रविवार, 30 जनवरी 2011

है किसी में दम जो यह टैग ओबामा को पहना दे.......


अमेरिका की चापलूसी करने के लिए हम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए हैं। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के चेहरे के ऊपर अमेरिकन राष्ट्रपति ने शराब गिरा दी थी। रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज के अंडर वियर तक उतरवाकर तलाशी ली गयी थी। अमेरिका में राजदूत मीरा शंकर के साथ बेहूदगी से तलाशी ली गयी। संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय दूत सरदार जी की भी तलाशी ली गयी और हम बुरा नहीं माने, बुरा मान कर हम कर ही क्या सकते हैं क्योंकि इससे पहले ब्रिटिश साम्राज्यवाद के समय में अंग्रेज भारतीयों को मजदूर के रूप में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में ले गए और दास बनाकर उनसे कार्य कराया पानी के जहाजों में उनको कोड़े मार-मार कर जहाज चलवाए गए। कोड़ों की मार सह न पाने के कारण सैकड़ों मजदूर मर जाते थे किन्तु अपने देश का अभिजात्य वर्ग ब्रिटिश साम्राज्य के यशोगान में ही लगा रहता था। उसी तरह से अब हमारी सरकार और मुख्य विपक्षी दल के नेता अमेरिकन साम्राज्यवाद के नौकर मात्र हैं, यशोगान करना उनका धर्म है।
कैलिफोर्निया में सैकड़ों भारतीय छात्रों को रेडियो कालर पैरों में कैद कर दिए गए हैं। जो उनकी गतिविधियों को सेटेलाईट के माध्यम से सिग्नल देते रहते हैं यह टैग जंगली जानवरों पर नजर रखने के लिए पहनाएं जाते हैं। और भारतीय संघ के राष्ट्राध्यक्ष से लेकर मुख्य विपक्षी दल के नेता गण चुप्पी साधे हैं। अगर किसी छोटे मुल्क ने जरा सा भी अनुचित हरकत की होती तो यहाँ का अभिजात्य वर्ग अपने मुंह से तोप और तलवार अवश्य चला रहा होता। यही हमारी मानसिकता है और यही यथार्त है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

9 टिप्‍पणियां:

Kajal Kumar ने कहा…

नहीं, क्यूबा के अलावा तो किसी में दम नहीं दिखता है...

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

हम केवल नाम के प्रभुसत्तासंपन्न गणराज्य हैं।

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

हर प्रकार से निंदनीय.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

समरथ को नहीं दोष गुसाईँ!

राज भाटिय़ा ने कहा…

ओर जब यह हमारे देश मै आया तो हम ने गुलामो की तरह से बिना चेक किये इसे इस के काफ़िले के संग एयर पोर्ट से जाने दिया, ओर हमारे सरदार जी एयर पोर्ट पर गये सलाम बजाने..... अब ओर कितने सबूट चाहिये मानसिका गुलामी के

shazia ने कहा…
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रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

क्यों न हो? हम मानसिक तौर पर उनके गुलाम जो बने हुए हैं. वे हमारी मेधा को उपयोग करते हैं और अपने काम चलाते हैं. फिर भी हम हमारा बेटा, भाई यूएस में कह कर गौरान्वित अनुभव करते हैं. यही हमारी मानसिक गुलामी कि निशानी है. क्या नहीं है हमारे देश में? हम क्यों उनके मानसिक गुलाम रहें? इस बात का भर पूर विरोध होना चाहिए. लेकिन हमारे युवा भी देश में होने वाली घटनाओं पर आगजनी करने को तैयार रहते हैं लेकिन ऐसी घटनाओं का बल्कि कहें अपमान के लिए आवाज अपने देश में उठाकर अपना विरोध प्रदर्शित नहीं कर पाते हैं. ये जिम्मेदारी हमारी सरकार की है.

shazia ने कहा…
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sajjad naqvi ने कहा…

phir ek inqilab ki zarurat hain.......sar utha ke calne ke liye...

zinda rahena hain tw meere karwon ban kar raho. is zame ki pastiyun me aasama ban kar raho. dost o ke pas jayo phoool bikhrate huve. dushmano ki saf se guzro aag barsate huve..