शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

तब और अब

तब और अब
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र आन्दोलन हुआ और कुलपति ने कुछ छात्रों को निष्कासित कर दिया प्रधानमंत्री नेहरू इलाहाबाद जनपद से ही सांसद होते थे निष्कासित छात्र रेल से बिना टिकट दिल्ली रवाना हो गए थे रास्ते में टिकट पूछने पर यह बता देते थे कि प्रधानमंत्री से मुलाकात करने के लिए जा रहे हैं
दिल्‍ली पहुंचने पर दूसरे दिन सुबह मुलाकात होना तय हुआ जब निष्कासित छात्र वहाँ पहुँचे तो वहां विभिन्न प्रकार के नाश्ते लगे हुए थे भूखे छात्रों ने जल्दी से जल्दी नाश्ता करने लगे और रास्ते के लिए जेब में भी रखना शुरू कर दिया कि नेहरू निकले और बगैर रुके कहा जाओ पढो और चले गए
जब छात्र इलाहाबाद पहुँचे स्टेशन पर विश्व विद्यालय के लोग मौजूद थे और ले जाकर तुरंत निष्कासन वापस ले लिया
अब
लखनऊ विश्वविद्यालय में कुछ छात्रों का निष्कासन होता है मुख्यमंत्री की नाक के छात्र प्रवेश के आंदोलन हो रहा होता है लाठीचार्ज होता है उल्टे मुकदमे राजभवन की देखरेख में कायम हो रहे हैं छात्रों का प्रवेश हो का समर्थन करने के कारण विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर रुपरेखा वर्मा पर भी मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जा रहा है
मेरा प्रोफेसर रुपरेखा वर्मा से कोई विशेष संबंध नहीं रहा है लेकिन जब मुझे हार्ट अटैक हुआ और लारी कार्डियोलॉजिस्ट सेंटर में भर्ती था तब प्रोफेसर रुपरेखा वर्मा मुझे देखने गई थी और मुझसे कहा था कि वकील साहब मेरे पास कुछ हजार रुपये है जब आपको जरूरत हो हम तुरंत रुपए भेजवा दूंगी
मुझे आवश्यकता नहीं पडी इसलिए रुपए नहीं मंगवाए थे
ऐसी महान शिक्षाविद के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई सिर्फ योगी मोदी सरकार में ही संभव है

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