शुक्रवार, 29 मई 2026

‘जज कोई पवित्र गाय नहीं है’, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

‘जज कोई पवित्र गाय नहीं है’, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी मद्रास हाई कोर्ट ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट एक फिल्म में न्यायपालिका की छवि खराब करने से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा था। तमिल फिल्म ‘करप्पू’ पर प्रतिबंध लगाने को लेकर मद्रास हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई थी। इसमें आरोप लगाए गए थे कि फिल्म में न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश हुई है। इसको लेकर कोर्ट ने कहा है कि इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता है कि न्यायपालिका में भी भ्रष्टाचार है, और जज कोई पवित्र गाय नहीं है। दरअसल, बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन और वी लक्ष्मीनारायणन की पीठ ने अधिवक्ता आर.एस. तमिलवेंडन द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि फिल्म ‘करप्पू’ में अदालतों को अपमानजनक तरीके से चित्रित किया गया है और न्यायिक प्रणाली को कलंकित किया गया है। ‘भ्रष्ट न्यायाधीश थे और हैं’ हाईकोर्ट ने कहा, “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है, इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता। भ्रष्ट न्यायाधीश थे और हैं।” कोर्ट ने कहा कि अदालतें और न्यायाधीश आलोचना से परे नहीं हैं। कोर्ट ने कहा, “न्यायाधीशों को पवित्र गायों की तरह नहीं माना जाना चाहिए। न्याय कोई एकांतप्रिय गुण नहीं है; उसे आम लोगों की जांच-पड़ताल और सम्मानजनक टिप्पणियों का सामना करने की अनुमति दी जानी चाहिए, भले ही वे टिप्पणियां मुखर हों।” पूर्व जज ने कहा था- 20 प्रतिशत न्यायाधीश भ्रष्ट हाईकोर्ट ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसपी भरूचा के केरल के कोल्लम में एक कानूनी सम्मेलन में दिए गए बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने संकेत दिया था कि देश के 20 प्रतिशत न्यायाधीश भ्रष्ट हैं। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण और उनके पुत्र अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा दिए गए चौंकाने वाले बयान पर भी पीठ ने ध्यान दिया । पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे व्यापक बयानों का समर्थन नहीं कर रही है। अदालत ने कहा, “हम इतनी दूर तक नहीं जाएंगे। हम इस तरह के व्यापक बयानों का समर्थन करने से भी इनकार करते हैं।” हालांकि, बेंच ने यह भी कहा कि वह इस बात से इनकार नहीं करेगी कि व्यवस्था में भ्रष्ट न्यायाधीश रहे हैं। कोर्ट ने कहा, “हमें न्यायिक भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी है और हमने ऐसे मामले देखे भी हैं। मद्रास उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ नियमित रूप से ऐसे भ्रष्ट न्यायाधीशों को बाहर का रास्ता दिखाती है।” प्रतिबंध लगाने की थी मांग न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में तमिलनाडु सरकार सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को सिनेमाघरों और ओटीटी प्लेटफार्मों पर ‘करप्पू’ फिल्म पर प्रतिबंध लगाने या उसे विनियमित करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने गौर किया कि फिल्म की कहानी सेवन वेल्स नामक स्थान पर स्थित एक न्यायालय में घटित होती है।

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