रविवार, 7 नवंबर 2010

दुनियां में गजब तमाशा हूँ, लाशों का खेल खेलता हूँ


मैं अमरीका, मैं अमरीका
मुझसे दुनियां थर्राती है
मेरे ही एक इशारे पर
ता थैया नाच दिखाती है
मेरे नाम का सिक्का चलता है
दुनियां मेरे ही तराने गाती है
मैं अमरीका, मैं अमरीका

मैं बेच रहा हूँ बम गोले
टूथपेस्ट, जहरीली कोकाकोले
लोगों को स्वपन दिखाता हूँ
भरने को बस अपनी जेबें
मैं ठेकेदार हूँ दुनियां का
दुनिया मेरे ही तराने गाती है
मैं अमरीका, मैं अमरीका

मैं तेल का बहुत ही प्यासा हूँ
दुनियां में गजब तमाशा हूँ
लाशों का खेल खेलता हूँ
सारे ही हैं मेरे पास पत्ते
है युद्ध ज्वाल मेरे दम से
दुनिया मेरे ही तराने गाती है
मैं अमरीका, मैं अमरीका

मैंने उन देशों को तोड़ा है
जो मेरी राह में रोड़ा हैं
बस युद्ध मेरा व्यवसाय है
जो सारी दुनियां को खाय है
फिर भी शांति है मेरा नारा
दुनियां मेरे ही तराने गाती है
मैं अमरीका, मैं अमरीका

मैं दुनियां को नंगा करता हूँ
चाहे नेता हो या अभिनेता
मैं सब खून तुम्हारा चूसूंगा
और दे दूंगा कुछ कतरे दान
तुम बने रहो यूँ ही भिक्षक
दुनियां मेरे ही तराने गाती है
मैं अमरीका, मैं अमरीका

तुम सोने की चिड़िया बनते हो
पंख मैं ही तुम्हारे कतरूँगा
फेंक के कश्मीर की हड्डी
कुत्तों का तमाशा देखूंगा
मैं नक्शा नया बना दूंगा
दुनियां मेरे ही तराने गाती है
मैं अमरीका, मैं अमरीका

मैं चतुर चालाक कहाता हूँ
दुनियां को नाच नचाता हूँ
हारा ईरान ओ अफगानिस्तान में
पर मैंने पैसा खूब कमाया है
मैं सारी दुनिया का राजा हूँ
दुनियां मेरे ही तराने गाती है
मैं अमरीका, मैं अमरीका

केदारनाथ"कादर"

1 टिप्पणी:

honesty project democracy ने कहा…

बहुत ही सुन्दर....और सच्ची अभिव्यक्ति......ये सब लाशों के सौदागर हैं और इनके संगत में रहने वाला भी लाशों का सौदागर ही बनेगा ......उससे इंसानियत की उम्मीद बेमानी है ........कास ये बातें सोनिया गाँधी,मनमोहन सिंह समझ पाते ........अमेरिका का ताकत दुनिया में अन्याय को बढ़ावा देने वाला है .......आजतक इसने किसी भी देश को न्याय दिलाने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है ......?