बुधवार, 16 मार्च 2011

भगत सिंह द्वारा फांसी के पूर्व पंजाब गवर्नर के नाम लिखा प्रत्र


युद्ध अभी जारी है ......हमें ....गोली से उड़ा दिया जाये
..........महोदय
उचित सम्मान के साथ हम नीचे लिखी बाते .आपकी सेवा में रख रहे हैं -
भारत की ब्रीटिश सरकार के सर्वोच्च अधिकारी वाइसराय ने एक विशेष अध्यादेश जारी करके लाहौर षड़यंत्र अभियोग की सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायधिकर्ण (ट्रिबुनल ) स्थापित किया था ,जिसने 7 अक्टुबर ,1930 को हमें फांसी का दंड सुनाया | हमारे विरुद्ध सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया हैं कि हमने सम्राट जार्ज पंचम के विरुद्ध युद्ध किया हैं |
न्यायालय के इस निर्णय से दो बाते स्पष्ट हो ज़ाती हैं -पहली यह कि अंग्रेजी जाति और भारतीय जनता के मध्य एक युद्ध चल रहा हैं |दूसरी यह हैं कि हमने निशचित रूप में इस युद्ध में भाग लिया है |अत: हम युद्ध बंदी हैं | यद्यपि इनकी व्याख्या में बहुत सीमा तक अतिशयोक्ति से काम लिया गया हैं , तथापि हम यह कहे बिना नहीं रह सकते कि ऐसा करके हमें सम्मानित किया गया हैं |पहली बात के सम्बन्ध में हमें तनिक विस्तार से प्रकाश डालना चाहते हैं |
हम नही समझते कि प्रत्यक्ष रूप से ऐसी कोई लड़ाई छिड़ी हुई हैं | हम नहीं जानते कि युद्ध छिड़ने से न्यायालय का आशय क्या हैं ? परन्तु हम इस व्याख्या को स्वीकार करते हैं और साथ ही इसे इसके ठीक सन्दर्भ को समझाना चाहते हैं | ......................
युद्ध कि स्थिति
हम यह कहना चाहते हैं कि युद्ध छिड़ाहुआ हैं और यह लड़ाई तब तक चलती रहेगी जब तक कि शक्तिशाली व्यक्तियों ने भारतीय जनता और श्रमिको की आय के साधनों पर अपना एकाधिकार कर रखा हैं -चाहे ऐसे व्यक्ति अंग्रेज या सर्वथा भारतीय ही हों ,उन्होंने आपस में मिलकर एक लूट जारी कर रखी हैं |चाहे शुद्ध भारतीय पूंजीपतियों के द्वारा ही निर्धनों का खून चूसा जा रहा हो तो भी इस स्थिति में कोई अंतर नही पड़ता |यदि आपकी सरकार कुछ नेताओ या भारतीय समाज के मुखियों पर प्रभाव जमाने में सफल हो जाये ,कुछ सुविधाय मिल जाये ,अथवा समझौते हो जाये ,इससे भी स्थिति नही बदल सकती ,तथा जनता पर इसका प्रभाव बहुत कम पड़ता हैं | हमे इस बात की भी चिन्ता नही कि युवको को एक बार फिर धोखा दिया गया हैं और इस बात का भी भय नहीं हैं कि हमारे राजनीतिक नेता पथ - भर्स्ट हो गये हैं और वे समझौते की बातचीत में इन निरपराध ,बेघर और निराश्रित बलिदानियों को भूल गये हैं ,जिन्हें दुर्भाग्य से क्रन्तिकारी पार्टी का सदस्य समझा जाता हैं |हमारे राजनीतिक नेता उन्हें अपना शत्रु समझते है ,क्योकि उनके विचार में वे हिंसा में विश्वास रखते हैं |हमारी वीरागनाओ ने अपना सब कुछ बलिदान कर दिया हैं |उन्होंने अपने पतियों को बलिबेदी पर भेट किया ,भाई भेट किये ,और जो कुछ भी उनके पास था -सब न्यौछावर कर दिया |उन्होंने अपने आप को भी न्यौछावर कर दिया परन्तु आपकी सरकार उन्हें विद्रोही समझती हैं |आपके एजेन्ट भले ही झूठी कहानिया बनाकर उन्हें बदनाम कर दें और पार्टी की प्रसिद्धी को हानि पहुचाने का प्रयास करें ,परन्तु यह युद्ध चलता रहेगा |
युद्ध के विभिन्न स्वरूप
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हो सकता हैं कि यह लड़ाई भिन्न -भिन्न दशाओ में भिन्न -भीं स्वरूप ग्रहण करे |किसी समय यह लड़ाई प्रकट रूप ले ले ,कभी गुप्त दशा में चलती रहे ,कभी भयानक रूप धारण के ले ,कभी किसान के स्तर पर युद्ध जारी रहे और कभी यह घटना इतनी भयानक हो जाये कि जीवन और मृत्यु की बाज़ी लग जाये |चाहे कोई भी परिस्थिति हो ,इसका प्रभाव आप पर पड़ेगा |यह आप की इच्छा हैं की आप जिस परिस्थिति को चाहे चुन लें ,परन्तु यह लड़ाई जारी रहेगी |इसमें छोटी -छोटी बातो पर ध्यान नही दिया जायेगा |बहुत सम्भव हैं कि यह युद्ध भयंकर स्वरूप ग्रहण कर ले |पर निश्चय ही यह उस समय तक समाप्त नही होगा जब तक कि समाज का वर्तमान ढाचा समाप्त नही हो जाता ,प्रत्येक वस्तु में परिवर्तन या क्रांति समाप्त नही हो जाती और मानवी सृष्टी में एक नवीन युग का सूत्रपात नही हो जाता |
अन्तिम युद्ध .........
निकट भविष्य में अन्तिम युद्ध लड़ा जायेगा और यह युद्ध निर्णायक होगा |साम्राज्यवाद व पूजीवाद कुछ दिनों के मेहमान हैं |यही वह लड़ाई हैं जिसमे हमने प्रत्यक्ष रूप में भाग लिया हैं और हम अपने पर गर्व करते है कि इस युद्ध को न तो हमने प्रारम्भ ही किया हैं और न यह हमारे जीवन के साथ समाप्त ही होगा हमारी सेवाए इतिहास के उस अध्याय में लिखी जाएगी जिसको यतीन्द्रनाथ दास और भगवतीचरण के बलिदानों ने विशेष रूप में प्रकाशमान कर दिया हैं | इनके बलिदान महान हैं |जहाँ तक हमारे भाग्य का सम्बन्ध हैं हम जोरदार शब्दों में आपसे यह कहना चाहते हैं कि आपने हमें फांसी पर लटकाने का निर्णय कर लिया हैं |आप ऐसा करेंगे ही |आपके हाथो में शक्ति हैं और आपको अधिकार भी प्राप्त हैं |परन्तु इस प्रकार आप जिसकी लाठी उसकी भैंसवाला सिद्धांत ही अपना रहे हैं और आप उस पर कटिबद्ध हैं |हमारे अभियोग की सुनवाई इस बात को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं कि हमने कभी कोई प्रार्थना नही की और अब भी हम आप से किसी प्रकार की दया की प्रार्थना नही करते |हम आप से केवल यह प्रार्थना करना चाहते हैं कि आपकी सरकार के ही एक न्यायालय के निर्णय के अनुसार हमारे विरुद्ध युद्ध जारी रखने का अभियोग हैं | इस स्थिति में हम युद्धबंदी हैं ,अत:इस आधार परहम आपसे मांग करते हैं कि हमारे प्रति युद्धबन्दियो -जैसा ही व्यवहार किया जाये और हमें फांसी देने के बदले गोली से उड़ादिया जाये |अब यह सिद्ध करना आप का काम हैं कि आपको उस निर्णय में विश्वास हैं जो आपकी सरकार के न्यायालय ने किया हैं |आप अपने कार्य द्वारा इस बात का प्रमाण दीजिये |हम विनयपूर्वक आप से प्रार्थनाकरते हैं कि आप अपने सेना -विभाग को आदेश दे दें कि हमें गोली से उड़ाने के लिए एक सैनिक टोली भेज दी जाये |

...............भवदीय
भगतसिंह ,राजगुरु ,सुखदेव
प्रस्तुती सुनील दत्ता

2 टिप्‍पणियां:

Manpreet Kaur ने कहा…

महत्वपूर्ण पोस्ट है ! आपका दिन शुब हो !
मेरे ब्लॉग पर आये !
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Kajal Kumar ने कहा…

इन शेरों की कुर्बानीयों का फल आज कुकुर लिए जा रहे हैं.
पुण्यात्माओं को मेरा नमन.