शुक्रवार, 26 जून 2026

पोर्न क्रांति और आरएसएस क्रांति-जगदीश्वर चतुर्वेदी

पोर्न क्रांति और आरएसएस क्रांति - आरएसएस -मोदी के सत्ता में आने के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर सेक्स क्रांति हो रही है। सेक्सुअल कंटेंट की बाढ़ आई है और खपत बढ़ी है।सवाल यह है सेक्स क्रांति से संघ की विचारधारा का कोई संबंध है ? आप देखिए कि आरएसएस वाले जब आपसे मिलते हैं तो उनके हाथ में गीता- रामायण होती है या मोबाइल होता है? यह कैसा हिन्दू है जो न तो जनेऊ पहनता है,न त्रिकाल संध्या करता है,न चोटी रखता है और न देशी वस्त्र पहनता है।देशी हिंदू चीजों का इसने आचरण में बहिष्कार किया हुआ है। अधिकांश भाजपा -संघ नेता न तो जनेऊ पहनते हैं और न त्रिकाल संध्या करते हैं, गायत्री मंत्र की दीक्षा तो बहुत दूर की बात है।ये लोग आचरण में कारपोरेट कल्चर में रहते हैं और उसमें रमण करते हैं। जबकि जनता में हिंदू कल्चर का पाखंडी प्रचार करते हैं ।ये संस्कार से हिंदू नहीं कारपोरेट बटुक हैं।ये संघ के कारपोरेट कल्चर प्रचारक हैं। एबीपी न्यूज के अनुसार "दुनिया में करोड़ों लोगों को किसी न किसी चीज की लत होती है, किसी की शराब की लत नहीं छूटती तो किसी को सिगरेट का एडिक्शन है. ऐसी ही एक लत पोर्न देखने की भी है, पिछले कुछ सालों में ऐसे लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है, जिन्हें पोर्न देखने की लत लग चुकी है. भारत में ऐसे कंटेंट को देखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।' 'ये चौंकाने वाली और परेशान भी करने वाली बात है कि भारत दुनिया का ऐसा तीसरा बड़ा देश है, जहां पोर्न कटेंट को सबसे ज्यादा देखा जा रहा है. यही वजह है कि विदेशी कंपनियां भारत में ऐसे कंटेंट को ज्यादा से ज्यादा परोस रही हैं. खासतौर पर अमेरिकी एडल्ट वेबसाइट्स ने भारत में ऐसा कंटेंट परोसा है. भारत में कोरोना लॉकडाउन के बाद से ऐसे कंटेंट में बड़ा बूम देखने को मिला है. ये सब कुछ तब है जब भारत सरकार की तरफ से तमाम पोर्न वेबसाइट्स को बैन किया गया है. भारत में करीब 30 फीसदी महिलाएं पॉर्न कंटेंट को देखती हैं. सबसे ज्यादा 35% पॉर्न कंटेंट 25 साल से लेकर 34 साल के एज ग्रुप के लोग देखते हैं. इसके अलावा 18 से 24 साल के युवाओं की हिस्सेदारी 24% है. इसके बाद 35 से 44 साल के लोगों की 17 फीसदी हिस्सेदारी है. भारत में पॉर्न देखने की एवरेज उम्र 29 साल है, जो बाकी किसी भी देश के लोगों की उम्र से काफी कम है. पॉर्न देखने के मामले में पहले नंबर पर अमेरिका और दूसरे नंबर पर यूके आता है. सबसे ज्यादा लोग फोन से ही ऐसे कंटेंट को देखते हैं. 70 फीसदी से ज्यादा लोग इसके लिए अपने फोन का इस्तेमाल करते हैं, इसके बाद करीब 19 फीसदी लोग अपने लैपटॉप या कंप्यूटर पर पॉर्न देखते हैं. " इसी तरह हिंदू राष्ट्र की राजनीति, कारपोरेट फूड कल्चर पर चुप क्यों है? भास्कर अखबार के अनुसार जयपुर. प्रदेश में 90% बच्चे (गांव या शहर) मैगी, चिप्स, पिज्जा-बर्गर, चॉकलेट, ड्रिंक्स लेते हैं। इससे न सिर्फ ज्यादा कैलोरी शरीर में पहुंचती है और न ही विटामिन की पूर्ति होती है। अल्ट्रा प्रोसेस फूड का कल्चर बढ़ रहा है। बच्चों को पैक्ड जूस देने से शुगर, मोटापा और दांत का दर्द होना तय है, काम में लिए जा रहा 82% मोबाइल डेटा पोर्न देखने में काम आ रहा है। हमारे घर की डस्ट (धूल) से ही हम अस्थमा का शिकार हो रहे हैं। पोर्न देखकर डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं नाबालिग आईपीए चेयरपर्सन डॉ. जेएस टूटेजा के अनुसार- बच्चों में सुसाइड केस काफी बढ़े हैं। वजह है, वे डिप्रेशन में आ रहे हैं। एक प्रमुख वजह सामने आई है वह चौंकाने वाली है। पोर्न देखकर बच्चे वैसी ही कल्पना करने लगते हैं और डिप्रेशन में आने लगते हैं। जबकि उन्हें मालूम ही नहीं होता कि ऐसी मूवी कई हिस्सों में बनी होती हैं और उनके अनुसार कुछ नहीं किया जा सकता। सत्ता पर कब्जा करने के चक्कर में बच्चों को पॉर्न के नशे में डुबो दिया गया है। इसने जीवन के यथार्थ ज्ञान से युवाओं को वंचित किया है।

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