मंगलवार, 14 सितंबर 2010

विशेष साक्षात्कार: पूंजीवादी व्यवस्था बेहद चालाक है: अजीज पाशा, भाग 2

1945 को जन्में सैयद अजीज पाशा अपने छात्र जीवन से ही राजनीति और जनांदोलनों में सक्रिय रहे हैं। 1974 से 1979 तक एआईएसएफ के महासचिव रहे तत्पश्चात सैयद अजीज पाशा आंध्रा प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं। 27 फरवरी ए0आई0वाई0एफ0 के सचिव एवं आंध्रा प्रदेश विशेषतौर पर हैदराबाद की हाशिये पर पड़ी गरीब जनता के संघर्षो की आवाज बनकर रहे हैं। देश की वाम राजनीति से जुड़े होने के पश्चात भी वर्तमान वाम राजनीति की दशा और दिशा पर बेहद बेबाकी से अपनी राय जाहिर की। उनसे लोकसंघर्ष के लिए बातचीत की दिल्ली के युवा पत्रकार महेश राठी ने।

प्र0 देश में अल्पसंख्यकों विशेषतौर पर मुस्लिमों के सवाल क्या हैं?
अजीज पाशा- गरीबी मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सबसे बड़ी समस्या है। यदि गरीबी के आँकडो को ही लें तो इससे भी देश के मुसलमानों की स्थिति का पता चलता है। जहाँ देश में गरीबी रेखा के नीचे आबादी का प्रतिशत 22 है वहीं मुसलमानों में यह 31 प्रतिशत है। इसके अलावा अशिक्षा और अवसरों की उपलब्धता में भेदभाव भी मुस्लिमों की गरीबी का मुख्य कारण है। नौकरशाही जरूरतमंदों तक संसाधनों को नहीं पहुँचने देती है। अवसरों के बँटवारे का यह भेद अल्पसंख्यकों के भीतर भी है मसलन कि जो अल्पसंख्यक देश की आबादी का महज एक प्रतिशत हैं उनकी फौज में भागीदारी 12 प्रतिशत हैं वहीं वे मुस्लिम जो देश में अल्पसंख्यकों की बहुमत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं उनकी संख्या फौज में बेहद कम है। बैंक कर्जों में भी ऐसा भेदभाव दिखाई देता है। इसके अलावा मुसलमानों में जागरूकता की कमी भी उनकी गरीबी का मुख्य कारण है। उन्हें मालूम ही नही है कि उनके लिए क्या सहूलियतें हैं?
प्र0 देश में मौलिक धर्मनिरपेक्ष के तौर पर स्थापित वाम शासित प्रदेशों विशेषतौर पर पं0 बंगाल में भी मुसलमानों की स्थिति कोई खास बेहतर नहीं है। क्या कारण है कि वामपंथ भी अल्पसंख्यकों की बेहतरी का कोई माॅडल पेश नही कर पाया?
अजीज पाशा- हमें अपनी नाकामी को मान कर चलना चाहिए। सच्चर कमेटी के आँकड़े देखें तो उसमें सरकार की विफलता जान पड़ती है। यह ठीक है कि गलतियाँ हुई हैं, परन्तु अब हम उन गलतियों को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। पं0 बंगाल में वक्फ की जमीन को बचाने के लिए विशेष कानून बनाया गया है जिसमें वक्फ की जमीन को कब्जा करने के खिलाफ कडे़ दण्ड एवं तुरन्त कार्यवाही का प्रावधान है। ऐसा कानून बनाने वाला पं0 बंगाल एकमात्र राज्य है। आपरेशन बरगा भी ऐसा कार्यक्रम था जिसमें बिना किसी भेदभाव के जमीनों का बँटवारा किया गया था। गलतियों को ठीक करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं।
प्र0 आपकी निगाह में मुस्लिम अल्पसंख्यकों की बेहतरी के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चााहिए?
अजीज पाशा-रंगनाथ मिश्रा कमेटी और सच्चर कमेटी की रिपोर्ट पर ईमानदारी से अमल करते हुए उन रिपोर्टो की संस्तुतियों को लागू करने से मुसलमानों की स्थिति बेहतर हो सकती है।

मोबाइल: 09891535484
लोकसंघर्ष पत्रिका में प्रकाशित
(समाप्त)

2 टिप्‍पणियां:

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

G.N.SHAW ने कहा…

all always,say still some thing has to be done for improvement of muslim but reality always denied.