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सोमवार, 7 अक्टूबर 2019

अटल सरकार से मोदी सरकार आगे

अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार ने तीन आतंकवादियों को कंधार ले जाकर छोड़ा था वहीँ मोदी सरकार ने  11 आतंकवादियों को तालिबान को सौंप दिया और उसके बदले में तीन इंजिनियर की रिहाई कराई. अपहरण और फिरौती का उद्योग इन राष्ट्रवादी सरकारों में फल-फूल रहा है. कूटनीतिक साहस क्षमता का कहीं भी प्रदर्शन करने में ये सरकारें असफल हो रही हैं लेकिन अपने भाषणों में ये रुस्तमे विश्व हैं. इजराइल का नाम हमेशा रटने वाली यह सरकारें यह भी सबक नही ले पायीं कि कैसे आतंकियों के अपरहण उद्योग से निपटा जा सकता है. विश्व में कई घटनाएं ऐसी हुई हैं जिसमें आतंकियों को पकड़ा गया है या मारा गया है और अपर्हित लोगों को छुड़ाया गया है. 
 11 आतंकियों की अदला-बदली रविवार को किसी गुप्त स्थान पर हुई। छोड़े गए 11 आतंकियों में शेख अब्दुर रहीम और मौलावी अब्दुर राशिद शामिल है। दोनों क्रमश: कुनूर और निमरोज प्रांत के लिए तालिबान के गर्वनर के रूप में काम कर चुके हैं.
दोनों तरफ से रिहाई की प्रक्रिया अफगानिस्तान के लिए विशेष अमेरिकी दूत जल्मे खलीलजाद और तालिबान के प्रतिनिधि मुल्ला अब्दुल गनी बरदार के बीच बैठक में हुई।  
               अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मौलाना मसूद अजहर को रिहा किया गया था. इसी शातिर आतंकी ने साल 2000 में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का गठन किया था. जिसका नाम 2001 में भारतीय संसद पर हुए हमले के बाद सुर्खियों में आया था. 
         दूसरा आतंकी अहमद उमर सईद शेख. इस आतंकवादी को 1994 में भारत में पश्चिमी देशों के पर्यटकों का अपहरण करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था. इसी आतंकी ने डैनियल पर्ल की हत्या की थी. अमेरिका में 9/11 के हमलों की योजना तैयार करने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी. बाद में डेनियल पर्ल के अपहरण और हत्या के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने उसे 2002 में गिरफ्तार कर लिया था.
           तीसरा आतंकी मुश्ताक अहमद ज़रगर. ये आतंकी रिहाई के बाद से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में उग्रवादियों को प्रशिक्षण देने में एक सक्रिय हो गया था. भारत विरोधी आतंकियों को तैयार करने में उसकी खासी भूमिका थी.
अटल सरकार में अप्रहत प्लेन अमृतसर  में रुका हुआ था लेकिन हमारे कमांडों वहां तक नहीं पहुँच पाते हैं. ऐसा बोला जाता है कि उनको विमान से एयरपोर्ट भेजना था लेकिन किसी भी विमान का इंतजाम नहीं हो पाया था. और जब वह सड़क के रास्ते गये तो वहां भरी जाम की वजह से देरी हो जाती है.  
                          भारत की खुफिया एजेंसी रॉ के तत्कालीन प्रमुख ए. एस. दौलत ने अपनी अंग्रेजी पुस्तक 'कश्मीर:द वाजपई ईयर्स' में भी कहा है कि भारत उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया था। दौलत ने अपनी पुस्तक में इस महत्वपूर्ण तथ्य का उल्लेख नहीं किया कि उस अपहृत विमान में उनकी खुफिया एजेंसी रॉ का एक अधिकारी भी बैठा था जिसका नाम शशि भूषण सिंह तोमर था। यह अधिकारी काठमाण्डू स्थित भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी के तौर पर कार्य कर रहा था। तोमर की तत्कालीन कैबिनेट सचिव एन.के. सिंह से नजदीकी रिश्तेदारी थी।
अपहृत विमान में इतना ईंधन नहीं था कि उसे लाहौर या कंधार ले जाया जाता। इस कारण उसे अमृतसर हवाई अड्डे पर उतरना पड़ा, जहां अपहृर्ताओं ने गुरुग्राम निवासी रूपन कत्याल नामक एक यात्री को इतना घायल कर दिया कि बाद में उसकी विमान में ही मृत्यु हो गई थी। 25 वर्षीय कत्याल शादी के बाद हनीमून मनाने काठमाण्डू गया हुआ था। विमान में उसकी पत्नी रचना सहगल उसके साथ थी।
             

अमृतसर हवाई अड्डे को दिल्ली स्थित क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप का निर्देश था कि किसी तरह विमान को वहीं रोक कर रखा जाए पर ईंधन न भरा जाए। इस बीच हवाई अड्डे के निदेशक विजय मुलेकर के पास एक फोन आया जिसमें एक आदमी ने यह निर्देश दिया कि हवाई जहाज में ईंधन भर दिया जाए और उसे आगे उड़ान भरने दी जाए। फोन करने वाले आदमी ने अपना नाम सी. लाल बताया और कहा कि वह गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव है। विजय मुलेकर ने उसकी बात नहीं मानी और कहा कि 'मैं केवल दिल्ली स्थित क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप की ही बात मानूंगा।' जांच करने पर पता चला कि वह फोन एक यूरोपीय देश से आया था। यूरोप से आए इस फोन वाली घटना का जिक्र अंग्रेजी समाचार पत्रिका 'इंडिया टुडे' के 10 जनवरी, 2000 अंक में किया गया है। इस घटना की चर्चा अंग्रेजी पुस्तक 'आईसी 814 हाइजैक्ड! द इनसाइड स्टोरी' में भी पृष्ठ संख्या 203 पर की गई है। वहां सी. लाल की जगह जे. लाल लिखा हुआ है।
                इन्डियन एयरलाइन्स  फ्लाईट 814 (VT-EDW) का अपहरण शुक्रवार, 24 दिसम्बर 1999 को  लगभग 05:30 बजे विमान के भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश के कुछ ही समय बाद कर लिया गया था। जिसको इब्राहिम अतहर, बहावलपुर, पाकिस्तान, शाहिद अख्तर सईद, कराची, पाकिस्तान, सन्नी अहमद काजी, कराची, पाकिस्तान, मिस्त्री जहूर इब्राहिम, कराची, पाकिस्तान, शकीर, सुक्कुर, पाकिस्तान ने किया था.
पाकिस्तान से हर समय मुकाबला करने वाले लोग अमेरिकी साम्राज्यवाद के भी समर्थक हैं लेकिन पाकिस्तान अमेरिकी साम्राज्यवाद का मुख्य चहेता देश है और पाकिस्तान के माध्यम से ही तालिबान का निर्माण हुआ था. दोनों घटनाओं में तालिबान शामिल था और अफगानी 11 आतंकियों को छुड़ाने में उसके मुख्य भूमिका रही है लेकिन देश के नीति नियंता अमेरिकी मोह में फंस कर सही निर्णय लेने में असमर्थ साबित होते हैं. यही देश का दुर्भाग्य है.

-रणधीर सिंह सुमन 

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

चोर चौकीदार और भगवा कसाईखाना: भाकपा का जुलुस

गली-गली में शोर हैं चौकीदार ही चोर हैं या भगवा कसाई खाना बंद करो जैसे नारे लगाते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जलूस निकाला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद के सदस्य रणधीर सिंह  सुमन ने सम्बोधित करते हुए कहा कि नरेन्द्र दामोदर मोदी ने राफेल घोटाले में कमीशन खाया है और सरकार को क्षति पहुंचाने के लिए एच.ए.एल (HAL) को ठेका न दिलवा कर 2019 का चुनाव लड़ने के लिए अपने मालिक से चुनावी चंदा प्राप्त कर लिया है.
            पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन  वर्मा ने कहा कि भगवा पुलिस भगवा कसाई खाने के रुप में तब्दील हो गई है और एक समुदाय विशेष के लोगों को पकड़  कर अलीगढ़ से लेकर बाराबंकी तक एनकाउंटर के नाम पर वध कर रही है. पार्टी के जिला सहसचिव डॉ कौसर हुसेन ने कहा कि मोदी सरकार को हटाने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी 2019 तक आन्दोलन चला कर संघर्ष करेगी। पार्टी के जिला सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि इस सरकार में किसान आत्महत्याएं कर रहा है, किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है वहीं अधिकारी बाढ राहत घोटाला करके मालामाल हो रहे हैं.
              प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह दलसिंगार व गिरीश चन्द्र कर रहे थे. प्रदर्शन में अमर सिंह प्रधान, मुनेश्वर बक्श, रामनरेश वर्मा, प्रवीण कुमार, महेंद्र यादव ने कहा वीरेंद्र कुमार, अशोक मौर्य, सहजराम, सुरेश रैना, दिनेश रावत आदि प्रमुख कम्युनिस्ट नेता शामिल शामिल थे.



बुधवार, 12 सितंबर 2018

अरुण जेटली ने माल्या को भगाने में मदद की

किंगफ़िशर एयरलाइन्स के मालिक व प्रमुख शराब व्यवसायी विजय माल्या जब 7000 करोड़ रुपये देनदारी को छोड़कर विदेश जा रहा था तो विदेश जाने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस हवाई अड्डों को प्राप्त हो चुकी थी इसलिए विजय माल्या को विदेश जाने के लिए किसी दमदार नेता की जरूरत थी जो एरोड्रम पर उसकी गिरफ्तारी न होने दे. इस कार्य के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली से विजय माल्या मिले और उसी के बाद वह समस्त देनदारियां छोड़ कर विदेश चले गये और उसके बाद सरकार अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए माल्या को इंग्लैंड से देश में लाने के लिए एक राजनीतिक ड्रामा करने लगी. 
             भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी  ने 12 जून को ट्वीट किया था, माल्या देश नहीं छोड़ सकता क्योंकि हवाई अड्डों पर उसके खिलाफ कड़ा लुक आउट नोटिस जारी हो चुका था. इसके बाद वो दिल्ली आया और उसने किसी प्रभावी शख्स से मुलाकात की जो विदेश जाने से रोकने वाले उस नोटिस को बदल सकता था. वो शख्स कौन है जिसने नोटिस को कमजोर किया?
            आज विजय माल्या द्वारा जब यह स्वीकार कर लिया गया कि देश छोड़ने से पहले उसने वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की थी. इस तथ्य को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अभी तक देश से छिपाए रखा था.
         इस तरह के मामले में अगर किसी विपक्ष के नेता का नाम आया होता तो सीबीआई प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर उस नेता की गिरफ्तारी कर लेती और न्यायलय में सीबीआई रिमांड का प्रार्थना पत्र देकर कम से कम तीन महीने का सीबीआई रिमांड  आदेश प्राप्त कर टोर्चेर करने का काम शुरू कर दिया होता. देश के अन्दर इस समय सीबीआई अमित शाह के तोते के रूप में जानी जाती है. 

रणधीर सिंह सुमन 

रविवार, 26 अगस्त 2018

वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे!


सभी मनुष्यों से अनुरोध है कि केरल के नागरिकों की हरसंभव मदद कर देश की एकता और अखंडता की रक्षा करें.

रणधीर सिंह सुमन

रविवार, 12 अगस्त 2018

जनता की कठिनाईयों को दूर करना ही कानून का मकसद- वाई.एस. लोहित

कार्यक्रम बोलते हुए अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन

आईएएल राष्ट्रीय महासचिव श्री वाईएस लोहित बोलते हुए
बाराबंकी।  इण्ड़ियन एसोसिएशन आफ लायर्स के तत्वाधान में आयोजित कानून जनता की कठिनाईयो और निदान विषय पर विचार गोष्ठी कार्यक्रम शांति पैलेस निकट बाबा बारात घर बड़ेल चौराहा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुये मुख्य अतिथि इण्डियन एसोसिएशन आफ लायर्स के राष्ट्रीय महासचिव वाई0एस0 लोहित ने कहा कि जनता ही इस देश की मालिक है। जनता की कठिनाईयो को दूर करना ही कानून का मकसद है। क्योकि कानून जनता के लिये है, जनता कानून के लिये नही! भारतीय संविधान की प्रस्तावना मे ही सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय को लक्ष्य घोषित किया गया है। जबकि इस देश की आजादी के पहले ब्रिटिश राज में न्याय दिलाना उद्देश्य नही था। बल्कि यह कहा जाता था कि यह जरुरी नही कि न्याय हो किन्तु न्याय की प्रक्रिया ही चलनी चाहिये। महामंत्री सुरेश चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि देश मे कानून का प्रथम स्त्रोत संविधान है। जो कानून संविधान संपन्न नही या जनहित में नही है उन्हे समाप्त किया जाना चाहिये। जनता अपने संघर्षो के बल
पर जनहित के कानून बनवा सकती है। उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक परमात्मा सिंह ने कहा कि यदि संसद, विधानसभा देशहित या जनहित मे कानून बनाने मे और लागू करने मे असफल रही तो जनता कानून बनवा लेगी। और कानून देश और जनता के लिये है।
श्री परमात्मा सिंह बोलते हुए
कार्यक्रम में मौजूद अधिवक्तागण
इसके अतिरिक्त वरिष्ठ अधिवक्ता रणधीर सिंह सुमन, जिला बार पूर्व अध्यक्ष गोण्डा रवि प्रकाश त्रिपाठी, जिला टैक्स बार एसोसिएशन अध्यक्ष पवन कुमार वैश्य, बृजमोहन वर्मा, पूर्व महामंत्री नरेन्द्र वर्मा, भारत सिह यादव, संजय गुप्ता आदि ने भी गोष्ठी मे अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता विभव मिश्रा व अध्यक्षता उपेन्द्र सिंह ने की। कार्यक्रम में नीरज वर्मा, पुष्पेन्द्र यादव, राजेन्द्र बहादुर सिंह राणा, तारिख खान, संजय सिंह, मलखान सिंह, प्रदीप सिंह, सरदार भूपिन्दर पाल सिंह, दिनेश वर्मा, कर्मवीर सिंह, प्रेमचन्द्र वर्मा, अभय सिंह, वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, विजय प्रताप सिंह, गौरी रस्तोगी, गिरीश चन्द्र, कुश कुमार, अशोक वर्मा, रामकुमार वर्मा, आनन्द सिंह, बालकृष्ण वर्मा, निर्मल वर्मा, रोशन वर्मा, हरि सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।

गुरुवार, 24 मई 2018

चंदा दो और सरकार से गोली चलवाओ

वेदांता कंपनी को एनडीए के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने फायदे में चल रही बाल्को को सौंप दिया था और नरेन्द्र मोदी व एनडीए का घटक रही प्रदेश की सरकार ने तूतीकोरिन में गोलियां चलवा कर पन्द्रह प्रदर्शनकारियों की हत्या करवा दी. इस विदेशी वेदांता कंपनी के मालिक अनिल अग्रवाल हैं और विदेशी नागरिक हैं. इन्होने मोदी को चुनाव लड़ने के लिए 19 करोड़ रुपये चंदा दिया था इसीलिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के मुंह में अपने असलहे डाल कर फायरिंग की थी. सूत्रों का कहना है कि इजराइल से मोदी सरकार ने जिन शार्प शूटरों की ट्रेनिंग करायी है वह शार्प शूटर्स कॉर्पोरेट सेक्टर के अनिल अग्रवाल वेदांता स्टेरलाइट के लिए जनता पर गोली चला रहे थे. जनता को यह समझना चाहिए कि यह सभी आर्म्ड फोर्सेज जनता की सुरक्षा के लिए कम हैं और कॉर्पोरेट सेक्टर की सुरक्षा के लिए तैयार की गई हैं. 
                  इस वेदांता कंपनी के ऊपर 1.03 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है और केंद्र सरकार की सेना, पुलिस, आर्म्ड फ़ोर्स इन कंपनियों के इशारे पर चलती हैं. बाल्को कारखाना बहुत सस्ते दामों पर अटल बिहारी वाजपेयी ने बेच दिया था और उसके बाद वेंदाता कंपनी ने 2001 में हजारों एकड़ सरकारी ज़मीन कब्ज़ा कर उसके उसके ऊपर लगे हुए पेड़ों को कटवा दिया था और सरकार ने कोई कार्यवाई नही की थी.
तमिलनाडु के तूतीकोरिन में आज स्टरलाइट कॉपर कारख़ाना बंद करने की माँग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फ़ायरिंग से 15 लोगों की मौत हो गई और तमाम लोग घायल हो गए। इस कारख़ाने के ख़िलाफ़ क़रीब सौ दिनों से आंदोलन चल रहा था। आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस कारख़ाने से निकलने वाले प्रदूषक तत्वों की वजह से आस-पास रहने वाले लाखों लोग प्रभावित हैं।
 तमिलनाडु सरकार हो या भाजपा की सरकार उन्हें 5 लाख लोगों की फ़िक्र नही है बल्कि वेदांता समूह के मालिक अनिल अग्रवाल की फ़िक्र सबसे ज्यादा रहती है. तमिलनाडु में पेरियार स्वामी और अन्नादुरई समर्थकों की सरकार है और वहां के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी जनता के साथ न होकर अनिल अग्रवाल के व्यक्तिगत नौकर की भूमिका में नज़र आते हैं. 
        कॉर्पोरेट सेक्टर के मामले में भाजपा कांग्रेस व क्षेत्रीय दल चुनावी चंदा लेने के कारण एक सा ही चरित्र दिखाई देता है और इन सभी दलों की भूमिका जल, जंगल, ज़मीन की लूट को रोकने की बजाए कॉर्पोरेट सेक्टर के नौकर की भूमिका में नज़र आते हैं. तमिलनाडु में एआईडीएमके एक क्षेत्रीय दल होने के बावजूद बहुसंख्यक जनता के साथ न खड़ा होकर अनिल अग्रवाल की वेदांता कंपनी के साथ खड़ा है.
         सरकारों के साथ मिलकर जनता  पर गोली चलवाने और मानवाधिकार उल्‍लंघन करने के मामले में वेदांता का रिकॉर्ड पहले से ही जगप्रसिद्ध है।  अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर मानवाधिकाार उल्‍लंघनों के लिए ब्‍लैकलिस्‍ट भी किया जा चुका है। आज से कोई साढ़े आठ साल पहले 23 सितंबर 2009 को छत्‍तीसगढ़ के कोरबा में एक निर्माणाधीन चिमनी गिर गई थी जिस हादसे में 40 लोग मारे गए थे और वेदांता के खिलाफ भगवा सरकारों ने कोई कार्यवाई नही की थी उलटे वेदांता की ही मदद की थी.

-रणधीर सिंह सुमन 

रविवार, 1 अप्रैल 2018

गद्दार केंचुल बदल रहे हैं

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ  ने शहीद राजगुरु को अपना संघी  बता दिया है। एक संघ प्रचारक नरेंद्र सहगल की किताब में इस बात का दावा किया गया है। नरेंद्र सहगल हरियाणा में विद्यार्थी परिषद  के संगठन मंत्री रहे हैं। दरअसल नरेंद्र सहगल की किताब ‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ में लिखा गया है कि ‘सरदार भगत सिंह और राजगुरु ने अंग्रेज अफसर सांडर्स को लाहौर की मालरोड पर गोलियों से उड़ा दिया। फिर दोनों लाहौर से निकल गए। राजगुरु नागपुर आकर डॉ. हेडगेवार से मिले। राजगुरु संघ के स्वयंसेवक थे’।
सहगल की किताब में दावा किया गया है कि राजगुरु संघ की मोहित बोड़े शाखा के स्वयंसेवक थे। सहगल की लिखी किताब के अनुसार नागपुर के भोंसले वेदशाला के छात्र रहते हुए राजगुरु, संघ संस्थापक हेडगेवार के बेहद करीबी रहे। किताब में यह भी दावा किया गया है कि सुभाष चंद्र बोस भी संघ से काफी प्रभावित थे। एक खास बात यह भी है कि किताब ‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ की भूमिका संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लिखी है। भागवत ने लिखा है कि स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका पर सवाल उठाने वाले लोगों को  यह किताब उचित जवाब देगी।
 राजगुरु को संघ का संघी  बताने के अलावा इस किताब में हेडगेवार का भी जमकर महिमामंडन किया गया है। हेडगेवार के बारे में लिखा गया है कि हेडगेवार ने 26 जनवरी 1930 को देश के हर प्रांत में स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले नेहरु के आदेश पर खुशी जताते हुए पूरे देश में, खासकर संघ की शाखाओं में आजादी का दिन मनाने का निर्देश दिया था।किताब के मुताबिक महात्मा गांधी के सत्याग्रह में स्वयंसेवक ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था और खुद हेडगेवार ने भी सत्याग्रह किया था।
वैसे यह किताब झूठ का पुलिंदा है और कोई भी तथ्य ऐतिहासिक नहीं  है क्योंकि संघियों की स्वतंत्रता आंदोलन में कोई  भूमिका नहीं रही है। अब संघ  इस किताब को इन सारे सवालों का जवाब बता रही है। हालांकि इधर शहीद राजगुरु को संघ का संघी  बताने पर लोग अब ट्विटर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ मजे ले रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि अभी वो लोग कह रहे हैं कि राजगुरु स्वयंसेवक थे बाद में यह लोग कहेंगे कि भगत सिंह लाहौर शाखा में शाखा प्रमुख थे।
इन तथ्यों के विपरीत वाराणसी में विद्याध्ययन करते हुए राजगुरु का सम्पर्क अनेक क्रान्तिकारियों से हुआ। चन्द्रशेखर आजाद से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से तत्काल जुड़ गये। आजाद की पार्टी के अन्दर इन्हें रघुनाथ के छद्म-नाम से जाना जाता था; राजगुरु के नाम से नहीं। पण्डित चन्द्रशेखर आज़ाद, सरदार भगत सिंह और यतीन्द्रनाथ दास आदि क्रान्तिकारी इनके अभिन्न मित्र थे। राजगुरु एक अच्छे निशानेबाज भी थे। साण्डर्स का वध करने में इन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव का पूरा साथ दिया था जबकि चन्द्रशेखर आज़ाद ने छाया की भाँति इन तीनों को सामरिक सुरक्षा प्रदान की थी।
23 मार्च 1931 को इन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव के साथ लाहौर सेण्ट्रल जेल में फाँसी के तख्ते पर झूल कर अपने नाम को हिन्दुस्तान के अमर शहीदों की सूची में अहमियत के साथ दर्ज करा दिया।
                         जबकि ऐतिहासिक तथ्य यह है कि 30 जनवरी 1930 को रावी नदी के तट पर जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा ध्वज फेहराया था और जिसका समर्थन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने नही किया था. 
                हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसिएशन का उद्देश्य व अन्तिम लक्ष्य स्वाधीनता प्राप्त करना और समाजवादी राज्य की स्थापना था। दल की ओर से बम का दर्शन नाम से प्रकाशित एक लघु पुस्तिका में क्रान्तिकारी आन्दोलन की समस्या के बारे में अपने विचार खुलकर प्रकट किये गये थे.
                संघ ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत कितना भी झूंठ प्रकशित करे लेकिन उसकी 'गद्दारी और मुखबिरी का इतिहास' इतिहास के पन्ने जब भी कोई खोलेगा तो वह अक्षर सबसे पहले दिखाई देंगे.  अगर राजगुरु संघ की शाखा के थे तो क्या संघ समाजवादी दर्शन के लिए काम कर रहा था. जिस तरह से सांप नई उर्जा प्राप्त करने के लिए अपनी केंचुल बदलता है उसी तरह संघी अपनी गद्दारी का इतिहास बदलने के लिए देश के महान क्रांतिकारियों को संघी बताने के लिए बेताब नजर आ रहे हैं. दूसरी तरफ अगर हेड़गेवारकर गाँधी के अनुयायी थे तो गाँधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का प्रचार प्रसार संघी क्यूँ करते हैं.
             भविष्य में गद्दारों को अपनी गद्दारी छिपाने के लिए जरुरत पड़ी तो काल मार्क्स को महर्षि कार्ल मार्क्स लिख कर हिंदुवत्व की परंपरा का महर्षि घोषित कर सकते हैं. वैसे कार्ल मार्क्स पूरी दुनिया मजदूर और किसान, शोषित-पीड़ित जनता के लिए महर्षि हैं.

रणधीर सिंह सुमन 

बुधवार, 14 मार्च 2018

जिंदा शहीद पृथ्वी सिंह आज़ाद

जिंदा शहीद कहे जाने वाले व ग़दर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में बाबा पृथ्वी सिंह आजाद साम्यवादी विचारधारा से ओत-प्रोत देश के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक रहे हैं. अंदमान की सेलुलर जेल से रिहा होने के बाद भी क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहे. वहीँ, अंडमान जेल से माफ़ी मांग कर सावरकर अंग्रेजी साम्राज्यवाद के लिए काम करने लगे थे. 
        शहीद भगत सिंह ने चंद्रशेखर आजाद से कहा था कि पृथ्वी सिंह आजाद से कहो कि वह आगे के प्रशिक्षण के लिए सोवियत यूनियन जाकर महान क्रांतिकारी लेनिन से मिलें और देश को आजाद कराने की लड़ाई को तेज़ किया जाए. बाबा पृथ्वी सिंह आजाद अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते से पैदल सोवियत यूनियन गए और वहां प्रशिक्षण और वहां की समाजवादी व्यवस्था का अध्ययन करके स्वदेश वापस लौटे. अल्फ्रेड पार्क में जब चंद्रशेखर आजाद की मुठभेड़ ब्रिटिश सरकार से हो रही थी तब भी बाबा पृथ्वी सिंह आजाद उनके साथ थे और चंद्रशेखर आजाद के कहने पर वहां से चले गये थे. 
बाबा पृथ्वी सिंह आजाद को लाहौर षड्यंत्र केस में फांसी की सज़ा सुने गयी थी जिसे बाद में उम्र कैद में बदल दिया गया था. उन्हें आज़ादी की लड़ाई में कई बार जेल जाना पड़ा और वह जिंदा शहीद कहलाये. आज़ादी के बाद भारत सरकार ने पद्म भूषण से पुरस्कृत किया उनकी  'लेनिन के देश में' नामक पुस्तक बहु चर्चित पुस्तकों में से एक है. पृथ्वी सिंह आजाद आजादी के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्यालय अजय भवन में जीवन पर्यंत रहे. 

रणधीर सिंह सुमन
लो क सं घ र्ष !

रविवार, 11 मार्च 2018

मुख्यमंत्री हैं वेतन नही देंगे...विकास के लिए समिट करेंगे


"उदार चरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् "अर्थात उदार चरित्र वाले लोगो का सारा संसार परिवार होता है खरगोश अगर भेडिया के पास जाएगा तो वह तुंरत भेडिया का भोजन हो जाएगा । उसी तरह महात्मा गाँधी से प्रमाण पत्र भी लिया और गाँधी की हत्या भी की जब जरूरत होती है तो आज भी गाँधी का इस्तेमाल गाँधी की हत्या करने वाले लोग करतें है और गाँधी वध भी ।
आज पंचतंत्र का संस्कृत वाक्यांश सच साबित हो रहा है. उत्तर प्रदेश में इसी तरह के वादे कर भाजपा सत्तारूढ़ हो गयी और उसके बाद  सरकार की हालत यह हो गयी है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जो पूरे प्रदेश की जनता की शिकायतें दूर करने के लिए है वह भी अपनी शिकायतें दूर नही कर पा रही है पूरे प्रदेश की जनता की शिकायतें क्या दूर करेगी.  
राजधानी लखनऊ के गोमती नगर के विभूतिखंड स्थित साईबर हाईट में संचालित मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में काम करने वाली महिला टेलीकालरों द्वारा चार माह से लटके वेतन की मांग करने पर कमरे में बंद कर प्रताड़ित करने का मामला 9 मार्च को सामने आया है। जिसके चलते कुछ युवतियां बेहोश हो गई। युवतियों को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पुलिस से भी प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत हो गई। इस मामले में विभूतिखंड थाना प्रभारी सत्येंद्र कुमार राय का कहना है कि कर्मचारियों को तीन महीने की ट्रेनिंग और एक महीने का वेतन नहीं मिला है।
         मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में कार्यरत लड़कियों को जबरदस्ती सरकार का डर दिखा कर काम लिया जा रहा है. जिस तरह से गुंडे और मवाली समाज के कमजोर तबकों से हंटर के बल पर काम लेते हैं, छेड़खानी करते हैं उसी तरह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की हेल्पलाइन की स्तिथि है. 
           लोकतंत्र में मत का प्रयोग अगर सही तरीके से नहीं किया गया है तो मीठी-मीठी बातें करके ऐसे लोग सत्ता में आ जाते हैं जिनका जनतंत्र और लोकतंत्र में कोई यकीन नही होता है और ऐसे लोग मजदूरों और किसानों का शोषण हंटर के बल के ऊपर करते हैं. इस घटना के बाद यह अच्छी तरह से प्रदर्शित हो रहा है कि जब मुख्यमंत्री कार्यालय से सम्बंधित लोगों को वेतन भुगतान नही हो रहा है तो पूरे प्रदेश में मजदूरों और किसानों की क्या दशा होगी. 
दूसरी तरफ प्रदेश के विकास के लिए दिवालिया उद्योगपतियों के ऊपर 65 करोड़ रुपये खर्च कर प्रदेश की जनता को लोलीपाप दिखाया जा रहा है. कोरिया की 13 करोड़ की कंपनी वर्ल्डबेस्टटेक उत्तर प्रदेश में 90000 करोड़ रुपये का निवेश करने की घोषणा की है. जिसका सीधा-सीधा अर्थ है कि 90000 करोड़ यहाँ बैंकों से दिए जायेंगे और फिर कंपनी उक्त रुपया लेकर तू चल मै आता हूँ के विपरीत विदेश चली जएगी.

रणधीर सिंह सुमन 

शनिवार, 10 मार्च 2018

संघी तालिबानियों ने लेनिन की मूर्ति को गिरा दिया


5 मार्च को त्रिपुरा में वाम दलों के गठबंधन के चुनाव में पराजित होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने  मजदूरों और किसानों का राज्य स्थापित करने वाले तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम को समर्थन करने वाले दुनिया के महान क्रांतिकारी लेनिन की मूर्ति को भाजपा नेतओं ने बुलडोज़र लगा कर गिरा दिया. यह काम उसी तरह किया गया जिस तरह अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान ने अपने 25 कैदियों के माध्यम से 2 मार्च 2001 को पहले उन्होंने बुद्ध प्रतिमा पर टैंक और भारी गोलियों से हमला किया और जब वह नाकाम रहे तो उन्होंने उसे नष्ट करने के लिए उसमें विस्फोटक लगा कर गिरा दिया था. बामियान की बलुआ पत्थर की मशहूर प्राचीन बुद्ध प्रतिमा कभी विश्व भर में बुद्ध की सबसे ऊंची 56 मीटर ऊंची मूर्ति हुआ करती थी.
                तालिबान ने विश्व धरोहर बुद्ध प्रतिमा को विष्फोटक लगा कर उड़ा दिया था और संघी तालिबानियों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन को समर्थन देने वाले लेनिन की प्रतिमा को गिरा. अफगानिस्तान में लोकतंत्र नहीं था जबकि उसके विपरीत देश में लोकतांत्रिक सरकार के रहते हुए लेनिन की मूर्ति को गिरा दिया गया. इन दोनों घटनाओं में मुख्य समानता यह है कि अफगानिस्तान के तालिबानी अमेरिका द्वारा समर्थित थे और देश की सरकार भी अमेरिकी ट्रम्प से समर्थित है. 
                 बुद्ध प्रतिमा गिराए जाने के बाद मुल्ला मुहम्मद ओमार ने कहा था कि “मुसलमानों को इन प्रतिमाओं के नष्ट होने पर गर्व करना चाहिए। उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में बीजेपी के वरिष्ठ नेता राज पुरोहित ने  कहा है कि वह लेनिन की मूर्ति गिराए जाने से बेहद खुश हैं। उन्होंने मूर्ति को पुतला बताते हुए कहा कि लेनिन का पुतला अपमान का प्रतीक है और उनके जितने भी पुतले हों, सभी गिरा देने चाहिए। बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, 'लेनिन तो विदेशी है, एक प्रकार से आतंकवादी है, ऐसे व्यक्ति की मूर्ति हमारे देश में क्यों?   बीजेपी नेता राम माधव और त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय ने भी इसे जायज ठहरा दिया।  
महान क्रांतिकारी भगत सिंह के आदर्श लेनिन थे और जेल की अदालत में लेनिन दिवस के अवसर पर भगत सिंह समेत उनके साथी क्रांतिकारियों ने उन सभी को हार्दिक अभिनन्दन भेजते हैं जो महान लेनिन के आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ भी कर रहे हैं। हम रूस द्वारा किये जा रहे महान प्रयोग की सफलता की कमाना करते हैं। सर्वहारा विजयी होगा। पूँजीवाद पराजित होगा। साम्राज्यवाद की मौत हो।
             आजादी की लड़ाई में ब्रिटिश साम्राज्यवाद के साथ रहने वाले लोगों की विचारधारा को मानने वाले लोगों ने देश के अन्दर हर उस व्यक्ति की चरित्र हत्या का कार्य शुरू कर दिया है जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ था. गाँधी से लेकर नेहरु, टैगोर की चरित्र हत्या का कार्य संघी तालिबानी कर रहे हैं.

सुमन 

मंगलवार, 5 दिसंबर 2017

हारने के बाद भी जीत का जश्न

प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक शगुन गौतम 80 वर्षीय अल्पसंख्यक मतदाता की पिटाई करते हुए
उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय चुनाव में नगर निगम की कुल 16 सीटों में से 14 सीटें जीतकर सत्तारूढ़ डाल भाजपा ने मीडिया के माध्यम से जनता के ऊपर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का प्रयास शुरू किया है कि उसने स्थानीय निकाय में भारी सफलता हासिल की है जबकि नगर पालिका परिषद् अध्यक्ष कुल 198 पदों में भाजपा ने मात्र 70 पद पर जीत हासिल की है. वहीँ नगर पंचायत अध्यक्ष के कुल 438 पदों पर भाजपा ने मात्र 100 पदों पर जीत हासिल की है लेकिन नगर निगम के चुनावों के परिणाम को आधार बना कर पूरे देश में सत्तारूढ़ दल जीतने का दावा करने से बाज नही आ रही है.बीजेपी के 3,656 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हुई है पार्टी के सभी उम्मीदवारों में से 45 फीसदी बीजेपी के उम्मीदवार ऐसे हैं जिनकी जमानत जब्त हुई है। वहीं नगर पंचायत सदस्य के चुनाव में बीजेपी को मात्र 11.1 फीसदी सीट पर जीत मिली है।
           स्थानीय निकाय चुनाव में मुख्यमंत्री अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ आदित्यनाथ ने दो हफ़्तों में 33 जनसभाएं की. प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ मिश्रा, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा सहित मंत्रियों ने पूरे प्रदेश में धनबल व सरकार का प्रयोग करते हुए जनता को अपने पक्ष में करने की कोशिश की लेकिन सफलता हाथ नही लगी.
        उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के गृह जनपद कौशाम्बी में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है. यहां तक कि जिस वार्ड में केशव का घर पड़ता है वहां भी बीजेपी की हार हुई है.सभी 6 नगर पंचायतों में भाजपा की जबरदस्त हार हुई है. वहीँ, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने गोरखपुर जिले के जिस वार्ड में अपने मत का प्रयोग किया था वहां भी भाजपा हार गयी है.  इसी तरह उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव में सत्तारूढ़ दल के मंत्रियों के अथक प्रयास करने के बावजूद अधिकांश प्रत्याशी चुनाव हार गये हैं लेकिन मीडिया द्वारा चुनाव जीतने का जश्न मनाया जा रहा है. लगता नहीं है कि सरकार में बैठे हुए लोग विवेकशील व्यक्ति हैं या लफ्फाजों या गप्पबाजों के गिरोह के सरगना हैं. 
        जहाँ तक निष्पक्ष चुनाव कराने की बात है वहां पर योगी सरकार स्थानीय निकाय चुनाव में सही मतदाता सूची भी नहीं बनवा पायी थी. मतदाता सूची में सैकड़ों नाम उसी वार्ड में कई बार थे. फिर वही नाम दूसरे वार्डों में भी थे और ऐसे लोगों के नामों की फर्जी आईडी सत्तारूढ़ दल द्वारा देकर मतदान कराया जा रहा था. देखने में यह भी आया है कि सत्तारूढ़ दल के कई प्रत्याशी फर्जी आईडी प्रूफ बनाने की मशीने भी लगाये हुए थे. मतदाताओं को डराने और धमकाने का काम मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी पुलिस बल के साथ कर रहे थे. हिन्दुस्तान अखबार में बाराबंकी जनपद की एक फोटो प्रकाशित हुई है जिसमें एसडीएम व सीओ एक मतदाता को पोलिंग स्टेशन के सामने मुर्गा बनाये हुए हैं और बाकी पुलिस बल उस दृश्य का आनंद ले रहा है.
                   बाराबंकी, प्रतापगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों में चुनाव मशीनरी को संचालित करने वाले बड़े अधिकारीयों ने नियोजित तरीके से अल्पसंख्यक बाहुल्य मतदान केन्द्रों पर सुबह से ही तोड़फोड़ व मतदाताओं की पिटाई का अभियान चला रखा था जिससे अल्पसंख्यक मतदाता अपने मत का प्रयोग न कर सकें. क्या यह योगी सरकार की निष्पक्षता का सबूत है ? 
              लोकतंत्र में प्रचार तो चलता है लेकिन नागपुर की संघी प्रयोगशाला दुष्प्रचार करने में माहिर है.  भाजपा अपनी नीतियों के कारण हार रही है लेकिन जनता में यह भ्रम पैदा किया जा रहा है कि वह जीत रही है. 

रणधीर सिंह सुमन 

मोदीयुग में बढ़ी है सूदखोरी

सूदखोर द्वारा पिटाई
मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद किसानो की आत्महत्याएं बढ़ी हैं उसका मुख्य कारण यह भी है कि वित्तीय संस्थाएं छोटे किसानो को ऋण देने में आनाकानी करने लगी हैं जिससे विश्व बैंक, NCAER के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के 21% ग्रामीण परिवारों पर औपचारिक लोन बकाया था लेकिन 40 % ग्रामीण परिवारों पर अनौपचारिक ऋण है जो यह प्रदर्शित करता है कि अधिकांश किसान सूदखोरों, भू स्वामियों व दलाल तबके के कर्ज के मकडजाल में फंसा हुआ है. अधिकतम ब्याज दरें होने के कारण ग्रामीण परिवार उस सूदखोरी के कर्ज को अदा नहीं कर सकता है. जिससे लघु व सीमान्त किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर होते हैं. 
                      मोदी की पार्टी के कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में सूदखोरी का धंधा करते हैं और अधिकतम ब्याजदरों को वसूलने के लिए वह बल प्रयोग करते हैं और भगवा अंगौछे के कारण उनके खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं हो पाती है अक्सर यह भी देखने में आया है कि उनके दबाव के कारण पीड़ित किसान आत्म हत्या कर लेते हैं लेकिन पुलिस आत्म हत्या के दुष्प्रेरण का मुकदमा भी दर्ज नही करती है. 
                 एक समाचार के अनुसार मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित पलज गांव निवासी संजीव पुत्र नकली प्रजापति ने करीब 8 महीने पहले बेटी की शादी के लिए सूदखोर से ब्याज पर 50 हजार रुपये लिए थे। संजीव बहादपुर निवासी रणतेज उर्फ काला नाम के इस सूदखोर को अब तक 75 हजार रुपये दे चुके हैं, लेकिन सूदखोर का कहना है कि 50 हजार की रकम के लिए ब्याज के साथ सवा लाख रुपये बनते है। संजीव को यह रकम चुकानी ही होगी। इसी रकम की वसूली को लेकर रणतेज लगातार संजीव पर दबाव बना रहा था। जिसके बाद रणतेज ने संजीव की चप्पल से पिटाई की।
           शहरी क्षेत्रों में निचले स्तर के कर्मचारी, मजदूर भी इन सूदखोरों के कर्ज जाल में फंसे हुए हैं इनकी ब्याज की दरें काम से काम 10% मासिक है जिसको लेने वाला व्यक्ति अदा करने में अक्षम होता है और फिर अपराधी, पुलिस व सूदखोरों के गुंडे अपने पौरुष बल के ऊपर वसूली करते हैं. हंटरों से पिटाई, पकड़ कर गुप्त गोदामों में बंधक बनाना व घर के अन्दर बंद कर घरेलू काम लेना प्रमुख है. 
            मोदी व विभिन्न प्रदेशों में भाजपा शासित सरकारें इस दिशा में कोई कदम उठाने को तैयार नही हैं और पहले से बने साहूकार अधिनियम जैसे कानूनों को दरकिनार कर दिया गया है. जिससे आर्थिक रूप से कमजोर तबकों का जीना हराम हो गया है और वह दास प्रथा की तरफ वर्तमान सामाजिक व्यवस्था को ले जा रहे हैं. 

रणधीर सिंह सुमन 

गुरुवार, 6 अप्रैल 2017

काले कानून से न्याय तंत्र को ख़त्म करने की साजिश

देश में लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था को संचालित करने के कार्य में अधिवक्ताओं की महत्वपुर्ण भूमिका होती है. अधिवक्ताओं द्वारा देश की जनता को न्याय दिलाने में एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी करनी होती है लेकिन विधि आयोग कि सिफारिशों को मानते हुए केंद्र सरकार विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित अधिवक्ता अधिनियम (संशोधन) विधेयक 2017 को तैयार किया है जो सीधे तौर पर देश के अन्दर विभिन्न न्यायालयों में काम करने वाले 14 लाख अधिवक्ता प्रभावित होंगे जिससे पूरी की पूरी न्याय व्यवस्था को खतरा हो गया है.  प्रस्तावित विधेयक की कुछ प्रमुख बातें : काम में लापरवाही करने, अनुशासन तोड़ने पर वकीलों पर कार्रवाई होगी, वकीलों को उपभोक्ता आयोग द्वारा तय नियमों के मुताबिक मुवक्किलों को हर्जाना देना होगा, जज या कोई भी न्यायिक पदाधिकारी लापरवाही व अनुशासनहीनता पर वकील का लाइसेंस रद कर सकता है, हड़ताल करने पर वकील पर कार्रवाई या जुर्माना हो सकता है, राज्य बार काउंसिल के आधे से ज्यादा सदस्य उच्च न्यायालयों द्वारा नामित किए जाएंगे। इन सदस्यों में डॉक्टर, इंजीनियर, बिजनेसमैन आदि होंगे, बीसीआइ के सदस्य के लिए कोई चुनाव नहीं होगा, सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, केंद्रीय निगरानी आयुक्त, चार्टर्ड अकाउंटेंट के अपीलीय पदाधिकारी के द्वारा बीसीआइ के आधे से अधिक सदस्य नामित किए जाएंगे। 
               इस तरह से अधिवक्ता की स्वतंत्रता को अप्रत्यक्ष रूप से सरकार छीनने की कोशिश कर रही है. इस तरह के संसोधनो से अधिवक्ता पूरी तरह से न्यायिक अधिकारीयों की गिरफ्त में आ जायेगा और वह अपनी बात को स्वतंत्रता पूर्वक रखने में असमर्थ होगा. बार कौंसिल का चुनाव न कराकर सरकार अपने पिट्ठू लोगों को नामित कर न्याय व्यवस्था को तथा अधिवक्ताओं को नियंत्रित कर तानाशाही की दिशा में देश को ले जाना चाहती है. 
        सरकार न्यायपालिका में न्यायिक अधिकारीयों की नियुक्ति ही नही कर रही है. जिसके कारण से वादों की संख्या बढती जाती है. नित्य नए कानून सरकार बनाती है लेकिन उन कानूनों को लागू करने के लिए न्यायिक तंत्र को विकसित नहीं करती है जिससे वादों की संख्या बढती जाती है और जब आज वादों का निस्तारण तेजी से नहीं हो रहा है तो उसका ठीकरा अधिवक्ताओं के सर पर फोड़ा जा रहा है.  एक तरफ देश की तमाम हाईकोर्ट न्यायिक अधिकारियों, या जजों की कमी का रोना रो रही हैं और इनमें उच्च न्यायालयों में करीब दो करोड़ और 80 लाख मुकदमें लंबित हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट इस मामले में थोड़ी उपलब्धि हासिल करता दिखाई पड़ रहा है।
     देश की उच्चतम न्यालाय में साल 2002 के मुकाबले साल 2016 में भर्तियों में दो फीसदी का इजाफा हुआ है। साल 2002 में उच्चम न्यायालय में नौकरियां 20 से 22 फीसदी हो गई है। बता दें कि उच्च न्यायालयों में 40 फीसदी जजों की कमी है।
       सरकार जब भी कोई कानून बनाए तो कानून बनाते समय ही उस कानून को तोड़ने वाले व्यक्तियों को दण्डित करने के लिए बजट व नए न्यायिक अधिकारीयों की नियुक्ति करे तभी न्याय व्यवस्था सुचारूरूप से चल सकेगी. अधिवक्ताओं को दबाकर नहीं रखा जा सकता है. पूरे न्यायिक तंत्र को संचालित करने का काम अधिवक्ता ही करता है और अगर काले कानूनों द्वारा अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता को छीनने का प्रयास हुआ तो न्यायिक तंत्र समाप्त हो जायेगा.

रणधीर सिंह सुमन
लो क सं घ र्ष !

सोमवार, 20 मार्च 2017

हम कुछ नही कहते हैं --------

 'तपसी धनवंत दरिद्र गृही कलि कौतुक तात न जात कही |'
कलियुग मे तपस्वी धनवान और गृहस्थ गरीब होंगे....यह बात  गोस्वामी तुलसी दास ने लिखी  है तपस्वी को भोग अच्छा लगने लगा और गृहस्थ को योग....विदेशी हमारे यहां योग और अध्यात्म जानने आते हैं और हमारे यहां से लोग विदेश धन कमाने जाते हैं | संत को सरल और सहज जीवन जीने वाला होना चाहिए |..उनके समर्थक  भी गजब हैं...देख रहे किले की तरह अट्टालिका बना कर संत जी हमे त्याग सिखा रहे हैं.....फिर भी होश में नहीं....कोर्ट का सम्मान करते हुए सामने आकर स्वयं अदालत मे हाजिर नही होते है .पथराव,फायरिंग आदि करते  है 
यह अमृतवाणी हमने नहीं प्रकट किया है. अब आप स्वयं देखिए कि यह अमृत वाणी किसकी है.
"जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने से कोई नहीं रोक सका तो मंदिर बनाने से कौन रोकेगा."
  "मूर्ति विसर्जन से होने वाला प्रदूषण दिखता है लेकिन बकरीद के दिन हज़ारों निरीह पशु काटे गए काशी में, उनका ख़ून सीधे गंगा जी में बहा है क्या वो प्रदूषण नहीं था?"
  "यूपी कैबिनेट के मंत्री आजम ख़ान ने जिस तरह यूएन जाने की बात कही है, उन्हें तुरंत बर्ख़ास्त किया जाना चाहिए. आज ही मैंने पढ़ा कि अख़लाक़ पाकिस्तान गया था और उसके बाद से उसकी गतिविधियां बदल गई थीं. क्या सरकार ने ये जानने की कभी कोशिश की कि ये व्यक्ति पाकिस्तान क्यों गया था? आज उसे महिमामंडित किया जा रहा है."
 "जो लोग योग का विरोध कर रहे हैं उन्‍हें भारत छोड़ देना चाहिए. जो लोग सूर्य नमस्‍कार को नहीं मानते उन्‍हें समुद्र में डूब जाना चाहिए."
  "मुस्लिमों की जनसंख्या तेजी से बढ़ना खतरनाक रुझान है, यह एक चिंता का विषय है, इस पर केंद्र सरकार को कदम उठाते हुए मुसलमानों की आबादी को कम करने की कोशिश करनी चाहिए."
 "अगर उन्हें अनुमति मिले तो वो देश के सभी मस्जिदों के अंदर गौरी-गणेश की मूर्ति स्थापित करवा देंगे. आर्यावर्त ने आर्य बनाए, हिंदुस्तान में हम हिंदू बना देंगे. पूरी दुनिया में भगवा झंडा फहरा देंगे. मक्का में ग़ैर मुस्लिम नहीं जा सकता है, वैटिकन में ग़ैर ईसाई नहीं जा सकता है. हमारे यहां हर कोई आ सकता है."
 लव जेहाद' को लेकर  एक वीडियो सामने आया था.  वह कहते कि हमने फैसला किया है कि अगर वे एक हिंदू लड़की का धर्म परिवर्तन करवाते हैं तो हम 100 मुस्लिम लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाएंगे. 
हम कुछ लिखेंगे तो परम आदरणीय, प्रातः स्मरणीय संतमहापुरुषों के भक्त गण अपने मुखार बिंदु से जिस वाणी का प्रकटन करेंगे उसको सुनकर सम्पूर्ण स्त्री जाति शर्मिन्दिगी महसूस करेगी.
           उसके बात भी हम स्वागत करते हैं कि अगर बिहार में नीतीश कुमार शराब बंदी लागू कर सकते हैं तो इस धर्म राज्य में शराब बंदी तुरंत लागू होनी चाहिए. अगर महात्मा गौतम बुद्ध इस देश के महानायक हैं तो उत्तर प्रदेश राज्य में सम्पूर्ण मांसबंदी लागू होनी चाहिए. अगर यह सब नहीं होता है तो गोस्वामी तुलसीदास ने ऊपर जो लिखा है वह सत्य ही है. तुलसीदास लिखते हैं:-
लखि सुबेष जग बंचक जेऊ। बेष प्रताप पूजिअहिं तेऊ॥
उघरहिं अंत न होइ निबाहू। कालनेमि जिमि रावन राहू॥
जो वेषधारी ठग हैं, उन्हें भी अच्छा साधु का सा वेष बनाए देखकर वेष के प्रताप से जगत पूजता है, परन्तु एक न एक दिन वे चौड़े आ ही जाते हैं, अंत तक उनका कपट नहीं निभता, जैसे कालनेमि, रावण और राहु का हाल हुआ. 

रणधीर सिंह सुमन

रविवार, 19 मार्च 2017

वादे मोदी के -इरादे योगी के

उत्तर प्रदेश में 46 मंत्रियों के साथ उग्र हिंदुवत्व के नेता योगी अजय सिंह बिष्ट ने मुख्यमंत्री पद का पदभार संभाल लिया है और आशा की जाती थी. अन्य मुद्दों के अलावा किसान के कर्ज माफ़ी की घोषणा की जाएगी किन्तु किसान कर्जे के सम्बन्ध में या अन्य वादों के सम्बन्ध में कोई भी बात नहीं की गयी है. वादे चुनाव में मोदी के थे और  मोदी प्रधानमंत्री हैं, उत्तर प्रदेश का चुनाव समाप्त हुआ और अब वह गुजरात सहित अन्य राज्यों की तैयारियां शुरू कर दी हैं. वादों से अब उनका कोई सम्बन्ध नही रह गया है. वहीँ, योगी साहब के इरादे भी सत्ता मिलते ही बदल गये हैं. अगर कोई दूसरा दल होता और अल्पसंख्यक समुदाय का सदस्य न जीत कर आता और कोई मंत्री उस समुदाय का बनाया जाता तो तुरंत नागपुर मुख्यालय और उसका प्रचारतंत्र मुस्लिम तुष्टिकरण का राग अलापना शुरू हो जाता लेकिन योगी साहब मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही सबसे पहला काम मुस्लिम तुष्टिकरण के तहत मोहसिन रजा को मंत्रिपद की शपथ दिलाना था. उग्र हिंदुवत्व फायरब्रांड नेता अजय सिंह बिष्ट उर्फ़ आदित्यनाथ ने विश्व हिंदू परिषद के सम्मेलन में कहा कि देश के हर मस्जिद में गौरी-गणेश की मूर्ति विराजमान कर देंगे जैसे उकसावेपूर्ण बयानबाजी के लिए जाने जाते थे अब वह सेक्युलर संविधान के तहत शपथ लेकर नया मुखौटा धारण कर लिया है. गुंडाराज बनाम मंगलराज का नारा देने वाले लोग उच्च आदर्शों और राजनीति के अपराधीकरण के खिलाफ अभियान चलाने वाले अब जब मुख्यमंत्री योगी साहब को चुना जिनके ऊपर कई अपराधिक मुक़दमे विचाराधीन हैं तब यह सब लोग पूर्व में कही गयी बातें भूल गये. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के ऊपर हत्या सहित सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने समेत 11 अपराधिक मुक़दमे हैं.
        गुंडाराज को समाप्त करने का नारा अब सिर्फ जुमला रह गया है. मोदी के वादे सिर्फ कल्पना मात्र हैं वहीँ मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी साहब के इरादे ओस की बूंदों की तरह से गायब हो गये हैं. जब भी किसी दुसरे दल की सरकार बनेगी तब ये वादे और इरादे पुनर्जीवित होंगे. सिर्फ समाज को विघटन की दिशा में ले जाने के लिए ये वाडे और इरादे दिखाई देते हैं. संघ का एजेंडा बहुत धीमी रफ्तार से लागू करने की प्रक्रिया जारी रहेगी जिससे लोग उनके सम्बन्ध में सही बात न जान पाएं. 
  योगी ने सभी मंत्रियों को 15 दिन के अंदर संपत्ति का ब्योरा देने का निर्देश दिया है जैसी बाते कर रहे है जबकि सभी  विधायक चुनाव आयोग को अपनी संपत्ति का ब्यौरा दे  चुके हैविकास का नारा दिया जा है  जनता की आय  विकास होगा या पूंजीपतियों का होगा बात साफ नही की जा रही है केंद्र सरकार कि नीतियों से जनता कि आय घटी है और  अदानी  ,अम्बानियो कि औय में लाखो गुना   बढ़ी है
      वर्तमान सरकार कॉर्पोरेट जगत के रुपयों से चुनी गयी है और जिस तरह से कॉर्पोरेट जगत के इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मडिया ने एक छाया जनता की भलाई का दिखाया है. जनता का भला नहीं होने जा रहा है हाँ अब कॉर्पोरेट सेक्टर की लूट बढ़ेगी बैंक सिर्फ जनता से पैसा जमा कराकर कॉर्पोरेट सेक्टर को देंगे और कॉर्पोरेट सेक्टर उन रुपयों को वापस नही करेगा. मजदूर, किसान, मेहनतकश जनता सिर्फ लुटेगी और लुटेगी इसके अतिरिक्त कोई उपलब्धि नही होगी. 
बेरोजगारी के सवाल पर सरकार का कोई नजरिया नहीं रहेगा जिससे नवजवानों को रोजगार नही मिलेंगे.कॉर्पोरेट सेक्टर की सेवक सरकार सिर्फ कॉर्पोरेट सेक्टर की ही सेवा करेगी. 

रणधीर सिंह सुमन 

शुक्रवार, 10 मार्च 2017

सैफुल्लाह एनकाउंटर फर्जी कहने पर मौलाना आमिर रशदी पर मुकदमा कायम

 सैफुल्लाह के एनकाउंटर को आमिर रशदी ने उसको फर्जी बताया था और कानपुर जाकर अबतक उस केस से संबधित पकडे गये लोगों के परिवारवालों से मुलाकात भी की थी इसलिए राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष आमिर रशदी मदनी के खिलाफ कानपुर में एफआईआर दर्ज की गई है. रशदी पर लखनऊ में हाल में मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला के परिवार वालों को कथित तौर पर भड़काने का आरोप है. उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत चौधरी ने कानपुर में एसएसपी को रशदी के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया था.  वहीँ, उलेमा कौंसिल के दफ्तर पर पुलिस पहुँच कर आमिर रशदी का इंतज़ार कर रही है.

 आमिर रशदी ने कहा कि आतिफ के घर में तीन दिन तक कानपुर के एसपी सिटी किस कानून के तहत पूछताछ कर रहे थे. उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर एसपी सिटी को तुरंत निलंबित नहीं किया गया, तो वो उत्तर प्रदेश को बंद करा देंगे. आमिर रशदी ने ये भी कहा कि सैफुल्ला के पिता बयान बदलना चाहते हैं, लेकिन बहुत दबाव होने की वजह से डरे हुए हैं.
ज्ञातव्य है कि उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि सैफुल्लाह का एनकांउटर फर्जी है। आतंकी सैफुल्लाह नहीं है, आतंकी तो सरकार है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि पुलिस वालों ने सैफउल्लाह को घर के अंदर बंधक बना रखा था।
शुक्रवार दोपहर मौलाना आमिर रशदी मदनी सैफउल्लाह, इमरान और आतिफ के घर पहुंचे। उन्होंने सभी के परिजनों से अलग-अलग बात की। केवल इमरान के घर पर ताला लगा होने के कारण परिजनों से बात नहीं हो सकी। सभी के परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, सैफउल्लाह का एनकाउंटर फर्जी है। आतंकी वह नहीं आतंकी सरकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस वालों ने सैफउल्लाह को घर के अंदर बंधक बना रखा था।
 वहीँ, दूसरी तरफ उत्तर पप्रदेश की जागरूकता की नई मिसाल भी देखने को मिली लखनऊ में हुए आतंकी सैफुल्ला के मुठभेड़ के बाद प्रदेश में  हाई अलर्ट कर दिया गया था। संदिग्धों की तलाश में तेलंगाना एटीएस के चार जवान सिविल ड्रेस में इटावा पहुंचे हुए थे। बताया जा रहा है कि इटावा पुलिस ने तेलंगाना एटीएस के तीन जवानों को संदिग्ध समझकर उन्हे हवालात में डालकर उनकी जमकर धुनाई कर दी। तेलंगाना एटीएस के आईजी तक मामले की जानकारी पहुँचने के बाद यूपी के आला अधिकारियों के हाथ पाव फूले, जिसके बाद उन्हे छोड़ा गया।
इटावा में संदिग्ध आतंकियों की सूचना पर पिछले 15 दिनों से तेलंगाना एटीएस के चार जवान डेरा जमाये हुए थे। बताया जा रहा है कि एटीएस जवानों को ठीक से हिन्दी नहीं आती, जिसके चलते मंगलवार देर रात बाइक सवार तीन जवानों को कुछ स्थानीय लोगों ने शक के आधार पर रोक लिया और उनकी भाषा ना समझ पाने के चलते उन्हे आतंकी समझकर पिटाई कर दी और मामले की सूचना पुलिस को दे दी। जो पुलिस आतंकवादी और एटीएस के कर्मचारी में अंतर नही समझ पाती है वह कानून और व्यवस्था किस तरह से कायम रखती है. वह भी इस उदहारण को देखने के बाद जनता को समझना चाहिए.
मध्य प्रदेश ट्रेन विस्फोट के तुरंत बाद जिस तरह से पुलिस ने कार्यवाई की है, वह अद्भुद है. अभी तक लखनऊ में सर्राफा व्यवसाई के यहाँ हुई लोट का आज तक पता लगाने में असमर्थ है या यूँ कहें कि दिल्ली पुलिस नजीब का आजतक पता नही लगा पायी है.
एग्जिट पोल में भाजपा की सरकार आने की बात आते ही नौकरशाही का भगवाकरण सम्बन्धी विचार पैदा होने शुरू हो गये हैं. एनकाउंटर जब भी कोई होता है तो उसकी स्वत: मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हो जाती है. अगर पुलिस की मुठभेड़ सही है तो मजिस्ट्रेटी जांच क्यूँ की जाती है लेकिन हर मुठभेड़ में मरने वाले व्यक्ति के सम्बन्ध में मजिस्ट्रेटी जांच का प्राविधान है इसलिए आमिर रशदी के ऊपर वाद कायम करने का कोई औचित्य नही है लेकिन आने वाली संभावित सरकार के लिए अपनी अभी से भक्ति साबित करना मजबूरी है. 
          लोकतंत्र में किसी भी घटना या किसी कार्य की जांच की मांग लोकतान्त्रिक व्यवस्था का अंग है और यह किसी तरह से अपराध नही है. अभी कुछ दिन पूर्व भाजपा के स्टार प्रचारक मोदी ने चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए रोड शो बनारस में किया जबकि धारा 144 सीआरपीसी लगी हुई थी पांच व्यक्तियों को एक साथ जाना मना था लेकिन जब कार्यवाई करने की बात आई तो मंदिर दर्शन का नाम देकर प्रशासन ने हाथ खिंच लिए थे.

-रणधीर सिंह सुमन 

बुधवार, 8 मार्च 2017

सैफुल्लाह का बाहरी आतंकी सम्बन्ध नही था


चुनाव की पूर्व संध्या पर मध्य प्रदेश में ट्रेन में विस्फोट, कानपुर में संदिग्ध आतंकियों की धरपकड़, मणिपुर में विस्फोट व लखनऊ में सैफुल्लाह का एनकाउंटर होना यह दर्शित करता है कि सोची समझी रणनीति के तहत आतंकवाद की राजनीति को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए हिस्सा बनाया गया है. 
             कथित आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर की मुख्य बात यह है कि सुबह पुलिस ने सैफुल्लाह से पूछताछ की थी.  पुलिस, ID देखा था और जिस मकान में एटीएस ने यह ऑपरेशन किया है उसके दूसरे किरायेदार अब्दुल कय्यूम और उसके बेटे के बीच झगड़े की सूचना पर पुलिस घटना के पांच घंटा पहले ही आई थी। पुलिस ने यहां आकर पिता और पुत्र के बीच पंचायत की थी और मामले को शांत कराया था। इतना ही नहीं पुसिस ने जाते-जाते दूसरे किरायेदार के कमरे में भी झांक-झांककर देखा था और वहां मौजूद दोनों संदिग्ध आरोपियों से भी पूछताछ की थी।
 दूसरे किरायेदारों का कहना है कि पुलिस ने उनकी आईडी भी देखी थी। कय्यूम ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे बेटे से एक बात को लेकर उनका और उनके बेटे की बीच झगड़ा हो गया था। इसके लेकर उन्होंने पुलिस कंट्रोलरूप को फोन किया। कुछ देर बाद ही पीआरसी मौके पर पहुंच गई। यहां तक की काकोरी थाने से एक दारोगा और सिपाही भी आ गए। कथित एनकाउंटर 7 मार्च को शाम को 4 बजे से प्रारंभ होता है और देर रात ढाई तीन बजे तक चलना यह भी बहुत सारी चीजों को संदिग्ध बनाता है.
        इस बात से यह पुष्टि होती है कि पुलिस उसे पहचानती थी और दुबारा चार बजे पुलिस के पहुँचने पर दरवाजा बंद कर फायरिंग करने लगना यह अपराध शास्त्र के मनोविज्ञान के ही खिलाफ है. 
आर डी निमेष कमीशन ने जब कचेहरी सीरियल बम विस्फोट कांड की जांच की थी तो कमीशन ने यह माना था कि तारिक काशमी व खालिद मुजाहिद आतंकी नहीं थे और उनकी गिरफ्तारी और बरामदगी को फर्जी माना था. कचेहरी सीरियल बम विस्फोट काण्ड में भी उत्तर प्रदेश एटीएस ने बहुत सारे स्वनाम धन्य आतंकी संगठनो से तार जोड़े थे.
वहीँ, "दलजीत सिंह , यूपी,एडीजी, कानून -व्यवस्था ,ने बताया की सैफ़ुल्लाह एंड कंपनी का किसी भी बाहरी आतंकी संगठन से संबंध नहीं था, उनको बाहर से किसी भी किस्म की मदद नहीं मिलती थी। प्रेस कॉंफ़्रेंस में अभी दिया गया यह बयान बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे मीडिया और फेसबुक पर बटुकसंघ का प्रचार खारिज होता है। इसका अर्थ यह है वे आईएसआईएस के साथ जुड़े नहीं थे।" - जगदीश्वर चतुर्वेदी की फेसबुक वाल से
         इस बयान के आने के बाद अब जरूरत इस बात की है कि इन सभी प्रकारों की जांच माननीय उच्च न्यायलय के वर्तमान न्यायाधीश को आयोग का अध्यक्ष बना कर करायी जा.

रणधीर सिंह सुमन

रविवार, 5 मार्च 2017

विदेशों में मोदी का पाप सामने आ रहा है

मोदी की विदेश यात्राओं का फल अब अमेरिका से मिलना शुरू हो गया है और कुछ दिन पूर्व अमेरिका के कनसास में भारतीय इंजीनियर श्रीनिवास कुचिभोटला की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. हत्यारे ने गोली मारने के दौरान चिल्लाकर कहा था 'मेरे देश से निकल जाओ.' 
              अब अमेरिका में एक अज्ञात शख्स ने 39 साल के एक सिख को उसके घर के बाहर गोली मारकर घायल कर दिया. बताया जा रहा है कि हमलावर ने गोली चलाते समय कथित तौर पर कह था- ‘अपने देश वापस जाओ.’ अमेरिकी मीडिया में छपी खबर के मुताबिक यह सिख व्यक्ति शुक्रवार को वॉशिंगटन के केंट शहर स्थित अपने घर के बाहर अपनी गाड़ी ठीक कर रहा था, 
          प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर मोदी ने अब तक 68 देशों कि विदेश यात्राएं की हैं और लगभग हर देश में अनिवासी भारतियों कि सभाओं को संबोधित कर भारत से जुड़ने कि अपीलें कर रहे थे. देश क अन्दर अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणापद प्रचार उनके सत्ता को चलाने का एक हिस्सा है वहीँ उनके तथाकथित अभिन्न मित्र ट्रम्प अपने चुनाव प्रचार में भारतीय या दूसरे देशों क रहने वाले अनिवासियों के खिलाफ घृणापद प्रचार चला रहे थे. जिससे अमेरिका सहित विभिन्न देशों में रहने वाले अनिवासियों को वहां रहना मुश्किल हो रहा है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अंतर्राष्ट्रीय शाखा अनिवासी भारतियों से चंदा वसूल-वसूल कर यहाँ भेजती है और उसी चंदे से देश के अन्दर अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणापद प्रचार अभियान चलाया जाता है. मोदी ने विदेशों में जाकर अनिवासी भारतीयों को एक मंच पर लाकर देश से जुड़ने कि बड़ी-बड़ी अपीलें की थीं जिससे उन नागरिकों की निष्ठा उस मुल्क में संदिग्ध होना शुरू हो गयी थी. 
            इससे पूर्व कि सरकारें अनिवासी भारतीयों को उस देश का नागरिक मानते हुए उसी देश के प्रति निष्ठा बनाए रखने कि नीति को कायम रखा था लेकिन मोदी ने उस नीति को परिवर्तित कर सम्पूर्ण अनिवासी भारतीयों की उस देश के प्रति निष्ठावान रहने की स्तिथि को बदल दिया. सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर नागपुर मुख्यालय ने जो प्रचार अभियान विदेशों में चलाया है उससे विदेशों में रहने वाले अनिवासी भारतीयों के प्रति एक घृणा का माहौल पैदा हो गया है. 
         बगैर किसी नीति के मोदी के मन में जो भी आता है करने लगते हैं उसके दुष्परिणाम वह समझते नहीं हैं या जानबूझकर उसकी अनदेखी करते हैं. मुख्य बात यह भी है कि उन्हें अच्छी तरह से अंग्रेजी  नहीं आती है जिसके कारण वह कई बार परेशान हो जाते है कि, किस तरह बातें करना है और कैसे उन्हें जवाब देना है  इसलिए नागपुरी प्रचार कि भाषा इस्तेमाल  करना उनके आसन पड़ता है 
                           मोदी ने विदेश नीति के नाम पर नागपुर मुख्यालय की विषाक्त विचारधारा का जो प्रचार विदेशों में किया है वह उनके पाप हैं जिसकी सजा अनिवासी भारतीयों ने विदेशों में भुगतना शुरू कर दिया हैं. यह लोग यह नहीं सोचते हैं कि अगर अपने देश में रहने वाले दुसरे धर्मों के मतावलंबी या विचारधारा के आधार पर अंतर्राष्ट्रीयतावाद में यकीन करने वाले लोगों के ऊपर नागपुरी मुख्यालाय जब हमला करता है तब  अनिवासी भारतीयों का क्या होगा. पाप कोई करे सजा कोई भुगते.

रणधीर सिंह सुमन 

गुरुवार, 5 जनवरी 2017

झूठों के सरदार और उनकी पार्टी

संसदीय चुनाव के समय वर्तमान शासक दल ने अपने चुनावी पोस्टरों में हांगकांग की सड़कों से लेकर शिबली नोमानी कॉलेज के छाया चित्रों को इन्टरनेट से उठाकर इस्तेमाल किया था. चुनाव के समय ही इनके झूठ खुलने शुरू हो गए थे. गुजरात मॉडल का नारा इनके झूठ की पराकाष्ठा थी. गोविल्स का झूठ चल निकला और केंद्र में वह सत्तारूढ़ हो गए. आज तक की स्तिथि यह है कि सत्तारूढ़ दल के  हिस्से में एक भी उपलब्धि नहीं आई है और नोटबंदी के बाद सियार के ऊपर से शेर की खाल भी उतर गयी है या यूँ कहिए विष्णु शर्मा की कहानी रंगा सियार जो पंचतंत्र में संकलित है का सियार हुवां-हुवां जब करने लगता है तब वन्यजीव जगत की आँखें खुल जाती हैं. भारतीय अंधभक्तों की परंपरा में आज जब हुवां-हुवां हो रहा है तो भी आँखें नहीं खुल रही हैं. 
           अभी ताज़ा झूंठ का पर्दाफाश हुआ है , वह यह है कि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार को एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है. पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार की कोशिशों से भारत के मोस्ट वांटेड क्रिमिनल दाऊद इब्राहिम की यूनाइटेड अरब अमीरात स्थित 15,000 करोड़ की संपत्ति को ज़ब्त कर लिया गया है.
 बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने बुधवार को एक ट्वीट कर इसे प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति का मास्टर स्ट्रोक क़रार दिया गया. वहीँ, भारतीय सीमा पर उसकी विफलता जग-जाहिर है, विदेश नीति पूरी तरह से असफल है और जिसके कारण सीमा पर हमारे जवान मारे जा रहे हैं और हम शहीद घोषित करने के अतिरिक्त कुछ कर नहीं पा रहे हैं.
 वहीँ, दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है. इस तरह से झूंठ पर झूंठ बूल कर चेहरे पर चमक लाने कि कोशिश अब कामयाब नहीं होनी चाहिए लेकिन अगर उसके बाद भी पांच राज्यों के चुनाव में रंगे सियार की हुवां-हुवां को जनता ने न सुना तो इससे बड़ा चमत्कार या आश्चर्यजनक चीज दुनिया में नहीं हो सकती है. यह सरकार असफलताओं की सरकार है.

सुमन

सोमवार, 2 जनवरी 2017

हवा और हवाई झूठे विकास की अम्मा

झूठों के सरगना  ने  उवाच किया कि उत्तर प्रदेश के विकास की है, जिसका पिछले 14 सालों से वनवास हो गया है.”यह बात  पूर्णतः  गलत है गुजरात का विकास इस तरह किया है कि शिक्षा  रोजगार  स्वास्थ्य   सडक  परिवहन आदि मामलों में उसका  कोई  नंबर ही नहीं है  चुनाव के समय  चीन की सड़कों को  विज्ञापित कर जनता के साथ छल किया गया था

मोदी ने एक बार फिर ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा बुलन्द करते हुए प्रदेश की जनता का आह्वान किया कि वह जात-पात और अपने-पराये की भावना से उपर उठकर विकास के लिये बीजेपी को वोट दे.विकास दो सालों में इस किया कि  नोट बंदी करने लगे और लाखों लोगों का  रोजगार छिन गया   किसान  बर्बाद हो गया  यह  देश  फर्जी तरीके से स्वर्ग की संज्ञा  देते  रहे और जनता  देश के अंदर और  सेना के जवान  सीमा पर  स्वर्गवासी  हो रहे हैं  जिंदा रहने पर  भूखों  मर जाऊ मरने के बाद  स्वर्ग  मिलेगा  संसदीय  चुनाव के समय यह सब झूठ बोल कर  सत्ता  हथिया लिए है  योजना विचार  विहीन  बुद्धि  विहीन  विकास के  मंत्र का जाप तो  करा सकते हैं  लेकिन विकास कर ही नहीं  सकते हैं

मैं कहता हूं कालाधन हटाओ, वो कहते हैं मोदी हटाओ  इस मामले में भी सबसे ज्यादा लोग  भारतीय  जनता पार्टी के लोग  नई नोटों के साथ पकडे गए हैं और  मोदी  साहब  स्वयं काले धन से आयोजित  सभा को संबोधित कर रहे थे
साफ-साफ नजर आ रहा यूपी में हवा का रुख विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में में संभावित उम्मीदवारों ने   लाखों रुपये खर्च कर लोगों को  लखनऊ ठहलाने आए थे  जिसको मोदी  बदलाव की  हवा बता  रहे थे                           गन्ना के संबंध में प्रधानमंत्री  और ग्रहमंतरी  के बयान आपस में  परस्पर विरोधी हैं   उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में   मोदी की  सभा में झूठ बोलने की  अंताक्षरी प्रतियोगिता  चल रही थी     किसान  मजदूरों   तथा  मेहनतकश  जनता की गाढी कमाई को  छीन कर  अडानी  अंबानी  जैक  मा को  सौंपने वाले  प्रधान  सेवक जनता का खून  निकलवा कर  बेच  सकते हैं  जनता से  यह कहेगे कि शरीर में इतने खून की कोई जरूरत नहीं है  ख़ून  निकल जाने  से  वजन  हल्का हो  जाएगा
सुमन 
लोकसंघर्ष

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