बुधवार, 10 नवंबर 2010

संघी हिन्दुवत्व के साथ हिन्दू नहीं

फोटो कैपसन : संघ का हिंसा में विश्वास नहीं
मालेगांव से लेकर अजमेर शरीफ तक की आतंकी घटनाओ में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम आने गिरफ्तार कर जेल जाने से बौखला कर आज देश में धरना प्रदर्शन हुआ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरसंघ चालक श्री मोहन भागवत जी के नेतृत्व संघ के समस्त अनुवांशिक संगठनो ने धरना प्रदर्शन किया जानकारों के अनुसार इस धरना प्रदर्शन में लगभग 500 के आसपास संघी शामिल हुए जिससे यह साबित होता है कि संघी हिन्दुवत्व के साथ हिन्दू मतावलंबी नहीं हैं मोहन भागवत ने केंद्र में कांग्रेसी सरकार के इशारे पर संघ के नेताओं को फर्जी फ़साने की बात कही वहीँ श्री भागवत ने संघ का मुसलमानों से कोई बैर नहीं की बात कहकर अपनी पुरानी बगुला भगत वाली छवि को प्रदर्शित किया श्री मोहन भागवत ने यह भी कहा संघ का हिंसा में कोई विश्वास नहीं है लेकिन जब वह यह कहते हैं तब वह विस्मृति के शिकार होते हैं गाँधी की हत्या, सिखों का नरसंहार, मालेगांव से अजमेर शरीफ की आतंकी घटनाएं भूल जाते हैं संघ का इतिहास रहा है कि यह अपनी स्थापना काल से ही जर्मन नाजी विचारधारा से ओत-प्रोत रहा है अगर दूसरे मतावलम्बियों से उनका बैर नहीं है तो वह धर्म निरपेक्ष भारत को हिन्दू राष्ट्र क्यों बनाना चाहते हैं हिन्दू राष्ट्र बनाने का अर्थ यह है कि दूसरी संस्कृतियों को मानने वाले लोगों के ऊपर अपने धर्म की सुपरियारिटी को लागू करना बाबरी मस्जिद प्रकरण में 22-23 दिसम्बर 1949 की रात को मूर्ति रख दी गयी थी और अगर उनका दूसरे मतावलंबियों से बैर नहीं है तो बाबरी मस्जिद के अस्तित्व को माने और बाबरी मस्जिद की जगह मस्जिद बनाने दे पुराने इतिहास के आधार पर बदला लेने की प्रवित्ति संघ की प्रवित्ति है, यही काम हिटलर ने जर्मनी में किया था और उसकी चरम प्रणत्ति लाखो लोगों की गैस चम्बरों में हत्या से हुई थी जिस समय मस्जिद बनी होगी उस समय के शासन सत्ता के कानून के हिसाब से जायज होगी उन सम्राटो ने मंदिरों के लिए भी जो सुविधाएं दी थी उन सुविधाओं का उपभोग उनके महंतों ने किया था और आज भी बहुत सारे मंदिरों के पास जमीनें मुस्लिम सम्राटो के द्वारा दी गयी जमीनें ही मौजूद हैं कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाना उचित नहीं है हाँ, ये जरूर है के कांग्रेस के अन्दर हजारो संघी प्रष्टभूमि के नेतागण मौजूद हैं जो कांग्रेस के धर्म निरपेक्ष सवरूप को ही बदल के रख दिए हैं
अच्छा यह होगा श्री मोहन भागवत जी देश के निरपेक्ष स्वरूप को बनाये बचाए रखने के लिए आप संघ के पदाधिकारियों को निर्देश दें कि वह आतंकी घटनाओ में हिस्सा लेना छोड़ कर इस देश को बहुभाषीय, बहुजातीय, बहुधार्मिक देश के रूप में विकसित होने दें जिससे यह देश एक बगिया की तरह विकसित हो जिसमें तरह-तरह के फूल हों और तरह-तरह की खुशबू हो एक माली की तरह हम और आप इस देश को एक चमन की तरह विकसित करें

सुमन
लो क सं घ र्ष !

3 टिप्‍पणियां:

Javed-Ali ने कहा…

सुमन जी आपने संघ परिवार को आईना दिखाने का काम किया है.

Khursheed ने कहा…

सुमन जी आपने संघ परिवार को आईना दिखाने का काम किया है.

Shah Nawaz ने कहा…

गलत-गलत ही होता है, चाहे मैं हूँ या कोई और, गलत का विरोध होना जायज़ बात है!




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