गुरुवार, 13 नवंबर 2014

अदम्य शौर्य व साहस के बहाने हत्याएं

अपनी जान जोखिम में डालकर कर्तव्यनिष्ठा की पराकाष्ठा का परिचय देते हुए अदम्य शौर्य व साहस का प्रदर्शन करते हुए आतंकवादियों  द्वारा की जा रही गोलाबारी का मुंहतोड़ जवाब देते हुए तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया तथा दो आतंकवादी भागने में कामयाब रहे . बड़ी मात्र में गोला बारूद हथियार व विस्फोटक बरामद जैसी खबरें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया व प्रिंट मीडिया पर दिखाई देती हैं . इस तरह की घटनाओ में 95 %  घटनाएं लोगों को घरों से कई-कई महीने पहले पकड़ कर अघोषित जेलों में रखकर प्रताड़ित करने के बाद पुरस्कार, सम्मान , इनाम , आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन, साहस और शौर्य का बखान करने जैसे शब्दों के लिए बराबर हत्याएं की जाती रही हैं. 
   अभी जम्मू और कश्मीर की सीमा पर हुए मछिल फर्जी मुठभेड़ कांड के सैन्य अधिकारीयों को आजीवन कारावास की  सजा सुनाई गयी है . उक्त फर्जी मुठभेड़ की जांच कराने के लिए जम्मू एंड कश्मीर में दो महीने जनता ने आन्दोलन चलाया था और 123 व्यक्तियों ने न्याय पाने के लिए जान दे दी थी तब जाकर जांच हुई थी . नवभारत टाइम्स के मुताबिक अप्रैल 2010 में उत्तरी कश्मीर में तैनात सेना की चार राजपूताना रेजिमेंट की कमान कर्नल डीके पठानिया के पास थी। कर्नल पठानिया ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों और जवानों के साथ एलओसी पर तथाकथित आतंकियों को मार गिराने की साजिश रची, ताकि मुखबिरों के नाम पर आने वाली राशि के साथ-साथ वीरता पुस्कार भी हासिल किया जा सके।
उन्होंने इस काम में सेना की 161 टेरिटोरियल आर्मी के एक जवान अब्बास सैयद हुसैन के अलावा दो स्थानीय नागरिकों बशारत लोन और अब्दुल हमीद की मदद ली। तीनों ने मिलकर बारामूला जिले के नादिहाल-रफियाबाद के तीन युवकों शहजाद अहमद खान, रियाज अहमद लोन और मुहम्मद शफी को सेना में नौकरी दिलाने का लालच दिया और अपने साथ 26 अप्रैल को मच्छल इलाके में ले गए। इसके लिए अब्बास और उसके दोनों साथियों को कथित तौर पर कर्नल पठानिया ने डेढ़ लाख रुपये दिए थे।
जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में मोहम्मद शफी, शहजाद अहमद और रियाज अहमद को बहला फुसलाकर मच्छल इलाके में लाया गया और तीनों को गोली मार दी गई। बाद में बताया गया कि तीनों पाकिस्तानी आतंकवादी थे, जो भारतीय सीमा में घुसपैठ का प्रयास करते मारे गए। हकीकत में तीनों जम्मू-कश्मीर के ही बारामूला सेक्टर स्थित नदिहल के निवासी थे।
शहजाद, रियाज और मुहम्मद शफी के परिवार वालों नों ने 27 अप्रैल 2010 को उनके लापता होने की रिपोर्ट लिखा दी। इसके बादे 30 अप्रैल को राजपूताना रेजिमेंट की तरफ से मच्छल में पुलिस को सूचित किया गया कि 29 अप्रैल की रात तीन पाकिस्तानी आतंकी मारे गए हैं। पुलिस ने तीनों शव कब्जे में लेकर दफना दिए, लेकिन जब इनकी तस्वीरें अखबारों में आईं तो मामला खुल गया। इस पर प्रदर्शन शुरू हो गए। पुलिस ने अब्बास सैयद और उसके दोनों साथियों को गिरफ्तार कर उनसे पूरी साजिश उगलवा भी ली।
अब्बास ने पुलिस को 4 राजपूताना रेजिमेंट के मेजर उपेंद्र के इसमें शामिल होने की बात बताई। फाइनल रिपोर्ट में पुलिस ने राजपूताना रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल डी के पठानिया और मेजर उपेंद्र समेत कुल 11 सैन्यकर्मियों को आरोपी बनाया था। पुलिस की जांच रिपोर्ट आने के बाद सेना ने भी मामले की जांच शुरू कर दी थी। कर्नल पठानिया पर जांच पूरी होने तक कश्मीर से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया, जबकि अन्य सैन्य अधिकारियों और जवानों को निलंबित कर दिया गया। 
न्यायलय का फैसला 
साढ़े चार साल पुराने मछिल फर्जी एनकाउंटर केस में दोषी पाए गए कर्नल समेत सात सैन्यकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सैन्य सेवा से बर्खास्त किए जा चुके इन सैनिकों को सेवा से जुड़ा कोई लाभ भी नहीं मिलेगा।
सेना के मुठभेड़ों की जांच कराना बेहद कठिन कार्य है वहीँ पूरे देश में पुलिस, स्पेशल सेल, एस टी एफ़ तथा ए टी एस जैसे सरकारी संगठन आये दिन मुठभेड़ों के नाम पर फर्जी मुठभेड़ करते रहते हैं तथा बेगुनाह लोगों को गंभीर अपराधों में निर्रुद्ध करने का काम पुरस्कार, सम्मान , इनाम , आउट ऑफ़ टर्न प्रमोशन, साहस और शौर्य का बखान करने जैसे शब्दों के लिए करते रहते हैं जिसकी सुनवाई आसानी से होना संभव नहीं है . 
    उत्तर प्रदेश के कचेहरी सीरियल बम विस्फोट कांड के आरोपी तारिक काशमी व मृतक खालिद मुजाहिद की गिरफ्तारी व आर दी एक्स, डेटोनेटर की बरामदगी की जांच इन्क्वारी एक्ट तहत आर डी निमेष कमीशन ने किया तो पाया की गिरफ्तारी व बरामदगी दोनों संदिग्ध हैं उसके बावजूद भी तारिक काशमी व अन्य सात वर्षों से लखनऊ जेल की स्पेशल सेल में बंद हैं . 

सुमन 


1 टिप्पणी:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शुक्रवार (14-11-2014) को "भटकता अविराम जीवन" {चर्चा - 17976} पर भी होगी।
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चर्चा मंच के सभी पाठकों को
बालदिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'