मंगलवार, 13 नवंबर 2012

दीपावली मनाए : जुआ मत खेलें

सुख, शांति, समृद्धि का प्रतीक त्यौहार दीपावली है। उत्तर भारत में जब फसलों की कटाई हो रही होती है तब दीपों का यह त्यौहार आम जन द्वारा मनाया जाता है। लेकिन इस त्यौहार की एक और मुख्य विशेषता है कि  गाँव से लेकर शहर तक अधिकांश लोग जुआ खेलने लगते हैं और जुआ खेलने का दौर हफ़्तों चलता रहता है जिससे बहुत सारे परिवार बर्बाद हो जाते हैं अब तो गाँव और शहरों में  जुआ साल भर चला करता है और इस पर्व क अवसर पर जो लोग कभी जुआ नहीं खेलते हैं वह लोग भी अपनी किस्मत अजमाने लगते हैं।
                   लोकसंघर्ष परिवार सभी को दीपावली के पर्व पर मुबारकबाद देता है और सभी लोगों से अनुरोध करता है की समृद्धि के इस त्यौहार को सौहार्द व सुखमय वातावरण में मनाये। लड़ाई-झगडा न करे और विशेषकर जुआ न खेले।

सुमन
लो क सं घ र्ष ! 

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…


दीवाली का पर्व है, सबको बाँटों प्यार।
आतिशबाजी का नहीं, ये पावन त्यौहार।।
लक्ष्मी और गणेश के, साथ शारदा होय।
उनका दुनिया में कभी, बाल न बाँका होय।
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(¯*•๑۩۞۩:♥♥ :|| दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें || ♥♥ :۩۞۩๑•*¯)
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Shah Nawaz ने कहा…

आपको भी रौशनी और खुशियों के पर्व "दीपावली" की ढेरों मुबारकबाद!

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

दीपों की यह है कथा,जीवन में उजियार
संघर्षो के पथ रहो, कभी न मानो हार,

दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाओं के साथ,,,,
RECENT POST: दीपों का यह पर्व,,,