शुक्रवार, 29 अप्रैल 2011

'केंद्र की शह पर हुआ पुरुलिया केस'

1995 में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में हथियार गिराए जाने की गुत्थी ने नया मोड़ ले लिया है। इस घटना के मुख्य षड्यंत्रकारी डेनमार्क के नील्स क्रिस्चन नील्सन उर्फ किम डेवी ने इस मामले में सनसनीखेज खुलासा किया है। डेवी ने हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ से बातचीत में कहा है कि उन्होंने पश्चिम बंगाल के लोगों को कम्युनिस्ट सरकार के दमन से बचाने के लिए हथियार गिराए थे। डेवी ने दावा किया कि ऐसा केंद्र सरकार में मौजूद लोगों के इशारे पर ही हुआ था। डेवी ने एक और खुलासा किया है कि इस काम में उनको ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी एमआई5 और भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का सहयोग प्राप्त था। इस मामले में शामिल एक ब्रिटिश नागरिक और हथियारों के डीलर पीटर ब्लीच ने भी इन्हीं आरोपों को दुहराया है।

डेवी ने बताया कि पश्चिम बंगाल में सीपीएम के आतंक से लोग परेशान थे। लोगों को इससे बचाने के लिए उन्होंने इस हथियार कांड को अंजाम दिया था। क्या हथियार कांड में भारतीय भी शामिल थे ? इस पर डेवी ने कहा, बेशक भारतीय भी शामिल थे। उस समय केंद्र में जो राजनीतिक सत्ता थी, उसका सहयोग भी उन्हें हासिल था। केंद्र सरकार ने पुरुलिया के लोगों को बचाने के लिए हथियार कांड को अंजाम देने की योजना को अमल में लाने को मंजूरी दे दी। इस कांड में हमें रॉ और एमआई5 का सहयोग भी मिला था। रॉ को बाहरी ताकतों ने सूचना दी और इसके बाद हथियार गिराने के एक महीने पहले ही उसने भी हमें इसकी मंजूरी दे दी। हथियार गिराने में जिस सांसद ने हमारी मदद की, वह पीएमओ के संपर्क में था।