रविवार, 21 जून 2009

प्रहरी मुझको कर डाला...


लघु स्मृति की प्राचीरों ने,
कारा निर्मित कर डाला ।
बिठला छवि रम्य अलौकिक
प्रहरी मुझको कर डाला ॥

पाटल-सुगंधी उपवन में,
ज्यों चपला चमके घन में।
वह चपल चंचला मूरत
विस्थापित है अब मन में॥

परिधान बीच सुषमा सी,
संध्या अम्बर के टुकड़े ।
छुटपुट तारों की रेखा
हो लाल-नील में जकडे॥

-डॉक्टर यशवीर सिंह चंदेल 'राही'

3 टिप्‍पणियां:

Dhiraj Shah ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति व रचना

M Verma ने कहा…

abhivyakipurn rachana

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर!!