शुक्रवार, 25 जनवरी 2013

स्वर्णमुकुट

आज हम विश्व के महान वैज्ञानिको को भूलते जा रहे है | जिन्होंने इस आधुनिक जीवन में आधुनिक संसाधनों , सुविधाओं , मालो सामानों और सेवाओं का उपयोग तथा उपभोग के लिए आविष्कार किये | हमे यह याद रखना चाहिए कि उन सबके खोज आविष्कार में विश्व के महान वैज्ञानिकों ने अपना जीवन लगा दिया | उन महान कार्यो के लिए अदम्य कर्मठता व त्याग के साथ उन्होंने अपना सारा जीवन उस उद्देश्य को समर्पित कर दिया |

आज उन्ही खोजो -अविष्कारों  के फलस्वरूप विकसित हुए संसाधनों से देश दुनिया की धनाढ्य  कम्पनिया अरबो -- खरबों कमाती जा रही है | विडम्बना यह कि उन खोजो -- अविष्कारों के फलस्वरूप बने आधुनिक मालो -- सामानों मशीनों सेवाओं पर देश -- दुनिया की दिग्गज कम्पनियों का नाम व ट्रेड मार्क तो है पर उनकी खोज आविष्कार करने वाले वैज्ञानिको का कही कोई नाम नही है | लोग कम्पनियों को जानते है पर उसे खोजने वाले वैज्ञानिकों को नही जानते | यह उन महान वैज्ञानिकों के प्रति घोर उपेक्षा व कृतघ्नता का परिलक्षण है | यह परिलक्षण न केवल धनाढ्य कम्पनियों द्वारा ही नही किया जा रहा है , बल्कि उनके उपभोग से सुख -- सुविधा भोगते जा रहे समाज खासकर आम प्रबुद्ध समाज द्वारा भी किया जा रहा है |
प्राकृतिक विज्ञान के पितामह कहे जाने वाले सर्वथा योग्य महान वैज्ञानिक आर्कमिडिज का जन्म ईसा से 287 से पहले यूरोप के सिसली नगर में हुआ था | उस समय वह के राजा ने देवताओं को भेट चढाने के लिए एक स्वर्ण मुकुट तैयार करवाया | मुकुट बहुत सुन्दर था | पर राजा को यह सन्देह हो गया कि इस स्वर्णमुकुट में मिलावट की गयी है | इसकी जांच के लिए उन्होंने अपने खोजी प्रतिभा के लिए प्रसिद्धि पाए आर्कमिडिज को बुलाकर मुकुट को बिना तोड़े ही उसमे किसी मिलावट की जानकारी का कार्यभार दे दिया |आर्कमिडिज दिन  --  रात इस समस्या को सुलझाने के चिन्तन मनन में लग गये | एक दिन उसी चिन्तन में वे सार्वजनिक स्नानागार में पानी से भरे टब में नहाने के लिए गये | उनके टब  में जाते ही पानी का एक हिस्सा बाहर बह गया | उसे देखकर वे तुरन्त इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि यदि कोई वस्तु किसी द्रव  में डुबोई जाय तो उसके भार में होने वाले कमी वस्तु द्वारा हटाए गये द्रव के भार के बराबर होती है | अपने इस वैज्ञानिक निष्कर्ष से आर्कमिडिज इतने प्रफुल्लित हुए कि टब  से बाहर निकल कर यूरेका -- यूरेका ( पा लिया -- पा लिया ) कहकर दौड़ते हुए अपने घर की ओर भागे |
इसी सिद्दांत को खोजकर उन्होंने पानी से भरे बर्तन में पहले मुकुट को डुबोया | फिर मुकुट के भार के बराबर सोना डुबोया | दोनों बार विस्थापित पानी के भर में अन्तर को देखकर उनोहे मुकुट को बिना तोड़े यह बता दिया कि इसमें मिलावट की गयी है |आर्कमिडिज का यह खोज आज भी वस्तुओ का आपेक्षित घनत्व मापने के लिए प्रयोग किया जाता है | इसी आधार पर आर्कमिडिज ने वस्तुओ के तैरने का सिद्धांत भी प्रतिपादित किया | आर्कमिडिज ने ही सबसे पहले लीवर का सिद्धांत प्रस्तुत किया | लीवर और घिरनियो द्वारा वे माल से भरे जहाज को अकेले ही किनारे तक उठा लाये |
आर्कमिडिज  ने अपनी खोजो को लेकर कई पुस्तके भी लिखी | उसमे '' आन दि स्फीयर एण्ड सिलेन्डर '' मेजरमेन्ट आफ दि सर्किल '' आन फ्लोटिंग बाडीज '' आन बैलेन्सज एण्ड लीवर्स |

एक युद्ध के बाद ईसा पूर्व 212 सदी में आर्कमिडिज  का गृह नगर रोम के कब्जे में आ गया | आर्कमिडिज  बहुत दुखी हुए | 75 वर्ष की उम्र में आर्कमिडिज  अपने घर में बैठे जमीन पर कुछ ज्यामितीय आकृतिया बना रहे थे | तभी कुछ सशत्र रोमन सिपाही उनके घर में घुस गये | वे अपने काम में इतने तल्लीन थे कि उन्हें सिपाहियों के आने का कुछ पता ही नही चला और वे अपने काम में लगे रहे | जब सिपाही उनकी ओर बढ़े तो वे अचानक बोल उठे -- '' इन आकृतियों को मत बिगाडिये| इतना सुनते ही सिपाही ने अपना भाला उनके शरीर में भोक दिया | आर्कमिडिज  की तत्काल मृत्यु हो गयी | उनकी कथा अमर है | उनके खोज और आविष्कार अमर है | क्योंकि उन्होंने अपने जीवन को मानव समाज को आगे बढाने के लिए समर्पित कर दिया न्योछावर कर दिया था |


-सुनील दत्ता
पत्रकार

3 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

.सार्थक अभिव्यक्ति गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें फहराऊं बुलंदी पे ये ख्वाहिश नहीं रही . आप भी जाने कई ब्लोगर्स भी फंस सकते हैं मानहानि में .......

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

धन्यवाद लेख अच्छा है

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

बहुत सुंदर सटीक आलेख ,,,

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए,,,
recent post: गुलामी का असर,,,