मंगलवार, 23 अगस्त 2011

अन्ना का आन्दोलन: असलियत क्या है ? भाग 1


मुझे इस बात की ख़ुशी है कि इस लोकसंघर्ष पत्रिका में कुछ लेखको ने अन्ना आन्दोलन के कई पहलुओं की आलोचना की है। भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन के नाम पर जिस तरह देश के लोगों को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिशें हो रही हैं उनसे सावधान रहने की जरूरत है।

इसमें कोई शक नहीं की हमारे देश में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और विकराल रूप धारण करती जा रही है लेकिन इसके नाम बराबर और इसका आवरण लेकर एक ऐसी राजनीति और विचारधारा का बड़ी चालाकी से प्रचार किया जा रहा है जो हमें जर्मनी में हिटलर के दिनों की याद दिलाता है जर्मनी में पूंजीवादी सरकार और व्यवस्था की कमजोरी का पूरा फायदा उठाकर नाजी पार्टी सत्ता में आयी। यहाँ हिटलर की बात क्यों कर रहे हैं ये आगे स्पष्ट हो जायेगा हो सकता है की कुछ लोगों की दृष्टि में ये जरा ज्यादती होगी, लेकिन याद रहे इटली और जर्मनी में फासीवाद पूर्वोत्तर मिलते जुलते तरीके अपनाये

अन्ना का गुट और आंदोलन मुख्य रूप से आरएसएस तथा संघ परिवार के बल पर बराबर चल रहा है, इसमें कोई दो राय नहीं है. अन्ना के पिछले आंदोलन में (अन्ना I में) ये साफ़ हो गया था कि नरेंद्र मोदी, आडवाणी और पूरा संघ परिवार इसका सञ्चालन कर रहा है। उस समय अन्ना ने नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ भी की थी। इस समय लगता है की जरा सावधानी बरती जा रही है, और हाँ यह और भी खतरनाक है। इसलिए अपने दूसरे संस्करण (अन्ना द्वितीय) में अन्ना और उनके सहयोगी, खासकर उनके पीछे उनका निर्देशन करनेवाली ताकतें बड़ी चालाकी से थोड़ा स्वर बादल कर बातें पेश कर रही हैं।

सबसे पहले ये पूछना चाहेंगे कि अन्ना कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में चल रहे असीम भ्रष्टाचार पर बराबर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं ? वे क्यों चुप हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री पिछले ९ वर्षों से लोकायुक्त की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं? अन्ना कहाँ थे जब कर्नाटक का तमशा चल रहा था ? वहीँ जाकर उन्होंने भूख 'हड़ताल' क्यों नहीं कर डाली, जिसका उन्हें इतना शौक है?! राम मंदिर के नाम बराबर ज़मा किये गए अरबों रुपये कहाँ गए? क्या जवाब है?

बीजेपी के इन राज्यों की बात हम इसलिए कर रहें हैं क्योंकि बीजेपी इस समय सबसे सक्रिय रूप से आन्दोलन का समर्थन और सञ्चालन कर रहा है। कहाँ से आ रहें हैं पैसे आन्दोलन चलने के लिये?

-अनिल राजिमवाले

सुप्रसिद्ध लेखक चिन्तक व सिद्धांतकार

(क्रमश:)

12 टिप्‍पणियां:

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

भाई ले देकर तो किसी तरह एक आदमी निकला जिसने इन भ्रष्टाचारी नेताओं की गर्दन दबाई है। अब अगर वह आरएसएस या बीजेपी का है तो हुआ करे।

ana ने कहा…

kuch logo ko har kam min mekh nikalne ki adat hoti hai ....aap bhrashtachar ko kis tarah mitana chahate ....aur us rah pe aapke sath aur kitne hai jara spasht kare.....anna ne to apna dam dikha diya ....zara aap bhi koshish kar le.

Vijai Mathur ने कहा…

वस्तुतः जो लोग स्वाधीनता दिवस पर अंधकार रखने की अपील पर खुशियाँ मनाते हैं उन्हें राष्ट्र प्रेम की ये अच्छी बाते समझ आ ही नहीं सकती इसलिए अनर्गल आलोचना करते हैं।
हम लोगों ने नौ पार्टियों के मोर्चे के रूप मे आज ही भ्रष्टाचार के खात्मे हेतु जो -प्रदर्शन किया है और हमारे साथ गरीब,मेहनतकश मजदूर-किसान जनता है। हम पैसे वालों के पिट्ठू नहीं हैं।

कविता रावत ने कहा…

इस आन्दोलन के पीछे कोई भी हो लेकिन देश की जनता में कुछ तो जागरूकता आयी है.. और जनता को अगर भविष्य में जागरूक रहने की आदत हो गयी तो इसका दूरगामी सकारात्मक प्रभाव परलक्षित होगा.. यह मेरा तो यही सोचना है..

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

इस आन्दोलन के पीछे कोई भी हो,लेकिन देश की जनता में कुछ तो जागरूकता आयी.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सहारा चाहे किसी का भी हो, मगर बन गया है यह जनआन्दोलन।

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

बीजेपी व संघ द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से वामपंथियों को तकलीफ है तो पहले खुद उन्हें ये आंदोलन शुरू कर देना चाहिए था|

अब प्रलाप करने का क्या औचित्य ??

बेनामी ने कहा…

aapki baaton se lag raha hai aap bhi khub bhrast hai .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

vidhya ने कहा…

nice

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

हे राम! अगर इस युग में आप भी होते तो रावन का संहार करने से रोकने वाले असंख्य अतिरिक्त्र जीव आपके कार्य को और दुष्कर बना देते....

Arvind Pande Wardha ने कहा…

mai anil raajimwaleG se etna hi kahana chahta hu.
krupya abhi koi nishkarsh pe naa pahuche .
jab tak aandolan chal raha hai.
aakhir sachhai to ek din saamne aana hi hai.
mai R.S.S. ka samrthak nahi hu.
lekin kahna chahta hu.ki ek taraf to ham sabhi dalo ko bharsht kahkar aalochna karte hai.our koi eske khilaaf baat karta hai to uski bhi aalochna karte hai.
ye lokpaal ki wajah sehi karnataka me yedurappa ko jaana pada.jiske adhyaksha santosh hegde the.
mera suzav hai k annaG k janlokpaal ko sarkaar ne 2 saal k liye laagu karna chahiye our uske assar ko dekhkar use cantinyu karna chahiye. nahi to vaapis bulane ka adhikaar to sarkar k paas sansad me to hai. aap ki rai ki pratiksha me.