शुक्रवार, 6 मार्च 2015

प्रगतिशील और स्वतंत्र विचारों की नागपुरी हत्या

 कोल्हापुर के साबरमल इलाके में 16 फरवरी, सोमवार की सुबह भाकपा महाराष्ट्र के पूर्व राज्य सचिव, केन्द्रीय कन्ट्रोल कमीशन के सचिव और राष्ट्रीय परिषद सदस्य
    इस हमले का महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों में जोरदार विरोध हुआ और समाज के सभी तबकों से आने वाले जाने माने लोगों एवं बुद्धिजीवियों ने इस हमले की निंदा की। समाज के प्रबुद्ध लोगों ने इसे प्रगतिशील विचारों पर हमला बताते हुए इसकी ना केवल कड़े शब्दों में निन्दा की बल्कि महाराष्ट्र और देश में स्वतंत्र, प्रगतिशील और जन समर्थक विचारों वाले लोगों पर बढ़ रही हमले की इन घटनाओं को महाराष्ट्र और देश के लिए एक खतरे की घण्टी बताया।
    बुद्धिजीवियों ने इस घटना में सरकार की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाते हुए धर्मान्ध एवं सांप्रदायिक शक्तियों  के बढ़ते हुए आतंक को रेखांकित किया और इस घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त की। विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना था कि जिन शक्तियों ने नरेन्द्र दाभोलकर जैसे तर्कशील विचारक के विचारों को खत्म करने की कोशिश की, इस हमले के पीछे भी उन्ही शक्तियों का हाथ है। इसे पूरे सभ्य समाज को शर्मसार करने वाली घटना बताते हुए अनेक प्रबुद्धजनों ने कहा कि गोविंद पानसरे अंधश्रद्धा उन्मूलन, सामाजिक न्याय और जनपक्षीय सवालों के लिए और सांप्रदायिकता के खिलाफ आजीवन लड़ने वाले व्यक्ति हैं और वर्तमान दौर में ऐसे संघर्षशील व्यक्ति पर हमले का अर्थ जनपक्षीय संघर्ष और जनवादी एवं धर्मनिरपेक्ष परंपरा पर हमला है। हाॅल ही में पानसरे जन विरोधी टोल टैक्स के खिलाफ अभियान चला रहे थे जिसके लिए उन्हे कईं बार धमकियाँ भी मिली थीं। इसके अलावा दो दिन पहले ही पानसरे ने एक कार्यक्रम में गांधी के हत्यारे गोड्से और उनका समर्थन करने वाले लोगों की कड़े शब्दों में निन्दा की थी। कार्यक्रम के बाद एक टीवी चैनल को दिये गए साक्षात्कार में उन्होंने पुरजोर शब्दों में प्रतिक्रियावादी आतंक की निन्दा करते हुए कहा था कि जो लोग तर्क का जवाब तर्क से नहीं दे सकते हैं वे ही तर्क का जवाब गोली से देते हैं और अंत में वे भी ऐसे ही किसी उन्मादी द्वारा चलाई गई गोली का शिकार हो गए। इसके अतिरिक्त पानसरे हेमंत करकरे की हत्या पर उनके द्वारा किए गए कुछ खुलासों को लेकर भी दक्षिणपंथियों के निशाने पर थे। राज्य सरकार इस पूरी घटना को केवल उनके टोल टैक्स अभियान से जोड़कर दुनिया के सामने पेश कर रही है। परंतु उसी राज्य में राज ठाकरे ने टोल टैक्स के खिलाफ अभियान चलाया और उत्तर प्रदेश में राकेश टिकैत और कई अन्य राज्यों में विभिन्न लोग ऐसे आंदोलनों की अगुवाई कर चुके हैं लेकिन उन पर कोई ऐसे हमले नहीं हुए। दरअसल यह उन दक्षिणपंथी आतंकवादियों की करतूत है जिनका सच हेमंत करकरे ने उजागर किया था और जिन्होंने दाभोलकर की हत्या की और अभी तक आजाद घूम रहे हैं।
    कामरेड गोविंद पानसरे के द्वारा दक्षिणपंथी ताकतों के खिलाफ चलाए जा रहे अथक अभियानों के कारण ही वे हमेशा प्रतिक्रियावादी संगठनों के निशाने पर रहे हैं। इन घोर दक्षिणपंथी ताकतों और कारपोरेट लूट के बीच व्यावसायिक गठजोड़ भी जगजाहिर है और इस हमले को देखते हुए दोनों के बीच साजिशपूर्ण गठजोड़ से भी इंकार नही किया जा सकता है। इस हमले की विभिन्न राजनैतिक दलों के नेताओं ने कड़ी निन्दा की है। एनसीपी के नेता शरद पवार ने हमले पर नाराजगी जाहिर करते हुए हमलावरों को तुरंत पकड़ने की माँग की। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चैहान ने इसे दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा धर्मनिरपेक्षता और जनवाद पर हमला बताया। इस घटना के बाद महाराष्ट्र और देशभर में प्रगतिशील लोगों में गुस्सा फूट पड़ा और हमले के विरोध में जगह जगह पर प्रदर्शन हुए।
    इस हमले के विरोध में स्वतःस्फूर्त तरीके से पूरा कोल्हापुर शहर बंद हो गया हजारों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। 16 फरवरी को कामरेड पानसरे पर हुए हमले के विरोध से फूटे आक्रोश और प्रतिरोध आंदोलनों के साथ ही हिंदुत्ववादी संगठनों पर रोक की मांग से पूरी महाराष्ट्र सरकार हिल उठी है। 16 फरवरी को जहाँ कोल्हापुर बंद हो गया और लोग सड़कों पर उतर आए और लोगों ने गृहमंत्री का घेराव किया तो वहीं 17 फरवरी को भी इस हमले के विरोध में पूरा शहर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए मानो सड़क पर उतर गया था। लडेंगे-जीतेंगे का नारा लिखे कामरेड गोविंद पानसरे की तस्वीर हाथों में लिए हजारों की संख्या में सड़कों पर उतरे लोगों से नगर का सारा जन जीवन ही मानो अस्त व्यस्त हो गया था। इसी प्रकार के प्रदर्शन महाराष्ट्र और देश के अन्य नगरों में भी हुए। मुम्बई में कम से कम तीन स्थानों पर वाम जनवादी दलों और जन संगठनों से जुड़े हुए लोगों ने सड़कों को जाम किया और भाजपा और संघी सरकार के विरोध में नारेबाजी की। 
औरंगाबाद
    औरंगाबाद में पैठण गेट पर प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी कार्यालय पर मोर्चा निकाला गया। इस प्रदर्शन में भाकपा के राज्य सचिव भालचंद्र कांगो, राम बाहेती, बुद्धिनाथ बराल, माकपा के पंडित मुंडे, सीटू के उद्धव भवलकर, भारिपा-बहुजन महासंघ के अविनाश डोलस, एड.बी.एच. गायकवाड, एड. रमेश भाई खंडागले, पंडितराव तुपे, पैंथर्स रिपब्लिकन पार्टी के नेता गंगाधर गाडे, आप के साथी सुभाष लोमटे, एड. नरेंद्र कापड़िया, उमाकांत राठौड, अभय टाकसाल, मधुकर खिल्लारे, विनोद फरकाडे., अशफाक सलामी, जयश्री गायकवाड़ समेत सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।
पुणे
     कम्युनिस्ट पार्टी नेता गोविंद पानसरे और उनकी पत्नी पर हुए हमले के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। इसके बाद एक प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी सौरभ राव को ज्ञापन सौंपा।
    फड़णवीस सरकार मुर्दाबाद, हम सब पानसरे, अपराधियों का सर्मथन करने वाली पुलिस हाय-हाय, जैसे नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने पानसरे पर हमले का विरोध जताया। इस दौरान अजीत अभयंकर, सुनिति सुर, प्रा. म. ना. कांबले, अनूप अवस्थी, विठ्ठल सातव, अलका जोशी, किरण मोघे, मुक्ता मनोहर, विद्या बाल, किशोर ढमाले, मनीषा गुप्ते, संतोष म्हस्के, तृप्ति देसाई आदि मौजूद थे। अभ्यंकर ने बताया कि 19 फरवरी को शाम 5 बजे मंडई से रैली निकालकर हमले का विरोध किया जाएगा। इस वक्त गोविंद पानसरे की ‘शिवाजी कोण होता‘ पुस्तक की स्क्रीनिंग भी की जाएगी।
    गोविंद पानसरे पर हुए हमले के विरोध में पूरे महाराष्ट्र में लोगों में गुस्सा फूट पड़ा है और वे सड़कों पर उतर आए सोलापुर, औरंगाबाद, नान्देड़, बीड़, पुणे, नागपुर, अहमदनगर, मुम्बई, नासिक शहर और देहात के अलावा महाराष्ट्र का कोई भी जिला ऐसा नहीं था जहाँ पर इस हमले का प्रतिकार नहीं किया गया हो। कामरेड गोविंद पानसरे पर हमले के विरोध में पूरा कोल्हापुर शहर मानो ठप्प ही हो गया था। शहर में जब महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री पानसरे और उनकी पत्नी उमा पानसरे का हालचाल लेने पहँुचे तो हमले के कारण गुस्साए हजारों लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके अलावा केरल से लेकर जम्मू कश्मीर तक देश के विभिन्न राज्यों में अनेक जन संगठनों ने बयानों द्वारा अथवा सड़क पर उतरकर इस हमले की तीव्र निन्दा की। दिल्ली
    गोविन्द पानसरे पर हुए जानलेवा हमले के खिलाफ पूरे देश में एआईएसएफ द्वारा प्रतिरोध जारी है। इस सिलसिले में महाराष्ट्र सरकार का पुतला फूँककर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने प्रतिरोध में एक कड़ी जोड़ी। इसके अलावा एआईएसएफ, एआईवायएफ और भाकपा सहित कई अन्य वाम संगठनों ने दिल्ली के महाराष्ट्र सदन पर प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इजहार किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व विश्वजीत कुमार, अमित कुमार, संजीव कुमार राणा, अमीक जमई एवं आनन्द शर्मा ने किया।
    पानसरे की मृत्यु की खबर प्राप्त होने के बाद फिर से लोगों का आक्रोश फूट पड़ा और दिल्ली से लेकर केरल तक विरोध प्रदर्शनों की मानो झड़ी ही लग गई। एआईएसएफ और एआईवायएफ ने नई दिल्ली के नार्थ ब्लाॅक में गृहमंत्रालय पर प्रदर्शन किया जहाँ से उन्हें गिरफ्तार करके संसद मार्ग थाने भेज दिया गया था।        
गोविंद पानसरे व उनकी पत्नी उमा पानसरे पर अज्ञात बंदूकधारियों ने जानलेवा हमला किया। चार दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच जूझते कामरेड गोविंद पानसरे की 20 तारीख को मृत्यु हो गई। हमले के दो दिन बाद जब ऐसा लग रहा था कि पानसरे मृत्यु पर विजय प्राप्त कर लेंगे तो अचानक आस्तर आधार अस्पताल के डाॅक्टरों ने उन्हें आगे के इलाज के लिए मुम्बई के ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाने का फैसला किया। पानसरे को हवाई एम्बुलेंस के द्वारा मुम्बई के ब्रीच कैंडी अस्पताल ले जाया गया। पंरतु मुम्बई पहुँचने पर भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और एक सांप्रदायिक फासिस्ट हमले में जनवाद और  धर्मनिरपेक्षता के लिए लड़ने वाला एक अथक योद्धा शहीद हो गया।
 -महेश राठी
मोबाइल: 0989153484
लोकसंघर्ष पत्रिका  मार्च 2015  में प्रकाशित

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