सोमवार, 7 जून 2010

न उनकी दोस्ती अच्छी, न उनकी दुश्मनी अच्छी

(हतोयामा)
आप नें देखा अभी जापान में क्या हुआ ? आम तौर पर लोग यही समझते हैं कि अमेरिका व जापान के बीम गाढ़ी- छनती है। अब यह राज़ खुलता नज़र आता है कि सरकारी स्तर पर चाहे यह सत्य हो परन्तु जनता के स्तर पर ऐसा विचार सही नही है।
आप जानते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के अवसर पर उक्त दोनो देश एक दूसरे क प्रबल विरोधी थे। यही कारण था कि अमेरिका नें जापान के दो शहरों हीरोशिमा एँव नागासाकी पर परमाणु बम बरसा कर दोनो को बर्बाद कर दिया था। बाद में दोनो देश मित्र बने यह मित्रता इतनी बढ़ी कि जापान के दक्षिणी द्वीप ओकिनावा में अमेरिका नें अपना सैन्य अड्डा स्थापित कर लिया । अब स्थिति यह है कि अमेरिकी फौज का वहाँ आधा हिस्सा मौजूद है।
अमेरिका तो दुनिया भर में दादागीरी भी करता है और स्वार्थ पूर्ति भी। जापानी जनता को भी इस बात का एहसास हुआ उसने इस अड्डे को हटवाने के लिये आवाज़ उठाई।
पिछले साल सितम्बर में वहाँ प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने वाले हतोयामा नें अपने चुनावी वादों नें अमेरिका सैन्य अड्डे फुतेन्वा को स्थानातरिक करने का वादा किया था, लेकिन बाद में वाशिंगटन को खुश रखने के लिये वह अपने वादे से मुकर गये।
इस फैसले से प्रधानमंत्री के गठबंधनसहयोगी सोशल डेमोक्रेट्स नाराज हो गये। इस निर्णय के कारण हाल में हुए जनमत संग्रह में उनकी लोकप्रियता 70 प्रतिशत से घटकर 20 प्रतिशत पहुंच गई।
अन्ततः 63 वर्षीय हतोयामा को यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा ‘‘सरकार जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाई।’’
क्या मेरे इस सवाल को आप मानेंगे।
उनकी दोस्ती अच्छी, उनकी दुश्मनी अच्छी।

डॉक्टर एस.एम हैदर

1 टिप्पणी:

'उदय' ने कहा…

... sundar post !!!!!