सोमवार, 23 दिसंबर 2013

मुज़़फ्फरनगर का सांप्रदायिक दंगा - भाग-9

  • इन्सानियत जब शर्मसार हुई
मुज़फ़्फ़रनगर दंगों में सबसे घिनौनी और मानवता को झकझोर कर रख देने वाली खबर कि इन्सान के रूप में दरिन्दों ने मुस्लिम महिलाओं और नाबालिग लड़कियों के साथ (जाट समुदाय के लोगों ने) उनके परिवार के सदस्यों के सामने बलात्कार और अभद्रता का व्यवहार किया और उन्हें बन्दी बनाकर रखा। इनमें लिसा़, लांक, बहावड़ी, हसनपुर, मोहम्मदपुर, कुटबा कुटबी, बाग़पत और शामली के बहुत से गाँव प्रमुख हैं।
गाँव लाँक निवासी सलमा पत्नी शहज़ाद ने बताया कि गाँव में हिंसा तो 7 सितम्बर की नंगलामंदौड़ की महापंचायत के बाद से ही शुरू हो गई थी। लगभग रात 8:00 बजे दंगाई हमारे घर में आ गए। मैने अपने पति को वहाँ से भाग जाने के लिए कहा। दंगाइयों ने सबसे पहले तेल डालकर मेरी 4 महीने की बच्ची को जला दिया, फिर मेरे साथ अभद्रता का व्यवहार करने लगे। दंगाइयों में हमारा पड़ोसी कुलदीप और उसके साथ जाट समुदाय के ही अन्य लोग थे। उन्होंने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया। मैं ऐसी ही हालत में वहाँ से भागी और पूरी रात ईख़ में छुपी रही। सुबह होने पर लोगों ने मुझे वहाँ से निकाला। अब मैं मलकपुरा कैम्प में रह रही हूँ। हमारे गाँव के प्रधान बिल्लू ने हमारी कोई मदद नहीं की। प्रमोद डीलर ने दंगाइयों को मुसलमानों के घर जलाने के लिए तेल दिया। कोई मेडिकल जाँच नहीं हुई। सरकारी अस्पताल के डॉक्टर ने जाँच करने से इन्कार कर दिया था। बच्ची की एफ0आई0आर0 दर्ज हो चुकी है।
लाँक गाँव की ही निवासी वसीला खातून की 12 वर्षीय पुत्री शहनाज़ का सामूहिक बलात्कार कर उस पर तेज़ाब डालकर आग लगा दी। वसीला ने बताया कि दंगाई उनके पड़ोसी जाट और दलित समुदाय के ही थे। जिसमें नीरज कश्यप, संजीव और नीटू ने उसकी बच्ची के साथ बलात्कार किया। घर का सब सामान लूटकर आग लगा दी। उनकी बच्ची तड़प रही थी लेकिन वे वहाँ से अपनी जान बचाकर भागे और हसनपुर पहुँचे। रास्ते में जब बच्चों को भूख लगी तो खाने के लिए बच्चों को मिट्टी दी। इसके बाद उनको मलकपुर भेज दिया गया। जहाँ पर 10 दिन बाद एफ0आई0आर0 दर्ज की गई।
गाँव लिसा़ निवासी 70 वर्षीय असग़री ने हमे बताया कि जब गाँव में दंगा शुरू हो गया तो हम अपना घर छोड़कर भागने लगे तो दंगाई हमारे घर में आ गए उनके हाथों में हथियार थे। दंगाई जाट समुदाय के थे। जिनमें हमारे पड़ोसी मुकेश और आर्यन भी शामिल थे। दंगाइयों ने मेरे नाती उमरदीन को गड़ासे से गला काटकर मार दिया। फिर जब हम जान बचाकर भागे और हमारी बहू वकीला घर पर अकेली रह गई। मोहल्ले के बच्चों ने बाद में हमें बताया कि वकीला डर कर छत की ओर भागी लेकिन दंगाइयों ने उसे पकड़ कर खींच लिया और उसके साथ बलात्कार करने के बाद उसको तीन हिस्सों में काट दिया।
गाँव फुगाना निवासी ख़ुशीर्दा पत्नी नसीम अहमद, ने बताया कि 8 सितम्बर दोपहर 2:00 बजे 68 जाट समुदाय के लोग हाथों में हथियार लिए हमारे घर में आए। उनके साथ हमारे पड़ोसी गौरव, सुभाष, कपिल, उद्देश्य, अमरपाल और रॉकी भी शामिल थे। उन सब ने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया और मुझसे कहने लगे कि अगर तुमने भागने की कोशिश की तो हम तुम्हें जान से मार डालेंगे। मैं ऐसी ही हालत में वहाँ से भागी। रात 11:30 बजे फोन पर सम्पर्क के ज़रिए मैं अपने पति से जोगिया खेड़ा के जंगल में मिली। थाना फुगाना में हमारी एफ0आई0आर0 दर्ज नहीं की गई। सरकारी अस्पताल गए तो डॉक्टर ने मेडिकल जाँच करने से इन्कार कर दिया। एस0पी0 कल्पना ने कहा कि ’तुम झूठे केस लिए फिरते हो’। इसके बाद से हम जौला गाँव में रह रहे हैं। हमारी एफ0आई0आर0 दर्ज हो चुकी है। फुगाना निवासी फ़हमीदा पत्नी युसुफ़, घर पर अकेली थी। बच्चों को पहले ही बु़ाना भेज दिया था। पति भी घर पर नहीं थे। 8 सितम्बर दोपहर करीब 2:00 बजे जाट और सैनी समुदाय के 6 लोग सचिन, वेदपाल, नेक सिंह सैनी, राजपाल, नरेन्द्र और योगेश ने हमारे घर पर हमला बोल दिया। सभी लोग हमारे मोहल्ले के ही थे। सबके हाथों में हथियार थे। मैं डर कर भागने लगी तो उन्होंने मेरी चोटी खींच ली और फिर मेरे हाथपैर पकड़े और मेरे साथ ज़बरदस्ती करने लगे। उन्होंने सामूहिक रूप से मेरे साथ बलात्कार किया, और मैं बेहोश हो गई। जब मुझे होश आया तो मै अपनी जान बचाकर वहाँ से भागी और मैं लोई गाँव पहुँची। फिर सरकारी अस्पताल गई, डाक्टर ने मेडिकल जाँच करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद जोगिया खेड़ा आई और फिर 15 दिन बाद यहाँ मेरी मेडिकल जाँच हुई। एफ0आई0आर0 दर्ज हो चुकी है।
गाँव फुगाना निवासी शबनम पत्नी शहज़ाद, ने बताया कि जब गाँव में दंगा शुरू हो गया तो प्रधान हरपाल ने मुसलमानों से विनती की कि वे गाँव छोड़कर न जाएँ। 8 सितम्बर की सुबह 45 लोगों ने घर पर हमला किया। उनके हाथों में हथियार थे। अपने पति को मैंने जान बचाकर भाग जाने के लिए कहा। बच्चे और मैं घर पर ही थे। दंगाइयों में राहुल, सुधीर और मोहित भी शामिल थे। सभी दंगाई जाट समुदाय के थे। उन्होंने मेरे बच्चों की नज़रों के सामने ही मेरा सामूहिक रूप से बलात्कार किया। सब सामान लूट लिया, घर जला दिया, कुछ नहीं छोड़ा। हमारे मोहल्ले में 16 घर मुसलमानों के थे, दंगे में सभी घर जला दिए गए। सेना ने हमें वहाँ से निकाला। मेडिकल जाँच नहीं हुई। डाक्टर ने कहा ’शादी शुदा की मेडिकल जाँच नहीं होती’। 15 दिन बाद एफ0आई0आर0 दर्ज हुई। सरकारी मेडिकल जाँच अभी तक नहीं हुई।
गाँव फुगाना की ही 22 वर्षीय फ़रज़ाना पत्नी शकील, ने बताया कि 8 सितम्बर हम अपने घर पर बैठे हुए थे तो शोर की आवाज़ सुनकर मेरे पति बाहर गए, इतने में जाट समुदाय के करीब 5 आदमी हाथों में हथियार लिए हुए हमारे घर में दाखिल हुए। मेरे साथ ज़बरदस्ती करने लगे। उन्होंने मेरे हाथपैर पकड़े और मुझे नीचे गिरा दिया, और सब ने बारीबारी से मेरे साथ बलात्कार किया। उनमें 3 मेरे पड़ौसी बदलू, नीरु और अमरदीप भी शामिल थे। मैं वहाँ से भागकर जोगिया खेड़ा पहुँची। अस्पताल गई तो डॉक्टर ने मेडिकल जाँच करने इन्कार कर दिया। 8 दिन बाद एफ0आई0आर0 दर्ज हुई।
गाँव फुगाना की एक और महिला 22 वर्षीय तस्मीम पत्नी मुस्तकीम ने हमें बताया कि 8 सितम्बर की सुबह 4 आदमी ज़बरदस्ती घर में आए, सबके हाथों में हथियार थे। घर में घुसने के बाद उन्होंने तोड़फोड़ की और फिर मेरे साथ हाथापाई करने लगे। सभी जाट थे। उन चारों ने मेरे साथ सामूहिक बलात्कार किया। मैं सभी को अच्छी तरह से जानती थी। उनके नाम हैं संजीव, रामदीन, रूपेश और पशमिन्दर। इसके बाद रामदीन ने कहा कि डीज़ल ले आओ इनके घर को आग लगा दो। मैं वहाँ से जान बचाकर भागी। मेरे घर के सभी लोग जोगिया खेड़ा में थे। कोई मेडिकल जाँच नहीं हुई, और एफ0आई0आर0 भी दर्ज नहीं है। जोगिया खेड़ा थाने में गई तो पुलिस ने कहा कि अपने थाने जाओ।
न जाने कितनी महिलाओं और लड़कियों को बलात्कार करने के बाद मार दिया गया और न जाने कितनी अभी तक लापता हैं।
-डा0 मोहम्मद आरिफ




क्रमश:
लोकसंघर्ष पत्रिका में प्रकाशित