रविवार, 7 अप्रैल 2013

साम्राज्यवादी गुंडे की पिटाई होगी ?

मोहल्ले के दादा को जब दादागिरी मिली तो उसने अपनी धौंस ज़माने के लिए बहुत छोटे से व्यक्ति से लड़ गया और 25 साल तक लड़ता रहा। दादा के घर में जब लाशें जाने लगी तब रोना पीटना मच गया और कुछ समय के लिए वह चुप हो गया। फिर उसने ताकत बटोरी और तमाम सारे लोगों के घर लोगों को मार -मार कर कब्ज़ा कर लिए और फिर वह शेरे बब्बर अपने को समझने लगा। उसकी समझ में आ गया की मोहल्ले में उसके बगैर पत्ता नहीं हिलना चाहिए लेकिन फिर भी उस दादा के दूसरे प्रतिद्वंदी ने चुनौती दे दी। आजा तेरी दादागिरी भुला देंगे, तेरी टांग तोड़ देंगे, मेरे बाप दादाओं ने तुमको हमेशा ठीक किया था और जब जब ठीक किया तो तुम कई कई साल तक मोहल्ले में मुह दिखने के काबिल नही रहे। उसी तरीके से इस दुनिया में अमेरिका जब विएतनाम से लड़ा तो 25 साल तक लड़ने के बाद अमेरिकी साम्राज्यवादी अपनी पूँछ दबा कर मुंह दिखाने के काबिल नही रहे थे किन्तु इराक युद्ध के बाद अमेरिकी साम्राज्यवाद ने कई देशों की संप्रभुता का हरण कर दुनिया के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। दुनिया के इस दरोगा के पीछे संयुक्त राष्ट्र संघ यूरोपीय यूनियन तथा कई अन्य देश विभिन्न देशों की प्राकृतिक सम्पदा को लूटने के लिए लामबंद हो गए। संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका यह हो गयी है कि जो देश अमेरिकी साम्राज्यवाद के दिशा निर्देशों को न माने उसके ऊपर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा कर उसकी ताकत को समाप्त करना और आर्थिक ताकत की कमी आते ही अमेरिकी साम्राज्यवादी मुल्क बाज की तरीके से उसको झपट लेते थे किन्तु उत्तरी कोरिया ने इस दुनिया के दादा को चुनौती देकर कहा है कि आ निपट ले तुझे छट्ठी का दूध याद दिल दिया जायेगा। किम जोंग उन ने चैलेंज देकर कहा कि हे अमेरिकी साम्राज्यवादी तू मुझसे क्या लडेगा तेरे बाप दादाओं का पानी का जहाज जब हमने छीना था वह आज तक ले नही पाया.   
बात सन 1968 की है। दुनिया में महाशक्ति  होने का दंभ भरने वाले अमेरिका के लिए यह साल बहुत फजीहत भरा था। उत्तर कोरिया ने इसी साल अमेरिकी नौसेना के पोत को अपने कब्जे में ले लिया था। यही नहीं, जहाज में मौजूद सभी सैनिकों को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में इन अमेरिकी सैनिकों को रिहा कर दिया गया, लेकिन अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस पब्लो को उत्तर कोरिया ने कभी अमेरिका के हवाले नहीं किया। आज भी उत्तर कोरिया में यहां जहाज खडा है।

                                                                          1968 में अमेरिकी जहाज को अपने कब्जे में ले दुनिया भर में सनसनी मचा चुका उत्तर कोरिया एक बार फिर हरकत में आया। इस बार उत्तर कोरिया ने एक कदम आगे बढ़ते हुए एक अमेरिकी टोही विमान को मार गिराया। नतीजा यह हुआ कि इस घटना में कुल 31 अमेरिकी मारे गए।
ऐसा नहीं है कि उत्तर कोरिया सिर्फ अमेरिका से वैर पाल कर बैठा है, बल्कि उसके निशाने पर उसके सहयोगी भी हमेशा रहते हैं। इसका सबसे बड़ा सुबूत देखने को मिला था सन् 1998 में जब ऐसी ही तनातनी के दौर में उत्तर कोरिया ने दो मिसाइलें दाग दीं। ये जापान का आसमान चीरते हुए निकली और जापानी सरकार की नींद उड़ गई। उत्तर कोरिया की इस हरकत की अंतरराष्ट्रीय मंच पर खूब आलोचना भी हुई, लेकिन इससे उसे कोई फर्क नहीं पडा।

वर्तमान में उत्तरी कोरिया ने सभी देशों से कहा है कि वह अपने दूतावास 10 अप्रैल तक खली कर दे अन्यथा उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उत्तरी कोरिया की नही होगी। इस घटना के बाद अमेरिकी साम्राज्यवाद की स्तिथि मोहल्ले के उसी दादा के तरीके से हो गयी है की वह मोहल्ले के चौराहे पर अपनी शर्ट के बटन खोल कर खड़ा नही हो सकता है और मोहल्ले के दादा के चमचे मर्सिया पढने लगे हैं। परमाणु युद्ध हो जायेगा, मानवता नष्ट हो जाएगी, लाखो लोग मारे जायेंगे, शांति के गीत गाये जाने चाहिए लेकिन जब दादा मोहल्ले में लोगों के घरों में घुसकर कत्लेआम कर रहा होता है या लूटपाट कर रहा होता है तब उसके चमचे उसके शौर्य गाथा और चरण वंदना में लग जाते हैं और कोई भी पीटने वालों को बचाने के लिए आगे नही आता है तब न्याय, समानता, लोकतंत्र, विश्व बंधुत्व किताबी हो जाता है। 
         आज जरूरत है कि साम्राज्यवाद का नाश हो और इसके लिए दुनिया की इंसानी ताकतों को हर कुर्बानी देने के लिए तैयार रहना चाहिए। उत्तरी कोरिया के ललकारने से दुनिया का जन गण प्रसन्न है। विशेषकर मेहनत कश अवाम. 

नोट: चित्र व लाल से लिखा कैप्शन दैनिक भास्कर डॉट कॉम से साभार लिया गया है. 

सुमन
लो क सं घ र्ष !


1 टिप्पणी:

ब्लॉग बुलेटिन ने कहा…

आज की ब्लॉग बुलेटिन समाजवाद और कांग्रेस के बीच झूलता हमारा जनतंत्र... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !