रविवार, 28 नवंबर 2010

अंग्रेज भक्त हैं हिन्दुवत्व के पैरोकार


आरएसएस की भागीदारी ! स्वतंत्रता संग्राम में........? भाग 3

तो यह है कि गोलवलकर ने स्वयं भी कभी यह दावा नहीं किया कि आरएसएस अंग्रेज विरोधी था। अंग्रेज शासकों के चले जाने के बहुत बाद गोलवलकर ने 1960 में इंदौर (मध्य प्रदेश) में अपने एक भाषण में कहा:

कई लोग पहले इस प्रेरणा से काम करते थे कि अंग्रेजो को निकाल कर देश को स्वतंत्र करना हैअंग्रेजों के औपचारिक रीति से चले जाने के पश्चात यह प्रेरणा ढीली पड़ गयीवास्तव में इतनी ही प्रेरणा रखने की आवश्यकता नहीं थीहमें स्मरण होगा कि हमने प्रतिज्ञा में धर्म और संस्कृति की रक्षा कर राष्ट्र की स्वतंत्रता का उल्लेख किया हैउसमें अंग्रेजो के जाने जाने का उल्लेख नहीं है

आरएसएस ऐसी गतिविधियों से बचता था जो अंग्रेजी सरकार के खिलाफ हों। संघ द्वारा छापी गयी डॉक्टर हेडगेवार की जीवनी में भी इस सच्चाई को छुपाया नहीं जा सका है। स्वतंत्रता संग्राम में डॉक्टर साहब की भूमिका का वर्णन करते हुए बताया गया है :
संघ स्थापना के बाद डॉक्टर साहब अपने भाषणों में हिन्दू संगठन के सम्बन्ध में ही बोला करते थेसरकार पर प्रत्यक्ष टीका नहीं के बराबर रहा करती थी

गौरतलब है कि ऐसे समय में जब भगत सिंह, राजगुरु, अशफाकुल्लाह, राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, राजेन्द्र लाहिड़ी जैसे सैकड़ों नौजवान जाति और धर्म को भुलाकर भारत मां को अंग्रेजों की गुलामी से आजाद कराने के लिए अपने प्राण दे रहे थे, उस वक्त हेडगेवार और उनके सहयोगी देश का भ्रमण करते हुए केवल हिन्दू राष्ट्र और हिन्दू संस्कृति तक अपने को सीमित रखते थे। यही काम इस्लाम की झंडाबरदार मुस्लिम लीग भी कर रही थी। जाहिर है इसका लाभ केवल अंग्रेज शासकों को मिलना था।

-आरआरएस को पहचानें किताब से साभार
समाप्त

1 टिप्पणी:

bjp_rajendra_adv ने कहा…

लोगों की याद दास्त कम होने से,वे लोग जो देश का बुरा कर चुके , लोगों का बुरा कर चुके और भ्रष्टाचार और घोटालों में अग्रणी रहे .., बार बार चुन कर सत्ता और सांसद में पहुचते रहे हैं ...!! कहीं न कहीं इसे जन दोष भी माना जाएगा ..! इसे कानून की कमजोरी भी माना जाएगा !! देश के विभाजन के बाद कांग्रेस सत्ता में आती है ...