गुरुवार, 10 फ़रवरी 2011

इन्टरनेट लोगों के मुखौटे भी नोचता है

मैं भी अमेरिकन साम्राज्यवाद का सेवक था अब अपनी मजदूरी वसूल रहा हूँ

साम्यवादी चीन के सम्बन्ध में सन 2006 में विकीलीक्स ने व्यवस्था सम्बन्धी तमाम सारी अव्यवस्थाओं को उजागर किया तो पश्चिमी मीडिया और उसके नेतागण दुनिया में उसे अपने सर पर बैठाये हुए नाच रहे थे लेकिन जब विकीलीक्स ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के सफ़ेद झूठों को उजागर करना शुरू किया तो ओबामा प्रशासन ने अमेरिकी कर्मचारियों को विकीलीक्स पढने पर पाबन्दी लगा दी। अमेरिका की लाईब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस ने सभी कम्प्यूटरों पर विकीलीक्स को प्रतिबंधित कर दिया। विकीलीक्स ने अमेरिकन साम्राज्यवाद को इराक, अफगानिस्तान, ईरान के सम्बन्ध में अमेरिका ने सैन्य हस्तक्क्षेप के जो बहाने बनाये थे उनको तार-तार कर दिया। मेन स्ट्रीम मीडिया दुनिया में यह ढिंढोरा पीटता है कि वह सच समाचार प्रकाशित करता है उसकी भी सारी बातें गलत साबित हुई।
अमेरिकन साम्राज्यवाद ने अफगानिस्तान में। यू.एस.एस.आर के खिलाफ तालिबान को खड़ा किया था। उसी तरह से विकीलीक्स को पश्चिमी मीडिया व उसके नेताओं ने साम्यवादी व्यवस्थाओं के खिलाफ पोषित किया था किन्तु तालिबान की भूमिका समाप्त होते ही तालिबानियों ने उलट कर अमेरिकन साम्राज्यवाद के शोषण के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया उसी तरह विकीलीक्स ने अमेरिकन साम्राज्यवाद के खिलाफ लीक जारी करना प्रारंभ किया तो उसके सारे मुखौटे गायब होते चले गए और वह पूरी दुनिया में अभियुक्त की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, समानता आदि के पाखंड को नंगा कर दिया। ईराक के अन्दर अमेरिकन सेनाओ ने जो भी कुछ किया है उसके आगे हिटलर के भी अपराध कम मालूम देते हें अमेरिका के ज्यादा अमेरिकन साम्राज्यवाद के लोग विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों की जिस तरह से बेइज्जती करते हैं उसका भी खुलासा हुआ है। अब अमेरिकन साम्राज्यवाद व उसके पिट्ठू विकीलीक्स के संचालक असान्जे को आतंकी बता कर जेल में रहने की बात कर रहे हें। हद तो यहाँ तक हो गयी है कि इन्टरनेट पर लोगों को प्राप्त अबाध स्वतंत्रता पर पाबन्दी लगा देने का प्रयास किया जा रहा है।
मिश्र में इन्टरनेट सेवाएं अमेरिकन साम्राज्यवाद के पिट्ठू तानाशाह हुस्नी मुबारक ने लगा रखी है लेकिन जनता के सामने वह बेबस है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

4 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

जनता सर्वोपरि है!
अगर जाग जाए तो!

honesty project democracy ने कहा…

वो दिन दूर नहीं जब अमेरिका और इंग्लेंड जैसे देशों से रिश्ता रखना कोई भी इंसानियत को पसंद करने वाला देश पसंद नहीं करेगा........भारत को तो अमेरिका और इंग्लेंड के साथ सभी सम्बन्ध तोर लेने में ही भलाई है.......इन दोनों देशों ने भारत को हमेशा लूटा है........

सलीम ख़ान ने कहा…

वो दिन दूर नहीं जब अमेरिका और इंग्लेंड जैसे देशों से रिश्ता रखना कोई भी इंसानियत को पसंद करने वाला देश पसंद नहीं करेगा...

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

nice.