रविवार, 29 अगस्त 2010

इंजीनियर हैं या यमराज के दूत

घाघरा नदी का गोंडा-बाराबंकी बोर्डर पर बना परसावल तटबंध टूट गयापरसावल, रायपुर, मांझा, कमियार, पसका, बांसगांव में अचानक तटबंध टूटने के कारण सैकड़ो लोग बह गए, करोडो रुपये की संपत्ति बर्बाद हो गयी पालतू जानवरों का कोई पुरसाहाल नहीं रहासरकार ने तीन अभियंताओ को निलंबित कर अपने को सुरक्षित कर लिया
प्रतिवर्ष घाघरा नदी के किनारे बने तटबंधो की मरम्मत का कार्य सिचाई विभाग देखता हैमरम्मत करने के नाम पर करोडो रुपये के पत्थर कागजों पर नदी के किनारे लगा दिए जाते हैं और मिटटी बालू की बोरियों से उसको मजबूती प्रदान की जाती है और प्रतिवर्ष कोई कोई तटबंध टूटता है और हजारों लोगों के परिवार बर्बाद हो जाते हैंबाराबंकी जनपद में पहले सूखा होता है जिसका भी इन्तजार जिला प्रशासन बेसब्री से करता है और लाखों करोडो रुपयों का गोलमाल हो जाता हैफिर शुरू होता है बाढ़ की विनाशलीला जिसमें भी अधिकारियो और कर्मचारियों की लाटरी खुल जाती है। बाढ़ पीड़ितों की मदद जमीनी स्तर पर नहीं हो पाती है और कागजों पर मदद दर्ज होती रहती हैफिर अप्रैल माह से खेल शुरू होता है नदी के तटबंध आदि की मरम्मत का कार्य जिसमें बाढ़ की विनाशलीला की पृष्ठभूमि छिपी होती हैये अधिकारी अभियंता जनता का भला नहीं कर सकते हैं यह सब निश्चित रूप से यमराज के दूत के रूप में ही कार्य करते हैं

सुमन
लो क सं घ र्ष !

4 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

सर "नाइस" तो नहीं कह सकते है पर दुखद है .... भ्रष्टाचारियों के हौसले इसकदर बढ़ गए है की उन्हें आम जनता के हितों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं हैं ... भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाना चाहिए...

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाना चाहिए...

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

sada ने कहा…

बेहतरीन प्रस्‍तुति ।