सोमवार, 18 जून 2012

21 हजार सरकारी स्कूल बंद


30 अप्रैल के हिन्दी दैनिक में 21 हजार सरकारी स्कूलो के बंद होने की खबर छपी है | खबर मानव संसाधन एवं विकास मत्रालय की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया गया है की 2009 -- 11 के दौरान देश में सरकारी स्कूलो की संख्या में 28052 स्कूलो की वृद्धि हुई है | लेकिन यह वृद्धि शिक्षा के पिछड़े राज्यों में -- उत्तर प्रदेश , बिहार , उड़ीसा , महाराष्ट्र और झारखंड में हुई है | जबकि शिक्षा में अगड़े 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशो में इस अवधि में 20 .796 स्कूल बन्द हो गये | इन राज्यों में केरल , आंध्र प्रदेश , राजस्थान , असम अरुणाचल , प्रदेश हरियाणा , सिक्किम , उत्तराखंड , दिल्ली तथा केंद्र शासित चंडीगढ़ , दमन दादरा एवं नगर हवेली शामिल है | दिलचस्प बात यह है की इन राज्यों के लगभग 21 हजार विद्यालयों के बन्द होने का प्रमुख कारण यह बताया गया है की इन राज्यों में जनसंख्या नियंत्रण पर अच्छा काम हुआ है | फलस्वरूप जन्मदर में कमी आई है | बच्चो की संख्या में कमी आई है | इसी कारण वहा के स्कूल बंद हुए है | प्रश्न उठता है की आबादी में वृद्धि दर में कमी आने से स्कूल क्यों और कैसे बन्द हो जायेंगे ? बच्चो की कमी से कम बच्चे स्कूल पहुचेंगे , लेकिन वे पूरी तरह से गायब कैसे हो जायेंगे ? जनसंख्या वृद्धि दर घटना और बच्चो की संख्या कम होने के साथ -- साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रिपोर्ट में आबादी के गाँवों से शहरों में बढते पलायन का कारण भी जोड़ दिया गया है | लेकिन यहाँ भी वही सवाल खड़ा है की क्या पूरी आबादी और बच्चे भी पलायन कर गये है , जो कत्तई संभव नही है |
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के रिपोर्ट की थोड़ी विवेचना भी स्कूलो का बन्द होने की बताये गये कारणों को गलत व झूठा साबित कर देता है | लेकिन तब सवाल है की स्कूल बन्द होने के वास्तविक कारण क्या है ? इस का वास्तविक कारण यह है की सरकारी स्कूलो में बच्चो को शिक्षित करने का काम उनमे शिक्षा की बुनियाद डालने और मजबूत करने का काम कब का छोड़ दिया गया है | उन्हें तो अब मुख्य तौर पर सरकारी सर्व शिक्षा अभियान के प्रचारों में ही शिक्षित दिखाया जा रहा है | इसीलिए तो प्राइवेट -- नर्सरी व प्राइमरी दर्जो के स्कूलो में न जा पाने वाले गरीब बच्चे ही सरकारी स्कूलो में पहुच रहे है | वह भी शिक्षा से ज्यादा मिड -- डे-- मील के नाम पर जा रहे है | यह इस बात का सबूत है की सरकार अब बच्चो की शिक्षा का काम राज्य व सरकार के उपर से हटाने लगी हुई है | इसे धीरे -- धीरे वे 20 -- 25 सालो से नयी शिक्षा नीति के लागू किए जाने के बाद से चरणबद्ध रूप से हटाती भी रही है | अब वह स्कूली शिक्षा को भी निजी विद्यालयों के छोटे -- बड़े मालिको के हाथ में सौप्ति जा रही है | 21 हजार स्कूलो के बन्द होने का असली कारण भी यही है | लेकिन तब शिक्षा में पिछड़े बताये गये राज्यों में विद्यालयों की संख्या बढ़ क्यों रही है ? उसके बढने का पहला कारण तो गरीब घरो के बच्चो का प्राइवेट स्कूलो में पहुचने की असर्मथता और मिड -- डे -- मील है | इसका दुसरा बड़ा कारण स्वंय ऐसे प्राइवेट स्कूल है , जिनको अभी मान्यता नही मिल पायी है | उनके बच्चे तो पढ़ते है गैर मान्यता प्राप्त स्कूलो में पर उनका नाम सरकारी स्कूल रजिस्टर में दर्ज है |
प्राप्त सूचनाओं के अनुसार सरकारी स्कूलो में इन बच्चो की संख्या , कुल बच्चो की संख्या के आधे से ज्यादा ही है | यह है इन प्रान्तों के स्कूलो के ज्यादा खुलने या बढने की स्थितियों का प्रमुख कारण | सही कहा जाए तो यह इन प्रान्तों के भी स्कूलो के भविष्य में बन्द होने की स्थितिया है , न की उनके लगातार चलने व बढने की | यह स्थिति खासकर सरकारी जूनियर हाई स्कूल के दर्जो में एकदम स्पष्ट दिखाई पड रही है | सरकारी स्कूलो के कक्षा 6 , 7 , और 8 के बच्चो की संख्या में भारी कमी आई है | साफ़ बात है की सरकारी स्कूलो के बन्द होने की यह स्थितिया न तो आबादी वृद्धि दर में कमी आने से हो रही है और न ग्रामीण आबादी के पलायन से | बल्कि यह स्थिति खुद सरकारों द्वारा सरकारी स्कूलो को हतोत्साहित करने और प्राइवेट स्कूलो को बढावा देने की नीतिगत बदलावों के चलते खड़ी हो रही है और बढती भी जा रही है |
बताने की जरूरत नही हैं की यह नीतिगत बदलाव समाज के निचले स्तर प्र्पदे और कल को निचले स्तर पर पहुचने वाले लोगो को स्कूली शिक्षा से बाहर कर देगा और कर भी रहा है | फिर यह बदलाव शिक्षण संस्थाओं के निजी मालिको को छोटे -- बड़े स्तर तक के मालिको को खासकर उच्च स्तरीय शिक्षण संस्थानों से भारी लाभ कमाने की छूट देने और इसे बढाने का भी काम कर रहा है | शिक्षा के क्षेत्र में यह नीतिगत बदलाव वैश्वीकरणवादी , आर्थिक नीतियों व डंकल प्रस्ताव का अहम हिस्सा है | सरकारी स्कूलो को धीरे -- धीरे बन्द किया जाना और उसे निजी हाथो में सौपा जाना डंकल प्रस्ताव के सेवा के व्यापार के अंतर्गत है | उसका नियोजित क्रियान्वन है | जागो -- जागी अब भी वक्त है अगर नही जागे तो तुम्हारे बच्चो का भविष्य पूरी तरह अँधेरे में होगा रौशनी का एक दिया भी नही होगा उनके जीवन में .......................................आने वाले कल की खातिर जागो |

सुनील दत्ता
पत्रकार
09415370672

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