गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

अच्छे दिन की चाहत में ......

देश में अच्छे दिन की चाहत में जनता ने वोट दिया किन्तु अच्छे दिन नहीं आये. महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में एक माह के अन्दर 112 किसानो ने आत्महत्या कर ली. 2014 के मुकाबले यह संख्या दोगुनी है। मराठवाड़ा के आठ जिलों में 1 जनवरी से अब तक हर सप्ताह 20 से 30 किसानों ने आत्महत्या की है। मराठवाड़ा के आठ जिलों में 2015 में 1,109 किसानों ने खुदकुशी कर ली। इनमें सबसे ज्यादा 299 किसान बीड़ जिले के थे। आकंड़े 27 दिसंबर तक के हैं.बीड़ के बाद नांदेड़ में सबसे ज्यादा 187 किसानों ने खुदकुशी की। तीसरे नंबर पर उस्मानाबाद इलाका है, जहां राज्य सरकार ने जीरो सुसाइड प्लान लागू किया है। बावजूद इसके यहां 160 किसानों ने आत्महत्या कर ली। 139 के आंकड़े के साथ औरंगाबाद चौथे नंबर पर है।
                        आकड़ों के अनुसार देश में हर महीने 70 से अधिक किसान आत्महत्या कर रहे हैं। वहीँ,राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की शुक्रवार को जारी ‘दुर्घटना एवं खुदकुशी के कारण भारत में 2014 में हुई मौतें’ रिपोर्ट के अनुसार खुदकुशी करने वाले 5,650 किसानों में 5,178 पुरुष और 472 महिलाएं शामिल हैं. महाराष्ट्र सबसे ऊपर रहा. महाराष्ट्र में पिछले साल कुल 16,307 लोगों ने खुदकुशी, जबकि तमिलनाडु में 16,122 और पश्चिम बंगाल में 14,310 लोगों ने खुदकुशी की.          
           हमारे प्रधानमंत्री जी उद्योग जगत के सी इ ओ लेकर उनके व्यापार को बढाने के लिए जब से पद संभाला है तभी से विदेश यात्राओं पर ले जाकर उनके लाखो-लाख करोड़ मुनाफे को बढाने में हर संभव मदद कर रहे हैं लेकिन किसान मजदूर सरकार की नीतियों के कारण आत्महत्याएं कर रहा है. अच्छे दिन उसके कब आयेंगे, यह बताने के लिए भी कोई तैयार नहीं है लेकिन देश के उद्योग जगत को लाखो करोड़ रुपये के करों में छूट देकर उनके अच्छे दिन जरूर लाये जा रहे हैं. हमारे आपके हिस्से में अच्छे दिन का मतलब सिर्फ जिन्दा रहना है बाकी सारी की सारी समस्याएं सुरसा की तरह बढती जाएँगी. जब आपका उत्साह हार जायेगा तो किसानो की तरह आत्महत्या करने के लिए यह व्यवस्था मजबूर कर देगी.

सुमन

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सुमन
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