रविवार, 3 जून 2012

आधुनिक यमराज


सुप्रसिद्ध साहित्यकार, कहानीकार मुंशी प्रेमचंद ने डाक्टरों की निष्ठुरता के सम्बन्ध में मन्त्र कहानी लिखी थी वह बीज जो मन्त्र कहानी में था वह विशाल बरगद हो गया है और जब आमिर खान ने सत्यमेव जयते के एपिसोड में डाक्टरों के व्यवसाय सम्बन्ध में फिल्मांकन कर वस्तुस्तिथि को जनता के सामने रख दिया तो इंडियन मेडिकल एशोशिएसन में आमिर खान को धमकी दी कि वह माफ़ी मांगे। यह शर्म आने की बजाये सीनाजोरी भरी बात है।
अधिकांश डाक्टर अपने मरीजों को अनावश्यक रूप से दवा खिला कर दवा कंपनियों को फायदा पहुँचाने का काम करते हैं। दवा मार्केट के एक प्रतिनिधि के अनुसार बहुत सारी दवाएं ऐसी होती हैं जिन पर 200 गुना ज्यादा दाम लिखे होते हैं और डाक्टर लोग ऐसी दवाओं को लिख कर सीधे अपना कमीशन प्राप्त करते हैं। जबसे पैथोलोजी जगह-जगह खुल गयी हैं तबसे डाक्टर कमीशन पाने के लिये एक्स रे अल्टासाउंड तथा अन्य महंगी जांचे लिखते हैं जबकि उन महंगी जांचों के बगैर भी इलाज संभव है। कुछ डाक्टर पैथोलोजी को टेलेफोन कर गंभीर मर्ज रिपोर्टों में भी दर्ज कराने का काम करते हैं। यदि सर्जरी होनी है तो अनावश्यक रूप से रक्त दवाएं तथा आप्रेसन से सम्बंधित छोटे छोटे इंस्ट्रूमेंट मरीजों से खरीदवा लेते हैं और बाद में वो बचा हुआ सारा सामान वापस मेडिकल स्टोर चला जाता है। बड़े-बड़े नर्सिंग होम में मरीजों को अनावश्यक रूप से वेंटिलेटर पर रखा जाता है। जबकि वास्तविक रूप से मरीज मृतप्राय होता है। ऐसे मरीजों से लाखों रुपये वसूले जाते हैं। प्राइवेट नर्सिंग होम्स में सुरक्षा के नाम पर गुंडे रखे जाते हैं जो मरीजों के तीमारदारों से रुपया वसूलने का काम करते हैं। डाक्टर लोग मरीजों से रुपया वसूलने के लिये पुलिस से भी चार कदम आगे बढ़कर अमानवीय हो जाते हैं। मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया अब तो जगह जगह डेंटल कॉलेज मेडिकल कॉलेज खोल रही है जिसमें प्रवेश हेतु करोडो रुपये तक की डोनेसन ली जाती है। जबकि अधिकांश मेडिकल व डेंटल कालेज मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया के मानक को पूरा नहीं करते हैं। ऐसे कालेजों में प्रोफ़ेसर व लेक्चरर के रूप में बड़े बड़े डाक्टरों के नाम लिखे होते हैं और पढ़ाने वाले लोग दूसरे होते हैं जिनको पांच हजार से लेकर दस हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाता है। पहले आदर्शवादी लोग डाक्टर को भगवान का रूप कहते थे किन्तु अब वस्तुस्तिथि यह है कि आधुनिक यमराज अगर कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
उत्तर प्रदेश में एनआरएचएम घोटाले की जांच हो रही है जिसमें कई सी.एम.ओ लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। जिसमें डाक्टर ए के शुक्ल पूर्व सी.एम.ओ, डाक्टर एस पी राम पूर्व डीजी जेल में बंद हैं। संयुक्त निदेशक स्तर के सौ सी.एम.ओ सी.बी.आई जांच में फंसे हुए हैं। डाक्टर आर्या, डाक्टर बी.पी सिंह, डाक्टर सचान की हत्या हो चुकी है और अगर सी.बी.आई ने जांच का दायरा बाधा दिया तो उत्तर प्रदेश के अधिकांश डाक्टर जिला कारागारों में ही मिलेंगे। एक घोटाले की जांच से उत्तर प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था का प्रशासनिक ढांचा अस्त व्यस्त हो गया है। सरकारी डाक्टर जिला अस्पताल व मेडिकल कालेज को अपनी व्यक्तिगत क्लिनिक के रूप में इस्तेमाल करता है और घर पर मरीज देखकर वहीँ रुपया वसूल लेता है। सरकारी अस्पताल या मेडिकल कालेज में आकर वह ऑपरेशन कर देता है। अधिकांश सरकारी डाक्टर अपनी ड्यूटी करते ही नहीं हैं और तनखाह हर महीने सरकारी खजाने से लेते रहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डाक्टर कभी जाता ही नहीं है और घर पर ही रजिस्टर मंगा कर हस्ताक्षर बना देता है। इस व्यवसाय के लोग अगर ऐसा कर रहे हैं तो बचाव में चाहे जो तर्क गढ़े जाएँ लेकिन वस्तुस्तिथि को छिपाया नहीं जा सकता है। अगर बजट की जांच करा ली जाए तो शायद दो प्रतिशत सरकारी डाक्टर बाहर रहेंगे बाकी सब जिला कारागारों की शोभा बढाएँगे। हाँ ! कुछ डाक्टर अत्यधिक मानवीय भी होते हैं जिनके कारण ही चिकित्सीय व्यवसाय कि छवि उज्जवल बनी हुई है।

सुमन
लो क सं घ र्ष !

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