शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय अंतिम भाग


आदेश
74. यह अदालत आदेश देती है कि-
1. छत्तीसगढ़ राज्य तुरन्त राज्य में माओवादी गतिविधियों से निपटने, उसे कम करने या समाप्त करने के लिए एस0पी0ओ0 का प्रयोग किसी भी प्रकार, किसी भी ढंग से या किसी स्वरूप में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, करने से तुरन्त रुक जाए एवं परहेज करे।
2. भारत सरकार एस0पी0ओ0 की भर्ती के प्रयोजन हेतु प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धन देने से तुरन्त रुक जाए।
3. छत्तीसगढ़ राज्य तत्काल प्रभाव से हर संभव प्रयास करे कि एस0पी0ओ0 को जारी किए गए सभी प्रकार के हथियार अथवा अन्य सामग्री तुरन्त वापस ले लिए जाएँ। हथियार की परिभाषा में बन्दूकें, रायफल, लांचर आदि सभी शामिल हैं।
4. छत्तीसगढ़ राज्य तत्काल प्रभाव से यह व्यवस्था करेगा कि वह ऐसे लोगों को जिनकी नियुक्ति एस0पी0ओ0 के रूप में की गई थी, के जीवन की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठाएगा।
5. छत्तीसगढ़ राज्य ऐसे उचित कदम उठाएगा जिससे कि वह किसी भी समूह जिनमंे कि सलवा जुडूम अथवा कोया कमाण्डोज़ भी सम्मिलित हैं, की गतिविधियों को रोकेगा, जो कानून को व्यक्तिगत हाथों में लेते हैं, असंवैधानिक रूप से कार्य करते हैं या किसी भी इंसान के मानवाधिकारों का हनन करते हैं। छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा उठाए गए कदम केवल सलवा जुडूम या कोया कमाण्डों के आपराधिक कार्य तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि उनके खिलाफ जाँच भी की जाएगी और उनके खिलाफ मुकदमा भी चलाया जाएगा।
(75) उपयुकर््त के अलावा हम एस0पी0ओ0 की नियुक्ति नियमित पुलिस बल के रूप में करने के लिए असंवैधानिक घोषित करते हैं। हमारा यह भी विचार है कि माओवादी नवजवान जिनकी पूर्व में नियुक्ति माओवादियों और नक्सलवादियों से लड़ने के लिए की गई, उन्हें एस0पी0ओ0 के उन कार्यों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है जैसा कि सी0पी0ए0 2007 की धारा 23 (वन) (एच) एवं 23 (वन) (आई) में वर्णित है। शर्त यह है कि उन्हें किसी ऐसे कार्य में न लगाया जाय जिनसे माओवादी, नक्सलवादी एवं बाएँ बाजू उग्रवाद से लड़ने की संज्ञा दी जा सके। या जिससे दूसरे व्यक्तियों के मानवाधिकारों का हनन हो जैसा कि स्वामी अग्निवेश द्वारा अपने वक्तव्य में कहा गया है।
(76) अब हम अपना ध्यान उन आरोपों की ओर करते हैं जिन्हें स्वामी अग्निवेश के द्वारा लगाया गया है। मोरपल्ली, टैडमेल्टा एवं टिम्मापुरम के गाँवों में कथित रूप से एस0पी0ओ0, कोया कमाण्डोज एवं सलवा जुडूम के द्वारा स्वामी अग्निवेश एवं अन्य लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ मार्च 2011 मंे अंजाम दी र्गइं, जबकि वे हिंसा से ग्रसित क्षेत्रों में राहत सामग्री उपलब्ध करा रहे थे।
77. इस सम्बन्ध में, हम छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा दाखिल किए गए हलफनामों का उल्लेख करते हैं। अदालत आश्चर्य से यह कहने पर मजबूर है कि उक्त शपथ पत्र मात्र अपने आपको सही साबित करने एवं औचित्य ठहराने के उद्देश्य से दाखिल किए गए हैं। उक्त कार्य को छत्तीसगढ़ राज्य ने अपने संवैधानिक उत्तरदायित्व को पूरा करने अर्थात हिंसा से निपटने के लिए नहीं किया है। छत्तीसगढ़ राज्य का हलफनामा अपने आप में एक दलील है कि उक्त तीनों गाँवों में हिंसा की वारदातंे हुई हैं। भिन्न-भिन्न लोगों के द्वारा स्वामी अग्निवेश एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध हिंसा की घटनाएँ घटित हुईं। हम यह भी नोट करते हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य के द्वारा जाँच आयोग गठित किया जाएगा जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के कार्यरत अथवा अवकाशप्राप्त न्यायाधीश के द्वारा की जाएगी। अदालत की राय में, राज्य के द्वारा उठाए गए कदम अपर्याप्त हैं एवं छत्तीसगढ़ राज्य की परिस्थिति को देखते हुए वे किसी संतोषजनक नतीजे तक नहीं पहुँचेंगे। इस अदालत ने पूर्व में कहा था कि जाँच आयोग, जैसा कि छत्तीसगढ़ राज्य ने व्यवस्था की है, का अधिकाधिक नतीजा यह हो सकता है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिर भी वे कानूनी प्रक्रिया को पूरा नहीं करते हैं जिसके अनुसार नागरिकों के विरुद्ध अपराधों की पूरी जाँच की जाए एवं जो व्यक्ति आपराधिक
गतिविधियों में सम्मिलित हो उसको दण्डित किया जाए। अतएव हम निम्नलिखित आदेश पारित करने के लिए विवश हैं:-
78. हम आदेशित करते हैं कि केन्द्रीय जाँच ब्यूरो तुरन्त इस सम्पूर्ण प्रकरण की जाँच करे एवं उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करे जो
1. इस घटना के लिए उत्तरदायी हंै जो मार्च 2011 में मोरपल्ली, टैडमेल्टा एवं टिम्मापुरम में घटित हुई एवं जो दान्तेवाड़ा एवं पड़ोसी जिलों में स्थित है।
2. मार्च 2011 में स्वामी अग्निवेश एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध हुई हिंसा की घटनाओं की जाँच करना जबकि वे राज्य की यात्रा पर गए थे।
79. हम यह भी निर्देशित करते हैं कि केन्द्रीय जाँच ब्यूरो अपनी प्रारम्भिक जाँच रिपोर्ट आज से छः हफ्ते के अन्दर दाखिल करे।
80. हम छत्तीसगढ़ राज्य एवं भारत सरकार को निर्देशित करते हैं कि आज की तिथि से छः सप्ताह के अन्दर सभी आदेशों एवं निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
81. सितम्बर 2011 के प्रथम सप्ताह में अग्रिम आदेशों के लिए अभिसूचित।

समाप्त

अनुवादक : मो0 एहरार
मो 08009513858

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