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रविवार, 17 फ़रवरी 2019

पाकिस्तान के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को समाप्त कर आर्थिक हड्ड़ी तोड़ने का काम करें सरकार-रणधीर सिंह सुमन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा सेनपुरवा में आयोजित की गयी श्रद्धाजंलि सभा

बाराबंकी। पुलवामा में अर्द्ध सैनिक बलो को सच्ची श्रद्धाजंलि यही होगी कि सरकार पाकिस्तान के साथ व्यापारिक सम्बन्धों को तुरन्त समाप्त कर पाकिस्तान की आर्थिक रीढ़ की हड्ड़ी तोड़ने का काम करें। उक्त विचार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पुलवामा मे अर्द्ध सैनिक बलो के जवानो की शहादत पर ग्राम सेनपुरवा बंकी में आयोजित श्रद्धाजंलि सभा को सम्बोधित करते हुये राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कही। श्री सुमन ने आगे कहा कि नौजवानो की शहादत से पूरा देश शहीद नौजवानों के साथ खड़ा है। लेकिन कुछ साम्प्रादायिक शक्तियां देश की एकता और अखण्ड़ता को कमजोर करने के लिये राजनीत कर रही है। जिसकी हम सब निंदा करते है। श्रद्धाजंलि सभा को सम्बोधित करते हुये पार्टी जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि शहीद होने वाले नौजवान हमारे घरो के हैं। जो मजदूर, किसान घरो से आते है। उनको पेशन तक नही दी जा रही है। सरकार को चाहिये कि पेशन सुविधा बहाल करते हुये अन्य सुविधा प्रदान करे। जिला सह-सचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि जिस तरह मजदूर और किसान के हालात अच्छे नही है। उसी तरह अर्द्ध सैनिक बलो को जो सुविधाये मिलनी चाहिये नही मिल पा रही है। श्रद्धाजंलि सभा को प्रवीन कुमार, किसान सभा अध्यक्ष विनय कुमार सिंह, मुनेश्वर बक्श वर्मा ने भी सम्बोधित किया। सभा की अध्यक्षता पूर्व प्रधान अरुण वर्मा ने की। सभा में महेन्द्र यादव, रामनरेश, जैनुल आबदीन, मयूर सिह, गिरीश चन्द्र वर्मा, परमेन्द्र वर्मा, अशोक मौर्य, वीरेन्द्र कुमार वर्मा, कुलदीप, ताराचन्द्र, अशोक कुमार राव, आशुराम, अनुपम वर्मा, नन्हेलाल, रामविलास वर्मा, आदि मौजूद रहे। सभा के पूर्व 2 मिनट का मौन रख शहीदो को श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। 

मंगलवार, 8 जनवरी 2019

चौकीदार-चोर गिरोह की विदाई जनता तय कर रही है


बाराबंकी। चौकीदार-चोर-पेटकटवा गिरोह ने बैंक,बीमा बिजली सरकारी कर्मचारी संविदा कर्मचारी आशाबहू शिक्षामित्र आंगनबाड़ी पंचायत मित्र सहित संगठित और अंसगठित मजदूरों की तनख्वाहों में बढोत्तरी न करके कटौती की है इस तरह से आम जनता को भरपूर रोटी न मिल सके जिससे न वह जिन्दा रह सके न मर सके। 
यह बात भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित जिला अधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा  कि चौकीदार-चोर गिरोह की विदाई जनता मन में तय कर चुकी है इनके पास सी0 बी0आई0 के अलावा कोई अस्त्र नहीं है जो विरोध के स्वर को दबा सके। पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा मॅहगाई आसमान छू रही है सरकार गौशाला खोलने का नाटक कर रही है। क्या गौशाला में साँड़ और नीलगाय व बन्दरों को भी बन्द किया जायेगा। 
पार्टी के सहसचिव ड़ा0 कौसर हुसैन ने कहा कि किसानों की हालत दयनीय है और 2014 से सरकार ने उनकी बेहतरी के लिए कोई कार्य नहीं किया है वही पार्टी के सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि सरकार आरक्षण को हथियार बनाकर सत्ता में आने का जो ख्वाब देख रही है वह मात्र सरकार की जुमलेबाजी हैं। जब नौकरियां ही नहीं है तो आरक्षण कहाँ देगी सरकार?
किसान सभा के जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि राफेल घोटाले से लेकर बैंक घोटालों में सत्तारूढ़ दल का हाथ है इन घोटालों की वजह से देश की अर्थ व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई है। 
प्रदर्शन में गिरीशचन्द, रामनरेश, प्रवीनकुमार, दलसिंगार, मुनेश्वरबक्स, राजेन्द्र बहादुर सिंह एडवोकेट, विनीतकुमार वमार्, अभिषेक वमार्, जैनुल आबदीन, सुरेश यादव ,वीरेन्द्र कुमार, महेन्द्र, राजेश सिंह, रमेश सिंह, दिग्विजय सिंह, मुशाहिद अली, जियालाल वर्मा , सत्यवान, अमर सिंह परमेन्दर वर्मा विनोद कुमार यादव आदि प्रमुख कम्युनिस्ट नेता शामिल थे।

मंगलवार, 20 नवंबर 2018

चोर ही चौकीदार है


राफेल घोटाला, नोटबन्दी घोटाला, जी0एस0टी0 घोटाला और अब सी0बी0आई0 जैसी संस्था को नष्ट कर मोदी देश को दिवालिया बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
‘चोर ही चैकीदार’ है, ‘नारे के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेे जुलूस निकाला जुलूस में  शामिल लोगों को सम्बोधित करते हुए पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह ‘सुमन’ ने यह उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक आफ इण्डिया को डरा धमकाकर 3.6 लाख करोड़ रूपये लेकर अपनी विदेेश यात्राओं  के मद में  खर्च कराना चाह रहे हैं।

पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि पाटी मोदी के भ्रष्टाचारों  का खुलासा करने के लिए बराबर जुलूस प्रदर्शन कर रही है वहीं क्षेत्रीय दल मोदी की मदद के लिए चुप्पी साध रखी है यह देश के लिए खतरनाक सन्देश है। पार्टी के सहसचिव डा0 कौसर हुसेन ने कहा कि सत्तारूढ़ दल अपने भ्रष्टाचारों  को छिपाने के लिए मन्दिर राग अलाप रही है उसको मन्दिर-मस्जिद से कोई लेना-देना नहीं है। सहसचिव शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि योगी सरकार किसानों  की धान खरीद मामले में असफल हो चुकी है और किसानों  का धान विचैलिए बारह सौ रूपये कुन्तल खरीद रहे हैं सरकार विचैलिए को फायदा देने के लिए धान खरीद की नौटंकी कर रही है।
किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि किसान समस्याओं  लेकर 29 व 30 दिसम्बर को दिल्ली प्रदर्शन करेगी जिसमें  जिले से काफी संख्या में किसान जायेंगे.
                    जुलूस में राम नरेश वर्मा, दल सिंगार, गिरीश चन्द, अमर सिंह प्रधान, मुनेश्वर बक्स, प्रवीन वर्मा, महेन्द्र यादव, अशोक मौर्य, परमेन्द्र वर्मा, नवीन वर्मा, सहदेव वर्मा, रामविलास, आशीष शुक्ला, राजेन्द्र, बहादुर सिंह, करमवीर सिंह, सरदार भूपेन्द्र पाल सिंह अधिवक्ता गिरीश चन्द, गौरी रस्तोगी आदि प्रमुख कार्यकर्ताओं  ने हिस्सा लिया।

मंगलवार, 25 सितंबर 2018

चोर चौकीदार और भगवा कसाईखाना: भाकपा का जुलुस

गली-गली में शोर हैं चौकीदार ही चोर हैं या भगवा कसाई खाना बंद करो जैसे नारे लगाते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जलूस निकाला। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य परिषद के सदस्य रणधीर सिंह  सुमन ने सम्बोधित करते हुए कहा कि नरेन्द्र दामोदर मोदी ने राफेल घोटाले में कमीशन खाया है और सरकार को क्षति पहुंचाने के लिए एच.ए.एल (HAL) को ठेका न दिलवा कर 2019 का चुनाव लड़ने के लिए अपने मालिक से चुनावी चंदा प्राप्त कर लिया है.
            पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन  वर्मा ने कहा कि भगवा पुलिस भगवा कसाई खाने के रुप में तब्दील हो गई है और एक समुदाय विशेष के लोगों को पकड़  कर अलीगढ़ से लेकर बाराबंकी तक एनकाउंटर के नाम पर वध कर रही है. पार्टी के जिला सहसचिव डॉ कौसर हुसेन ने कहा कि मोदी सरकार को हटाने के लिए कम्युनिस्ट पार्टी 2019 तक आन्दोलन चला कर संघर्ष करेगी। पार्टी के जिला सहसचिव शिवदर्शन वर्मा ने कहा कि इस सरकार में किसान आत्महत्याएं कर रहा है, किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है वहीं अधिकारी बाढ राहत घोटाला करके मालामाल हो रहे हैं.
              प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह दलसिंगार व गिरीश चन्द्र कर रहे थे. प्रदर्शन में अमर सिंह प्रधान, मुनेश्वर बक्श, रामनरेश वर्मा, प्रवीण कुमार, महेंद्र यादव ने कहा वीरेंद्र कुमार, अशोक मौर्य, सहजराम, सुरेश रैना, दिनेश रावत आदि प्रमुख कम्युनिस्ट नेता शामिल शामिल थे.



सोमवार, 10 सितंबर 2018

राफेल कमीशन को वापस करे मोदी

बाराबंकी। पेट्रोल, डीजल, गैस के दामो मे वृद्धि व राफेल घोटाले मे मोदी द्वारा कमीशन खाये जाने के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओ द्वारा शहर मे जुलूस निकाल कर भारत बन्द का समर्थन किया गया। पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर िंसह सुमन ने कहा कि मोदी द्वारा राफेल मे कमीशन खाया है उसे वापस लिया जाये। पेट्रोल, डीजल, गैस के दाम बाजार मूल्य पर बेचा जाये। किसानो के समस्त कर्जे माफ किये जाये। बैक लुटेरो का गिरोह शाह-संघी गिरोह को बन्द कर रासूका लगाया जाये। जुलूस में सचिव बृजमोहन वर्मा, सहसचिव डा0 कौसर हुसैन, शिव दर्शन वर्मा, विनय कुमार सिंह, प्रवीण कुमार, विनोद कुमार यादव, गिरीश चन्द्र, वीरेन्द्र कुमार, अमर सिंह, अशोक, रामनरेश, दलसिंगार, सत्यवान आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रविवार, 2 सितंबर 2018

फर्जी मुकदमों का मुंहतोड़ जवाब सड़कों पर दिया जाएगा

डॉ कौसर हुसैन बोलते हुए
सरकार अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए कवि लेखक पत्रकार अधिवक्ताओ व सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी कर रही है. सरकार का यह कार्य गोरे अंग्रेजों को स्थापन्न कर लोकतंत्र में काले अंग्रेजों द्वारा देश को तानाशाही की ओर ले जाने वाला कदम है.
           भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कौंसिल की बैठक को संबोधित करते हुए राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिह सुमन कहा कि चुनावों से पूर्व सरकार लोगों को फर्जी मुकदमों में बंद करने की तैयारी कर रही है जिसका मुंहतोड़ जवाब सड़कों पर दिया जाएगा. पार्टी के जिला सचिव  बृजमोहन वर्मा ने कहा कि वर्तमान सरकार अपने किसी वादे को पूरा करने में असमर्थ साबित हुई है.
उपस्थित श्रोता
  सहसचिव डॉ कौसर हुसैन ने कहा कि सरकार धर्म की आड़ में गरीब मजदूरों और किसानों की सम्पत्ति को लूट कर पूंजीपतियों को दे रही है. किसान सभा के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि सरकार के लोकतंत्र विरोधी कार्यो का जवाब दिया जाएगा. सहसचिव शिव दर्शन वर्मा ने कहा कि पार्टी शीघ्र ही किसानों की समस्याओं को लेकर आन्दोलन करेगी.
जिला कौंसिल में प्रवीन कुमार मुनेश्वर वर्मा रामनरेश वर्मा वीरेंद्र वर्मा दलसिंगार अमर सिंह गुड्डू अवधेश आनंद प्रताप सिंह ताराचंद रामचंद आदि प्रमुख लोग थे

बुधवार, 11 अप्रैल 2018

समाजवादी समाज के निर्माण के लिए समर्पित भाकपा

भारत की भूमि पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना सम्मेलन उत्तर प्रदेश के कानपुर में 90 साल पहले 26-28 दिसम्बर, 1925 को सम्पन्न हुआ था। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के केन्द्रीय सचिव मंडल सदस्य रहे तथा वर्षों तक गहन अनुसंधान के बाद कई खंडों में प्रकाशित पार्टी इतिहास का सम्पादन करने वाले डॉ. गंगाधर अधिकारी ने ‘डाक्युमेंट्स ऑफ दि हिस्ट्री ऑफ दि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया’ के द्वितीय खंड (1923-1925) में लिखा है कि सबसे पहले कानपुर बोल्शेविक षड्यंत्र केस में गिरफ्तार कम्युनिस्ट गुटों के नेताओं ने, विशेषकर कॉ. एस.ए. डांगे को ऐसा सम्मेलन कराने का विचार आया था। कम्युनिस्ट रहे एस. सत्यभक्त ने इंडियन कम्युनिस्ट पार्टी के सचिव के नाम पर जारी एक परिपत्र द्वारा देश के विभिन्न शहरों में कार्यरत कम्युनिस्ट गुटों के सदस्यों तथा उन सभी को जिनको पार्टी के कार्यों पर विश्वास था, आग्रह किया था कि वे सभी कानपुर में 26 से 28 दिसम्बर, 1925 को आयोजित इस सम्मेलन में भाग लें। 20 सितम्बर, 1925 को हुई बैठक में इस सम्मेलन के लिए स्वागत समिति का गठन किया गया। उसके अध्यक्ष बने मौलाना हसरत मोहानी और सचिव गणेश शंकर विद्यार्थी। ब्रिटिश कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में वहाँ के पार्लियामेंट में चुने गए एक भारतीय कॉ. शापुरजी सकलतवाला को सत्यभक्त ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने का आमंत्रण पत्र भेजा था। उनके असमर्थता जताने पर मद्रास के कम्युनिस्ट नेता कॉ. सिंगारावेलु चेट्टीयार को अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया गया। कॉ. सकलतवाला द्वारा भेजे गए संदेश को सम्मेलन में पढ़कर सुनाया गया। कॉ. सिंगारावेलु ने अपने अध्यक्षीय भाषण में पढ़ा-ऐसे समय जबकि कम्युनिज्म के विरोधी लोग इस धरती पर बसने वाले सभी मनुष्यों के लिए दुनिया को ज्यादा से ज्यादा खुशहाल और सुख-सम्पन्न बनाने वाले हमारे लोकोपकारी आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रहे हैं, भारत के हम कम्युनिस्ट भारत की राजनैतिक और आर्थिक स्थिति पर सामान्य रूप से विचार करने आज इस हॉल में एकत्र हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि इस सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्शों के माध्यम से हमारे देशवासी और हमारे शासक दोनों ही हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन को अच्छी तरह समझेंगे तथा हम अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं कि सामान्य जनता, खासकर उद्योग-धंधों और कृषि क्षेत्रों के मजदूर, जिनके लाभ के लिए ही यह सम्मेलन हो रहा है, हमारे कार्यों का भली-भाँति मूल्यांकन करेंगे।
    के.मुरुगेसन और सी.एस. सुब्रह्मण्यम द्वारा लिखित, ‘सिंगारावेलु दक्षिण भारत में कम्युनिज्म के अग्रदूत’ अंग्रेजी पुस्तक जिसका हिन्दी अनुवाद श्री कन्हैया द्वारा किया गया, उसे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की 50वें वर्षगाँठ के अवसर पर पीपुल्स पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित की गई थी। उसे पढ़ने से हम जान पाते हैं कि, सिंगारावेलु दक्षिण में कम्युनिज्म के जनक थे। वे अपने कम्युनिस्ट विचारों को मजदूर-वर्ग के संघर्षों के प्रत्येक कार्य क्षेत्र में, कांग्रेस के आत्मगौरव आंदोलन में और नागरिक मामलों में भी लागू करते थे। 1860 में मद्रास के एक मछेरे परिवार में जन्मे सिंगारावेलु ने कानून की डिग्री हासिल की और हाईकोर्ट में वकालत की। 1902 में इंग्लैंड की यात्रा कर वहाँ विश्व बौद्ध सम्मेलन में भाग लिया। जब वह भारत लौटकर आए, तो उनके घर में ही महाबोधि सोसायटी की बैठक होने लगी। बाद में वे रूस की 1905 की क्रांति के समाचार से प्रेरित हुए, जलियांवाला बाग हत्याकांड और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए गांधीजी के आह्वान के बाद मद्रास शहर में नौजवानों के एक दल का नेतृत्व करना शुरू किया। उन्होंने 1922 में कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में गया-अधिवेशन में भी भाग लिया। सिंगारावेलु ने 1923 में मद्रास में हिन्दुस्तान मजदूर-किसान पार्टी की स्थापना की और मद्रास नगर में मई दिवस सभा का आयोजन किया। इतिहास में भारत में आयोजित पहला मई दिवस वही था। दैनिक समाचार पत्र कीर्ति के अनुसार कानपुर में आयोजित कांग्रेस पार्टी के
अधिवेशन पंडाल के पास ही सड़क के दूसरी तरफ विशेष रूप से बनाए गए अस्थायी सभागृह में कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में 300 से ऊपर प्रतिनिधि उपस्थित थे। 25 दिसम्बर को सम्मेलन उद्घाटन अधिवेशन हुआ था। 26 दिसम्बर की शाम को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की विधिवत स्थापना का प्रस्ताव भी था। 27 दिसम्बर को पार्टी संविधान पारित किया गया और केन्द्रीय कार्यकारिणी समिति व पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। महाराष्ट्र, बंगाल, लाहौर, उत्तर प्रदेश, पंजाब व मद्रास के कम्युनिस्ट गुटों के प्रतिनिधि शामिल थे। मुजफ्फर अहमद द्वारा 1969 में बंगाली में लिखित पुस्तक अमार जीवन आर. भारतेर कम्युनिस्ट पार्टी के मुताबिक इस सम्मेलन से एस.व्ही. घाटे और जानकी प्रसाद बगरेहट्टा संयुक्त महासचिव चुने गए और घाटे को बम्बई केन्द्रीय कार्यालय संचालन की जिम्मेदारी दी गई। पार्टी का 11 सदस्यीय केन्द्रीय कार्यकारिणी का भी चुनाव हुआ, जिसमें से एक थे कॉ. मुजफ्फर अहमद। बाद में कॉ. मुजफ्फर अहमद ने उसी पुस्तक में, जिसे पार्टी का 1964 में विभाजन के बाद 1969 में लिखा गया था, लिखा कि कानपुर में कम्युनिस्ट सम्मेलन एक बच्चों का खेल था और वे इसे एक शर्मनाक घटना मानते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना कानपुर में 26 दिसम्बर 1925 को नहीं, बल्कि ताशकंद में एम.एन. राय के नेतृत्व में 17 अक्टूबर, 1920 को 7 सदस्यों की एक बैठक आयोजित की गई थी। 1964 में बनी सीपीआई (एम) के नेताओं ने उनकी पार्टी का कलकत्ता में सम्पन्न सप्तम पार्टी कांग्रेस (31 अक्टूबर से 7 नवंबर, 1964) में सीपीआई (एम)  के जिस पार्टी कार्यक्रम को पास करवाया गया, उसकी भूमिका में लिखा गया कि सन् 1920 में कम्युनिस्ट पार्टी का गठन हुआ और 1920 के दशक में पार्टी गठित होने के बाद पार्टी गैरकानूनी घोषित हो गई। सीपीआई (एम) के स्थापना वर्ष को 1920 दर्शाते हुए उस पार्टी ने अपने को सीपीआई से अलग दिखाने का प्रयास ही नहीं किया, बल्कि सन 2014 में सीपीआई से अलग होने का 50वीं वर्षगाँठ मनाते हुए इस बात की बहुत खुशी जाहिर की कि उनकी पार्टी को सीपीआई के संशोधनवाद से मुक्ति मिली थी। वहीं अपने लक्ष्य के बारे में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा, पार्टी ऐसे न्यायपूर्ण समाजवादी समाज के लक्ष्य के लिए दृढ़तापूर्वक समर्पित है जो हर किस्म के शोषण और वर्ग, जाति एवं लिंग अंतरों के कारण पैदा होने वाले सामाजिक उत्पीड़न को समाप्त करने के लिए रास्ता साफ करेगी। पार्टी ऐसे समाजवादी समाज के निर्माण के लिए समर्पित है, जिसमें मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण अंततः समाप्त हो जाएगा। तमाम मतांध और मात्र सिद्धांतवादी एवं मताग्राही सोच एवं संशोधनवादी रूझानों को अस्वीकार करते हुए, पार्टी एक ऐसे नये समाजवादी समाज के लिए रास्ते की रूपरेखा तैयार करने के लिए भारत की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुसार मार्क्सवादी लेनिनवाद के विज्ञान को लागू करेगी। यह रास्ता सामने उपस्थित विशिष्ट ऐतिहासिक परिस्थितियों और साथ ही हमारे स्वयं के देश की विशेष विशिष्टताओं एवं लक्षणों, इसके इतिहास, परंपरा, संस्कृति, सामाजिक बनावट एवं विकास के स्तर से तय होगा। यह किसी मॉडल पर आधारित नहीं होगा। यह अद्वितीय और विशेषतः इस 21वीं सदी में समाजवाद का भारतीय रास्ता होगा। मुख्य तत्व है उत्पादन के मुख्य साधनों का समाजीकरण। सीपीआई के राजनैतिक प्रस्ताव-2015 में कहा गया कि, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दृढ़तापूर्वक विश्वास करती है कि अपनी समृद्ध विरासत के साथ जनता के उद्देश्यों के लिए संघर्ष और अभियान से समाजवादी समाज के लिए पथ प्रशस्त करके एक जनविकल्प का निर्माण होगा। समाजवादी हमारा भविष्य है।

-चित्तरंजन बक्शी
लोकसंघर्ष पत्रिका अप्रैल 2018 विशेषांक में प्रकाशित

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

योगी सरकार की नीतियों के कारण किसान ठंडक में खेतों में सोने को मजबूर

भाकपा कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियो के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन
ठंड़क भरी रात में फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं किसान - रणधीर सिंह सुमन
 
बाराबंकीं। प्रदेश मे योगी सरकार के आने के बाद आवारा पशुओ की संख्या उनकी नीतियो के कारण बढ़ गई है। जिससे खेती किसानो करने वाले लोग अपनी फसलो को बचाने के लिये ठड़क भरी रातो में खेत की रखवाली करने को मजबूर है। उसके भी बावजूद लगभग 50 प्रतिशत फसले आवारा पशुओ द्वारा नष्ट की जा चुकी है। योगी इस विकराल समस्या का समाधान करने मे असमर्थ है। प्रदेश मे पूर्व की सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रो मे सबको बिजली मिले इसके लिये विद्युत दरो को कम करके रखा था। लेकिन वर्तमान सरकार ने अत्याधिक बिजली दामो को बढ़ा दिया है। जिससे गरीब आदमियो को विद्युत कनेक्शन जारी रखना दुर्भर हो गया है। उक्त बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने विरोध प्रदर्शन करने के पश्चात् जिलाधिकारी कार्यालय पर व्यक्त किये। पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि धर्म के आधार पर जनता को लड़ाने के अतिरिक्त इस केन्द्र व प्रदेश की सरकार के पास कोई एजेन्ड़ा नही है। तो वही पार्टी सह सचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि मॉब-लीचिंग के कारण अल्पसंख्यको का जीवन मुश्किल है। अराजकता का दौर जारी है। अराजकतत्वो द्वारा लोगो की पीट-पीटकर मारने की घटनांए बड़ी है। किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि आलू जैसी नकदी फसलो के दाम नही मिल पा रहे है। धान खरीद की व्यवस्था इनके करीबी सिर्फ झूठ बोलने के अतिरिक्त कोई कार्य नही है। प्रदर्शनकारियों मे दलसिंगार, अमर सिंह, रामनरेश वर्मा, गिरीश चन्द्र, प्रवीन कुमार, मुकेश, गणेश सिंह अनूप, नीरज वर्मा, अवधेश यादव, वीरेन्द्र कुमार, प्रमोद वर्मा, नरेन्द्र यादव, पूर्णश प्रताप सिंह, राजेश सिंह, सुरेश यादव मौजूद रहे।

 - भूपिंदर पाल सिंह "शैंकी"

रविवार, 10 सितंबर 2017

संघी गिरोह भविष्य में तर्कवादी लोगों की हत्याएं कर सकता है


 बाराबंकीं। संघी गिरोह की हिन्दुवत्व वाली विचारधारा अब अपने असली चेहरे के साथ मैदान में आ गई है। जिसका परिणाम नरेंद्र दाभोलकर गोविंद पंसारे कुलर्गी व गौरी लंकेश की हत्या हैं। भविष्य में यह लोग तर्कवादी लोगों की हत्याएं कर सकते है। 
                   उक्त विचार व्यक्त करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कौंसिल बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओ को संबोधित करते हुए सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि इस उग्रवादी विचार धारा से देश की एकता और अखंडता को खतरा है। पार्टी इस संबंध में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक जन जागरूकता अभियान चलाएगी। 
                        कौंसिल सदस्यों को संबोधित करते हुए सचिव ब्रजमोहन वर्मा ने कहा कि गांव-गांव जाकर जनसभाओं के माध्यम से किसान कर्जों की फर्जी त्रण-माफी का पर्दाफाश किया जाएगा। 15 सितंबर को अतरोरा व 16 से जनसभा से जन-जागरूकता अभियान की शुरूआत होगी।
                  बैठक में कौंसिल के वीरेंद्र कुमार, प्रवीन कुमार, मुनेश्वर बक्श वर्मा, राम नरेश वर्मा, अमर सिंह प्रधान कैलाश आदि वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

-भूपिंदर पाल सिंह

बुधवार, 9 अगस्त 2017

देशी अंग्रेजों भारत छोड़ो




गुंडों द्वारा पुलिस से मिलीभगत कर माकपा कार्यालय गिराए जाने के मामले ने पकड़ा तूल

क्रांति दिवस पर किसान सभा ने किया जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन
योगी सरकार मे कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने मे गोरखपुरी गैंग का पूरा हाथ - रणधीर सिंह सुमन 


बाराबंकी। योगी सरकार लोकतन्त्र मे ऐसी हरकते कर रही है। जो अग्रेजो के शासनकाल को भी पीछे छोड़ रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण माकपा कार्यालय को लूटवाकर गिरवा दिया है। प्रदेश की कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने मे इनके गोरखपुरी गैंग का पूरा हाथ है। यह विचार गांधी भवन मे किसान सभा द्वारा आयोजित क्रांन्त दिवस पर अंग्रेजो भारत छोड़ो’ के दिन किसानो की मांगो को पूरा करो वरना भारत छोड़ो आन्दोलन बैठक व गुण्डो द्वारा पुलिस से मिली-भगत कर माकपा कार्यालय गिराये जाने के विरोध में आयोजित सभा में किसान सभा के राज्य कौसिल सदस्य रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि मोदी सरकार के आने के बाद देश के अन्दर तीन लाख किसानो ने आत्महत्या कर ली है। और लगभग चार लाख करोड़ लोगो का रोजगार छीन चुका है। नये रोजगार का सृजन नही हो रहा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि पहले विदेशी अंग्रेज किसान मजदूरो को तंग कर रहे थे। उससे कही ज्यादा यह देशी अंग्रेज तंग कर रहे है। उनके समय मे किसान जिन्दा था। इनके समय मे किसान आत्महत्या कर रहा है। किसानो से ही देश चल रहा है। इसलिए किसानो को जिन्दा रखने के लिए उनको प्रति माह दस हजार रुपये पेंशन दिया जाना आवश्यक है। पार्टी जिला सहसचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि योगी सरकार किसानो के कर्जे माफ करने के सवालो पर सत्ता पर आई थी। लेकिन अभी तक किसी भी किसानो का कर्जा माफ नही किया गया। सभा मे शिवदर्शन सिंह, डा0 विनोद यादव, प्रवीण कुमार, रामनरेश वर्मा, अमर सिंह प्रधान, सरदार भूपिन्दर पाल सिंह , प्रित्यूशकान्त शुक्ला आदि किसान नेताओ ने अपने विचार रखे। सभा के पश्चात लाल झण्ड़ा लिये किसानो ने देशी अंग्रेजो भारत छोड़ो, योगी मोदी गद्दी छोड़ो किसानो को पेंशन दो आदि नारो के साथ गांधी भवन से जुलूस निकाल कर जिलाधिकारी कार्यालय पर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मुख्यमंत्री को सम्बोधित माकपा कार्यालय गिराये जाने का शिकायती प्रार्थना पत्र अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को दिया। जुलूस में रामेश्वर यादव, निर्मल वर्मा, राजेन्द्र सिंह राणा, गणेश सिंह अनूप, कर्मवीर सिंह, अवधेश यादव, अमर सिंह गुड्डु, सतीश कुमार, गिरीश चन्द्र, विजय प्रताप सिंह आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

- भूपिंदर पाल सिंह 

बुधवार, 26 जुलाई 2017

अडानी, अम्बानी की नौकरी छोडो’

बाराबंकी। योगी मोदी की सरकार नही चलेगी, नही चलेगी, किसान कर्जो की माफी, किसानो का नरसंहार बन्द करो। अडानी, अम्बानी की नौकरी छोडो’, जेल में तेरी जगह है कितनी, देखा है और देखेगें, हर जोर जुल्म के टक्कर पर संघर्ष हमारा नारा है, आदि गगनभेदी नारो के साथ देवा रोड़ स्थित गांधी भवन से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का जेल भरो जुलूस शुरु होकर पटेल तिराहे होते हुये जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। जंहा पर कार्यकर्ताओ ने जमकर नारेबाजी करते हुये अपनी गिरफ्तारी देनी चाही। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पूरे देशभर में किसानो की समस्याओ को लेकर जेल भरो आन्दोलन किया जा रहा है। देश-प्रदेश की सत्तारुढ़ दल की किसान विरोधी नीतियो के कारण प्रतिदिन किसान आत्म-हत्यांए कर रहा है। किसानो ने आन्दोलन के दौरान यह मांग कि किसानो को उनकी फसलो की सरकारी लागत मूल्य के हिसाब से लाभकारी मूल्य निर्धारित किया जाये। जेल भरो आन्दोलन जुलूस में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समेत अखिल भारतीय नौजवान सभा व किसान सभा कार्यकर्ताओ ने हिस्सा लिया। आन्दोलन के दौरान बृजमोहन वर्मा, रणधीर सिह सुमन, जिलाध्यक्ष नौजवान सभा सरदार भूपिन्दर पाल सिंह, पंड़ित प्रत्यूशकान्त शुक्ला, डा0 कौशर हुसैन, अनिल बौझड़, मंयकर यादव, रामतेज यादव, गिरीश चन्द्र, रामनरेश वर्मा, सन्तराम प्रधान, विनय कुमार सिंह, अमर सिंह, दलसिंगार, विनोद यादव, मुनेश्वर बक्श वर्मा, शिवदर्शन वर्मा, शम्भू वर्मा, जितेन्द्र वर्मा, सुभाष वर्मा, शाहिद अली, रमेश चन्द्र, राजेन्द्र बहादुर सिंह राणा, कर्मवीर िंसह, सुरेश यादव, आशूतोष वर्मा, लवकुश, धीरेन्दर, अम्बिका, अमर सिंह गुड्डू, प्रदीप यादव, कपिल वर्मा, सलाम मोहम्मद आदि प्रमुख लोग शामिल रहे। उपजिलाधिकारी एस0पी0सिंह व क्षेत्राधिकारी नगर श्वेता श्रीवास्तव ने धारा 144 का उल्लंघन न होने पर गिरफ्तारी से मना कर दिया।

सोमवार, 19 दिसंबर 2016

नोटबंदी : कॉर्पोरेट सेक्टर को फायदा पहुँचाना

बाराबंकी। नोटबन्दी योजना कारपोरेट सेक्टर को फायदा पहुंचाने के लिए एक हत्यारी योजना है। हजारो लोग बैंक की लाईन में या पैसे के अभाव में चिकित्सा सुविधा न मिलने के कारण मर चुके हैं।
    यह उद्गार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित टाण्डा निजामपुर में जनसभा को सम्बोधित करते हुए जिला सह सचिव रणधीर सिंह सुमन ने कहा कि काला धन बरामद करना एक बहाना है वास्तव में अम्बानी के जियो सिम और चीनी कम्पनी अलीबाबा के मालिक जैक मा को फायदा पहुंचाना है।
    जन सभा को सम्बोधित करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव बृज मोहन वर्मा ने कहा कि नोट बन्दी के कारण किसानों के आलू, टमाटर, धान की कोई कीमत न रही और किसान बरबाद हो चुका है। मोदी सरकार के आने के बाद हजारों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। जनता की तकलीफों को कोई ध्यान देने के लिए तैयार नही है।
    पार्टी के नेता विनोद कुमार यादव ने कहा कि जनपद के हजारों नौजवान जो देश के विभिन्न हिस्सों में काम करते थे उनकी नौकरियां चली गयी हैं और अपने घरों में वापस लौट आये हैं।
    किसान सभा के जिला अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि नोट बन्दी योजना से देश की जनता का रुपया बैंकों में रोक दिया है जिसका कोई अधिकार सरकार को नही है सरकार स्वयं काला धन को सफेद धन बना रही है। सरकार जनता के धन को रोक कर जनता को पंगु बना दिया है।
    सभा का संचालन रामू ने किया तथा अध्यक्षता डा0 इन्द्रपाल चैहान ने किया।

सोमवार, 22 जुलाई 2013

गुजरात का सांप्रदायिक और एनकाउंटर कल्चर का मॉडल देश में नहीं चल सकता- दिपांकर

खालिद मुजाहिद की तरह निमेष कमीशन की रिपोर्ट का कत्ल करना चाहती है सपा
सरकार- दीपांकर भट्टाचार्या
इस राजव्यवसथा ने केवल तीन चीजें ही जनता को दी हैं काले कानून, फर्जी
मुठभेड़ तथा फर्जी मुकदमें- दिपांकर
आने वाली पीढ़ी लोकतंत्र को बचाने वाली इस लड़ाई को एक नजीर की तरह पेश

करेगी- दिपांकर भट्टाचार्या

लखनऊ 22 जुलाई 2013। उत्तर प्रदेश की कचहरियों में सन् 2007 में हुए सिलसिले वार धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फंसाए गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रपायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और खालिद के हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को 62 वें दिन भी जारी रहा। आज धरने को समर्थन देने के लिए भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने शिरकत की।
धरने में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि हिन्दुस्तान के अंदर लोकतांत्रितक आंदोलन के इतिहास मे यह धरना एक मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि आनेवाली पीढ़ी लोकतंत्र को बचाने वाली इस लड़ाई को एक नजीर के तौर पर पेश करेगी। उन्होने कहा कि आज आम जनता के सामने  अमेरिका प्रायोजित नीतियों की तबाही सामने हैं। आज सवाल चाहे प्रशासन का हो या फिर आर्थिक नीतियों का हर ओर अमेरिकी साम्राज्यवाद परस्त नीतियां ही दौड़ रही हैं। उन्होने
कहा कि मारूती का आंदोलन आज पूरे देश में फैल चुका है। यह धरना भी उसी लड़ाई का एक रूप है। उन्हांेने कहा कि हमें वो दिन लाना होगा जब सड़क की आवाज, जो सच्चाई की आवाज है को दबाने की हिम्मत शासक वर्ग न कर सके। उन्हांेने कहा कि इस मंच ने आज खालिद के सवाल पर ही नही देश के विभिन्न भागों में बंद निर्दोष मुस्लिम नौजवानों तथा राज्य प्रायोजित आतंकवाद से लड़ रहे आदिवासियों के पक्ष में एक लंबी लड़ाई लड़ी है।
भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्या ने कहा कि ,
  भाकपा (माले) के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्या ने कहा कि आज मीडिया और न्यायपालिका ने भी आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को न्याय दिलाने की मुहिम से मुंह मोड़ लिया है। उन्होंने कहा कि बिहार के कतील सिद्दीकी की हिरासत में की गयी हत्या की कोई खबर नहीं छपी। आज देश का समूचा लोकतंत्र ही संकट में है लेकिन हम लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे। जो भी संगठन लोकतंत्र को बचाने के लिए आगे आयेगा हम बिना बैनर देखे उसके साथ होंगे।
                                                          दीपंकर भट्टाचार्या ने बोधगया में हुए धमाकों का जिक्र करते हुए कहा कि बिना किसी जांच के इस विस्फोट में सीधे इंडियन मुजाहिदीन का हाथ बता दिया गया।  उन्होंने सवाल किया कि क्या संघ के लोग इन विस्फोटों में शामिल नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि एक विशेष नीति के तहत मुसलमानों को बदनाम करने का खेेल चल रहा है। आज भाजपा संघ की मंशा के मुताबिक मोदी को आगे कर उन्हें भारत का भविष्य बता रही है। इस देश में सन् 1992 दुहराने की तैयारी चल रही है। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण में असल मुद्दे गायब करने की एक चाल चल रही है। गुजरात का सांप्रदायिक और एनकाउंटर कल्चर का माॅडल देश में नहीं चल सकता। गुजरात में मजदूरों का शोषण खुलेआम जारी है। आज मोदी
पूंजीपतियों का संरक्षण खुलेआम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के नाम पर बन रही नीति आज अमेरिका से प्रेरित है। हमें 2014 के आम चुनाव में इसे पलटने के लिए आगे आना होगा। उन्हांेने कहा कि आज देश के कई सवालों को मिलाकर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन को एक सवाल बनाना होगा। भट्टाचार्य ने
कहा कि माले रिहाई मंच के इस धरने को अपना समर्थन जारी रखेगी।
                                                  सीपीआई (एमएल) सेंन्ट्रल कमेटी सदस्य और इंकालाबी मुस्लिम कांफ्रेस के
अध्यक्ष मोहम्मद सलीम ने कहा कि लोकतात्रिंक ढांचा इंसाफ के वसूलों पर टिका होता है और इंसाफ ही उसकी बुनियाद होती है। पर जिस तरीके से खालिद और अन्य आतंकवाद के नाम पर बेगुनाहों की रिहाई के सवाल पर सपा सरकार मुकर गई है ऐसे में अगर सत्ता जनता द्रोही हो जाए तो जनता को भी राज्य द्रोही
हो जाना चाहिए। आज कथित सेक्युलर पालिटिक्स का नकाब ओढ़े सत्ताधारी मोदी का हौव्वा बना रहे हैं। उनसे बस मैं यही कहना चाहूंगा की मोदी एक भेडि़या है और भेडि़या जब शहर में आता है तो उसका क्या हाल होता है आप सब जानते हैं।
   धरने के समर्थन में अंमेबडकर नगर से सैकड़ों की संख्या में लोग पहुचे थे  जिन्हें सपा सरकार में पिछले दिनों दंगों में जान माल का नुकसान हुआ था। इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष बाल मुकुन्द धूरिया ने कहा कि सपा राज में मुसलमान दंगे की आग में पिछले साल भर से झुलस रहा है और मुलायम बड़ी बेशर्मी से कहते फिरते नजर आते हैं कि वो 2014 में प्रधानमंत्री बनेंगे। यह एक संवेदहीन सरकार के नुमाइंदे हैं जिन्हें जनता के दुख दर्द से ज्यादा अपने कुनबे की चिन्ता होती है। यूपी को पिछले दो दशक से ठग रही सपा-बसपा से पूछना चाहूंगा कि जब आप के समर्थन से काग्रेंस की दिल्ली में सरकार है तो प्रधानमंत्री भी आपका ही हुआ और इन दोनों दलों ने ही एफडीआई के मसले पर सीबीआई के डंडे से बचने के लिए वोट किया। इन्हें जनता की कम अपने जेल जाने की ज्यादा चिंता है।
एपवा की ताहिरा हसन ने कहा कि खालिद का मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं है, क्योंकि खालिद के न्याय का संघर्ष हो चाहे इशरत के न्याय का सवाल यह वो मुद्दे हैं जिन्हें वर्तमान सरकारें हल करने में नाकामयाब हैं। ऐसे में हमारी लड़ाई पूरे तंत्र के बदलाव ही है और यह लड़ाई लंबी है। आज रिहाई मचं ने जो पहल की और इस आंदोलन को आज तमाम उत्पीड़न व दमन के बावजूद चला रहा है वो एक लोकतांत्रिक आवाज है जिसे आज पूरे देश के जनांदोलनों का समर्थन मिल रहा है।
आजमगढ़ रिहाई मंच के प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि 2012 विधानसभा चुनवों में सपा के नेताओं ने आतंकवाद के नाम पर बेगुनाहों की रिहाई के सवाल के वादे को लेकर वोट लिया और आज जब मौलाना खालिद की हत्या हो गई  और आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को सदन के पटल पर नहीं रखा जा रहा है। जिससे आजमगढ़ के तारिक कासमी की रिहाई संभव नहीं हो रही है और इस इंसाफ की मांग को लेकर जब धरना किया जा रहा है और सपा सरकार रिहाई मंच का मंच उखाड़ फेकवाया। ऐसे में आजमगढ़ के नौवों सपा विधायकों और 3 मंत्रियों से पूछना चाहेंगे कि क्या अपना जमीर गिरवी रख दिया है क्या?
  धरने का संचालन मुस्लिम मजलिस के जैद अहमद फारूकी ने किया। धरने को रिहाई
मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब, मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पाण्डेय, सीपीआई (एमएल) सेंन्ट्रल कमेटी सदस्य और इंकालाबी मुस्लिम कांफ्रेस के अध्यक्ष मोहम्मद सलीम, इंकलाबी नौकजवान सभा के प्रदेश अध्यक्ष बाल मुकुन्द धूरिया, एपवा की प्रभारी ताहिरा हसन, सीपीआईएमल के राज्य सचिव सुधाकर यादव, इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान, भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोईद अहमद, हाजी फहीम सिद्दीकी, मौलाना कमर सीतापुरी, डा0 अली अहमद कासमी, पटना से आए अधिवक्ता काशिफ यूनुस, दिनेश सिंह, डा0 आफताब, मसीउद्दीन संजरी, हरेराम मिश्र, शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने संबोधित किया।
को निर्दोष साबित करने वाली जस्टिस निमेष कमीशन की रिपोर्ट की भी  हत्या की जा रही है। यह केवल यहीं नही हो रहा है। आज देश के विभिन्न भागों में सरकारें सच्चाई का गला घोटने को तैयार खड़ी है। उन्होंने बिहार की नीतिश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जो नितीश कुमार आज अपने को सबसे बड़े सेक्यूलर होने का दावा कर रहे हैं उन्हांेने ही सत्ता में आते ही दलितों के नर संहार से संबंधित अमिरदास आयोग को भंग कर दिया था ताकि सच्चाई किसी के सामने न आ सके और दोषी दंडित न किये जा सकें इसी तरह नितीश सरकार ने फारबिसगंज में मुस्लिमों का जनसंहार करवाया। उन्होंने कहा कि सन् सत्तर के दशक से जब से जनता में राजनैतिक गोलबंदी बढ़ी है तब से इस राजव्यवसथा ने केवल तीन चीजें ही जनता को दी हैं काले कानून, फर्जी मुठभेड़ तथा फर्जी मुकदमें। आम जनता के खिलाफ यह संघर्ष एक पाॅलिसी लेवल पर सभी सरकारों द्वारा चलाया जा रहा है।

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

चुनाव : धनबल का चुनाव

उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया है लेकिन इस चुनाव की मुख्य विशेषता यह है कि आयोग ने शांतिपूर्वक चुनाव तो करवा लिए लेकिन मतदाताओं की खरीद फरोख्त को रोक नहीं पाए कुछ क्षेत्रों में सीधे-सीधे मतदाताओं को एक हजार रुपये की नोट देने के समाचार हैं चुनाव में प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रोनिक मीडिया के लोगों ने मेज के नीचे से रुपया लेकर सपा-बसपा-भाजपा को मतदाताओं के सामने पेश किया अन्य पार्टियों जिनके उम्मीदवारों ने या पार्टी स्तर पर रुपये का भुगतान नहीं किया वह पार्टियाँ उनके एजेंडे से गायब ही रहीं राजनितिक दलों के सिम्बल अख़बारों में प्रकाशित किये गए किन्तु उत्तर प्रदेश में दो राष्ट्रीय पार्टियों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मर्क्सस्वादी कम्युनिस्ट पार्टी के चुनाव निशान प्रकाशित नहीं किये गए इसका मुख्य कारण यह है कि इन पार्टियों ने मेज के ऊपर से और ही मेज के नीचे से पेमेंट किया
धर्म गुरुओं ने भी अपनी अपनी निष्ठाएं विभिन्न दलों में व्यक्त की चुनाव में भी उनका भाव तेजी पर रहा लग्जरी गाड़ियाँ, प्रतिदिन का खर्चा तथा विभिन्न प्रकार की सुविधाओं का उपयोग भी इन लोगों ने किया।
चुनाव में मुद्दे गायब थे, चुनाव संपन्न होते ही किसानो की खाद, बीज की समस्याएं ज्यों की त्यों बनी हैं। महंगाई दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। वोट लेने वाले बहुरूपियों ने सरकार बनाने के लिये साम, दाम, दंड भेद से मत प्राप्त कर लिये हैं, बिजली पानी नदारद है। सरकार चाहे जिसकी बने महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी जैसे मुद्दे हल करने की दिशा में इन राजनीतिक दलों की कोई रूचि नहीं है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

बुधवार, 11 जनवरी 2012

भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन में उत्तर प्रदेश का योगदान -7


भगत सिंह से अजय की मुलाकात

अजय घोष की भगत सिंह से सब से पहले मुलाकात 1923 में कानपुर में हुई। दोनों को बटुकेश्वर दत्त ने मिलाया। उस समय दोनों ही लगभग एक ही उम्र यानी 15 वर्ष के थे। कुछ दिनों बाद फिर मुलाकात मंे दोनों के बीच लम्बी बातचीत हुई। उन दोनों के बीच फिर 1928 में मुलाकात हुई। उन्होंने एच0एस0आर00 में परिवर्तनों के बारे में विचार विमर्श किया। वे अब समाजवाद की ओर झुक रहे थे। अजय एच0एस0आर00 की बम बनाने वाली यूनिट के सदस्य थे। केन्द्रीय असेम्बली में भगत सिंह और बटुकेश्वर द्वारा बम गिराने के बाद अजय तथा अन्य साथी भी गिरफ्तार कर लिए गए। अजय लाहौर जेल में रखे गए। जेल में अजय, भगत सिंह, शिव वर्मा तथा अन्य कुछ साथियों ने तय किया कि बाहर निकलने के बाद वे सभी कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो जाएँगे। दुर्भाग्य से भगत सिंह को फाँसी हो गई, लेकिन बाकी साथी सचमुच कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गए।

अजय कम्युनिज्म की ओर -

अजय को कांग्रेस के कराँची अधिवेशन में भाग लेने का मौका मिला, वहाँ से वापस आने पर यू0पी0 में उन्हें कई कम्युनिस्टों से मिलने का मौका मिला, इनमें एच0जी0 सरदेसाई प्रमुख थे। वापस कानपुर आकर अजय ने मजदूरों के बीच काम किया। उन्होंने मजदूर किसान पार्टी का गठन किया और कई स्टडीसर्किल चलाए। अजय को 1932 के आरम्भ में फिर गिरफ्तार किया गया और कानपुर जेल में एक साल रखा गया, बाद में फैजाबाद जेल में लगभग 6 महीने रखा गया। कानपुर जेल में उनकी मुलाकात एस0जी0 सर देसाई से हुई, दोनांे एक ही बैरक में रखे गए थे, सर देसाई के साथ बातचीत के फलस्वरूप कई बातें साफ र्हुइं। इस प्रकार जब अजय जेल से निकले तो वे कम्युनिस्ट बन चुके थे, जेल में दोनों ने माक्र्स की पूँजी साथ पढ़ी, फैजाबाद जेल में अजय की मुलाकात रुस्तम सैटिन से हुई, जेल से निकलने के बाद अजय कानपुर में मजदूरों के बीच काम करने लगे। इस बीच मेरठ षड्यंत्र मुकदमा चला, जिसका काफी गहरा असर अजय पर पड़ा। अजय लाहौर षड्यंत्र केस में गिरफ्तार थे, दोनों मुकदमे साथ साथ ही चल रहे थे। कम्युनिज्म की ओर झुकाव से अजय की दिलचस्पी मेरठ केस में होना स्वाभाविक था। अजय को कम्युनिस्टों के विचार अधिक गहराई से जानने का अवसर मिला। अजय घोष उसी वर्ष पार्टी में भरती हुए जिस वर्ष जोशी मेरठ जेल से रिहा किए गए। अजय ने तिलक राष्ट्रीय विद्यालय में नौकरी कर ली, जहाँ उनकी मुलाकात रमेश सिन्हा से हुई। 1934 में अजय ने बम्बई में अखिल भारतीय कपड़ा मजदूरों के सम्मेलन में कानपुर के प्रतिनिधि की हैसियत से हिस्सा लिया और अजय पार्टी ग्रुप में शामिल कर लिए गए। 1935 की सी0सी0 बैठक में अजय को देश के पश्चिमी हिस्से,भारद्वाज को उत्तरी और एस0वी0 घाटे को दक्षिणी भाग का इन्चार्ज बनाया गया। इस प्रकार इन तीनांे नेताओं को भारत में कम्युनिस्ट आन्दोलन के पुनर्गठन और विस्तार का काम सौंपा गया और जैसा कि हमनें देखा ये तीनों ही यू0पी0 से थे, इनमें जोशी पार्टी के महामंत्री बनाए गए।
जोशी को सी0सी0 की ओर से यू0पी0 का आर्गनाइजर भी बनाया गया था, वे अजय से कानपुर में मिले, साथ ही अन्य साथियों से भी। जोशी ने अजय का नाम कानपुर की जिला कम्युनिस्ट की संगठन समिति के आर्गनाइजर के रूप में प्रस्तावित किया और वे इस पद पर नियुक्त भी किए गए। कुछसमय में अजय को यू0पी0 पार्टी की प्रथम संगठन समिति का सचिव भी बनाया गया। यह प्रस्ताव भी जोशी का ही था। 1934 में अजय सी0पी0आई0 की सी0सी0 में और 1936 में पोलित ब्यूरों में लिए गए। दोनांे ही अवसरों पर उनका नाम जोशी ने प्रस्तावित किया। आगे अजय यू0पी0, फिर केन्द्र, फिर अहमदाबाद, बम्बई इत्यादि स्थानों पर पार्टी और टी0यू0 कामों के लिए, लगाए गए। लगातार अण्डर ग्राउंड काम करने और कठिन तथा विपरीत परिस्थितियों में काम करने से अजय का स्वास्थ्य बिगड़ता चला गया, वे एक हट्टे-कट्टे नौजवान थे, लेकिन जल्द ही उन्हें टी0बी0 ने घेर लिया। इसका कारण जेलों में निरंतर भूख हड़तालें भी थीं।
1938 में अजय घोष को बम्बई में पार्टी के केन्द्रीय मुख्य पत्र नेशनल फ्रण्ट की देख भाल का जिम्मा दिया गया। वैसे जोशी उसके सम्पादक थे लेकिन अमल में लगभग सारा ही काम अजय देखा करते। साथ ही वे 1940 के दशक के आरम्भ में अंग्रेजी मासिक कम्युनिस्ट निकालने के जिम्मेदार भी थे। अजय घोष और आर0डी0 भारद्वाज ने दिल्ली में सी0पी0 की यूनिट बनाने में अहम भूमिका अदा की। उन दिनों एम0 फारूकी तथा अन्य नेताओं को गाइड किया और पार्टी तथा जनसंगठनों को खड़ा करने में अत्यन्त ही प्रभावशाली रोल अदा किया। सी0एस0पी0 या कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी का दूसरा अखिल भारतीय सम्मेलन मेरठ में 1936 में हुआ, डेलीगेशन की लिस्ट में अजय का भी नाम था लेकिन उनके नाम को लेकर कुछ समाजवादियों को आपत्ति थी इसका कारण था कि वे छिपे कम्युनिस्ट थे। इस विवाद के कारण अजय घोष ने सम्मेलन में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया। वे एक गैर प्रतिनिधि के रूप में मेरठ की एक धर्मशाला में ठहरे रहे। साथ ही वे उन मीटिंगों में शामिल होते रहे जो गैर डेलीगेट्स के लिए खुले थे। इस समय 0एम0एस0 नाम्बूदरीपाद एक सोशलिस्ट थे। अजय ने उन्हें कम्युनिस्ट बनने में मदद की। इसी आन्दोलन में सुप्रसिद्ध मेरठ थीसिस पास किया गया जिससे सभी समाजवादी शक्तियों को एक होने में मदद मिली।
सुप्रसिद्ध कानपुर मजदूर हड़ताल 1938 1938 में कानपुर के मिल मजदूरांे की एतिहासिक प्रसिद्ध हड़ताल हुई जो 50 दिनों तक चली। इसमें 50 हजार मजदूरों ने भाग लिया। यह भारत के मजदूर आन्दोलन में एक शानदार अध्याय है, कानपुर के मिल मालिकों ने राजेन्द्र प्रसाद कमेटी के सुझावों को लागू करने से इंकार कर दिया था। मजदूरों की माँग थी कि न्यूनतम वेतन दिया जाए, किसी भी मजदूर को मनमाने तरीके से काम से बाहर नहीं किया जाए। कानपुर की मजदूर सभा को मान्यता दी जाए इत्यादि। हड़ताल का नेतृत्व आर0डी0 भारद्वाज बालकृष्ण शर्मा, राजाराम शास्त्री, हरिहरन तथा कई अन्य नेताओं ने किया। इनमें बाल कृष्ण शर्मा कांग्रेस के लीडर थे लेकिन उन्होंने मजदूरों का सक्रिय साथ दिया। पहले तो मिल मालिकों ने राजेन्द्र प्रसाद समिति के सुझावों को मानने से इंकार कर दिया था। समिति ने 15 रूपयों की वृद्धि की सिफारिश की थी। इसे आंशिक रूप से स्वीकार किया गया और इसके लिए एक बोर्ड बना दिया गया।
उत्तर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को इस आन्दोलन के सामने झुकना पड़ा। पहले उसने आनाकानी की लेकिन मजदूरों के बढ़ते संघर्ष और स्वमं कांग्रेसियों द्वारा विरोध के कारण उसे पीछे हटना पड़ा।
आरम्भ में हड़ताल में 15 हजार ही मजदूर शामिल हुए थे। लेकिन दो दिनों के अंदर हड़तालियों की संख्या 35 हजार हो गई। कपड़ा मजदूरों के अलावा अन्य उद्योगों के मजदूर भी शामिल होते गए। प्रत्येक मिल से 10 प्रतिनिधियों को लेकर एक हड़ताल समिति का गठन किया गया। वालेन्टियरों को संगठित किया जाने लगा। यह वह समय था जब उद्योगों की आर्थिक स्थिति अच्छी थी और वे मजदूरों को ज्यादा वेतन इत्यादि देने की स्थिति में थे।
प्रांत सरकार ने एक बयान के जरिए सभी पक्षों से समिति की रिपोर्ट लागू करने का अनुरोध किया। जहाँ ट्रेड यूनियन संगठनों ने इसे लागू किया, मालिकों ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। मजदूर यूनियन ने इसके सुझावों के अनुसार अपने संविधान में आवश्यक सुधार किया।

देवली सेन्ट्रल जेल में

यह जेल भारत के क्रांतिकारियों और कम्युनिस्टों को नजर बन्द रखने का बहुत बड़ा केन्द्र था। यह कान्शनटेªशन कैम्प या यातना शिविर भी कहलाता था। यहाँ अत्यन्त कठिन परिस्थितियों में कैदियों को रखा जाता था। यह एक विशेष जेल थी। देवली जेल राजस्थान में थी। कैदियों को पहले कोटा तक रेलवे द्वारा और फिर 50-60 किमी. बस से कैम्प ले जाया जाता था। इसका निर्माण वास्तव में सन् 1857 के विद्रोह के दौरान हुआ था। जिसमें बागियों को रखा जाता था। 1857 की विफलता के बाद इसे बन्द कर दिया गया। यह 1880 तक बन्द रही। 1880 के बाद इसे फिर चालू किया गया। इसे पुनः 1940 में ज्यादा सक्रिय किया गया। 1940 में नजरबन्दों की टोलियाँ एक-एक करके देवली भेजी जाने लगीं। इनमें बड़ी संख्या में कम्युनिस्ट थे। आबादी तो आप पास नहीं के बराबर थी। इक्के दुक्के गाँव ही थे। दूर-दूर तक गर्म रेगिस्तान था। कोई अगर भागना भी चाहता तो संभव भी नहीं था, क्योंकि वह रेतीले इलाके में ही दम तोड़ देता, पूरी जेल कँटीले तारों से घिरी हुई थी। कहीं-कहीं बिजली के तार भी लगे हुए थे। हर दो तीन सौ कदम पर निगरानी रखने के लिए टावर बने हुए थे। हथियार बन्द सैनिक चारों ओर निगरानी रखा करते थे। दूसरे विश्व युद्ध के आरम्भ होते ही देवली कैम्प में ज्यादातर कम्युनिस्ट कैदी ही रखे जाने लगे। इनमें उत्तर प्रदेश से शफीक नकवी, आर0डी0 भारद्वाज, अजय घोष, के0एम0 अशरफ, झारखण्डे राय, रमेश सिन्हा, हर्षदेव मालवीय, रुस्तम सैटिन, एम0एन0 टण्डन, अर्जुन अरोड़ा, सुशील दास गुप्ता तथा अन्य थे। अन्य सुप्रसिद्ध नेताओं में एस00 डांगे, मेराजकर, रणदिवे, सोहन सिंह जोश और कई अन्य थे। इन सब के अलावा कई दूसरे क्रांतिकारी जिनमें राष्ट्रवादी भी थे। जब जेड00 अहमद देवली पहुँचे तब वहाँ 66 कम्युनिस्ट पार्टी के, तीन सोशलिस्ट पार्टी के, आर0एस0पी0 के 11, एस0एच0आर0के0 5 कैदी 0 क्लास के थे। बी0 क्लास के 90 में से 70 सी0पी0आई0 के थे। कुछ ही महीनों में अन्य पार्टियों के कई लोगों ने सी0पी0आई0 की सदस्यता ले ली। देवली कैम्प की खास बात यह थी के उसे बाहर की दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रखा गया था, और बहुत ही कम लोगों को वहाँ आकर मिलने की इजाज़त थी। बिल्कुल नजदीकी खून के रिश्तों के लोग ही मिल पाते थे। देवली में कम्युनिस्टों ने कई बार अपनी माँगों के समर्थन में भूख हड़ताल भी की। वे भूख हड़तालंे बहुत लम्बी चला करती थीं, और अधिकारी निरुपाय होकर मात्र देखा करते थे। बाद में उन्होंने जबरन दूध या फलों का रस पिलाने और खाना खिलाने के तरीके अपनाने शुरू किए। एक भूख हड़ताल काफी लम्बी चली। इसमें अहमद और दूसरे कैदी काफी कमजोर हो गए। यहाँ तक कि उनमें उठकर खड़े होने या बैठने की भी ताकत नहीं रही। कांग्रेसियों समेत सभी ने इसमें हिस्सा लिया। भूख हड़ताल की जानकारी कैदी सिद्दीक हुसैन के भाई और अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में लेक्चरर महमूद हुसैन द्वारा लेबर पार्टी के सांसद एन0एम0 जोशी को पहुँचाई गई। उन्होंने संसद या असेम्बली में इस सवाल को उठाया। फिर चारो ओर काफी हो हल्ला हुआ और अखबारों में भी खबरें आईं। पहले से भी लोगों को धीरे धीरे पता चल रहा था। भूख हड़ताल के सातवें दिन महिलाओं का एक डेलीगेशन मैक्सवेल से मिला। वह गृह सचिव थे। इस डेलीगेशन का नेतृत्व कर रही थीं
हाजरा बेगम और इनके साथ कामरेड पी0पी0 बेदी की पत्नी फरीदा बेदी और मुहम्मद मुजफ्फर की पत्नी रसीद जहाँ थी। अखबारों में यह बात छप गई कि महिलाएँ भूख हड़ताल पर बैठेंगी और राष्ट्र व्यापी आंदोलन करेंगी। यहाँ तक कि हैदराबाद, बंगलौर और दूसरी जगहों में भी आन्दोलन छिड़ गया। ब्रिटिश सरकार को आखिरकार कैदियों की माँगे माननी पड़ीं। जनवरी 1942 के आरम्भ में देवली जेल बन्द करने का काम शुरू हो गया। कैदियों को मुख्यतः फतेहगढ़ और बरेली सेन्ट्रल जेल भेजा गया। ज्यादातर कम्युनिस्ट बरेली में थे।

1940 के दशक में कम्युनिस्ट पार्टी

उत्तर प्रदेश और समूचे भारत में पार्टी का यह दौर काफी सक्रिय घटनाओं से भरा पड़ा है, लेकिन हम उसके पूरे विस्तार में नहीं जा पाएँगे। उत्तर प्रदेश में किसानों तथा अन्य तबकों में अब तक पार्टी काफी मजबूत हो चुकी थी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में तो ग्रामीण इलाकों में मजबूत आधार बन चुका था। सरजू पाण्डेय और झारखण्डे राय जैसे जनप्रिय नेता घर-घर में प्रसिद्ध होते चले गए, उन्होंने आजादी के बाद पार्टी बनाने में विशेष भूमिका अदा की।
इस दौर में किसान सभा का विशेष प्रसार-प्रचार हुआ। राहुल और स्वामी सहजानन्द सरस्वती जैसे नेता लोकप्रिय हो गए। अखिल भारतीय किसान सभा का दसवाँ अधिवेशन अलीगढ़ के सिकन्दरा राव में मई 1947 में हुआ था। यह उत्तर प्रदेश में संगठन की मजबूती का परिचायक था कि यह अखिल भारतीय सम्मेलन इतनी भयानक गरमी में यहाँ सम्पन्न हो गया। बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों के ठहरने का इंतजाम किया गया। उत्तर प्रदेश में प्रभावशाली मजदूर, किसान, बुद्धिजीवी तथा अन्य प्रकार के आंदोलन और संगठन विकसित हुए। जनवरी 1941 में आर0डी0 भारद्वाज गिरफ्तार कर लिए गए। वे कानपुर में पकड़े गए। कानपुर एक अत्यन्त ही सक्रिय मजदूर और कम्युनिस्ट केन्द्र था। इसके बाद लगभग एक के बाद एक जेल में बन्द रहे। 1943 तक सुल्तानपुर, बरेली, देवली, आगरा वगैरह जेलों में उन्हें रखा गया। इससे उनके स्वास्थ्य पर बड़ा ही प्रतिकूल और नुकसान देह प्रभाव पड़ा। देवली और बरेली जेलों से बाकी सबको तो मई 1942 तक रिहा कर दिया गया, लेकिन भारद्वाज को नहीं। उनकी रिहाई का अनुरोध ब्रिटिश सरकार ने अस्वीकार कर दिया। भारद्वाज और रमेश सिन्हा ने मिलकर काफी काम किया था। गोविन्द विद्यार्थी के साथ मिलकर गुप्त प्रादेशिक दफ्तर बनाना, कानपुर तथा अन्य जगहों पर हड़तालंे, कानपुर से उन्नाव तक मजदूरों का पैदल मार्च इत्यादि कई काम होते थे। उन्नाव में पंडित विशम्भर दयाल त्रिपाठी के नेतृत्व में अच्छा काम हो रहा था।
भारद्वाज पार्टी के एक अच्छे राजनैतिक शिक्षक भी थे। उन्होंने रमेश सिन्हा को आगरा जेल में माक्र्स की पूँजी समझाई। बरेली में भी उन्होंने पढ़ाने का काम किया। उन्हें सुल्तानपुर जेल भेज दिया गया क्योंकि डाक्टरों ने कहा कि उनका इस प्रकार बच पाना मुश्किल है। सन 1943 में उन्हें रिहा कर देना पड़ा। फिर उन्हें भुवाली के टी0वी0 सैनीटोरियम में भर्ती कर दिया गया। जहाँ वे ठीक भी होने लगे थे। शिव कुमार मिश्रा के अनुसार पार्टी में भर्ती होने का उनका साथ और समझदारी काफी काम आई। भारद्वाज देर रात तक पार्टी क्लास लेकर कुछ आराम के बाद फिर काम में लग जाते थे। ऐसा कई मौकों पर हुआ। भारद्वाज अत्यन्त ही सरल और सीधे सादे जीवन के उदाहरण थे। शिव कुमार को आगे कई मौकों पर भारद्वाज के जीवन और कार्य को देखने का मौका मिला। कानपुर की हड़ताल के दौरान भी उन्होंने देखा कि उनका आम लोगों में कितना सम्मान था। शिव कुमार मिश्रा के मन से हिन्दू मुस्लिम की दीवार भी इन संघर्षों के दौरान हट गई, जब सभी एक साथ काम करते और रहते खाते थे।
यही शिव कुमार मिश्रा बाद में 1948 में उत्तर प्रदेश पार्टी के सचिव बने। भुवाली सैनीटोरियम से निकलने के बाद भारद्वाज के लिए फिर वही कठिन जिन्दगी शुरू हो गई। यह वह समय था जब पार्टी में जोशी युग का अन्त हो रहा था और बी0टी0 रणदिवे भी संकीर्ण और साथियों के प्रति केवल उदासीन ही नहीं थे बल्कि कामरेडों वाली भावनाआंे के विपरीत अमानवीय भावनाएँ फैला रहे थे। बहुमूल्य मानवीय और कम्युनिस्ट मान्यताएँ खत्म हो रही थीं। पार्टी लगभग गैर कानूनी करार दे दी गई थी। बेतहाशा गिरफ्तारियाँ और पार्टी से निकाला जाना चल रहा था। पार्टी के अन्दर दमन और आतंक का वातावरण व्याप्त हो रहा था। ऐसे में भारद्वाज देहरादून में मजबूरन विश्राम के लिए पड़े हुए थे। उनकी देखभाल की सुध बहुत कम साथियों को थी तभी उन्हें 4 अप्रैल 1948 को गिरफ्तार कर लिया गया जब उनको बुखार था। 8 अप्रैल 1948 को उनका देहान्त हो गया।
इस प्रकार एक अत्यन्त ही बहुमूल्य और मेधावी साथी नेता और संगठनकर्ता का नाहक ही बलिदान दे दिया गया। इससे कई सीखंे मिलती हंै बहुत ही कम उम्र में वे मृत्यु को प्राप्त हुए यदि कई दुस्साहसिक कार्य किए जाते तो उन्हें और उनके सरीखे कई सारे, साथियों को बचाया जा सकता था। ऐसे नेता नेहरू, गांधी, बोस और अन्य से किसी मायने में कम नहीं थे फिर भी पार्टी उनका पूरा इस्तेमाल नहीं कर सकी। बड़े ही दुख की बात है कि आज पार्टी में आर0डी0 भारद्वाज और उनके सरीखे अन्य महान कम्युनिस्टों के बारे में बहुत ही कम जानकारी है इस स्थिति को सुधारने की जरूरत है।

अनिल राजिमवाले
क्रमश:
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