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शुक्रवार, 10 मार्च 2017

सैफुल्लाह एनकाउंटर फर्जी कहने पर मौलाना आमिर रशदी पर मुकदमा कायम

 सैफुल्लाह के एनकाउंटर को आमिर रशदी ने उसको फर्जी बताया था और कानपुर जाकर अबतक उस केस से संबधित पकडे गये लोगों के परिवारवालों से मुलाकात भी की थी इसलिए राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष आमिर रशदी मदनी के खिलाफ कानपुर में एफआईआर दर्ज की गई है. रशदी पर लखनऊ में हाल में मारे गए संदिग्ध आतंकी सैफुल्ला के परिवार वालों को कथित तौर पर भड़काने का आरोप है. उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) दलजीत चौधरी ने कानपुर में एसएसपी को रशदी के खिलाफ केस दर्ज करने का निर्देश दिया था.  वहीँ, उलेमा कौंसिल के दफ्तर पर पुलिस पहुँच कर आमिर रशदी का इंतज़ार कर रही है.

 आमिर रशदी ने कहा कि आतिफ के घर में तीन दिन तक कानपुर के एसपी सिटी किस कानून के तहत पूछताछ कर रहे थे. उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर एसपी सिटी को तुरंत निलंबित नहीं किया गया, तो वो उत्तर प्रदेश को बंद करा देंगे. आमिर रशदी ने ये भी कहा कि सैफुल्ला के पिता बयान बदलना चाहते हैं, लेकिन बहुत दबाव होने की वजह से डरे हुए हैं.
ज्ञातव्य है कि उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि सैफुल्लाह का एनकांउटर फर्जी है। आतंकी सैफुल्लाह नहीं है, आतंकी तो सरकार है। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि पुलिस वालों ने सैफउल्लाह को घर के अंदर बंधक बना रखा था।
शुक्रवार दोपहर मौलाना आमिर रशदी मदनी सैफउल्लाह, इमरान और आतिफ के घर पहुंचे। उन्होंने सभी के परिजनों से अलग-अलग बात की। केवल इमरान के घर पर ताला लगा होने के कारण परिजनों से बात नहीं हो सकी। सभी के परिवारों से मिलने के बाद उन्होंने मीडिया से कहा, सैफउल्लाह का एनकाउंटर फर्जी है। आतंकी वह नहीं आतंकी सरकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस वालों ने सैफउल्लाह को घर के अंदर बंधक बना रखा था।
 वहीँ, दूसरी तरफ उत्तर पप्रदेश की जागरूकता की नई मिसाल भी देखने को मिली लखनऊ में हुए आतंकी सैफुल्ला के मुठभेड़ के बाद प्रदेश में  हाई अलर्ट कर दिया गया था। संदिग्धों की तलाश में तेलंगाना एटीएस के चार जवान सिविल ड्रेस में इटावा पहुंचे हुए थे। बताया जा रहा है कि इटावा पुलिस ने तेलंगाना एटीएस के तीन जवानों को संदिग्ध समझकर उन्हे हवालात में डालकर उनकी जमकर धुनाई कर दी। तेलंगाना एटीएस के आईजी तक मामले की जानकारी पहुँचने के बाद यूपी के आला अधिकारियों के हाथ पाव फूले, जिसके बाद उन्हे छोड़ा गया।
इटावा में संदिग्ध आतंकियों की सूचना पर पिछले 15 दिनों से तेलंगाना एटीएस के चार जवान डेरा जमाये हुए थे। बताया जा रहा है कि एटीएस जवानों को ठीक से हिन्दी नहीं आती, जिसके चलते मंगलवार देर रात बाइक सवार तीन जवानों को कुछ स्थानीय लोगों ने शक के आधार पर रोक लिया और उनकी भाषा ना समझ पाने के चलते उन्हे आतंकी समझकर पिटाई कर दी और मामले की सूचना पुलिस को दे दी। जो पुलिस आतंकवादी और एटीएस के कर्मचारी में अंतर नही समझ पाती है वह कानून और व्यवस्था किस तरह से कायम रखती है. वह भी इस उदहारण को देखने के बाद जनता को समझना चाहिए.
मध्य प्रदेश ट्रेन विस्फोट के तुरंत बाद जिस तरह से पुलिस ने कार्यवाई की है, वह अद्भुद है. अभी तक लखनऊ में सर्राफा व्यवसाई के यहाँ हुई लोट का आज तक पता लगाने में असमर्थ है या यूँ कहें कि दिल्ली पुलिस नजीब का आजतक पता नही लगा पायी है.
एग्जिट पोल में भाजपा की सरकार आने की बात आते ही नौकरशाही का भगवाकरण सम्बन्धी विचार पैदा होने शुरू हो गये हैं. एनकाउंटर जब भी कोई होता है तो उसकी स्वत: मजिस्ट्रेटी जांच शुरू हो जाती है. अगर पुलिस की मुठभेड़ सही है तो मजिस्ट्रेटी जांच क्यूँ की जाती है लेकिन हर मुठभेड़ में मरने वाले व्यक्ति के सम्बन्ध में मजिस्ट्रेटी जांच का प्राविधान है इसलिए आमिर रशदी के ऊपर वाद कायम करने का कोई औचित्य नही है लेकिन आने वाली संभावित सरकार के लिए अपनी अभी से भक्ति साबित करना मजबूरी है. 
          लोकतंत्र में किसी भी घटना या किसी कार्य की जांच की मांग लोकतान्त्रिक व्यवस्था का अंग है और यह किसी तरह से अपराध नही है. अभी कुछ दिन पूर्व भाजपा के स्टार प्रचारक मोदी ने चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का उल्लंघन करते हुए रोड शो बनारस में किया जबकि धारा 144 सीआरपीसी लगी हुई थी पांच व्यक्तियों को एक साथ जाना मना था लेकिन जब कार्यवाई करने की बात आई तो मंदिर दर्शन का नाम देकर प्रशासन ने हाथ खिंच लिए थे.

-रणधीर सिंह सुमन 

बुधवार, 8 मार्च 2017

सैफुल्लाह का बाहरी आतंकी सम्बन्ध नही था


चुनाव की पूर्व संध्या पर मध्य प्रदेश में ट्रेन में विस्फोट, कानपुर में संदिग्ध आतंकियों की धरपकड़, मणिपुर में विस्फोट व लखनऊ में सैफुल्लाह का एनकाउंटर होना यह दर्शित करता है कि सोची समझी रणनीति के तहत आतंकवाद की राजनीति को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए हिस्सा बनाया गया है. 
             कथित आतंकी सैफुल्लाह के एनकाउंटर की मुख्य बात यह है कि सुबह पुलिस ने सैफुल्लाह से पूछताछ की थी.  पुलिस, ID देखा था और जिस मकान में एटीएस ने यह ऑपरेशन किया है उसके दूसरे किरायेदार अब्दुल कय्यूम और उसके बेटे के बीच झगड़े की सूचना पर पुलिस घटना के पांच घंटा पहले ही आई थी। पुलिस ने यहां आकर पिता और पुत्र के बीच पंचायत की थी और मामले को शांत कराया था। इतना ही नहीं पुसिस ने जाते-जाते दूसरे किरायेदार के कमरे में भी झांक-झांककर देखा था और वहां मौजूद दोनों संदिग्ध आरोपियों से भी पूछताछ की थी।
 दूसरे किरायेदारों का कहना है कि पुलिस ने उनकी आईडी भी देखी थी। कय्यूम ने बताया कि सुबह साढ़े नौ बजे बेटे से एक बात को लेकर उनका और उनके बेटे की बीच झगड़ा हो गया था। इसके लेकर उन्होंने पुलिस कंट्रोलरूप को फोन किया। कुछ देर बाद ही पीआरसी मौके पर पहुंच गई। यहां तक की काकोरी थाने से एक दारोगा और सिपाही भी आ गए। कथित एनकाउंटर 7 मार्च को शाम को 4 बजे से प्रारंभ होता है और देर रात ढाई तीन बजे तक चलना यह भी बहुत सारी चीजों को संदिग्ध बनाता है.
        इस बात से यह पुष्टि होती है कि पुलिस उसे पहचानती थी और दुबारा चार बजे पुलिस के पहुँचने पर दरवाजा बंद कर फायरिंग करने लगना यह अपराध शास्त्र के मनोविज्ञान के ही खिलाफ है. 
आर डी निमेष कमीशन ने जब कचेहरी सीरियल बम विस्फोट कांड की जांच की थी तो कमीशन ने यह माना था कि तारिक काशमी व खालिद मुजाहिद आतंकी नहीं थे और उनकी गिरफ्तारी और बरामदगी को फर्जी माना था. कचेहरी सीरियल बम विस्फोट काण्ड में भी उत्तर प्रदेश एटीएस ने बहुत सारे स्वनाम धन्य आतंकी संगठनो से तार जोड़े थे.
वहीँ, "दलजीत सिंह , यूपी,एडीजी, कानून -व्यवस्था ,ने बताया की सैफ़ुल्लाह एंड कंपनी का किसी भी बाहरी आतंकी संगठन से संबंध नहीं था, उनको बाहर से किसी भी किस्म की मदद नहीं मिलती थी। प्रेस कॉंफ़्रेंस में अभी दिया गया यह बयान बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे मीडिया और फेसबुक पर बटुकसंघ का प्रचार खारिज होता है। इसका अर्थ यह है वे आईएसआईएस के साथ जुड़े नहीं थे।" - जगदीश्वर चतुर्वेदी की फेसबुक वाल से
         इस बयान के आने के बाद अब जरूरत इस बात की है कि इन सभी प्रकारों की जांच माननीय उच्च न्यायलय के वर्तमान न्यायाधीश को आयोग का अध्यक्ष बना कर करायी जा.

रणधीर सिंह सुमन
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