सोमवार, 5 दिसंबर 2011

मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया



. मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया

शोखियो में घोला जाए फूलो का शबाब , उसमे फिर मिलायी जाए थोड़ी सी शराब
होगा यू नशा जो तैयार वो प्यार है के फलसफे को देने वाला एक अजीमो शख्सियत अपनी अंतिम यात्रा पे निकल चुका है | देव आनद साहब को मैं जब कशा ६ का विद्यार्थी था तभी से जाता था , क्यों की मेरे बड़े भाई उनके जबरदस्त फैन हुआ करते थे वो जब उनके गुनगुनाये गीतों को गाया करते थे तो मेरे मन में भी एक अजीब सी कौतूहल हुआ करती थी मेरे मन में भी एक उत्सुकता थी की एक बार देव साहब की कोई फिल्म देखने को मिले और वो दिन मिला भी मुझे माँ ने मुझे इजाज़त दे दी की मैं फिल्म देखने जाऊ और मेरे जीवन की सबसे पहली फ़िल्म " हम दोनों " थी | मुझे आज भी वो दृश्य याद है जब देव साहब जंगल में एक फौजी की जिन्दगी को जी रहे थे उस वक्त सुबह का वो दृश्य जिसमे वो तैयार होते है उसके बाद एक सिगरेट जलाते हुए अपने ही अक्स को पानी में देखते ही यह गीत गुनगुना उठते है और जिन्दगी जीने का एक नया फलसफा देते हैं " मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया , हर फ़िक्र को धुएं में उडाता चला गया , बरबादियो का सोज मनाना कबूल था , बरबादियो का जश्न मनाता चला गया | देव आनंद जैसे विरले के कूबत में ही ऐसी बात थी की वो बरबादियो पे जश्न मनाने का हौसला रखते थे | इन गीतों के माध्यम से उन्होंने जिन्दगी को एक नया आयाम दिया |उन्होंने दर्द के एहसास को भी एक अलग अंदाज़ में पेश किया कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया ,बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया , हम तो समझे थे की हम भूल गये हैं उनको क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया | देव साहब ने एक अलग अंदाज़ दिया "काला पानी " में हम बेखुदी में तुमको पुकारे चले गये , सागर में जिन्दगी को उतारे चले गये |देखा किए तुम्हे हम बन के दीवाना ,उतरा जो नशा तो हमने ये जाना ,सारे वो जिन्दगी के सहारे चले गये | तो कभी प्यार का अलग अंदाज़ देते हुए कह जाते हैं "प्यार किया दिल ने कहा हो तुम "

जब गाइड का राजू यह कहता है " दिन ढल जाए हाय रात न जाए , तू तो न आये तेरी याद सताए | प्यार में जिनके सब जग छोड़ा , और हुए बदनाम उनके हाथो हाल हुआ ये बैठे है दिल को थाम , अपने कभी थे अब है पराये | जिन्दगी के ऐसे रंगों को उन्होंने दिया तो जिन्दगी के अलग रंग भी दीये देव साहब ने प्रेम पुजारी में ये रंग भी भरा "रंगीला रे तेर रंग में यू रंगा हैं मेरा मन , चली आ रे ना बुझे है इस जल से ये जलन |तो कही यह कहते हुए की " हीरा की तमन्ना है की पन्ना मुझे मिल जाए |अपने प्यार का इज़हार करते हुए बोल पड़ते है " ये दुनिया वाले पूछेंगे मुलाक़ात हुए क्या बात हुयी , ये बात किसी से ना कहना देव आनद उन्हें भी नही मालूम था कि " जिन फूलो में रंग भरना अभी शेष है वे सदा के लिए बेरंग रह जायेंगे | देव आनद तो चले गये पर राजू , को हमारे बीच छोड़ गये जिन्दगी के फलसफे के साथ जीने का अंदाज़ दे गये |
सुनील दत्ता
पत्रकार
09415370672

2 टिप्‍पणियां:

ms khan ने कहा…

dewanand sahab aap bahut yaad aaoge.

ms khan ने कहा…

dewanand sahab aap bahut yaad aaoge.