीय सेना के एक कर्नल एच.एस. कोहली को नवम्बर 2004 में सेना से बर्खास्त कर दिया गया था वह ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले नौटंकी में मुठभेड़ के सीन को दर्शा कर वीरता पदक प्राप्त करना चाहते थे कर्नल कोहली ने असोम के सिलचर के पास बड़ा नागादुन में कुछ ग्रामीणों को टमाटर के रस से नहला कर मुठभेड़ दिखा कर वीरता पदक प्राप्त करने की कोशिश की मामला खुल जाने पर उनको बर्खास्त कर दिया गया था और अब उनकी पुनिरीक्षण याचिका भी ख़ारिज कर दी गयी है
कर्नल एच.एस कोहली को सैन्य जगत से संबध रखने वाले लोग केचप कर्नल के नाम से जानते हैं सेना के सूत्रों के अनुसार भारी संख्या में सैन्य अधिकारी विभिन्न अपराधिक मामलों में लिप्त हैं आज जरूरत इस बात की है कि सेना के अधिकारियों के चयन प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए । आदिम युग के मूल्यों की सेना सभ्य समाज में कोई आदर्श प्रस्तुत नहीं कर सकती है

सुमन
लो क सं घ र्ष !

1 टिप्पणी:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

एसा कौनसा क्षेत्र है जहाँ धोखेबाज नहीं है जब नैतिकता पूरे राष्ट्र से ही गायब होती जा रही है तो सेना अछूती कैसे रह सकती है फिर भी गनीमत है कि सेना में ऐसे मामले गिने चुने होते है जबकि वकीलों,डाक्टरों,पुलिस,प्रशासनिक महकमों ,स्कूलों में तो जयादातर ठग ही बैठे है |