शनिवार, 24 जुलाई 2010

पुलिस मंत्री भागा है, अफसर हैं जेल में

भगोड़ा पुलिस मंत्री
माननीय उच्चतम न्यायलय के निर्देश पर सी.बी.आई द्वारा सोहराबुद्दीन के एनकाउन्टर के मामले में गुजरात के पुलिस मंत्री भाग गए हैं। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने पुलिस उपनिरीक्षक डी. बंजारा, पुलिस अधीक्षक राजकुमार पांडियन, एम.एन दिनेश, पुलिस उपाधीक्षक एम.एल परमार व एन.के अमीन के खिलाफ आरोप पत्र न्यायलय में दाखिल कर दिया है। नस्लवादी सोच के आधार पर राज्य अपने नागरिको की हत्या करने लगा है। जिसका लोकतान्त्रिक व्यवस्था में प्रत्यक्ष उदहारण है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने भगोड़े पुलिस मंत्री के समर्थन में प्रधानमंत्री के लंच का बहिष्कार किया है।
दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो के अधीक्षक श्री दिवाकर त्रिपाठी को रंगेहाथ घूस लेते हुए पकड़ा गया है। श्री दिवाकर त्रिपाठी अपने पद का दुरपयोग करते हुए लोगों को नोटिस जारी करते थे। नोटिस प्राप्त करने वाला व्यक्ति जब उनके कार्यालय पहुँचता था तो लाखों रुपये उससे वसूले जाते थे। रुपये न देने पर एन.डी.पी.एस एक्ट में चालान कर दिया जाता था। नारकोटिक्स ब्यूरो का कार्यालय प्रतारणा केंद्र भी था। घूस न देने पर इस तरह से पिटाई की जाती थी कि वह व्यक्ति मर जाता था जिसका प्रत्यक्ष उदहारण बाराबंकी जनपद के मदन की मौत है। मदन नामक युवक को बाराबंकी शहर से उसके घर से उठाया ले जाया गया था और नारकोटिक्स ब्यूरो के कार्यालय में जब पिटाई से उसकी मृत्यु हो गयी थी तो उसके घर उसकी लाश छोड़ कर भाग गए थे। लखनऊ स्तिथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के कार्यालय में अब तक कई करोड़ रुपये की वसूली बाराबंकी जनपद के नागरिको से हो चुकी है जिन व्यक्तियों ने रुपया नहीं दिया उनका चालान फर्जी मार्फीन दिखाकर कर दिया गया।
अब राज्य आधारित अपराधों को कैसे नियंत्रित किया जाए मुख्य सवाल यह है ?

सुमन
लो क सं घ र्ष !

3 टिप्‍पणियां:

honesty project democracy ने कहा…

घोर शर्मनाक है ये नारकोटिक्स ब्यूरो की करतूत ,पता नहीं इस देश में सरकार है या सरकार के नाम पर सिर्फ और सिर्फ अपराध है |

सम्वेदना के स्वर ने कहा…

हर साल दुनिया में ड्रग्स या नार्कोटिक्स का धंधा 500 बिलियन डॉलर का है...ऐसे में एन.सी.बी. के आला अफसर इस काम में मुब्तिला हैं तो क्या ताज्जुब है...हमारे देश में हर साल जितने विदेशी सैलानी आते हैं, उनमें से कितने ऐसे हैं, जो चम्बा, गोवा और दार्जीलिंग के चप्पे चप्पे की ख़बर लेकर आते हैं कि कहाँ ये ज़हर मिलता है और कौन कॉन्टैक्ट परसन है... हम तो अतिथि देवो भवः का नारा बुलंद करते हैं, मगर उसकी आड़ में जो होता है, वो कहाँ दिखता है... सुमन जी आपका आभार!!

नीरज जाट जी ने कहा…

nice