रविवार, 31 मार्च 2013

देवरानी - जेठानी का पितियाव लतियाव

 उत्तर प्रदेश की राजनीतिक भूमि पर कब्जे करने और उसे बचाने लेकर मुलायम सिंह यादव व उनके अनुयायियों द्वारा बेनी प्रसाद वर्मा के बीच वाक् युद्ध जारी है इस वाक् युद्ध में मुलायम खेमा कमजोर पड़ रहा है इसलिए वह भद्दी-भद्दी गालियों का प्रयोग करने पर उतर आया है। स्तर यह हो गया है कि एक मुलायम अनुयायी ने बेनी प्रसाद को तस्कर कहा व राकेश वर्मा के हारने की बात को कहा जा  रहा है। जबकि बेनी ने कहा कि डिम्पल भी तो हार गयी थी वहीँ आज बेनी की बातों की गवाही में आज केन्द्रीय मंत्री  अजित सिंह भी उतर आये हैं और उन्होंने मुलायम सिंह के ऊपर कई आरोप लगा दिए हैं। 
                मुलायम सिंह ने कांग्रेस को धोखे बाज व मक्कार कहा है जबकि मुलायम सिंह यादव लोगों को धोखा देने का कार्य किया है। वी पी सिंह, ममता बनर्जी को तो इन्होने धोखा दिया ही था और जिस कम्युनिस्ट पार्टी ने क्रांतिकारी मोर्चा बनाकर मुलायम सिंह यादव को प्रदेश स्तर का  नेता बनाया था  उसी पार्टी को धोखा देते हुए उसका विलय कुछ नेताओं को खरीद फरोख्त कर समाजवादी पार्टी में किया था। आज जब बेनी प्रसाद उनकी पोल खोलने पर तुल गए हैं तो तस्कर हैं बेहूदा हैं, मानसिक संतुलन खो बैठना जैसे अल्फाजों को बयान का हिस्सा समाजवादी पार्टी बना रही है 

सपा नेताओं के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नजदीकी रिश्ते हैं। इस बार उन्होंने कांग्रेस के रणनीतिकारों को भी नहीं बख्शा और कहा कि वर्ष 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यदि अल्पसंख्यकों का आरक्षण तथा बाटला हाउस कांड की जांच पुन: खोल दी गई होती तो नतीजे कुछ और होते।
 "मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों के साथ धोखा किया है और उनका असली चेहरा उजागर किए बिना मैं चुप बैठने वाला नहीं हूं, चाहे मुझे इसकी कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।" 

 केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि कांग्रेस मुसलमानों को 4.5 फीसदी आरक्षण तथा बाटला हाउस कांड के मुद्दे से पीछे नहीं हटी होती तो परिणाम कुछ और होते। वर्मा ने यह भी कहा कि यदि इस बार भी कांग्रेस ने वही गलती की तो फिर उसे नुकसान उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि मुलायम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को हमेशा नीचे रखना चाहते हैं और इसीलिए उन्होंने पर्दे के पीछे भाजपा के साथ 'डील' कर रखी है। वर्मा ने कहा कि वर्ष 2003 में 135 विधायकों के साथ मुलायम प्रदेश में सिर्फ इसीलिए सरकार बना सके क्योंकि उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आशीर्वाद प्राप्त था। इसी तरह वर्ष 1990 में मुख्यमंत्री रहते मुलायम ने विहिप नेता अशोक सिंघल को इसलिए अयोध्या जाने दिया ताकि सांप्रदायिक उन्माद भड़के और इसका फायदा उन्हें मिलता।
बेनी ने कहा कि मुलायम ने गुजरात में इसीलिए प्रत्याशी उतारे, ताकि मुस्लिम मतों का विभाजन हो सके और नरेंद्र मोदी फिर मुख्यमंत्री बन सकें। मयावती की पार्टी के बावत पूछे जाने पर वर्मा ने कहा कि वह बसपा में नहीं जा रहे हैं, क्योंकि यदि वहां जाएंगे तो घुटकर मर जाएंगे।

'मैंने कुछ भी गलत नहीं कहा। माफी मांगने का सवाल ही नहीं। बाबरी मस्जिद गिराना आतंकवाद था, उसके दोषी कल्याण से मुलायम ने हाथ मिलाया। मेरे इस्तीफे की मांग करने वाले वह कौन हैं?'
-बेनी प्रसाद वर्मा, केंद्रीय इस्पात मंत्री
 एसपी के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा कि बेनी प्रसाद वर्मा हद दर्जे तक बड़बोले हो गए हैं। वह इस तरह के बयान दे रहे हैं, जिसका सच्चाई से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। उन्होंने कहा कि बेनी के बेटे राकेश वर्मा पिछले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए थे और उससे पहले हुए चुनाव में खुद बेनी की भी यही दुर्गति हुई थी।

बेनी को मुलायम के अहसानों को भूल जाने वाला अहसान फरामोश व्यक्ति बताते हुए चौधरी ने कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में जनता उन्हें पूछेगी भी नहीं और उनके बेबुनियाद बयानों का खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ेगा।
 एसपी के राष्ट्रीय महासचिव राम आसरे कुशवाहा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय इस्पात मंत्री का मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है और उन्हें इलाज की सख्त जरूरत है। वर्मा की केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया और अन्य लोगों को वर्मा के बयानों का संज्ञान नहीं लेना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे व्यक्ति को केंद्र में मंत्री बनाया गया है।


  बेनी प्रसाद वर्मा ने कहा कि समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव शुरू से ही अल्पसंख्यकों के साथ धोखाधड़ी करते रहे हैं। उन्होंने बीजेपी के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी की तारीफ यूं ही नहीं की है। बल्कि 2003 में प्रदेश में बीजेपी की इनायत से एसपी की सरकार प्रदेश में बनी थी। वर्मा ने अपने आवास पर बातचीत करते हुए कहा कि बाबरी मस्जिद को बचाने के नाम पर भी एसपी मुखिया ने अल्पसंख्यकों के साथ छल किया था।

न्होंने कहा वर्ष 1990 में 29 अक्टूबर की रात को मुलायम सिंह यादव ने टेलीफोन कर मुझसे एक तरफ तो यह कहा था कि यह सुनिश्चित करो कि अयोध्या में कारसेवक न पहुंच पाएं, वहीं दूसरी तरफ विश्व हिन्दू परिषद नेता अशोक सिघंल को अयोध्या भिजवा दिया।


  वर्मा ने कहा जब मैंने सिंघल के अयोध्या पहुंचने के बारे में यादव से पूछा तो उन्होंने बताया था कि अगर सिंघल नहीं पहुंचते तो गर्मी नहीं आती और यह भी साफ किया कि तत्कालीन एडीजी राम आसरे ने भी इस बात की मुझसे पुष्टि की थी। वर्मा ने परोक्ष रूप से यह भी आरोप लगाया कि मुलायम सिंह यादव और बीजेपी के रिश्ते हमेशा अच्
छे रहे हैं यह बात दीगर है कि वह बाहर से एक-दूसरे की आलोचना करते हैं।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा कि मुलायम को बोलने से पहले सोच लेना चाहिए कि वह क्या बोल रहे हैं, क्योंकि वह सुबह कुछ बोलते हैं और शाम को कुछ और। अजित पर जवाबी हमला करते हुए समाजवादी पार्टी के महासचिव राम आसरे कुशवाहा ने बेनी प्रसाद वर्मा के साथ-साथ उन्हें भी गद्दार करार दे दिया है।अजित सिंह ने मेरठ में कहा, 'मुलायम सिंह बार-बार कांग्रेस और केंद्र सरकार पर अशोभनीय टिप्पणी करके मास्टर जी से छात्र बन रहे हैं। उन्हें चाहिए कि वह राजनीति प्रजातंत्र के हित में करें, स्वार्थ की राजनीति से वशीभूत होकर बयानबाजी न करें।'

  प्रदेश सरकार थ्री सी यानी कैश, क्राइम व कास्टिज्म को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कहा कि यदि वह एक रात बागपत या मेरठ के किसी गांव में बिताएं तो विकास कार्य की पोल खुल जाएगी। प्रदेश में तबादला उद्योग चल रहा है।

बेनी ने कहा था, 'कांग्रेस तुमको नहीं पूछने वाली है। समर्थन दे रहे हो इसलिए पैसा लेते रहो। खूब कमिशन खाओ...परिवार में लुटाओ। विदेश में जमा करो। बेनी प्रसाद वर्मा यह नहीं करेंगे। अपराध और बेईमानी तो तुम्हारा पेशा है। सबसे बड़ा अभिशाप है इस प्रदेश के लिए मुलायम सिंह यादव। मायावती भी लुटेरी थीं लेकिन ये लुटेरा और गुंडा दोनों है। कैसे बचाओगे अपने प्रदेश को। आतंकवादियों से इसके रिश्ते हैं। बेनी प्रसाद वर्मा को मरवा डालोगे तो सौ बेनी प्रसाद पैदा होंगे। अभी तुम्हारा आखिरी कार्यकाल है। तुम क्या डराना चाहते हो। कांग्रेस से हम नहीं डरे, तो तुम तो अभी चुहिया हो।'

पूंजीवादी राजनीति में जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के हथकंडे चुनाव से पूर्व प्रारंभ किये जाते हैं। इलेक्ट्रॉनिक चैनल से लेकर प्रिंट मीडिया तक इन्ही बातों को उछाल-उछाल कर जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, उत्पीडन, कानून व्यवस्था से हटाने का करता है। इस तरह इन सब के पाप चुनाव की गंगोत्री में धुल जाते हैं।

सुमन 


3 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

दिन प्रति दिन राजनैतिक स्तर गिरता जा रहा है,,
RECENT POST: होली की हुडदंग ( भाग -२ )

मन के - मनके ने कहा…


श्रीमान,

हिंदुस्तान की रजानीति-----भगवान ही जाने.

जरा कम समझ में आती है.

फिर भी,दर्पन दिखाने के लिये,धन्यवाद.

रविकर ने कहा…

शुभकामनायें-