सोमवार, 7 मार्च 2011

ब्रिटेन का कमांडो आपरेशन टांय-टांय फिस्स



लंदन/त्रिपोली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन को लीबिया में गुप्त कमांडो आपरेशन के असफल हो जाने के कारण देश-विदेश में जगहंसाई का सामना करना पड़ रहा है।

दुश्मन के इलाके में तोड़फोड़ और विरोधी नेताओं का सफाया करने में दक्ष ब्रिटेन के स्पेशल एअर सर्विस एसएएस के सात कमांडों और विदेश खुफिया एजेंसी एमआई-6 के एक एजेंट को लीबिया के विद्रोहियों ने अपने नियंत्रण वाले बेनगाजी शहर में गिरफ्तार कर लिया था।

यह भी एक विडम्वना है कि जिन लोगों ने कमांडो को गिरफ्तार किया, उन्हीं की मदद के लिए वे गुप्त रूप से लीबिया पहुंचे थे। ब्रिटेन के अधिकारियों के गिड़गिड़ाने के बाद विद्रोहियों ने कमांडो रिहा किया। फिर वे बेनगाजी बंदरगाह पहुंचे जहां से युद्धपोत कंबरलैंड में सवार होकर वे स्वदेश रवाना हुए।

ब्रिटेन के लिए अपमान की स्थिति उस समय और बढ़ गई जब गद्दाफी सरकार ने ब्रिटेन के राजदूत और विद्रोहियों से नेता के बीच हुइ टेलीफोन वार्ता का टेप सरकारी रेडियो पर प्रसारित किया। टेप में राजदूत रिचर्ड नार्दर्न विद्रोही नेता मुस्तफा अब्दुल जलील से कमांडो को रिहा करने की गुहार कर रहे हैं।

ब्रिटेन के लोगों और मीडिया सहित कोई भी सरकार की इस सफाई को मानने के लिए तैयार नहीं है कि उसने कमांडो नहीं बल्कि एक राजनयिक दल बेनगाजी भेजा था जिसे विद्रोही नेताओं से बातचीत का काम सौंपा गया था।

ब्रिटेन के अखबार मिशन के असफल होने का दोष प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के सिर मढ रहे हैं। दूसरी ओर गद्दाफी सरकार को प्रचार का जबरदस्त हथियार मिल गया है। सरकारी टेलीविजन और रेडियों पर इस असफल मिशन का जोरशोर से प्रचार किया गया ताकि लोगों को बताया जा सके कि देश की वर्तमान अशांति के पीछे अमरीका, ब्रिटेन सहित पश्चिमी देशों का हाथ है।

पत्रिका.कॉम से साभार

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