शुक्रवार, 7 जून 2013

न्यायिक अभिरक्षा में हत्या या मौत


   आतंकवाद के झूठे आरोपों में निरुद्ध होकर वर्षों से जेलों में बंद मुस्लिम नवयुवकों की अखिलेश सरकार द्वारा रिहाई के अपने वायदे पर अमल न करने से प्रदेश का मुसलमान उन से नाराज तो चल ही रहा था कि रही सही कसर लखनऊ व फैजाबाद न्यायालय परिसर में हुए श्रंखलाबद्ध बम विस्फोटों के आरोपी खालिद मुजाहिद की पुलिस अभिरक्षा में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पहले से ही आहत मुसलमानों के जले हुए दिलों पर पेट्रोल डालने का काम कर डाला।
    पुलिस सूत्रों के मुताबिक खालिद मुजाहिद, तारिक कासमी, सज्जादुर्रहमान और मुहम्मद अख्तर को लेकर 18 मई को दोपहर लगभग एक बजे लखनऊ पुलिस लाइन के सब इंस्पेक्टर रामअचल राय के नेतृत्व में 7 सिपाहियों का एक दल फैजाबाद जेल पहुँचा जहाँ एडीशनल सेशन जज मो0 हुसैन की अदालत में केस की सुनवाई के बाद लगभग साढ़े तीन बजे चारों अभियुक्त लखनऊ वापसी  के लिए पुलिस वाहन से चले। सब इंस्पेक्टर पुलिस रामअचल राय के अनुसार खालिद मुजाहिद की तबीयत लगभग 4ः45 बजे रामसनेहीघाट क्षेत्र में अचानक बिगड़ी और वह अचेत हो गया। पुलिस ने ठण्डे पानी के छींटे उसके चेहरे पर डाले, परन्तु खालिद मुजाहिद अचेत ही रहा। जब उसे 5ः25 मिनट पर जिला अस्पताल बाराबंकी के आपात कक्ष में पहुँचाया गया तो डाक्टरांे ने उसका चिकित्सीय परीक्षण कर उसकी मृत्यु की घोषणा कर दी।
    मीडिया को जो बयान तारिक कासमी ने दिया उसके मुताबिक खालिद मुजाहिद की तबीयत विगत कई दिनों से खराब चल रही थी, परन्तु जेल अधिकारियों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जबकि आरोपियों के वकील मुहम्मद शुऐब के अनुसार फैजाबाद में खालिद बिल्कुल स्वस्थ व प्रसन्नचित था, अपने घर वालों को सलाम भी उसने उनसे कहने को कहा था। तारिक कासमी द्वारा मीडिया को दिए गए बयान को सही न मानते हुए उन्होंने कहा कि पुलिसअभिरक्षा में तारिक के बयान की सच्चाई सवालों के घेरे में है। उन्होंने एक सवाल यह उठाया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ए0टी0एस0 व एस0टी0एफ0 ने कभी भी मीडिया को आरोपियों के पास नहीं आने दिया परन्तु खालिद मुजाहिद की मृत्यु के पश्चात तारिक कासमी को मीडिया के सामने पुलिस ने बयान देने के लिए प्रस्तुत करने से तनिक भी संकोच नहीं किया।
  
    वहीं मृतक के चाचा जहीर आलम फलाही ने पोस्टमार्टम के पूर्व एक तहरीर देकर हत्या का वाद कोतवाली नगर, बाराबंकी में दर्ज कराया जिसमें मुख्य अभियुक्त के रूप में विक्रम सिंह, बृजलाल, मनोज कुमार झा, चिरंजीव नाथ सिन्हा, एस आनन्द, राजेश कुमार श्रीवास्तव सहित 42 अधिकारी व आई0बी0 के लोग हैं।
    प्रतापगढ़ के कुण्डा पुलिस सर्किल के डिप्टी एस0पी0 जियाउल हक की हत्या के पश्चात यह दूसरी जाँच है जो सरकार ने सी0बी0आई0 के हवाले की है। देखना यह है कि सी0बी0आई0 कितनी निष्पक्षता से दोनों केसों की जाँच करती है। फिलहाल अखिलेश सरकार पर से मुसलमानों का विश्वास डगमगा गया है।
खालिद मुजाहिद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विषाक्त पदार्थ के सेवन के उपरान्त जो संकेत शव के विभिन्न अंगों में आने चाहिए वह सभी दिखे, परन्तु दो मुस्लिम डाक्टरों सहित पाँच डाक्टरों की टीम मृत्यु का कारण फिर भी स्पष्ट न कर सकी। यह बात किसी के गले के नीचे नहीं उतरी।
-तारिक़ खान
लोकसंघर्ष पत्रिका से

1 टिप्पणी:

बेनामी ने कहा…

terrorist k case lad k suman Ji ap bhi deshdroh kar rage hain.