शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

सांप्रदायिक हिंसा 2014 : हरियाणा,दिल्ली, जम्मू.कश्मीर, बिहार, राजस्थान

हरियाणा
गुजरे साल, हरियाणा में सांप्रदायिक हिंसा की तीन घटनाएं हुईं, जिनमें से एक मेवात और दो गुड़गांव में हुईं। यद्यपि हरियाणा, खाप पंचायतों और जातिगत संघर्षों के लिए जाना जाता है परंतु वह सांप्रदायिक हिंसा से अपेक्षाकृत मुक्त रहा है। राज्य में कुछ महीनों पहले विधानसभा चुनाव हुए थे और उनमें भाजपा को सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण से बहुत लाभ मिला था। इसके अतिरिक्त, इंडियन नेशनल लोकदल ;आईएनएलडी के मुस्लिम उम्मीदवारए जिन्होंने गुड़गांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के तीन मुस्लिम.बहुल विधानसभा क्षेत्रों से दो लाख से अधिक वोट पाये थे, भी मुसलमानों को भड़काने में लगे हुए थे।
दस अप्रैल को गुड़गांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र, जो कि राज्य के मेवात इलाके का हिस्सा है, में आईएनएलडी के मुस्लिम समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ जिसमें वाजिद नामक मुस्लिम युवक गोली लगने से मारा गया। विवाद की शुरूआत, पुनहाना तहसील के नकनपुर के एक मतदान केंद्र के बाहर हुई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने बाद में मेवाती मुसलमानों को निशाना बनाया। क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने दावा किया कि वाजिद की मृत्यु सांप्रदायिक हिंसा में नहीं हुई। 
सात जून को एक ओवरलोडेड डंपर, जिसे एक मुस्लिम युवक चला रहा था,की चपेट में आकर एक हिंदू युवक दानवीर कुमार मारा गया। यह घटना गुड़गांव से 15 किलोमीटर दूर तारू नामक कस्बे में हुई। इसके बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी। स्थानीय बाजार में एक मुसलमान ने हिंदुओं पर गोलियां चलाईं। स्थानीय निवासियों का दावा है कि कम से कम तीन लोग मारे गये और कई घायल हुये परंतु पुलिस का कहना है कि हिंसा में किसी की मृत्यु नहीं हुई, अपितु सड़क दुर्घटना में जरूर एक व्यक्ति मारा गया। पुलिस उपाधीक्षक सुखबीर सिंह सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए। डंपर के चालक और क्लीनर की जमकर पिटाई की गई और उन्हें गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया गया। ऐसी अफवाह उड़ा दी गई कि वे दोनों मुस्लिम युवक मर गये हैं। एक मस्जिद को जला दिया गया और कई दुकानों के ताले तोड़कर उन्हें लूट लिया गया। चूंकि विधानसभा चुनाव नजदीक थे इसलिए स्थानीय राजनेताओं ने सांप्रदायिकता की भट्टी को सुलगने दिया। भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री राव इंदरजीत सिंह, 12 जून को निकट के एक गांव में पहुंचे परंतु उन्होंने सिर्फ हिंदू दंगा पीडि़तों से मुलाकात की और उन्हें यह आश्वासन दिया कि पुलिस उन्हें सुरक्षा देगी। एक दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं। तारू चारों ओर से मेवाती मुस्लिम गांवों से घिरा हुआ है। ये मेवाती मुसलमान अपनी खाप पहचान पर गर्व करते हैं और गोत्र व्यवस्था के अनुरूप वैवाहिक संबंध करते हैं। कुछ साल पहले तक मेवाती मुसलमान दशहरा,होली और दिवाली जमकर मनाया करते थे।
अगस्त की शुरूआत में, गुड़गांव के बसई गांव में करीब दो दर्जन मुस्लिम परिवार, जो नाई व दर्जी का काम तथा कबाड़ का धंधा करते थे, पर हमले हुए और उन्हें अपना गांव छोड़कर भागना पड़ा। कबाड़ का धंधा करने वालों पर यह आरोप था कि वे आसपास की दुकानों और घरों से सामान चुराते हैं। मुख्य आरोपी अमित को गिरफ्तार कर लिया गया। मुसलमानों पर यह आरोप भी लगा कि वे मवेशियों की तस्करी करते हैं व इस कारण भी सांप्रदायिक तनाव में वृद्धि हुई।
दिल्ली
24 अक्टूबर को पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में हुई सांप्रदायिक हिंसा में 20 पुलिसकर्मियों सहित 45 लोग घायल हो गये। पांच घायलों को बंदूक की गोलियां लगीं थीं। करीब चार घंटे तक दंगाई मुसलमानों पर पत्थर फेंकते रहे। जब उन्हें चारों ओर से घेर लिया गया तब मुसलमानों ने पुलिस से मदद की गुहार की परंतु उन्हें जवाब यह मिला कि हमें हस्तक्षेप करने के निर्देश नहीं हैं। अगले दिन, पुलिस, मुसलमानों के घरों में जबरदस्ती घुस गई और कई घरों के दरवाजे तोड़ दिये गये। पुलिसकर्मी अनेक मुस्लिम युवकों को उनके घरों से उठाकर ले गये और उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।
त्रिलोकपुरी में अवैध शराब बेचने वालों और ड्रग्स का धंधा करने वालों की भरमार है। नशे में चूर लोग.चाहे वे किसी भी धर्म के हों.सड़कों पर हंगामा करते रहते हैं। दिवाली के कुछ दिन पहले, शराब के नशे में धुत चार लोग एक अस्थायी मंदिर के सामने खड़े होकर आपस में बहस कर रहे थे। इस मंदिर का निर्माण उसी साल हुआ था और उसे माता की चौकी कहा जाता था। इन व्यक्तियों में से एक, जो मुसलमान था,का हाथ गलती से मंदिर के एक हिस्से में लग गया जो थोड़ा सा धसक गया। ऐसा प्रचार किया गया कि उस मुस्लिम व्यक्ति ने जानबूझकर मंदिर को नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद, 23 अक्टूबर को माता की चौकी पर लगे लाउडस्पीकर को लेकर विवाद हुआ। पास की एक मस्जिद में प्रार्थना कर रहे मुसलमानों का कहना था कि लाउडस्पीकर बहुत जोर से बज रहा था और उसके कारण उन्हें परेशानी हो रही थी। जल्दी ही दोनो ओर से पत्थरबाजी शुरू हो गई। तब दिल्ली में चुनाव होने ही वाले थे और स्थानीय सांप्रदायिक नेताओं ने घटना को सांप्रदायिक रंग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अफवाहें फैलाकर हिंसा को और बढ़ावा दिया। ऐसा आरोप लगाया गया कि पूर्व भाजपा विधायक सुनील वैद्य ने यह घोषणा की कि माता की चौकी के स्थान पर एक स्थायी मंदिर बनाया जायेगा। वैद्य ने बाद में कहा कि उन्होंने ऐसी घोषणा नहीं की थी। 24 अक्टूबर को अचानक बहुसंख्यक समुदाय के सैंकड़ों लोग,जिसमें से अधिकांश त्रिलोकपुरी के बाहर के थेए ब्लॉक 20 में घुस गये और घरों पर पत्थर फेंकने लगे। उन्होंने गोलियां भी दागीं। इसके बाद वहां बड़ी संख्या में पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को तैनात किया गया।
इसके अगले दिन, 25 अक्टूबर कोए त्रिलोकपुरी के अन्य ब्लाकों में हिंसा फैल गई। ब्लॉक 15, 20 और 27 इस हिंसा से सबसे गंभीर रूप से प्रभावित हुए। दंगे और लूट की शुरूआत चार बजे सुबह हुईए जब लगभग दो दर्जन लोग ब्लॉक 27 में स्थित एक दुकान, जिसका नाम 'ए.जेड शॉप' था , का दरवाजा तोड़कर उसमें घुस गये और वहां रखे सामान को लूटने के बाद दुकान में आग लगा दी। हिंसा कल्याणपुरी व अन्य आसपास के इलाकों में फैल गई। 24 अक्टूबर की रात को हथियारबंद पुलिसकर्मी ब्लॉक 27 में पहुंचे और मुसलमानों के कई वाहनों में तोड़फोड़ की। बाद में वे संजय कैंप में गये जहां उन्होंने दंगाइयों को ढूंढने के बहाने कई घरों के दरवाजे तोड़कर उनमें प्रवेश किया। उसी दिन रात को पुलिस ने 14 युवकों को गिरफ्तार किया और थाने में उनकी जमकर पिटाई लगाने के बाद उनके विरूद्ध कई मुकदमे कायम कर दिये। 25 अक्टूबर को देर रात इलाके में धारा 144 लगाई गई। अगर यही कार्यवाही 23 तारीख की रात को कर दी गई होती तो शायद हिंसा इतनी न फैलती।
भवाना में ताजि़या ;मोहर्रम के अवसर पर निकाले जाना वाला जुलूसद्ध के खिलाफ लोगों को भड़काने के लिए दो नवंबर को एक महापंचायत बुलाई गई। ईद के ठीक पहलेए 'हिंदू क्रांतिकारी सेना' नामक संगठन ने एक काल्पनिक 'गौवध' का सहारा लेकर भवाना जेजे कालोनी और निकट के भवाना गांव में सांप्रदायिक तनाव फैलाया। पांच अक्टूबर को भवाना गौशाला में एक बैठक के आयोजन की घोषणा करते हुए भड़काऊ पोस्टर जगह.जगह चिपकाए गए थे। बकराईद के बाद से ही यह अफवाह फैला दी गई कि उक्त त्योहार पर कई गायों को काटा गया है। इस बहाने हिंदुओं को मुसलमानों के खिलाफ भड़काया गया। हरियाणा और दिल्ली सहित भवाना के आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में उपद्रवी भवाना पहुंच गये।
महापंचायत का उद्देश्य था भवाना में ताजि़ये न निकलने देना। जेजे कालोनी के रहवासियों ने हमें बताया कि कालोनी के मुसलमानों ने 28 अक्टूबर को आयोजित एक बैठक, जिसमें दोनों समुदायों के नेता और स्थानीय असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मौजूद थे, में पहले ही यह निर्णय ले लिया था कि जुलूस केवल जेजे कालोनी के अंदर निकाला जायेगा। महापंचायत में कई नेताओं ने निहायत भड़काऊ भाषण दिये और मुसलमानों के खिलाफ जहर उगला। कई वक्ताओं ने कहा कि मुसलमानों का घर पाकिस्तान है और हिंदू, भारत के मूलनिवासी हैं इसलिए जिन मुसलमानों को भारत में रहना है उन्हें हिंदुओं की शर्तों पर रहना होगा। खुलेआम हिंसा की धमकियां भी दी गईं।
नूर.ए.इलाही में गाय के एक शव का इस्तेमाल शांति भंग करने के लिए किया गया। नौ नवंबर को रात लगभग नौ बजे इलाके एक प्रसिद्ध होटल 'नूर.ए.इलाही चिकन कार्नर' के बाहर सड़क पर एक बोरी में गाय का शव पाया गया। जल्दी ही वहां भीड़ इकट्ठी हो गई और यह आरोप लगाया गया कि उस दुकान में चोरी.छुपे गाय का मांस परोसा जा रहा है। सौभाग्यवश, सांप्रदायिक तत्वों के कुत्सित इरादे कामयाब नहीं हो सके क्योंकि स्थानीय रहवासियों ने जबरदस्त एकता का प्रदर्शन किया। इलाके के हिंदू निवासियों ने जोर देकर कहा कि होटल का मालिक एक शरीफ व मज़हबी आदमी है जो किसी भी हालत में अपनी दुकान में गाय का मांस नहीं बिकने देगा।
एक दिसंबर को सुबह.सुबह दिलशाद गार्डन इलाके में सेंट सेबेस्टियन चर्च में आग लगा दी गई। चर्च के पादरी फादर कोएकल का कहना था कि आग जानबूझकर लगाई गई थी, यह इससे स्पष्ट था कि वहां चारों ओर कैरोसीन की बदबू आ रही थी। परंतु स्थानीय थानेदार ने यह कहा कि आग बिजली के शार्ट सर्किट के कारण लगी है। यह इस तथ्य के बावजूद की चर्च की बिजली सप्लाई यथावत बनी हुई थी। चर्च की किताबें, बेंचे व वह स्थान जहां से पादरी उपासकों को संबोधित करते हैंए को नष्ट कर दिया गया। फादर को एकल का कहना था कि चर्च को लगभग डेढ़ करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है।
जम्मू.कश्मीर
जम्मू.कश्मीर के कटुआ जिले के बासोहिल कस्बे में 28 जुलाई को भड़की सांप्रदायिक हिंसा में करीब एक दर्जन दुकानें जलाकर राख कर दी गईं और कई लोगों को चोटें आईं। पिछली रात एक नाले में गाय का शव पाये जाने के बाद यह हिंसा भड़की। अफवाहें फैलाई गयीं और हिंदुओं को इकट्ठा कर एक जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल लोगों ने मुसलमानों की कई दुकानों में आग लगा दी। पत्थरबाजी हुई और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। हिंसा बानी व महानपुर कस्बों में भी फैल गई।

बिहार
बिहार में जेडीयू व भाजपा का गठबंधन समाप्त होने के बादए सांप्रदायिक हिंसा में अचानक तेजी आ गई। जून से लेकर दिसंबर 2013 तक 87 छोटी.बड़ी हिंसक घटनायें हुईं। 2014 में राज्य में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं हुईं।
सात अक्टूबर को किशनगंज में एक मंदिर के पास एक जानवर का शव पाए जाने की अफवाह के बाद हिंसा हुई। जलते टायर फेंककर सड़क और रेल यातायात रोकने की कोशिश की गई। दुकानों और कार्यालयों को बंद करवा दिया गया। कस्बे में कर्फ्यू लगाना पड़ा।
राजस्थान
राजस्थान में 2014 में सांप्रदायिक हिंसा की 61 घटनायें हुईं जिनमें 13 लोग मारे गये और 116 घायल हुये।
14 जनवरी को दक्षिणी राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा में तीन लोग ;राजा खान, 20, भंवर सिंह, 50, व दिनेश कुमार, 25  मारे गये व छः घायल हो गये। हिंसा तब भड़की जब आरएसएस के कार्यकर्ता शाम साढ़े सात बजे के करीब अपनी एक बैठक से लौट रहे थे और रास्ते में खड़े कुछ मुस्लिम युवकों ने उन पर कोई टिप्पणी की। दोनों धर्मों के समूह निकट स्थित बस स्टेण्ड पर इकट्ठा हो गये जहां दोनों ओर से गोलियां चलाईं गईं। अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों की लगभग 40 दुकानें और कच्चे घर,आगजनी में नष्ट हो गये।
-इरफान इंजीनियर

3 टिप्‍पणियां:

Neetu Singhal ने कहा…

सम्प्रदाए किसे कहते हैं.....?

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
--
आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-02-2015) को "कुछ गीत अधूरे रहने दो..." (चर्चा अंक-1890) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
--
पाश्चात्य प्रेमदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-02-2015) को "कुछ गीत अधूरे रहने दो..." (चर्चा अंक-1890) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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पाश्चात्य प्रेमदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'