गुरुवार, 11 नवंबर 2010

जन्म से पहले मौत क्यूँ ?


जन्म से पहले मौत क्यूँ ?
माँ मुझे इस दुनिया में आने दे
लड़की हूँ, या लड़का
जन्म तो लेने दे मुझे
क्यूँ समझती हो मुझे
जिन्दगी का अंधेरा
मैं बनूंगी तेरी,
प्यारी बिटिया !!
जिन्दगी के हर पल,
हर लम्हें ,धूप छाँव में!!
दूँगी मैं तुम्हारा साथ !!
जब झटक देगा कोई तेरा हाथ,
तब मैं रहूंगी तेरे आस पास !!
मां ने सिसकते हुए कहा ,
बिटिया रानी ,
मुझे है तुमसे बहुत प्यार!!
कोन सुनेगा तेरी यह पुकार!!
मैं भी एक नारी हूँ ,
समाज ने दिए अनेकों दुःख !!
लड़की होना ही है समाज
के लिए अभिशाप
तभी तो करा दिया
जाता है गर्भपात!!
गाज़र ,मूली की तरह
आने से पहले ही काट देते
हैं यह लोग !!
एक मौन चीख के साथ
तुझे देते हैं मौत !!
यह पढ़ा लिखा है समाज
या है हैवानों का समाज !!
एक तरफ़ पूजता हैं देवी की तरह
दूसरी तरफ देते हैं तुझे मौत ...................

- ज्योति डांग
लुधियाना

4 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

समाज को झकझोरने के लिए बहुत कुछ करने की जरुरत है | आपको साधुवाद की आपने इस ज्वलंत विषय पर लिखा | मानव न जाने कब भगवान में विश्वास करना शुरू करेगा जो उसकी सत्ता में अपना दखल देने की कोशिश करता है |

अजय सिंघल
www.panchtatva.in

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

झकझोर देने वाली रचना ..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

ज्योति डांग को सुन्दर रतना के लिए बधाई!
--
इस सुन्दर रचना की चर्चा
आज के चर्चा मंच पर भी है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/11/337.html

Dorothy ने कहा…

कन्या भ्रूण हत्या जैसे ज्वलंत एवं संवेदनशील मुद्दे पर अंतर्मन को कहीं गहरे तक कचोटती और झझकोरती, गहन संवेदनाओं की बेहद मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति. आभार.
सादर
डोरोथी.