शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2013

जेहेन से अपाहिज

इस बीच कई घटनाओ ने इस बात को साबित किया है कि  देश के अन्दर जेहेन से अपाहिजों की तादाद बढ़ी है और देश को फासीवादी, नस्लवादी विचारधारा से संचालित करने की कोशिश करने वाली ताकतें मजबूत हुई हैं और विचार व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को रोका जा रहा है। जयपुर साहित्य सम्मलेन में आशीष नंदी ने दलित और पिछड़ी जातियों के सम्बन्ध में टिप्पणी की तो राजस्थान सरकार की पुलिस ने 506 आई पी सी  व 3(1) 10 एससी एसटी एक्ट का वाद कायम कर विवेचना प्रारंभ कर दी। आशीष नंदी ने क्या गलत कहा, क्या सही कहा यह विवाद का विषय हो सकता है लेकिन राज्य द्वारा वाद कायम करना कहीं से औचित्यपूर्ण नहीं है क्यूंकि उनके भाषण से उक्त दोनों धाराओं का अपराध ही गठित नहीं होता है और यह एक अलग किस्म का अपराध गठित हो रहा है जो राज्य द्वारा किया जा रहा है। राज्य अगर अपराध कर रहा है तो उसकी सुनवाई कहाँ होगी। माननीय उच्चतम न्यायलय ने उनकी गिरफ्तारी पर तो रोक लगा दी किन्तु राज्य से यह नहीं सवाल किया कि उसने वाद कैसे कायम कर लिया। जातियों के आधार पर भ्रष्टाचार करने वालों की कोई जनगर्णा नहीं हुई है लेकिन यह भी सच है कि सरकारी अधिकारीयों का बहुसंख्यक हिस्सा सफ़ेद पोश अपराधियों का है। आय से अधिक संपत्ति होना इस अपराध की मुख्य विशेषता है। दूसरी घटना यह है कि  तमिलनाडू सरकार ने कमल हासन की फिल्म 'विश्वरूपम' पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। बहाना यह लिया है कि इससे मुसलमानों की भावनाएं आहत होंगी जिसका कोई मापदंड नहीं है और न राज्य को इस मामले में हस्तक्षेप ही करना चाहिए था। वहीँ प्रवीण तोगड़िया देश भर में घूम-घूम कर मुसलमानों को गालियाँ देते हैं तब किसी भी राज्य सरकार को या केंद्र सरकार को मुस्लिम हितों की या उनकी भावनाओ की याद नहीं आती है। पुलिस के थानों में जब उनका दरोगा भारतीय नागरिको को जिसमें मुसलमानों को भी, दलितों को भी, पिछड़ों को भी भद्दी-भद्दी गालियाँ देता है और डंडा कर देता तब कोई भी संगठन नहीं बोलता है और उलटे उसी दरोगा को हजारो हजार रुपये का इनाम इकराम पीड़ित परिवार दे आता है। यह दिन प्रतिदिन होता है. न्यायलय को भी यह बात मालूम है। सरकार को भी मालूम है। साहित्यकार को भी मालूम है, जनता को भी मालूम है। संविधान निर्माताओं को भी यह मालूम था। एक अच्छे स्वास्थ्य समाज के लिए आवश्यक है कि भाषण या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल दूसरे का सम्मान करते हुए करना चाहिए तभी इस स्वतंत्रता का मतलब है लेकिन जर्मन नाजीवादी विचारधारा के लोग इस देश की एकता और अखंडता को नष्ट करने के लिए जान बूझ कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गलत इस्तेमाल करते हैं लेकिन राज्यों के संरक्षण के कारन कोई कार्यवाई संभव नहीं हो पाती है। प्रवीण तोगड़िया ने अपने बयान में कहा है "अगर मैं प्रधानमंत्री बना तो मुसलमानों को वोट के अधिकार से वंचित कर दूंगा." केंद्र सरकार, राज्य सरकार में इतना दम ही नहीं है कि  वह उनके खिलाफ कार्यवाई करे।

सुमन 

1 टिप्पणी:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

वोट की राजनीति के कारण कार्यवाही करना संभव नही,,,,,

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