गुरुवार, 9 मई 2013

सरबजीत का बदला सनाउल्लाह से

सरबजीत का बदला सनाउल्लाह से...कसम से, मजा आ गया। वैसे ही जेल में हमला...फिर गहरे कोमा में जाना..डाक्टरों की कोशिशें और नाकामी....पाक हुकूमत को उसी तरह टका सा जवाब, जैसा उसने सरबजीत के समय दिया था..वाह..वाह क्या मंजर है--"एक लाश उधर से आए, एक लाश इधर से जाए''...हिसाब बराबर....हिंदुस्तान हर हाल में पाकिस्तान बनकर दिखा देगा...यूँ फहमीदा रियाज जैसी पाकिस्तानी शायरा ने, काफी दिन हुए, हमारी इस तरक्की को ताड़ लिया था। एक नज्म भी सदके की थी...मुलाहिजा फरमाएँ...और अपनी कामयाबी पर ताली बजाएँ..
तुम बिलकुल हम जैसे निकले...
---------------------------------------
तुम बिल्‍कुल हम जैसे निकले
अब तक कहाँ छिपे थे भाई
वो मूरखता, वो घामड़पन
जिसमें हमने सदी गंवाई
आखिर पहुँची द्वार तुम्‍हारे
अरे बधाई, बहुत बधाई।
प्रेत धर्म का नाच रहा है
कायम हिंदू राज करोगे ?
सारे उल्‍टे काज करोगे !
अपना चमन ताराज़ करोगे !
तुम भी बैठे करोगे सोचा
पूरी है वैसी तैयारी
कौन है हिंदू, कौन नहीं है
तुम भी करोगे फ़तवे जारी
होगा कठिन वहाँ भी जीना
दाँतों आ जाएगा पसीना
जैसी तैसी कटा करेगी
वहाँ भी सब की साँस घुटेगी
माथे पर सिंदूर की रेखा
कुछ भी नहीं पड़ोस से सीखा!
क्‍या हमने दुर्दशा बनाई
कुछ भी तुमको नजर न आयी?
कल दुख से सोचा करती थी
सोच के बहुत हँसी आज आयी
तुम बिल्‍कुल हम जैसे निकले
हम दो कौम नहीं थे भाई।
मश्‍क करो तुम, आ जाएगा
उल्‍टे पाँव चलते जाना
ध्‍यान न मन में दूजा आए
बस पीछे ही नजर जमाना
भाड़ में जाए शिक्षा-विक्षा
अब जाहिलपन के गुन गाना।
आगे गड्ढा है यह मत देखो
लाओ वापस, गया ज़माना
एक जाप सा करते जाओ
बारम्बार यही दोहराओ
कैसा वीर महान था भारत
कैसा आलीशान था-भारत
फिर तुम लोग पहुँच जाओगे
बस परलोक पहुँच जाओगे
हम तो हैं पहले से वहाँ पर
तुम भी समय निकालते रहना
अब जिस नरक में जाओ वहाँ से
चिट्ठी-विठ्ठी डालते रहना।


साभार Pankaj Srivastava

कोई टिप्पणी नहीं: