रविवार, 5 जून 2011

पुलिस उच्चाधिकारियों द्वारा विधि प्रक्रिया का उपहास

बाराबंकी जनपद में हैदरगढ़ पुलिस ने दावा किया कि दो करोड़ की मूर्तियाँ उसने बरामद की हैं और तीन व्यक्तियों को अपराध संख्या 505/11 अंतर्गत धरा 41, 411, 414 आइ.पी.सी के तहत गिरफ्तार कियापुलिस ने लिखा-पढ़ी में लिखा की बरामद गौतमबुद्ध श्रीकृष्ण की मूर्ती को मौके पर सील मोहर कर दी और वहीँ पर फर्द बरामदगी लिखी गयीबाद में अपर पुलिस अधीक्षक श्रीपर्णा गांगुली अन्य पुलिस अधिकारियो ने प्रेस के सामने गौतम बुद्ध श्रीकृष्ण की मूर्तियों के साथ फोटोवें खिचवा कर प्रकाशित कराया
गौरतलब है कि किसी भी अवैध वस्तु की बरामदगी करने वाला अधिकारी बरामदगी स्थल पर ही उस वास्तु को सर्वमोहर करता है और मौके पर फर्द बरामदगी लिख कर उसकी एक प्रति अभियुक्तों को देता है और फिर सम्बंधित पुलिस स्टेशन आकर फर्द बरामदगी को हेड मोहर्रिर को देता हैहेड मोहर्रिर फर्द बरामदगी के आधार पर चिक प्रथम सूचना रिपोर्ट तैयार करता हैमुलजिम को हवालात में दाखिल करता हैबरामद सील मोहर अवैध वस्तु को माल खाने में रखता हैजब अभियुक्त्गन को सम्बंधित मजिस्टेट के समक्ष पेश किया जाता है तो सर्व मोहर माल को मजिस्टेट से हस्ताक्षर करवाए जाते हैंइस बीच में सर्वमोहर माल को खोलने का अधिकार किसी को नहीं हैयदि सर्व मोहर माल को खोल दिया जाता है तो वाद में अभियुक्त को सजा नहीं करायी जा सकती है और इस कार्य का लाभ अभियुक्त को मिलता है किन्तु पुलिस ने इस मामले में पूरी विधिक प्रक्रिया का उपहास उड़ाते हुएनेताओं की स्टाइल में मूर्तियों के साथ फोटो खिंचवाकर प्रकाशित कराने से अभियुक्तों को ही लाभ होगाइस प्रकरण की शिकायत जिला बार एशोसियेशन के पूर्व महामंत्री श्री प्रदीप सिंह एडवोकेट ने जिला मजिस्टेट से की है

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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