शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

महान क्रांतिकारी महावीर सिंह-4


आज जिस आजादी का उपभोग हम कर रहे है उसकी भव्य इमारत की बुनियाद डालने में महावीर सिंह उन जैसे कितने अज्ञात क्रान्तिकारियो ने अपना रक्त और माँस गला दिया था |किसी देश में महावीर सिंह जैसे बहादुर देशभक्त और उनके पिता जैसी आत्माए रोज -रोज जन्म नही लेती |उनकी यादगार हमारे गौरवपूर्ण इतिहास की पवित्र धरोहर है |क्या हम उसका उचित सम्मान कर रहे है ?
--"भगत सिंह के साथी क्रांतकारी शिव वर्मा की संस्मृतियो से |
पिता का उपरोक्त पत्र महावीर सिंह द्वारा लिखे पत्र के उत्तर के रूप में आया था |महावीर सिंह का पत्र 'भगत सिंह एवं साथियो के दस्तावेज में मौजूद है |उसको हम संक्षिप्त रूप में दे रहे है |
पूज्य पिताजी ! पोर्टब्लयेर (अंडमान ).....प्यारे भाई का क्या हाल है ...इसकी सुचना मुझे शीघ्र दीजिएगा |उसे केवल वैद्ध ही बनने का उपदेश न देना ,बल्कि साथ -ही साथ मनुष्य बनाना भी बतलाना |आजकल मनुष्य वही हो सकता है जिसे वर्तमान वातावरण का ज्ञान हो ,जो मनुष्य के कर्तव्य को जानता ही न हो परन्तु उसका पालन भी करता हो |इसलिए समाज की धरोहर को आलस्य तथा आरामतलबी तथा स्वार्थपरता में डालकर समाज के सामने कृतघ्न न साबित हो |इससे शारीरिक तथा मानसिक दोनों प्रकार की उन्नति करता रहे ,क्योकि दोनों आवश्यक है |शारीरिक पुष्टि अन्न तथा व्यायाम से तथा मानसिक अध्ययन से |उसे आजकल के वातावरण का ज्ञान करने के लिए समाचार पत्र तथा एतिहासिक ,साम्पत्तिक तथा राजनैतिक ,सामाजिक पुस्तको का अवलोकन (अध्ययन ) को कहिये |समाज से मेरा मतलब आर्य समाज अथवा अन्य संकीर्णताव्य्जक समाज नही है ,परन्तु जनसाधारण का है |क्योंकि ये धार्मिक समाज मेरे सामने संकीर्ण होने के कारण कोई भी मूल्य नही रखते है और साथ ही इस संकीर्णता तथा स्वार्थपरता तथा अन्यायपूर्ण होने के कारण सब धर्मो से दूर रहना चाहता हूँ और दुसरो को भी ऐसा ही उपदेश देता हूँ (और )उसको सबसे बढकर तथा मनुष्य तथा समाज का (के लिए )कल्याणकारी समझता हूँ वह है "मनुष्य का मनुष्य तथा प्राणी -मात्र के साथ के कर्तव्य बिना किसी जाति-भेद ,रंग भेद धर्म तथा धन भेद के "|....................आपका आज्ञाकारी पुत्र महावीर सिंह .....(सेलुलर जेल ,पोर्टब्लयेर (अंडमान )
-सुनील दत्ता .पत्रकार

कोई टिप्पणी नहीं:

Share |