सोमवार, 12 अगस्त 2013

बेटी को जन्म दिया तो मै तुम्हे तेज़ाब से नहला दूंगा ।


क्सवी सदी के इस आधुनिक भारत में आज भी लोग बेटा - बेटी के बीच भेद-भाव को मन में पाले है विश्वास नहीं होता।  कही कोई वंश की चाहत में बेटी को मारना चाहता है , तो कही कोई बेटी को बोक्ष समक्ष कर उसका क़त्ल कर रहा है पता नहीं क्यों लोग भूल जाते है कि आखिर उनको भी किसी महिला ने ही जन्म दिया है जो एक बेटी का ही रूप है। मानव हो के मानवता के खिलाफ जाना समक्ष से परे है। साथियों हो सकता है यह दास्तान पढ़ते समय आपकी आँखों से आंसू छलक आये और आपका मन उद्देलित हो उठे और आपको अपनी भावनाओ पर नियंत्रण करना मुश्किल हो जाए पर साथियों इसके बाद भी आप उस महिला के दर्द को महसूस नहीं कर पाएंगे जिसने यह सब अकेले झेला है। जी हाँ यह दास्तान है उन हजारो महिलाओ में से ही एक की जों  अक्सर पारिवारिक हिंसा और शोषण का शिकार होती है और हमारा समाज इसे चुपचाप देखता रहता है । 34 वर्षीय रेशमा की दास्तान भी ऐसी ही है जो पांच बेटियों की मां है और इसके बाद भी उसका शरीर एक नए बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार है क्या स्थिति होगी उसके शरीर की शायद इस बात को सिर्फ एक महिला ही समक्ष सकती है। पर यह बात उन सभ्य पुरुषो के लिए कोई खाश मायने नहीं रखती जो महिलाओ को सिर्फ बच्चा पैदा करने की मशीन समझते है,और अपनी कायर मर्दानगी पर ऐठते रहते है पर यह सभ्य पुरुष सिर्फ इतने से खुश नहीं है वो इस बच्चा पैदा करने वाली मशीन से सिर्फ अपने जैसे मर्दो की फौज चाहता है ताकि उसकी कायर मर्दानगी का खेल पीढियों तक चलता रहे है। जरा इस सभ्य पुरुष की सभ्यता तो देखिये उसे बच्चा पैदा करने वाली मशीन तो चाहिए पर उसे बेटियों से नफरत है क्योकि बेटियां उसकी कायर मर्दानगी को आंगे नहीं बढ़ा सकती है इसलिए उसे तो सिर्फ बेटा ही चाहिए और अगर ऐसा नहीं होगा तो वो हैवानियत पर उतर आएगा । जैसा कि रेशमा के साथ हुआ।  कानपुर की रहने वाली रेशमा की शादी  1998 में लखनऊ के नसीम के साथ हुयी थी। नसीम लखनऊ के कसाई बाड़ा में ट्रेवल एजेंसी संचालक है।  बताते है कि रेशमा छठी बार गर्भवती हुयी थी इससे पहले वो पांच बार बेटियों को जन्म दे चुकी है पर शायद उसके परिवार वालो को बेटे की चाहत कुछ ज्यादा ही थी इसलिए उसे छठी बार गर्भवती होना पड़ा और इस चाहत के चलते ही रेशमा पर दबाव बनाया जाने लगा कि वो बच्चे के लिंग की जाँच कराये ताकि यह पता चल सके कि बेटा है या फिर बेटी और यदि इस बार भी बेटी होने की स्तिथि में उसे जन्म से पहले ही मार दिया जाए ताकि एक और बेटी का बोक्ष उनके सर न चढ़े पर रेशमा एक मां है और मां कितनी भी कमजोर क्यों न हो वो किसी भी हालत में अपने बच्चे को मार नहीं सकती और रेशमा ने भी ऐसा किया उसने अपने बच्चे के लिंग की जाँच कराने से मना कर दिया क्योकि रेशमा को पता था कि लिंग जाँच कराने में यदि बेटी का पता चला तो ये लोग उसे मार देंगे इसलिए रेशमा ने लिंग जाँच कराने से साफ साफ़ मना कर दिया पर शायद रेशमा को नहीं मालूम था कि उसे इस गुस्ताखी की इतनी बड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी । लिंग जाँच न कराने की बात से नाराज होकर रेशमा के पति ने रेशमा की योनि में  ( कमर के नीचे वाले हिस्से में )  तेज़ाब डाल दिया और कहा आज के बाद अब तू बच्चा देने लायक ही नहीं बचेगी। बेचारी रेशमा ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसने जिस इंसान के साथ सात जन्मो तक जीने-मरने की कसमे खायी थी और जिसे वो देवता समक्षकर पूजती रही, वही इंसान उसके साथ हैवानियत का खेल खेलेगा । सिर्फ इतना ही नहीं चार दिनों तक रेशमा दर्द से तड़पती रही न तो किसी ने कोई मदद करी और न ही कोई उसे अस्पताल ले गया।  किसी तरह पिता तक खबर पहुंची और पिता से कानपुर लेकर आये और उसके बाद उसे हैलेट अस्पताल में भर्ती कराया गया ।  डाक्टर कहते है कि तुरंत इलाज न होने के कारण जख्म काफी गहरा हो गया है भरने में समय लगेगा और हो सकता है इससे उसके बच्चे को भी नुक्सान हो । साथियों रेशमा किसी तरह जीवन और मौत के बीच लड़ रही है उसके के शरीर में रक्त की मात्रा बहुत कम बची है उसे अभी तक दो बोतल रक्त चढ़ाया जा चुका हैऔर डाक्टरों का कहना है कि अभी और रक्त की जरूरत पड़ सकती है पर रक्त देने वाला भी कोई नहीं है और न ही उसके इलाज में मदद करने वाला जबकि उसके साथ हैवानियत का खेल खेलने वाला आज भी आजाद घूम रहा है। शासन प्रशासन से मदद तो दूर, थाने में उसकी रिपोर्ट तक नहीं लिखी गयी है यह हाल है इस लोकतान्त्रिक भारत का जहाँ महिलाओ को आधी आबादी का दर्जा दिया जाता है पर उन्हें सुरक्षा और इन्साफ का अधिकार नहीं दिया जाता जहाँ आज भी पुरुष वादी सोच और सत्ता कायम है ।

साथियों मुक्षे पता नहीं रेशमा को इन्साफ मिलेगा कि नहीं या फिर मिलेगा तो  कितना, पर इतना तो जरूर है कि अगर इसी तरह पुरुषो के जुल्म चलते रहे तो एक दिन यह समाज महिला विहीन जरूर हो जायेगा ।

के. एम्. भाई
कानपुर
  mo- 8756011826

5 टिप्‍पणियां:

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

अगर इसी तरह पुरुषो के जुल्म चलते रहे तो एक दिन यह समाज महिला विहीन जरूर हो जायेगा ।

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रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक कल मंगलवार (13-08-2013) को "टोपी रे टोपी तेरा रंग कैसा ..." (चर्चा मंच-अंकः1236) पर भी होगा!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Neelima ने कहा…

ओह ! समाज का एक घिनोना रूप यह भी हैंबेटे की चाहत मैं इंसान किसी भी हद तक गिर रहे हैं .इश्वर रेशमा के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ कराये ...

HARSHVARDHAN ने कहा…

आज की बुलेटिन याई रे, याई रे, ब्लॉग बुलेटिन आई रे ... में आपकी पोस्ट (रचना) को भी शामिल किया गया। सादर .... आभार।।

कालीपद प्रसाद ने कहा…


पुलिस की अक्षमता है की दरिन्दे अभी आज़ाद घूम रहे हैं
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