गुरुवार, 20 जनवरी 2011

यह लोकतंत्र है!

अभी हाल में जिला पंचायतों के चुनाव में सत्तारूढ़ दल ने सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर बड़ी तादाद में लोगों को चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया। जिसका परिणाम यह रहा कि अधिकांश जिला पंचायत अध्यक्ष व प्रमुख क्षेत्र पंचायत के पद निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए। जनपद में जिला पंचायत चुनाव की घोषणा होते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों व मजिस्टेटी अधिकार प्राप्त अधिकारियों ने सम्भावित प्रत्याशियों के घर में कानून व्यवस्था के नाम पर तलाशी अभियान शुरू किया और लूटपाट की। क्षेत्र पंचायत प्रमुख पद के एक प्रत्याशी के घर की तलाशी के बाद उसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बुलाकर कहा कि मादर...... चुनाव लड़ेगा या अभी अपना एनकाउण्टर कराएगा। आखिर में वह प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ा और सत्तारूढ़ दल का प्रमुख निर्विरोध निर्वाचित हो गया।
रामनगर क्षेत्र प्रमुख के चुनाव में सरकारी मशीनरी द्वारा सभी प्रकार के नंगा नाच के पश्चात भी चुनाव हुआ, मतगणना के समय सत्तारूढ़ दल प्रत्याशी के 38 वोट गिनकर रख दिए गए और विपक्षी प्रत्याशी के 9 वोट इन वैलिड करने के बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। बाद में अधिकारियों ने विचार विमर्श करके बगैर किसी प्रार्थना पत्र के पुनः मतगणना कर डाली और 9 में से 6 वोट वैलिड घोषित कर दिए। इससे यह साफ होता है कि कुल 76 वोट की गिनती भी एक बार में निर्वाचन अधिकारी, पर्यवेक्षक नहीं कर पाए। इन सब धाँधलियों को कानून व्यवस्था की लाठी से दबाया गया। विरोध करने का मतलब है सब कुछ लुटवा देना।
जनपद में एक थाना इंचार्ज ने घोषणा कर रखी थी कि मादर..... गाली के वोट अगर नहीं दोगे तो कट्टे में चालान कर डेढ़ सौ लाठियाँ मारूँगा, जिन्दगी भर वोट देना भूल जाओगे। इस तरह से पूरे प्रदेश में पंचायत चुनाव शान्तिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो गए।
पंचायत चुनावों में सत्तारूढ़ दल के समर्थन में स्टार प्रचारक के रूप में विभिन्न अधिकारी उभरे, उनके समस्त भ्रष्टाचार, दुराचार, घोटाले माफ हो गए। कानून व्यवस्था और सुरक्षा के नाम पर विपक्षियों का दमन किया गया और लोकतंत्र पर नारकोटिक्स ड्रग्स स्मगलरों को कब्जा दिला दिया गया। सब मिलाकर चुनाव एक धोखा साबित हुआ। हमारे कुछ कहने का मतलब-माओवाद नहीं है, नहीं तो व्यवस्था हम सब को मिलकर डा0 विनायक सेन बना देगी। वैसे याद दिला दें कि हमारी पार्टी के लगभग 400 लोग छत्तीसगढ़ की विभिन्न जेलों में है जिन्होंने सिर्फ व्यवस्था जनित अपराधों का विरोध किया था।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

1 टिप्पणी:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

यही तो है लोकतन्त्र का घिनौना स्वरूप!